शेख़ हसीना पर आपराधिक मुक़दमा चलाना क्या संभव है?

    • Author, तान्हा तसनीम
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला

इंटरनेशलन क्रिमिनल ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन के संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत नौ लोगों के खिलाफ जांच करने का फैसला लिया है.

सभी पर हत्या, नरसंहार और यातना के आरोप लगाए गए हैं. आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान एक छात्र के पिता ने बुधवार को यह याचिका लगाई थी.

अंतरिम सरकार के कानून, न्याय और संसदीय मामलों के सलाहकार प्रोफेसर आसिफ नज़रूल ने बुधवार को कहा कि अभियुक्तों के खिलाफ इंटरनेशलन क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में मुक़दमा शुरू किया जाएगा.

उन्होंने कहा, “आप साफ़ तौर पर कह सकते हैं कि आईसीटी में ट्रायल शुरू किया जाएगा. यह इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल है. मुक़दमे के तहत हम पूर्व प्रधानमंत्री और अन्य लोग, जिन पर आरोप है, हम उन्हें कोई छूट नहीं देंगे.”

सवाल यह है कि क्या युद्ध अपराधियों पर मुक़दमा चलाने के लिए बने इस कानून में शेख हसीना पर मुकदमा चलाना संभव है? इस कानून में क्या कहा गया है?

इंटरनेशलन क्रिमिनल ट्रिब्यूनल

बांग्लादेश में जब 2008 के चुनाव हुए थे तब अवामी लीग ने घोषणापत्र में कहा था कि मानवता के खिलाफ अपराध करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा.

संसदीय चुनाव जीतने के बाद अवामी लीग सरकार ने वादे के मुताबिक मुकदमे की पहल की थी.

1973 में बने इंटनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल एक्ट के तहत अभियुक्त की जांच और मुक़दमा चलाया जा सकता है.

यह एक्ट 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बांग्लादेश में हुए मानवता के खिलाफ अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए बनाया गया था.

हालांकि साल 2010 से पहले इस कानून के तहत ना तो किसी पर मुक़दमा चलाया गया और ना ही किसी को सज़ा दी गई.

साल 2009 में बांग्लादेश की संसद ने ‘युद्ध अपराधियों पर मुक़दमा’ चलाने पर एक मौखिक प्रस्ताव पास किया था.

इसके बाद व्यक्तियों और समूहों पर ट्रिब्यूनल में ट्रायल चलाने और ट्रिब्यूनल की कार्यवाही के स्वतंत्र संचालन के लिए कानून में कुछ संशोधन किए गए.

इसके ज़रिए साल 2010 में ट्रिब्यूनल, वकीलों के पैनल और जांच एजेंसियों का गठन किया गया.

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क्या कहता है कानून?

इस कानून की धारा 3(1) के मुताबिक कोई व्यक्ति, समूह या सशस्त्र और सुरक्षा बलों से जुड़ा कोई सदस्य इस कानून की उप-धारा दो में बताए गए किसी भी अपराध में शामिल है तो उस पर आईसीटी मुकदमा चलाने और सजा देने का अधिकार रखता है.

कानून के मुताबिक बांग्लादेश की सीमा में गए अपराधों के लिए आईसीटी के पास यह अधिकार होगा, भले व्यक्ति या समूह किसी भी राष्ट्र से क्यों ना संबंध रखता हो.

मानवता और शांति के खिलाफ अपराध, नरसंहार, युद्ध अपराध, जिनेवा कन्वेशन के विपरीत काम करना, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध करने की स्थिति में इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल को मुकदमा चलाने की शक्ति दी गई है.

बांग्लादेश सरकार के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने कहा कि इस कानून के तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मुकदमा चलाना संभव है.

उन्होंने कहा कि 1973 का जो कानून है उसमें मानवता के खिलाफ अपराध की जो परिभाषा दी गई है, यह अपराध भी उसी के अंदर आता है.

इसका मतलब है कि शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ अधिनियम की धारा तीन की उपधारा 2(ए) के मुताबिक मानवता के विरुद्ध अपराध का आरोप लगाया जा सकता है.

इस धारा के अनुसार, हत्या, विनाश, गुलाम बनाकर रखना, निर्वासन, कारावास, अपहरण, यातनाएं देना, रेप, नागरिकों के खिलाफ किए गए अमानवीय कृत्यों की सुनवाई इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में की जा सकती है.

इसके अलावा यहां राजनीतिक, जातीय या धार्मिक आधार पर उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई भी हो सकती है.

राणा दासगुप्ता ने इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में अभियोजक के रूप में काम किया है.

हालांकि उन्होंने 13 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था. वे बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के महासचिव भी हैं.

दासगुप्ता कहते हैं, “इस कानून का एक लंबा इतिहास है. यह 1971 के मुक्ति संग्राम को देखते हुए बनाया गया था. यह कानून उन लोगों पर मुक़दमा चलाने के लिए बनाया गया है जिन्होंने वहां युद्ध अपराध किए हैं.”

उनका मानना है कि जिस संदर्भ में बात की जा रही है, वह संदर्भ यहां लागू नहीं होता है.

हालांकि, बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मंजिल मोर्शेड का मानना है कि शेख हसीना और अन्य पर मुक़दमा आसानी से चलाया जा सकता है.

उन्होंने कहा, ''पिछली सरकार ने जो कानून संशोधित किया था, उसमें मानवता के खिलाफ अपराध या नरसंहार का मुक़दमा चलाया जा सकता है.”

वकील का कहना है कि ट्रिब्यूनल के पास किन अपराधों के खिलाफ मुक़दमा चलाने की शक्ति है, वह कानून में साफ-साफ लिखा गया है.

उनका कहना है कि इस मामले में बहस की कोई गुंजाइश नहीं है.

शेख हसीना के खिलाफ मामले

पाँच अगस्त को सावर में गोली लगने से अलीफ़ अहमद सियाम नाम के एक छात्र घायल हो गए थे. वे नौवीं कक्षा में पढ़ते थे. घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन दो दिन बाद ही उनकी मौत हो गई.

उसी के मद्देनज़र पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 9 लोगों पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

छात्र के पिता बुलबुल कबीर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वकील गाजी एमएच तनीम ने इसे लेकर इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल की जांच एजेंसी में शिकायत दर्ज कराई है.

इसी दिन मीरपुर में कॉलेज छात्र फैजुल इस्लाम राजोन की हत्या के आरोप में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

इसके बाद गुरुवार को मीडिया में खबर आई कि राजधानी ढाका के शेरेबंगला नगर थाना क्षेत्र में भी शेख हसीना समेत 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है.

इस मामले में उन पर शहाबुद्दीन नाम के ऑटो रिक्शा चालक की हत्या का आरोप लगाया गया है.

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)

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