अमेरिका का आरोप- न्यूयॉर्क में की जानी थी सिख अलगाववादी की हत्या, भारत पर उठाई उंगली

    • Author, फिल मैक्कॉसलैंड
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, न्यूयॉर्क

अमेरिका ने दावा किया है कि उसने न्यूयॉर्क में रहने वाले एक सिख अलगाववादी अमेरिकी नागरिक की हत्या की योजना को नाकाम कर दिया है.

अमेरिका ने इस मामले में बुधवार को भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर आरोप लगाए. कोर्ट में पेश दस्तावेज़ों के मुताबिक उन्हें भारत सरकार के एक कर्मचारी से निर्देश मिले थे.

कथित साजिश में किस अलगाववादी को निशाना बनाया जाना था, अभियोजन पक्ष ने उनके नाम की जानकारी नहीं दी है. लेकिन कोर्ट में पेश दस्तावेजों में कहा गया है कि टार्गेट हरदीप सिंह निज्जर के सहयोगी थे. निज्जर की 18 जून को कनाडा में हत्या कर दी गई थी.

अमेरिका के इन आरोपों पर अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. प्रतिक्रिया मिलने पर उसे इस रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.

हालांकि, व्हाइट हाउस ने कहा है कि भारत ने इस मामले में 'हैरानी और चिंता जाहिर' की है.

इसके पहले ब्रितानी अख़बार फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि अमेरिकी ज़मीन पर एक सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश को नाकाम किया गया है और इस साजिश में शामिल होने की चिंताओं के मद्देनज़र भारत सरकार को जानकारी दी गई है.

सिख अलगाववादी नेता पन्नू अमेरिकी-कनाडाई नागरिक हैं और भारत में आतंक से जुड़े कई मामलों में वांछित हैं.

इस पर बुधवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि भारत ने इस मामले को लेकर एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है.

इसके पहले कनाडा ने भी भारत पर सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर आरोप लगाए थे. भारत ने कनाडा के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था और तभी से भारत और कनाडा के संबंधों में खटास आ गई.

कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने बुधवार को अमेरिकी अटॉर्नी की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. हालांकि, ब्रसेल्स में उन्होंने दावा किया कि कनाडा अपने 'विश्वसनीय आरोपों' पर कायम है कि निज्जर की 'हत्या में भारतीय एजेंट शामिल थे.'

व्हाइट हाउस ने क्या कहा

अमेरिका ने बुधवार को भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर कथित ‘योजना के तहत पैसे लेकर हत्या’ का आरोप लगाया गया है. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ये साजिश भारत में रची गई.

कोर्ट में जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, उसमें कथित टार्गेट (जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ साजिश रची गई) का नाम जाहिर नहीं किया गया है.

इसके पहले भारत सरकार ने कहा था कि उसने अमेरिका की ओर से सुरक्षा मामले में जाहिर की गई चिंता को लेकर जांच शुरू कर दी है.

अभियोग लगाए जाने की जानकारी मिलने के कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा कि उसने ये मामला भारत सरकार के सामने रखा है. व्हाइट हाउस के मुताबिक ये मामला सर्वोच्च स्तर पर उठाया गया है. व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत के अधिकारियों ने “हैरानी और चिंता जाहिर की.”

अमेरिका के अटॉर्नी डैमियन विलियम्स ने कहा, “पक्षकार यहां न्यूयॉर्क सिटी में भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक की हत्या करने के लिए आया. ये अमेरिकी नागरिक सिखों के लिए एक संप्रभु देश की वकालत करते हैं. ”

अटॉर्नी ने कहा, “हम अमेरिकी ज़मीन पर अमेरिकी नागरिक की हत्या की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे.”

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस मामले में पूछे गए सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की.

क्या हैं आरोप?

अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए गए आरोप के मुताबिक, “गुप्ता ड्रग्स और हथियारों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी में शामिल था. उसके बाद मई में भारत के एक सरकारी अधिकारी ने उन्हें कथित तौर पर टार्गेट की हत्या करने के काम पर रखा.” यानी उन्हें हत्या की सुपारी दी गई.

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उस अधिकारी ने गुप्ता को निर्देश दिया कि वो हत्या की संभावित योजना को लेकर अमेरिका में एक सहयोगी से संपर्क करें.

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है कि गुप्ता ‘हिटमैन’ से मिलने वाले थे जो कि न्यूयॉर्क में हत्या को अंजाम देता.

कोर्ट में पेश दस्तावेजों में कहा गया है कि उस व्यक्ति ने ख़ुद को एक अंडरकवर अधिकारी बताया और कहा कि वो एक लाख डॉलर (करीब 80 लाख रुपये) लेकर टार्गेट की हत्या करेगा. गुप्ता ने नौ जून को एक सहयोगी की मार्फत उसे 15 हज़ार डॉलर दिए.

