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ट्रंप की पसंद काश पटेल बने एफ़बीआई चीफ़, विरोधियों को क्यों है उनसे डर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के काश पटेल को एफ़बीआई यानी फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन का नया निदेशक नियुक्त किया है.
काश पटेल ने गीता पर हाथ रखकर एफ़बीआई के निदेशक के तौर पर शपथ ग्रहण किया.
काश पटेल ने अपना पद संभालने के बाद कहा, "आप उस भारतीय की पहली पीढ़ी से बात कर रहे हैं जो दुनिया के सबसे महान देश की लॉ इन्फ़ोर्समेंट एजेंसी का नेतृत्व करने वाला है. यह दुनिया में कहीं और नहीं हो सकता है. मैं वादा करता हूं कि एफ़बीआई के अंदर और बाहर लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी."
माना जा रहा है कि ट्रंप के कट्टर समर्थक काश पटेल अमेरिकी फ़ेडरल ब्यूरो में कई तरह के बदलाव कर सकते हैं, जो लंबे समय से उनके निशाने पर रहा है.
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काश पटेल के एफ़बीआई का निदेशक नियुक्त होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मेरे काश पटेल पसंद करने की एक वजह एफ़बीआई एजेंट्स के मन में उनके प्रति सम्मान है. वो एक मज़बूत और ताक़तवर शख्स हैं. उनके पास अपना नज़रिया है."
उनके शपथ ग्रहण करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "हमने एफ़बीआई में अखंडता और न्याय को फिर से स्थापित कर दिया है. अमेरिका को फिर से सुरक्षित करना है. "
काश पटेल ने अपना पद संभालने के बाद पहले ही दिन वॉल ऑफ़ ऑनर पहुंचकर एफ़बीआई के पूर्व अधिकारियों को श्रद्धांजली दी, जिन्होंने अमेरिका के लोगों के लिए अपना बलिदान दिया है.
काश पटेल ने कहा है, "मैं अमेरिका के सपने को जी रहा हूं और अगर कोई ये सोचता है कि अमेरिका का सपना मर चुका है तो वो मेरी तरफ़ देखे."
ट्रंप के कट्टर समर्थक
काश पटेल डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक रहे हैं और अमेरिकी सरकार की शीर्ष लॉ इन्फ़ोर्समेंट एजेंसी के आलोचक हैं.
पटेल ने क्रिस्टोफ़र रे की जगह ली है, जिन्हें ट्रंप ने साल 2017 में एफ़बीआई का निदेशक नियुक्त किया था. रे ने पिछले महीने ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले इस्तीफ़ा दे दिया था. ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए थे कि वो रे को पद से हटा देंगे.
काश पटेल की नियुक्ति को 49 के मुक़ाबले 51 वोटों से मंज़ूरी मिली है. उनके ख़िलाफ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी सांसदों ने वोट किया, जबकि दो रिपब्लिकन सांसदों ने भी उनका विरोध किया.
इन लोगों ने एफ़बीआई के नेतृत्व के लिए उनकी योग्यता पर सवाल खड़े किए और दावा किया कि काश पटेल ट्रंप के आलोचकों के ख़िलाफ़ बदले की भावना से काम करेंगे.
साल 2023 में प्रकाशित अपने संस्मरण 'गवर्नमेंट गैंगस्टर्स' में, पटेल ने एफ़बीआई के भीतर "सरकारी अत्याचार" को ख़त्म करने के लिए "वरिष्ठ अधिकारियों" को निकालने की अपील की था.
कई कट्टरपंथी मानते हैं कि एक "डीप स्टेट" या अनिर्वाचित नौकरशाही गुट, ट्रंप के एजेंडे को नाकाम करने के लिए काम कर रहा है.
अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी, जो अब पटेल की बॉस हैं, उन्होंने इसी महीने की शुरुआत में पटेल की नियुक्ति की पुष्टि की सुनवाई के दौरान सांसदों को बताया था कि उनके नेतृत्व में न्याय विभाग में विरोधियों की कोई सूची नहीं होगी.
डोनाल्ड ट्रंप के क़रीबी कैसे बने
एफ़बीआई निदेशक 55 अमेरिकी क्षेत्रीय कार्यालयों में 37 हज़ार कर्मचारियों का नेतृत्व करते हैं. वे सेटेलाइट के माध्यम से जुड़े 350 दफ़्तरों और 60 से अधिक अन्य विदेशी जगहों की भी निगरानी करते हैं, जिनसे क़रीब 200 देशों पर नज़र रखने की उम्मीद की जाती है.
काश पटेल ने सबसे पहले साल 2017 में अमेरिकी सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव की खुफिया समिति के वरिष्ठ वकील बनने के बाद ट्रंप का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. ट्रंप उस समय राष्ट्रपति के रूप में अपना पहला कार्यकाल संभाल रहे थे.
साल 2019 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में आतंकवाद निरोध के वरिष्ठ निदेशक के रूप में नियुक्त होने के बाद वो तेज़ी से ट्रंप के क़रीबी बनते चले गए और साल 2020 में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रमुख के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ नियुक्त किए गए.
काश पटेल ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के बोर्ड में हैं, जो ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल का मालिक है.
पटेल को एफ़बीआई का प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्हें "सत्य, जवाबदेही और संविधान का समर्थक" बताया.
ट्रंप ने कहा, "काश एक शानदार वकील, जांचकर्ता और 'अमेरिका फर्स्ट' के योद्धा हैं. उन्होंने अपना करियर भ्रष्टाचार को उजागर करने, न्याय की रक्षा करने और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा में बिताया है."
