'देवरानी की मौत हो गई, देवर घायल हैं', नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में अपनों को खोने वालों की आपबीती

- Author, दिलनवाज़ पाशा और अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात भगदड़ मचने से अब तक 18 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हैं.
इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं ने शोक जताया है.
मृतकों और घायलों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से नजदीक स्थित लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल (एलएनजेपी) ले जाया गया है.
हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है उनमें आभा देवी, पिंकी देवी, शीला देवी, व्योम, पूनम देवी, ललिता देवी, सुरुचि, कृष्णा देवी, विजय साहा, नीरज, शांति देवी, पूजा कुमार, संगीता मलिक, पूनम, ममता झा, रिया सिंह, बेबी कुमारी और मनोज शामिल हैं.

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हादसे से प्रभावित लोगों के लिए मुआवज़े का एलान हो गया है. भारतीय रेलवे की ओर से मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को एक लाख रुपये के मुआवज़े का एलान हुआ है.
मृतकों के परिजनों ने सुनाई आपबीती

बिहार में पटना की रहने वाली ललिता देवी अपने भांजे गिरधारी के साथ नई दिल्ली से पानीपत जा रही थीं. रात में क़रीब नौ बजे का समय था.
गिरधारी का कहना है, "हम दोनों पटना से पहले आनंद विहार ट्रेन से आए फिर पानीपत जाने के लिए नई दिल्ली से ट्रेन पकड़ रहे थे, लेकिन प्लेटफ़ॉर्म 14 पर भगदड़ मचने से मामी की मौत हो गई."
गिरधारी ने बताया, "प्लेटफॉर्म में जाने के लिए जैसे ही स्टेशन में आए भारी भीड़ थी. सीढ़ी में धक्का-मुक्की की वजह से हम अलग हो गए."
उन्होंने कहा, "मैं थोड़ी देर बाद उनको देखने गया तो उधर दो, तीन लोगों के बचाओ-बचाओ की आवाज आ रही थी. मैं चादर से मामी को पहचाना, जैसे ही चादर हटाई तो हल्की सांस चल रही थी."


इस घटना में दिल्ली में किराड़ी के रहने वाले उमेश गिरी अपनी 45 वर्षीय पत्नी शीलम देवी को खो चुके हैं.
उमेश गिरी बताते हैं, "हम महाकुंभ जा रहे थे. हम अजमेरी गेट की तरफ से चढ़े थे, 14 नंबर प्लेटफॉर्म से मेरी प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन थी. मेरी टिकट एसी कोच में थी."
उन्होंने बताया, "ऊपर चढ़ने के बाद भीड़ काफी अनियंत्रित हो गई. बहुत ज़्यादा भीड़ होने की वजह से ये घटना घटी."
उमेश अपनी आंखोदेखी बताते हैं, "मेरे सामने पहले से कई लोगों की बॉडी गिरी हुई थी. उसके बाद वो लोग टकराए हैं, उनके ऊपर से लोग जाने लगे हैं."
उन्होंने बताया, "उस समय लोगों (बॉडी) को झीने के सामने ही लगा रखा था. उस समय वहां पर न कोई मीडिया थी और न कोई प्रशासन था."
मदद को लेकर उमेश कहते हैं, "मदद तो कुछ नहीं मिली. बाद में बहुत देर हो गई थी. मैंने कई पुलिस वाले, आरपीएफ़ वालों को कहा लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था."
दिल्ली के सुल्तानपुरी की रहने वालीं शोभा मूलरूप से बिहार की हैं. इस घटना में उन्होंने अपनी देवरानी को खो दिया है.
शोभा बताती हैं, "मेरे देवर जख्मी थे, उन्होंने फोन कर बताया कि वो घायल हैं, जल्दी आओ."
वो बताती हैं, "मेरे देवर ने फोन किया, यहां भगदड़ मच गई, मैं घायल हूं और पत्नी की मौत हो गई. उनके दोनों बच्चे दबे हुए थे, वो सही सलामत हैं, लेकिन पत्नी की मौत हो गई."