निखिल गुप्ता को चेक रिपब्लिक के अधिकारियों ने 30 जून को गिरफ़्तार किया था. इसके कुछ वक़्त पहले ही अमेरिकी अभियोजकों ने उनके ख़िलाफ़ शुरुआती आरोप दर्ज किए थे.

कोर्ट में पेश दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिका के अनुरोध पर वो अब भी चेक रिपब्लिक की हिरासत में हैं.

हालांकि, कोर्ट में पेश दस्तावेजों में उस व्यक्ति के नाम की जानकारी नहीं दी गई है, जिनकी कथित तौर पर हत्या की साजिश रची गई थी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वो सिख अलगाववादी समूह के अमेरिका में नेता हैं.

सिख भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं. वो भारत की कुल आबादी के करीब दो फ़ीसदी हैं. कई अलगाववादी समूह लंबे अर्से अलग देश ‘खालिस्तान’ की मांग उठाते रहे हैं.

पश्चिमी देशों में जब कभी अलगाववादी खालिस्तान की मांग उठाते हैं, तब भारत सरकार की ओर से अक्सर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

अमेरिकी ज़मीन पर एक सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश को लेकर किए गए दावों के बारे में बुधवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने बताया कि भारत ने इस मामले में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है.

बागची ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "हम पहले ही बता चुके हैं कि द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर चर्चा के दौरान हमने संगठित अपराध, बंदूक चलाने वाले और आतंकवादियों और अन्य के बारे में अमेरिका के साथ कुछ इनपुट साझा किए थे."

"हमने ये भी संकेत दिया था कि भारत ऐसे इनपुट को बहुत गंभीरता से लेता है क्योंकि इसका हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर असर पड़ सकता है और इससे जुड़े विभाग इसकी जांच पहले ही कर रहे थे."

उन्होंने कहा, "इसी बाबत यह सूचित किया जाता है कि 18 नवंबर को भारत सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है ताकि इस मसले से जुड़े सभी पक्षों को देखा जा सके."

अमेरिका और कनाडा के आरोपों पर भारत की प्रतिक्रिया अंदाज अलग-अलग

इस बीच मीडिया रिपोर्टों में इस बात की भी चर्चा है कि भारत ने कनाडा और अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोपों पर अलग-अलग अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी है.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितंबर को अपने देश की संसद में ये मामला उठाते हुए भारत पर आरोप लगाए थे.

भारत ने इन्हें ‘बेतुका’ बताते हुए ख़ारिज कर दिया था.

भारत ने कहा था कि इस ‘दावे के समर्थन में कोई सुबूत पेश नहीं किया गया है.’

वहीं, फ़ाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिका ने एक सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश के मामले को भारत के सामने उच्च स्तर पर उठाया है.

इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची की प्रतिक्रिया ‘सधी और संतुलित रही.’

कनाडा ने निज्जर की हत्या से जुड़े आरोपों के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक सबूत नहीं दिया है.

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने निज्जर को ‘आतंकवादी’ घोषित किया था. 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की हत्या कर दी गई थी.

निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच हुए कूटनीतिक विवाद में भारत ने सितंबर में अगली सूचना तक कनाडा के नागरिकों के लिए वीज़ा सेवाएं बंद कर दी थीं.

हालांकि, पिछले महीने, भारत ने चार श्रेणियों में कनाडा के नागरिकों के लिए वीज़ा सेवा फिर से बहाल की थी. बीते 26 अक्टूबर से भारत ने एंट्री वीज़ा, बिज़नेस वीज़ा, मेडिकल वीज़ा और कांफ्रेंस श्रेणियों में वीज़ा सेवाएं बहाल कर दी थीं.

हालांकि अब तक दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हुए हैं.

कौन हैं गुरपतवंत सिंह पन्नू?

गुरपतवंत सिंह पन्नू खालिस्तान समर्थक अमेरिकी वकील हैं. उनकी उम्र 40 से 50 साल के बीच है. उनका सम्बंध अमृतसर के पास खानकोट गांव से है. उनके पिता महिंदर सिंह पंजाब स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में कर्मचारी थे.

पन्नू ने 1990 के दशक में पंजाब यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की और अब अमेरिका में वकील हैं. वह अक्सर कनाडा में खालिस्तान समर्थक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में अक्सर देखे जाते हैं.

उन्हें न्यूयॉर्क से चलने वाले खालिस्तान समर्थक संगठन सिख्स फ़ॉर जस्टिस के संस्थापक और नेता के तौर पर जाना जाता है.

पन्नू ने हाल में सिखों को एयर इंडिया के विमानों से यात्रा न करने के लिए आगाह किया था. उन्होंने दावा किया था कि ऐसा करना जानलेवा हो सकता है.

इस मामले में भारत में एनआईए ने पन्नू पर एफ़आईआर भी दर्ज की है.

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