डेमोक्रेटिक पार्टी को काश पर क्यों है संदेह
एफ़बीआई के नए निदेशक काश पटेल ने ब्यूरो के "पुनर्निर्माण" की शपथ ली है, जिस पर वे लंबे समय से हमला करते रहे हैं.
डेमोक्रेटिक पार्टी ने चेतावनी दी थी कि वो ट्रंप के दुश्मनों से बदला लेंगे, हालांकि काश पटेल ने राजनीतिक प्रतिशोध की किसी भी योजना से इनकार किया है.
44 साल के काश पटेल ने अपनी नियुक्ति की सुनवाई के दौरान सुनवाई में "डीप स्टेट" दुश्मनों की सूची बनाकर रखने से इनकार किया. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में की गई अपनी विवादास्पद टिप्पणियों से भी किनारा किया, जैसे कि डोनाल्ड ट्रंप की जांच करने वाले लॉ इन्फ़ोर्समेंट के अधिकारियों को "आपराधिक गैंगस्टर" कहना.
सभी डेमोक्रेटिक सीनेटरों और दो रिपब्लिकन सीनेटर... मेन की सुसान कोलिन्स और अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की ने पटेल के ख़िलाफ़ वोट दिया.
सीनेट द्वारा पुष्टि किए जाने के तुरंत बाद पटेल ने एक्स पर कहा, "मैं संघीय जांच ब्यूरो के नौवें निदेशक के रूप में पुष्टि किए जाने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं."
"निदेशक के रूप में मेरा मिशन स्पष्ट है, अच्छे पुलिसकर्मियों को पुलिसकर्मी ही बने रहने देना और एफ़बीआई में फिर से भरोसा बनाना."
उन्होंने कहा, "हम एक ऐसी एफ़बीआई का पुनर्निर्माण करेंगे जिस पर अमेरिकी लोग गर्व कर सकें."
पटेल ने एफ़बीआई का कार्यभार संभाला है, जो उस समय अस्थिर स्थिति में थी, जब न्याय विभाग ने अपने कुछ शीर्ष अधिकारियों को पद से हटा दिया था और उन एजेंटों के नाम मांगे थे, जिन्होंने यूएस कैपिटल में 2021 में ट्रंप समर्थकों द्वारा किए गए दंगे की जांच की थी.
रिपब्लिकन पार्टी के ज़्यादातर सदस्यों को लगता है कि काश पटेल देश की शीर्ष कानूनी प्रवर्तन एजेंसी में लंबे समय से लंबित बदलाव लाएंगे, जिसके बारे में वे और ट्रंप दावा करते हैं कि इसका इस्तेमाल कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ हथियार के रूप में किया गया है.
लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि पटेल एक कट्टर दक्षिणपंथी सिद्धांत के समर्थक हैं, जिन्हें लॉ इन्फ़ोर्समेंट का बहुत कम अनुभव है.
डेमोक्रेटिक पार्टी का मानन है कि काश पटेल ऐसे व्यक्ति हैं जो स्वतंत्र रूप से काम करने वाले विभाग का नेतृत्व करने से ज़्यादा ट्रंप के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता देंगे.
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद मार्टिन हेनरिक ने एक्स पर कहा था, "पटेल का ख़राब निर्णय और अनुभव की कमी उन्हें हमारे एफ़बीआई निदेशक के रूप में अमेरिकियों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से अयोग्य बनाती है. मैंने 'नहीं' के पक्ष में मतदान किया."
काश पटेल कौन हैं?
काश पटेल भारतीय प्रवासी के बेटे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका जन्म एक गुजराती परिवार में हुआ था और उनके पिता एक अमेरिकी एविएशन कंपनी में काम करते थे. उनका पूरा नाम कश्यप प्रमोद पटेल है.
अमेरिका के रक्षा विभाग के मुताबिक पटेल न्यूयॉर्क के मूल निवासी हैं. उन्होंने रिचमंड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क वापस आकर कानून की डिग्री हासिल की.
उन्होंने अपना करियर एक वकील के रूप में शुरू किया, जहां उन्होंने हत्या, ड्रग्स से लेकर पेचीदा वित्तीय अपराधों के मामलों में अदालतों में जिरह की.
पटेल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में राष्ट्रपति के डिप्टी असिस्टेंट और आतंकवाद निरोधक विभाग के वरिष्ठ निदेशक रहे हैं.
नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में शामिल होने से पहले पटेल ने ख़ुफ़िया मामलों पर स्थायी चयन समिति के लिए वरिष्ठ वकील के तौर पर काम किया था.
काश पटेल ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी और यूएस स्पेशल ऑपरेशन फोर्स के लिए संवेदनशील कार्यक्रमों की देखरेख की है.
उन्होंने दुनिया भर में इंटेलिजेंस और काउंटर टेररिज्म को अरबों डॉलर फंड करने वाले क़ानून को बनाने में भी मदद की थी.
खुफिया मामलों पर स्थायी चयन समिति के लिए काम करने से पहले पटेल ने अमेरिका के न्याय विभाग में आतंकवाद अभियोजक के रूप में काम किया.
रक्षा विभाग के मुताबिक ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान पटेल ने कई बड़े अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी.
काश पटेल के पद पर रहने के दौरान ही आईएसआईएस के मुखिया अल बगदादी, अल क़ायदा के कासिम अल रिमी को मारने के अलावा अमेरिकी बंधकों की सुरक्षित वापसी हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित