गुरपतवंत सिंह पन्नू मामला: अभियुक्त निखिल गुप्ता को अमेरिका लाया गया, क्या बढ़ेंगी भारत की मुश्किलें?

सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की अमेरिकी धरती पर हत्या कराने की कथित साजिश रचने के अभियुक्त निखिल गुप्ता को चेक रिपब्लिक से अमेरिका ले आया गया है.

52 साल के निखिल गुप्ता को लोअर मैनहट्टन कोर्ट हाउस में पेश किया जा सकता है. अगर आरोप साबित हुए तो उन्हें 20 साल की कैद हो सकती है.

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ सप्ताहांत में गुप्ता को अमेरिका लाया गया. पिछले साल चेक रिपब्लिक में उन्हें गिरफ़्तार किया गया था.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक निखिल गुप्ता पर सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या करने के लिए सुपारी देने का आरोप है.

अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि गुप्ता को किसी अनाम भारतीय अधिकारी से गुरपतवंत सिंह की हत्या कराने का निर्देश मिला था.

हालांकि भारत ने इस आरोप से इनकार किया है. भारत का कहना है कि इस कथित साजिश से उसका कोई लेना-देना नहीं है.

पिछले महीने चेक रिपब्लिक की एक संवैधानिक अदालत ने निखिल गुप्ता की वो याचिका रद्द कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ अपील की थी.

जेल रिकार्ड्स के मुताबिक़ निखिल गुप्ता को फिलहाल ब्रुकलिन में फेडरल मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

बीबीसी ने उनके वकीलों से संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.

पिछले साल नवंबर में अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि निखिल गुप्ता ने पन्नू समेत चार सिख अलगाववादी नेताओं की हत्या की साजिश रची थी.

इन अभियोजकों का आरोप है कि पन्नू की हत्या कराने के लिए निखिल गुप्ता ने भाड़े के एक हत्यारे को एक लाख डॉलर यानी 83.50 लाख रुपये दिए थे.

निज्जर के सहयोगी रहे हैं पन्नू

पन्नू के पास अमेरिका के साथ कनाडा की भी नागरिकता है. फिलहाल वो न्यूयॉर्क में रह रहे हैं.

वो अलगाववादी खालिस्तानी आंदोलन को समर्थन देने वाले संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के संस्थापक और वकील हैं. भारत सरकार ने उन्हें 2020 में आतंकवादी घोषित किया था.

वो सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर के सहयोगी रहे हैं. निज्जर की पिछले साल कनाडा में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सार्वजनिक तौर कहा था कि निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने के 'विश्वसनीय आरोप 'हैं.

हालांकि भारत इसका विरोध करता रहा है. उसका कहना है कि अपने आरोपों के समर्थन में कनाडा ने अभी तक उसके सामने कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया है.

अमेरिका ने भारत के सामने उठाया था पन्नू मामला

पन्नू की हत्या की कथित साजिश को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बयानबाजी हो चुकी है.

पिछले साल नवंबर में व्हाइट हाउस ने भारत सरकार के सीनियर अधिकारियों के सामने ये मामला उठाया था. लेकिन इन अधिकारियों का कहना था इस कथित साजिश से भारत का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है.

उनका कहना था कि ऐसा करना भारत सरकार की नीति के ख़िलाफ़ है.

भारत सरकार ने कहा था कि उसने निखिल गुप्ता के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है.

इस साल भारत के सुप्रीम कोर्ट ने निखिल गुप्ता की वो याचिका ख़ारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपनी रिहाई में मदद करने और सही तरह से सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की थी.

इस याचिका में कहा गया था कि निखिल गुप्ता को अमेरिका के स्वयंभू एजेंटों ने गिरफ़्तार किया था.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था. कोर्ट ने कहा था कि ये सरकार का काम है.

कौन हैं निखिल गुप्ता

अमेरिका की अदालत में पेश दस्तावेज़ के मुताबिक़ निखिल गुप्ता ने भारत सरकार के लिए काम करने वाले एक अधिकारी के कहने पर अमेरिका में एक हिटमैन (भाड़े के व्यक्ति) से संपर्क किया और उसे एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या का कॉन्ट्रैक्ट दिया.

अभियोग में दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारी से बातचीत के दौरान निखिल गुप्ता ने बताया था कि वो नार्कोटिक्स और हथियारों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े हुए हैं.

दस्तावेज़ के मुताबिक़ निखिल गुप्ता ने जिस हिटमैन से संपर्क किया था, वह अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग के अंडरकवर एजेंट थे.

इस एजेंट ने निखिल गुप्ता की सभी गतिविधियों और बातचीत को रिकॉर्ड किया. इसी के आधार पर ये मुक़दमा दायर किया गया है.

अभियोग में अमेरिकी एजेंसी की जांच के हवाले से कहा गया है कि गुप्ता और भारतीय अधिकारी के बीच लगातार एनक्रिप्टेड ऐप के ज़रिए बात हो रही थी और इस वार्ता के दौरान गुप्ता दिल्ली या आसपास के इलाक़े में ही थे.

अभियोग में ये भी दावा किया गया है कि निखिल गुप्ता पर गुजरात में एक आपराधिक मामला चल रहा है जिसमें मदद के बदले वो भारतीय अधिकारी के लिए न्यूयॉर्क में हत्या करवाने के लिए तैयार हो गए थे.

अभियोग में दावा किया गया है कि 12 मई को गुप्ता को भारतीय अधिकारी की ओर से बता दिया गया था कि ‘उनके ख़िलाफ़ चल रहे आपराधिक मामले को देख लिया गया है.’

उन्हें ये भी बताया गया था कि ‘गुजरात पुलिस की तरफ़ से अब कोई कॉल नहीं करेगा.’

23 मई को भारतीय अधिकारी ने फिर से गुप्ता को आश्वस्त किया कि ‘उन्होंने अपने बॉस से बात कर ली है और गुजरात में जो मामला है, वो अब साफ़ है और अब तुम्हें दोबारा कोई कॉल नहीं करेगा.’

अभियोग के मुताबिक़, अमेरिका की गुज़ारिश पर और इस मामले के संबंध में निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ़्तार कर लिया गया था. उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया जाएगा.

कौन हैं गुरपतवंत सिंह पन्नू

पेशे से वकील पन्नू का परिवार पहले पंजाब के नाथू चक गांव में रहता था, जो बाद में अमृतसर के पास खानकोट में बस गया. पन्नू के पिता महिंदर सिंह पंजाब मार्केटिंग बोर्ड के सचिव थे.

पन्नू के एक भाई और एक बहन हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा लुधियाना में ली. 1990 के दशक में पन्नू ने पंजाब यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की. वे अपने कॉलेज के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे.

साल 1991-92 वे पन्नू अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया. यहां से उन्होंने फ़ाइनेंस में एमबीए की और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से क़ानून की डिग्री ली.

अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद 2014 तक पन्नू ने न्यूयॉर्क में वॉल स्ट्रीट में सिस्टम एनालिस्ट के रूप में काम किया, इस दौरान वे राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहे.

क्या है सिख फ़ॉर जस्टिस

साल 2007 में पन्नू ने सिख फ़ॉर जस्टिस की स्थापना की थी. संगठन का पंजीकृत कार्यालय अमेरिका के वॉशिंगटन में है, वहीं पन्नू न्यूयॉर्क के ऑफ़िस से काम करते हैं, जहां वे अपनी लॉ फर्म भी चलाते हैं.

भारतीय पंजाब को ‘आज़ाद’ कराने और खालिस्तान नारे के तहत पंजाबियों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने के लिए 'सिख फॉर जस्टिस' ने ‘रेफरेंडम-2020’ अभियान शुरू किया था.

इसके तहत पंजाब और दुनियाभर में रहने वाले सिखों को ऑनलाइन वोट करने के लिए कहा गया था, लेकिन वोटिंग से पहले ही भारत सरकार ने 40 वेबसाइटों को सिख फ़ॉर जस्टिस और खालिस्तान समर्थक बताकर बैन कर दिया था.

यह संगठन ख़ुद को मानवाधिकार संगठन बनाता है, लेकिन भारत इसे ‘आतंकवादी’ संगठन घोषित कर चुका है.

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