शेख़ हसीना के बेटे ने पीएम मोदी, आईएसआई और बांग्लादेश के हिंदुओं पर क्या कहा

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के बेटे सजीब वाजिद ने अपनी मां की सरकार के पतन के लिए देश के एक छोटे समूह और आईएसआई की साज़िश को ज़िम्मेदार ठहराया है.

उन्होंने अपनी मां की जान बचाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है.

साथ ही इस बात का भी खंडन किया है कि पश्चिमी देशों ने शेख़ हसीना का वीज़ा रद्द कर दिया है या फिर उन्होंने किसी देश में राजनीतिक शरण की मांग की है.

सजीब वाजिद ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक वीडियो इंटरव्यू में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि देश के एक छोटे से समूह और एक विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी संभवत: आईएसआई ने ये स्थिति पैदा की है. क्योंकि सरकार के ख़िलाफ़ विरोध का कोई कारण नहीं था. सरकार ने आरक्षण को घटाकर काफ़ी कम कर दिया था.

उन्होंने कहा कि आरक्षण कोटा बहाल करने का फ़ैसला हसीना सरकार का नहीं बल्कि का कोर्ट का था.

सरकार ने कभी भी पुलिस को हमले का आदेश नहीं दिया था.

सरकार ने तुरंत बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था लेकिन प्रदर्शनकारी उनकी मां की सरकार से इस्तीफ़ा लेने को उतारू थे.

उन्होंने कहा, ''आख़िर प्रदर्शनकारी छात्रों के पास कहां से हथियार आए. वे छात्र नहीं थे बल्कि दंगाइयों की भीड़ थी. वे आतंकवादी थे, जिन्हें एक निर्वाचित सरकार गिराने के लिए उकसाया गया था. मेरी मां ने इस्तीफ़ा दे दिया क्योंकि वो देश में नरसंहार को रोकना चाहती थीं.''

अमेरिका की 'भूमिका' के बारे में क्या बोले सजीब वाजिद

समर्थकों की ओर से शेख़ हसीना के सरकार के पतन के लिए पश्चिमी देशों को ज़िम्मेदार ठहराने से जुड़े सवालों पर सजीब वाजिद ने कहा कि उनके पास इस बात के सुबूत नहीं हैं कि अमेरिका इसमें शामिल था या नहीं. लेकिन हालात पर गौर करें तो पाएंगे कि सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शनकारियों को भड़काया गया.

उन्होंंने कहा, ''शुरू में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे. पहले दौर के प्रदर्शन के बाद सरकार ने आरक्षण घटा दिया था. सरकार ने हिंसा रोकने के लिए सबकुछ किया. सरकार ने हिंसा का आदेश नहीं दिया. हिंसा कुछ अनाम समूहों ने फैलाई. ये जानबूझ कर किया गया. मुझे पूरा विश्वास है कि हिंसा को पश्चिमी देशों की ओर से हवा दी गई.''

सजीब ने कहा- मां की जान बचाने के लिए पीएम मोदी का दिल से आभार

सजीब वाजिद ने अपनी मां शेख़ हसीना की जान बचाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'दिल से आभार' व्यक्त किया है.

उन्होंने कहा, ''मैं भारत सरकार की तुरंत कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभारी हूं. इतनी तेज़ी से फ़ैसला लेने की वजह से ही मेरी मां की जान बच सकी.''

''भारत को विश्व में अब नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए. वो पड़ोस में किसी विदेशी ताकत को हावी न होने दे. बांग्लादेश भारत का पूर्वी पड़ोसी देश है. इसलिए भारत को सतर्क रहना होगा.''

उन्होंने कहा, ''इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि शेख़ हसीना की सरकार ने देश को आर्थिक तरक्की की बुलंदियों तक पहुंचाया. अतिवादियों को काबू किया और इस महादेश की पूर्वी सरहदों पर स्थिरता कायम की. हमने साबित करके दिखाया कि हम जो सोचते हैं वो कर सकते हैं. लेकिन देश की दूसरी सरकारें नाकाम रहीं.''

'अंतरिम सरकार असंवैधानिक'

सजीब वाजिद ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के संविधान के मुताबिक़ कोई भी गैर निर्वाचित सरकार सत्ता में नहीं रह सकती.

नब्बे दिनों के अंदर चुनाव कराने होंगे इसलिए अंतरिम सरकार की पहली प्राथमिकता चुनाव कराने की होनी चाहिए.

बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी है. 8 अगस्त को राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें और अंतरिम परिषद में शामिल सदस्यों को शपथ दिलाई थी.

उन्होंने यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने पर कहा, ''इन लोगों को यहां के एक छोटे समूह, इलिट और पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल है. सरकार में सलाहकार के तौर पर काम करने के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि किसी के ज़रिये पद पर बिठाया जाना एक बात है और सरकार चलाना अलग बात है. बगैर राजनीतिक और गवर्नेंस के अनुभव के देश चलाना काफी मुश्किल है. मैं देखना चाहता हूं वो कैसे काम करते हैं. क्या वो सरकार चला भी पाएंगे.''

अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर क्या कहा

बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर सजीब वाजिद ने कहा, ''इस देश के इतिहास में केवल एक ही सरकार रही है जिसने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अपनी विश्वसनीयता कायम की है और इस देश को सुरक्षित रखा है. पिछले 15 साल बांग्लादेश के इतिहास में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित समय था.''

''जो लोग शेख़ हसीना की आलोचना करते हैं वो भी इससे इनकार नहीं कर सकते कि उनके समय में देश में बेहद तेज़ आर्थिक तरक्की हासिल की है. मौजूदा इस गैर-निर्वाचित सरकार को बांग्लादेश की लगभग पूरी आबादी का समर्थन प्राप्त नहीं है. उसके पास कोई जनादेश नहीं है क्या ऐसे में वो अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रख पाएगी.’’

उन्होंने कहा, ''आप देख रहे हैं कि अल्पसंख्यक देश से भागने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे उनकी चिंता हो रही है. मैं अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने और बांग्लादेश में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए जो कर सकता हूं वह करना चाहता हूं. मैं लोकतंत्र को वापस लाने के लिए हर कोशिश करना चाहता हूं. यही हमारा लक्ष्य है.’’

सजीब वाजिद से पूछा गया कि देश छोड़ कर जाने से पहले शेख हसीना का आखिरी संदेश क्या था. इस पर उन्होंने कहा, ''वह इस्तीफ़ा देने और सत्ता सौंपने की योजना बना रही थीं. उनका अपना आधिकारिक आवास छोड़ कर देश से बाहर जाने का कोई इरादा नहीं था.''

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