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बांग्लादेश के अख़बार ने ट्रंप और मोदी की मुलाक़ात पर ऐसा क्या लिखा था कि मांगनी पड़ी माफ़ी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की व्हाइट में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान बांग्लादेश से जुड़े सवाल पर ट्रंप के जवाब को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं.
ट्रंप के जवाब का अर्थ क्या था या फिर ट्रंप क्या कहना चाह रहे थे को लेकर लोग अलग-अलग मतलब निकाल रहे थे.
इसी मामले में बांग्लादेश के अख़बार द डेली स्टार को माफ़ी मांगनी पड़ी है.
बीते गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साथ बैठकर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए थे.
इस दौरान बांग्लादेश से जुड़े सवाल पर डोनाल्ड ट्रंप ने टिप्पणी की थी जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर कोई बयान नहीं दिया था.
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बांग्लादेश से जुड़े सवाल का जवाब देने के बाद ट्रंप ने इस पर कुछ ऐसा कहा, जिसको लेकर बांग्लादेश समेत कई विश्लेषकों के बीच बहस छिड़ गई थी.
इसी मुद्दे पर बांग्लादेश के मीडिया समूह द डेली स्टार ने अब माफ़ी मांगी है.
मीडिया समूह का कहना है कि 14 फ़रवरी को उसकी ऑनलाइन प्रकाशित की गई रिपोर्ट में बांग्लादेश को लेकर ट्रंप के बयान पर उनकी कवरेज 'ग़लत और भ्रामक थी.'
आख़िर ट्रंप ने कहा क्या था?
बांग्लादेशी मीडिया समूह द डेली स्टार की माफ़ी से पहले ये जान लेना ज़रूरी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने आख़िर कहा क्या था?
ट्रंप से एक पत्रकार ने सवाल किया था कि वो बांग्लादेश के मुद्दे पर क्या कहना चाहेंगे और बांग्लादेश के हालात पर डीप स्टेट ने क्या भूमिका निभाई?
इस पर उन्होंने जवाब दिया कि 'हमारे डीप स्टेट की इसमें कोई भूमिका नहीं थी. इस पर प्रधानमंत्री (मोदी) काफ़ी लंबे समय से काम करते रहे हैं, और सौ से अधिक सालों से काम किया जा चुका है. मैं इसके बारे में पढ़ रहा हूं लेकिन मैं बांग्लादेश को प्रधानमंत्री के लिए छोड़ता हूं.'
यहां डीप स्टेट का मतलब है कि किसी वैसे प्रभाव से जो अनाधिकारिक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं. किसी सरकार को बनाने में या बिगाड़ने में. भारत के कई विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में शेख़ हसीना की बेदख़ली और मोहम्मद युनूस के आने के पीछे बाइडन प्रशासन का हाथ था.
भारत के पत्रकारों ने इसी डीप स्टेट का हवाला देते हुए सवाल पूछा था.
इस बयान की बांग्लादेशी मीडिया में ख़ासी चर्चा होने लगी, जिसके बाद द डेली स्टार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें लिखा गया था- 'ट्रंप ने बांग्लादेश का विषय मोदी के हाथ में छोड़ दिया है.'
डेली स्टार की इस पोस्ट पर बांग्लादेश में बवाल होने लगा और आख़िरकार अख़बार को माफ़ी मांगनी पड़ी. लोगों का कहना था कि द डेली स्टार ने ट्रंप के बयान को भ्रामक तरीक़े से पेश किया क्योंकि ट्रंप ने बांग्लादेश पर पूछे गए सवाल को मोदी के हवाले किया था न कि बांग्लादेश को.
वहीं कई विश्लेषकों ने भी सवाल पूछा कि ट्रंप का जवाब समझ में नहीं आया कि वो किस चीज़ को पीएम मोदी के हवाले छोड़ना चाहते थे.
थिंक टैंक द ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूशन की सीनियर फेलो तन्वी मदान ने एक्स पर पोस्ट लिखकर कहा था कि ये साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मतलब बांग्लादेश का सवाल पीएम मोदी पर छोड़ना था या बांग्लादेश या एशिया का मैनेजमेंट उन पर छोड़ना था.
जवाब पर छिड़ी बहस
ट्रंप के बयान के बाद थिंक टैंक द विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टिट्यूट डायरेक्टर माइकल कुगलमैन ने एक्स पर पोस्ट किया था कि "मैं इसका मतलब ये निकाल रहा हूं कि उन्होंने इस सवाल को पीएम मोदी के आगे जवाब देने के लिए पेश कर दिया था."
"शायद वो ऐसी किसी चीज़ पर टिप्पणी नहीं करना चाहते थे जिसके बारे में वो ज़्यादा नहीं जानते हैं."
इसी पोस्ट पर जवाब देते हुए अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार जॉन डेनिलोविज़ ने लिखा था कि 'इस सवाल पर मोदी ने जवाब देना बेहतर नहीं समझा और इसका अर्थ कुछ लोग ये निकाल रहे हैं कि ट्रंप ने बांग्लादेश मोदी को दे दिया जो कि मुझे लगता है कि सही नहीं है.'
वहीं बांग्लादेश के अंग्रेज़ी दैनिक अख़बार ढाका ट्रिब्यून के संपादक ज़फ़र सुब्हान ने भी कुगलमैन की पोस्ट पर कमेंट किया. उन्होंने लिखा कि उनका आशय सवाल से था, देश से नहीं.
वहीं अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की डिप्लोमैटिक अफ़ेयर्स एडिटर सुहासिनी हैदर ने एक्स पर ट्रंप के जवाब को पोस्ट करते हुए लिखा था कि 'ट्रंप संकेत दे रहे थे कि मोदी बांग्लादेश के सवाल का जवाब देंगे लेकिन मोदी ने बांग्लादेश के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया.'
वहीं सोशल मीडिया एक्स पर ही कई लोग ये अंदाज़ा लगा रहे थे कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बांग्लादेश के मुद्दे को पूरी तरह से पीएम मोदी पर छोड़ दिया है.
वहीं कुछ लोग ये भी कह रहे थे कि ट्रंप ने इशारों-इशारों में संकेत दिया है कि उनकी बांग्लादेश के मुद्दे में दिलचस्पी नहीं है और भारत ही इस मुद्दे को देखे.
अल्बनी यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के असोसिएट प्रोफ़ेसर क्रिस्टोफ़र क्लेरी ने एक्स पर पोस्ट किया कि ट्रंप भारत-पाकिस्तान के लिए पहले भी 'सौ से अधिक सालों' वाली बात कह चुके हैं लेकिन हैरत की बात है कि जवाब के दौरान वो बांग्लादेश और पाकिस्तान का घालमेल कर रहे थे.
भारत ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब पर अमेरिका या बांग्लादेश की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था लेकिन उसी दिन शाम में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बांग्लादेश को लेकर एक सवाल का जवाब ज़रूर दिया था.
उन्होंने बयान में कहा था, "बांग्लादेश पर दिए गए बयान के बारे में हम क्या सोचते हैं. यह एक ऐसा विषय था जिस पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हाल की घटनाओं के संबंध में अपने विचार और वास्तव में अपनी चिंताएं साझा कीं और बताया कि भारत इस स्थिति को कैसे देखता है."
"मुझे लगता है कि हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश में भी स्थिति ऐसी दिशा में आगे बढ़ेगी, जहां हम उनके साथ रचनात्मक और स्थिर तरीक़े से संबंध बना सकेंगे. लेकिन हालात को लेकर चिंताएं हैं. प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उन विचारों को साझा किया."
हालांकि अब द डेली स्टार की माफ़ी के बाद इस मुद्दे पर विराम लगता दिख रहा है. अख़बार ने एक्स पर अपने माफ़ीनामे को भी प्रकाशित किया है.
इसमें लिखा है, "हम अपने पाठकों, संरक्षकों और शुभचिंतकों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भारतीय प्रधानमंत्री मोदी से वॉशिंगटन में हुई मुलाक़ात पर 14 फ़रवरी को ऑनलाइन प्रकाशित अपनी रिपोर्ट के लिए खेद व्यक्त करते हैं और ईमानदारी से माफ़ी मांगते हैं."
"हम मानते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप की बांग्लादेश के मामले में की गई हमारी कवरेज ग़लत और भ्रामक थी. हमने मामले की गहनता से जांच की है और ग़लती को सुधारने के लिए डिजिटल न्यूज़रूम में क़दम उठाए हैं."
अख़बार के इस माफ़ीनामे की भी कइयों ने निंदा की है. इस पोस्ट पर सिटिज़न्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन नामक एक प्रोफ़ाइल ने कमेंट किया है जो अन्याय और हिंसा के ख़िलाफ़ ख़ुद को बांग्लादेशी नागरिकों का एक संगठन बताता है.
उसने लिखा है कि 'बांग्लादेशी होने के नाते हम किसी भी चर्चा में अपने देश के बारे में सकारात्मक भावनाओं और विचारों को सुनना पसंद करते हैं. हममें से कइयों ने समझा कि ट्रंप ने मोदी का ज़िक्र सिर्फ़ इस सवाल को मोदी पर टालने के लिए किया था. हालांकि आपने इसे समझा कि ट्रंप बांग्लादेश के मामलों को भारत पर छोड़ रहे हैं. अख़बार ने बांग्लादेश में अपनी पत्रकारिता की विश्वसनीयता से समझौता किया है.'
ऐसा नहीं है कि बांग्लादेश का चर्चित अंग्रेज़ी अख़बार द डेली स्टार पहली बार विवादों में रहा हो. बीते साल नवंबर में द डेली स्टार पर भारत का समर्थन करने के आरोप लगे थे, जिसके बाद इसके दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए थे.
वहीं बीते साल फ़रवरी में ही द डेली स्टार के एग्ज़िक्युटिव एडिटर सैयद अशफ़ाकुल हक़ को पुलिस कस्टडी में कोर्ट में ले जाने के दौरान इस मीडिया समूह के पत्रकारों ने दूसरे मीडिया समूह के पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की थी.
इस घटना को लेकर भी द डेली स्टार की ख़ासी निंदा हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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