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ट्रंप और पुतिन ने कैसे एक सप्ताह में दुनिया भर को हिला डाला
- Author, स्टीव रोज़ेनबर्ग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
1917 की रूसी क्रांति के गवाह रहे अमेरिकन पत्रकार जॉन रीड जब इस बारे में अपने संस्मरण लिख रहे थे तो उन्होंने इसका शीर्षक रखा, 'दस दिन जब दुनिया हिला उठी'
लेकिन ट्रंप और पुतिन के लिए 10 दिन बहुत ज़्यादा हैं. उन्होंने एक सप्ताह में ही दुनिया को हिला डाला.
ये सब शुरू हुआ 12 फ़रवरी को दोनों के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत और अमेरिका-रूस के बीच रिश्तों की नई शुरुआत के अपने वादे से.
जहां दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधरने की शुरुआत हो रही है वहीं अमेरिका और यूरोप के रिश्ते तल्ख़ होते जा रहे हैं.
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सऊदी अरब में बातचीत
यूक्रेन युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच पहली उच्च स्तरीय बातचीत सऊदी अरब में हुई.
ये वो सप्ताह था जिसमें परंपरागत सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा, यूरोप और यूक्रेन को अमेरिकी रुख़ की आलोचना करने पर मजबूर होना पड़ा, यूरोप की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं और रूस की स्थिति मज़बूत हुई.
बिना किसी को किसी तरह की रियायत दिए या कोई क़ीमत अदा किए वो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बेहद मज़बूत स्थिति में पहुंच गया.
बुधवार सुबह के रूसी अख़बारों में टेबल के आर-पार बैठे, यूक्रेन युद्ध को ख़त्म करने को लेकर बातचीत करते रूसी और अमेरिकी अधिकारियों की तस्वीर छाई रही.
रूस अपनी जनता और दुनिया को दिखाना चाहता है कि यूक्रेन वॉर को लेकर उसे अलग-थलग करने की यूरोपीय कोशिशें फ़ेल हो गई हैं.
क्या कह रहा है रूसी मीडिया
रूसी मीडिया अमेरिका और रूस के संबंधों में गर्माहट का स्वागत कर रहा है.
पुतिन समर्थित टेबलॉयड मॉस्कॉस्की कॉमसॉमोलेट्स ने लिखा, "'ट्रंप जानते हैं कि उन्हें रूस को रियायत देनी होगी क्योंकि वो उस पक्ष से समझौता कर रहे हैं जो यूक्रेन वॉर जीत रहा है. वो रूस को रियायत देंगे लेकिन इसका ख़ामियाजा अमेरिका नहीं, बल्कि यूक्रेन और यूरोप को भुगतना होगा."
टेबलॉयड आगे लिखता है, "लंबे समय से यूरोप दुनिया को बताता रहा है कि वही दुनिया में सबसे सभ्य है. भगवान का दूत है. लेकिन वो ये भांपने में विफल रहा है कि उसकी ख़ुद की इज़्ज़त सरे राह उतर रही है."
मॉस्को की सड़कों पर कैसा है माहौल
लेकिन मॉस्को की सड़कों पर ये उत्साह नदारद दिखा.
लोग ट्रंप को लेकर जल्दबाज़ी में कुछ नहीं कहना चाहते.
लोगों को अब भी इस बात पर शक़ है कि डोनाल्ड ट्रंप, रूस के सबसे अच्छे दोस्त साबित होंगे और यूक्रेन के साथ उसकी जंग ख़त्म करा देंगे.
नादेज़्दा मुझसे कहती हैं, "ट्रंप व्यापारी हैं. वो सिर्फ़ पैसा बनाना जानते हैं. मुझे नहीं लगता कि हालात कुछ बदलेंगे."
वहीं गियोर्गी ने कहा, "शायद सऊदी अरब में हुई बातचीत से कुछ बदले. समय आ गया है जब हम अपनी दुश्मनी ख़त्म करें."
इरिना नाम की महिला ने कहा, "ट्रंप ऊर्जावान हैं, सक्रिय हैं. हमें उम्मीद है कि इस बातचीत से इलाके में शांति आए. ये पहला क़दम है. इससे शायद हमारी अर्थव्यवस्था को मदद मिले. खाने-पीने और दूसरी ज़रूरी चीज़ों के दाम बढ़ते जा रहे हैं. लड़ाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव इसकी मुख्य वजहें हैं."
पुतिन और ट्रंप के बीच फ़ोन पर बात हुई. उनकी टीमें सऊदी अरब में मिलीं. दोनों राष्ट्रपतियों की भी जल्द ही मुलाक़ात हो सकती है. लेकिन मॉस्कॉस्की कॉमसॉमोलेट्स ने पुतिन और ट्रंप के बीच हुई बातचीत का काल्पनिक वर्णन कुछ यूं किया है
(फ़ोन कॉल पर ट्रंप, पुतिन से)- व्लादीमिर. आपका देश बड़ा प्यारा है. मेरा देश भी उतना ही प्यारा है. क्या हम मिलकर इस दुनिया को बांट दें?
पुतिन- और मैं इतने दिनों से क्या बोल रहा हूं? चलो ये करके दिखा दें
आगे क्या होगा, ये देखना होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित