ऑस्ट्रेलियाई पीएम से पूछा, क्या मोदी को 'द बॉस' कहने के लिए खेद है? मिला यह जवाब

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में खालिस्तान समर्थक नेता और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का संबंध भारत सरकार के एजेंट से जोड़कर भारत के लिए राजनयिक चुनौती खड़ी कर दी है.

कनाडा और भारत के द्विपक्षीय संबंध हमेशा से ही खालिस्तान मुद्दे को लेकर तनाव में रहे हैं. कनाडा और भारत में उपजे विवाद को लेकर सवाल अब दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी पूछे जा रहे हैं.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज़ से भी इससे जुड़ा सवाल पूछा गया.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चाहते हैं कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में उन्होंने भारत पर जो उंगली उठाई है, उसमें पश्चिम के उसके सहयोगी देश साथ दें.

कनाडा नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो और जी-7 का सदस्य है. इन दोनों समूहों से भी ट्रूडो चाहते हैं कि भारत के ख़िलाफ़ आरोपों को गंभीरता से ले.

मंगलवार को ट्रूडो ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन का मामला है, जो कि बहुत ही गंभीर है. ट्रूडो ने कहा कि उन्होंने अपने सहयोगी देशों और भारत के सामने इस मुद्दे को उठाने तक इंतज़ार किया.

जस्टिन ट्रूडो ने मंगलवार को पार्लियामेंट हिल में पत्रकारों से कहा, ''हम पहले अपने सहयोगियों से साझा करना चाहते थे कि इस मामले में हमें क्या पता है. हमने भारत के साथ भी इस मामले को गंभीरता से उठाया था.''

भारत ने जस्टिन ट्रूडो के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया और कहा है कि यह कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए है.

क्या कनाडा को मिलेगा साथ?

कनाडा फाइव आइज़ इंटेलिजेंस अलायंस का भी सदस्य है. इसमें ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और कनाडा हैं.

कनाडा के साथ इन चारों देशों ने कहा है कि आरोप बहुत ही गंभीर हैं. अमेरिका ने कहा है कि जस्टिन ट्रूडो ने भारत की संलिप्तता को लेकर जो दावा किया है, वो काफ़ी चिंताजनक है.

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय और आवास व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल की प्रवक्ता एर्डिन वाट्सन ने कहा, ''कनाडा के प्रधानमंत्री ने जो आरोप लगाए हैं, वे काफ़ी गंभीर हैं. हम अपने कनाडाई पार्टनर्स से नियमित रूप से संपर्क में रहते हैं. यह कनाडा की जाँच के लिए काफ़ी अहम है और जो भी दोषी है, उसे इंसाफ़ के दायरे में लाना अहम है.''

ब्रिटेन ने भी मामले को काफ़ी गंभीर बताया है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवर्ली ने कहा कि वह कनाडा की इस जाँच का समर्थन करते हैं कि भारत सिख नेता की हत्या के मामले में शामिल था या नहीं.

ब्रिटिश विदेश मंत्री अभी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करने गए हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, ''मुझे लगता है कि यह बहुत ही अहम है. हम कनाडा की इस जाँच का समर्थन करते हैं. ज़ाहिर है कि कनाडा से हमारा बहुत ही मज़बूत संबंध है और भारत के साथ भी गहरा रिश्ता है.''

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर चिंता जताई है और कहा है कि इस मामले में भारत से अपनी चिंता साझा की है.

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा, ''ऑस्ट्रेलिया भारत के ख़िलाफ़ इस आरोप को लेकर काफ़ी गंभीर है. ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि सभी देशों को संप्रभुता और क़ानून के शासन का सम्मान करना चाहिए. हम इस मामले में अपने साझेदारों से संपर्क में हैं. हमने भारत में सीनियर लेवल पर अपनी चिंता ज़ाहिर की है.''

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

वॉशिंगटन पोस्ट ने पश्चिम के एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि फाइव आइज़ अलायंस ने सार्वजनिक रूप से हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की निंदा में एक संयुक्त बयान जारी करने से इनकार कर दिया था लेकिन जी-20 समिट से पहले इस मामले को उठाया था. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जस्टिन ट्रूडो ने फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भी यह मामला उठाया था.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से पत्रकारों ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इस मामले सवाल पूछा. अल्बनीज़ से पत्रकारों ने पूछा कि क्या उन्हें नरेंद्र मोदी को 'द बॉस' कहने के लिए अफ़सोस है? इस सवाल के जवाब में ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि थोड़ा सब्र रखिए.

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में कहा जा रहा है कि अल्बनीज़ मंगलवार को मीडिया में इस पर बातचीत को लेकर अनिच्छुक दिखे. उन्होंने मोदी को द बॉस कहने वाले सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा, ''आपको थोड़ा सब्र रखना चाहिए. आपको पता है कि हमने पीएम मोदी के स्वागत में यह बात कही थी और वहाँ भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में थे. मैंने पीएम मोदी का स्वागत वैसा ही किया था जैसा बाक़ी के मेहमानों का ऑस्ट्रेलिया में करते हैं.''

अल्बनीज़ ने कहा, ''मेरे दोस्त और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछली बार जब आए थे तो ब्रुस स्प्रिंगस्टन मंच पर उनका जिस तरह से स्वागत हुआ था, वैसा मैंने पहले किसी का नहीं देखा था.'' तब अल्बनीज ने मोदी के स्वागत में आई भीड़ को देखते हुए कहा था- प्रधानमंत्री मोदी द बॉस हैं. यह मंच अमेरिकी रॉक सिंगर स्प्रिंगस्टन के नाम पर है और उनका निक नेम द बॉस था.

फाइव आइज इंटेलिजेंस के लेकर ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा, ''मैं फाइव आइज इंटेलिजेंस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात नहीं कर सकता. मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात करूंगा तो इंटेलिजेंस का मतलब ही क्या रह जाएगा. हम ख़ुफ़िया के मामलों में अटकलें नहीं लगाते हैं.''

फाइव आइज इंटेलिजेंस में शामिल देश एक दूसरे से ख़ुफ़िया सूचना साझा करते हैं. ऑस्ट्रेलिया की सरकार पिछले कुछ सालों से भारत के साथ व्यापार और रक्षा संबंध गहरा करने में लगी है. चीन के साथ रिश्तों में आए तनाव के बाद से ऑस्ट्रेलिया की क़रीबी भारत से बढ़ी है. ऑस्ट्रेलिया में भी हिन्दू मंदिरों पर खालिस्तानी एक्टिविस्टों के हमले बढ़ने की कई रिपोर्ट्स आई हैं और पीएम मोदी ने अल्बनीज़ के सामने ही सार्वजनिक रूप से यह मुद्दा उठाया था.

कनाडा के मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

कनाडा के मीडिया में भी जस्टिन ट्रूडो के बयान पर कवरेज की भरमार है.

कनाडाई अख़बार टोरंटो स्टार ने लिखा है, ''कनाडा के सहयोगी देशों को भारत की ओर से संप्रभुता पर हमले के मामले में साथ देना चाहिए. जब जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में हमारी धरती पर कनाडाई नागरिक की हत्या का आरोप एक विदेश सरकार के एजेंट पर लगाया तो यह ज़्यादातर कनाडाई नागरिकों के लिए हैरान करने वाला था.''

''कनाडा की संप्रभुता पर इससे ज़्यादा खुलेआम हमला और नहीं हो सकता है. इस मामले में अमेरिका की शुरुआती प्रतिक्रिया प्रभावी नहीं रही है. बाइडन को इस मामले में कनाडा के साथ खुलकर आना चाहिए. बाइडन फिर से राष्ट्रपति बनने के चुनावी दंगल में है और वो शायद ही मोदी से टकराना चाहेंगे. कनाडा को इस मामले में बहुत उत्साहजनक समर्थन नहीं मिला है.''

फाइव आइज इंटेलिजेंस में शामिल अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के भी बहुत अच्छे संबंध हैं. कहा जा रहा है कि इनमें से कोई भी देश नहीं चाहेगा कि कनाडा की वजह से भारत के साथ संबंध पटरी से उतर जाए.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इन देशों की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि कनाडा कितना ठोस सबूत पेश करता है. ट्रूडो न्यूयॉर्क जाने वाले हैं और कनाडा की विदेश मंत्री जी-7 के विदेश मंत्रियों से यूएनजीए से अलग मिलेंगी. यहाँ से क्या चीज़ें निकलकर आती हैं, इन पर भी प्रतिक्रिया निर्भर करेंगी. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी न्यूयॉर्क जाने वाले हैं और उन्हें भी इन सवालों का सामना करना होगा.

भारत का क्या कहना है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने कनाडा के प्रधानमंत्री के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ''कनाडा के प्रधानमंत्री ने संसद में जो कुछ भी कहा, उसे हम ख़ारिज करते हैं. कनाडा की विदेश मंत्री के बयान को भी हम नकारते हैं.''

''कनाडा में किसी भी तरह की हिंसा में भारत सरकार पर शामिल होने का आरोप लगाना हास्यास्पद और राजनीति से प्रेरित है. इसी तरह हमारे प्रधानमंत्री के सामने कनाडा के प्रधानमंत्री ने आरोप लगाए थे और हमने उसे भी पूरी तरह से ख़ारिज किया था. हम क़ानून के राज को लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं.''

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ''ऐसे बेबुनियाद आरोप खालिस्तानी आतंकवादी और अतिवादियों से ध्यान भटकाने के लिए हैं. ऐसे खालिस्तानी आतंकवादियों और अतिवादियों को कनाडा ने प्रश्रय दे रखा है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए ख़तरा हैं.''

''इन मामलों में कनाडा की सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करना लंबे समय से चला आ रहा है और ये हमारे लिए अब भी चिंता की बात बनी हुई है. कनाडा के नेता ऐसे तत्वों से खुलेआम सहानुभूति जता रहे हैं और ये हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है.''

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ''कनाडा में हत्या, मानव तस्करी और संगठित अपराध जैसी गतिविधियों को फलने-फूलने देना कोई नई बात नहीं है. ऐसी गतिविधियों में भारत सरकार को जोड़ने की किसी भी कोशिश को हम ख़ारिज करते हैं. हम कनाडा की सरकार से आग्रह करते हैं कि कनाडा की धरती से संचालित होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों पर तत्काल और प्रभावी क़ानूनी कार्रवाई करे.''

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