अस्पताल की स्थिति पर शोभा कहती हैं, "घायलों से पूरा वार्ड भरा पड़ा है. वहां बहुत सारी डेड बॉडीज़ हैं. मैंने खुद देखी है. एक बेड पर चार-चार लोग पड़े हैं. जिस बेड पर मेरी देवरानी हैं, उसमें तीन लोग हैं."
अपने परिवार के साथ कुंभ के लिए निकले संजय ने इस घटना में अपनी बहन को खो दिया है.
संजय ने बताया, "हम 12 लोग प्रयाग एक्सप्रेस से कुंभ के लिए जा रहे थे, लेकिन हम लोग प्लेटफॉर्म तक पहुंच ही नहीं पाए. पहले ही झीने पर ही मौत हो गई."
उन्होंने बताया, "हम नीचे उतर रहे थे, पीछे से भीड़ आई. आगे जो लोग गिर गए थे, वो दब गए. भीड़ बहुत ज़्यादा थी और उसी भीड़ में वो दब गए."
संजय कहते हैं, "मेरे छोटे भाई की पत्नी और मेरी बेटी फंस गई थी. उनको हमने निकाला. मेरी बहन मुझे आधे घंटे बाद मिली. तब तक वो मर चुकी थीं. एक घंटा हमने उसे सीपीआर भी दिया. लेकिन एक घंटे तक कोई भी नहीं आया."
संजय की सरकार से मांग है कि जो उनके साथ घटा है वो और किसी के साथ न हो.

चश्मदीदों ने क्या बताया
घटना के वक्त नई दिल्ली स्टेशन पर मौजूद रवि ने समाचार एजेंसी एएनआई से अपनी आंखोंदेखी बताई है.
उन्होंने कहा, "रात करीब नौ, साढ़े नौ बजे भगदड़ हुई थी. कुछ गाड़ियां भी लेट थीं. उसी समय ज़्यादा भीड़ हुई. 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर भी बहुत भीड़ थी."
"लोगों ने जैसे ही गाड़ी देखी, उधर के लोग (दूसरे प्लेटफॉर्म के) यहीं पर आ गए और भगदड़ मच गई. ऊपर भी ज़्यादा लोग खड़े थे. भीड़ बहुत ज़्यादा थी. पुलिस सारी चीजें देख रही थी फिर भी भीड़ नहीं रुक पाई."

एक अन्य चश्मदीद ने बताया, "रात 9 बजे के आसपास यह घटना हुई थी. पुलिस ने बहुत कंट्रोल किया लेकिन पब्लिक लिमिट से ज़्यादा हो गई थी. वो संभाल ही नहीं पा रहे थे."
उन्होंने बताया, "यहां दोनों ओर गाड़ियां खड़ीं थीं. पुल (पैदल पुल) के ऊपर भगदड़ मच गई. जो भी नुकसान हुआ है, वहीं हुआ है. प्लेटफॉर्म तो खाली था. यहां उतनी भीड़ नहीं थी. जितनी भी सवारियां थीं वो गाड़ी में बैठी हुई थीं. जितनी भी भीड़ थी वो पुल के ऊपर थी."
चश्मदीद ने बताया, "मुझे 26 साल यहां पर हो गए. आज तक इतनी भीड़ नहीं देखी. ऐसा तो आज तक छठ पूजा में भी नहीं हुआ जैसा कल रात पब्लिक आई थी."
किसने क्या कहा?

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इस घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई नेताओं ने शोक जताया है.
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में लोगों की मौत की ख़बर सुनकर बहुत दुख हुआ. मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूँ और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूँ."
पीएम मोदी ने दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से दुख पहुंचा है."
"मेरी सहानुभूति उनके साथ है जिन्होंने अपनों को खो दिया. घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं. प्रशासन भगदड़ से प्रभावित होने वालों का पता लगा रहा है."
अश्विनी वैष्णव ने कहा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई दुखद भगदड़ से गहरा आघात पहुंचा है. मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है. पूरी टीम हादसे में प्रभावित होने वालों की मदद कर रही है."
विपक्ष ने उठाए सवाल

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इस घटना पर विपक्ष के नेताओं ने भी शोक जताया है, साथ ही व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुर खड़गे ने कहा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई मौतों के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार की सच्चाई छिपाने की कोशिश बेहद शर्मनाक व निंदनीय है."
उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि मृतकों और घायलों की संख्या जल्द से जल्द घोषित की जाए और गुमशुदा लोगों की पहचान भी सुनिश्चित की जाए."
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्था और भगदड़ के कारण हुई असामयिक मौतों से मन व्यथित है. इतने सरकारी संसाधनों के बावजूद भगदड़ में श्रद्धालुओं की जाने जा रही है और डबल इंजन सरकार इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की लीपापोती कर पीआर करने में व्यस्त है."
उन्होंने कहा, "आमजनों और श्रद्धालुओं की बजाय सरकार का ध्यान मीडिया प्रबंधन, वीआई लोगों की सुविधा और उनकी व्यवस्था तक ही सीमित है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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