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बांग्लादेश: मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से भारत को क्या हैं उम्मीदें?
- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार के मुखिया है. शांति का नोबेल जीतने वाले यूनुस को बांग्लादेश में ‘बैंकर ऑफ़ पुअर्स’ के नाम से जाना जाता है.
साल 2006 में नोबेल का शांति पुरस्कार जीतने वाले यूनुस ने माइक्रोफाइनेंस के ज़रिए ग्रामीण इलाकों में हज़ारों बांग्लादेशियों को ग़रीबी के चक्र से बाहर निकाला. उनके इस काम को दुनिया के 100 से अधिक देशों ने फॉलो किया.
84 साल के यूनुस बांग्लादेश की कमान ऐसे वक्त संभाल रहे हैं जब राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है. देश में लूटपाट और अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं.
मोहम्मद यूनुस के शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि "प्रोफे़सर मोहम्मद यूनुस को उनकी नई ज़िम्मेदारी संभालने पर मेरी शुभकामनाएँ. हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी, जिससे हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी."
"भारत शांति, सुरक्षा और विकास के लिए दोनों देशों के लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है."
भारत के साथ रिश्तों पर मोहम्मद यूनुस ने क्या कहा?
भारतीय न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ को दिए गए एक इंटरव्यू में मोहम्म यूनुस मे कहा, "भारत को बांग्लादेश के लोगों के चुने हुए नेता के साथ काम करना है. वो नेता जो लोगों से जुड़ा हो."
"हमारे और भारत के बीच बेहतरीन रिश्ता होना चाहिए ना कि ऐसा रिश्ता जिसमें हम दोनों एकदूसरे को संदेह की नज़र से देखें.”
लेकिन भारत के लिए बांग्लादेश की पार्टी बीएनपी के ओर से बहुत सहज करने वाले बयान नहीं आ रहे.
ख़ालिदा जिया के नेतृत्व वाली बीएनपी पार्टी ने भारत की ओर से शेख़ हसीना को पनाह दिए जाने को लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए बीएनपी के वरिष्ठ नेता गायेश्वर रॉय ने कहा "बीएनपी का मानना है कि बांग्लादेश और भारत के बीच आपसी सहयोग होना चाहिए."
"भारत सरकार को ये समझना चाहिए और इसी आधार पर व्यवहार करना चाहिए. लेकिन अगर आप हमारे दुश्मन के साथ काम करेंगे तो इस आपसी सहयोग का सम्मान कर पाना मुश्किल होगा."
बांग्लादेश में नई सरकार से भारत की उम्मीदें
बांग्लादेश में उच्चायुक्त रहीं वीना सीकरी कहती हैं, "प्रोफेसर यूनुस को विदेशों में सभी उनके काम के लिए जानते हैं. उन्होंने माइक्रोफाइनेंस में जो काम किया है वो उल्लेखनीय है."
"हमें देखना होगा कि आने वाला समय भारत और बांग्लादेश के लिए कैसा होगा. प्रोफ़ेसर यनुस के शपथ लेते ही पीएम नरेंद्र मोदी ने तुरंत बधाई दी, ये बताता है कि बांग्लादेश में जो भी सत्ता में हो, भारत उसके साथ काम करना चाहता है."
वो बीएनपी के नेता गायेश्वर रॉव की बात को ख़ारिज करते हुए कहती हैं कि जब बांग्लादेश में ख़ालिदा जिया सत्ता में थीं तो भी भारत के रिश्ते बांग्लादेश के साथ बेहतर थे.
वो कहती हैं कि "लोकतंत्र में विपक्षी पार्टी को दुश्मन बताना लोकतंत्र को कम करने जैसा है."
मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की अंतरिम का प्रमुख सलाहकार चुने जाने की मांग विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने की थी.
इस सप्ताह देश में अंतरिम सरकार के बनने के बाद अब दूसरा चरण होगा देश में चुनाव कराने का, ताकि नई सरकार चुनी जा सके.
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशिया स्टडीज़ के प्रोफेसर संजय भारद्वाज मानते हैं कि मोहम्मद यूनुस के भारत के साथ कैसे रिश्ते होंगे इसे लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.
हालांकि वो ये मानते हैं कि भारत हर उस शख्स के साथ मिलकर काम करेगा जो बांग्लादेश में स्थिरता लाएंगे.
भारद्वाज कहते हैं, "जब भी प्रोफे़सर यूनुस भारत आए हैं उन्हें सम्मान मिला है. वो शेख़ हसीना सरकार के कट्टर आलोचक रहे हैं. भारत सरकार के साथ शेख़ हसीना सरकार के अच्छे रिश्ते रहे हैं, ऐसे में लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं. लेकिन भारत और बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति को देखें तो दोनों देशों को एकदूसरे की ज़रूरत है."
"बांग्लादेश में भारत का बड़ा निवेश है और बांग्लादेश की बात करें तो वहां सरकार किसी की भी हो उसे आर्थिक विकास को केंद्र में रखना ही होगा. ऐसे में जो भी सरकार बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता लाएगी भारत उसके साथ खड़ा होगा."
शेख़ हसीना के आलोचक रहे हैं मोहम्मद यूनुस
बीते सालों में कई मुद्दों पर शेख़ हसीना और मोहम्मद यूनुस आमने-सामने रहे हैं. यहां तक कि प्रो़फेसर यूनुस, शेख़ हसीना को 'ग़रीबों के खू़न का प्यासा' तक बता चुके हैं.
साल 2007 में जब मोहम्मद यूनुस के संसदीय चुनाव से पहले पार्टी बनाने की चर्चा थी, उस वक्त शेख़ हसीना ने उनके लिए कहा था, "राजनीति में नए-नए आने वाले लोग ख़तरनाक तत्व हैं और उन्हें संदेह की नज़र से देखा जाना चाहिए."
हालांकि मोहम्मद यूनुस ने कभी अपनी राजनीतिक पार्टी नहीं बनाई.
2011 में बांग्लादेश सरकार ने ग्रामीण बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से मोहम्मद यूनुस को हटा दिया. सरकार ने कहा कि वह रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुके हैं.
अगले कुछ सालों में यूनुस पर कई केस हुए. उन पर टैक्स में गड़बड़ी करने और मानहानि का केस हुआ.
इसी साल जनवरी में बांग्लादेश की एक कोर्ट ने उन्हें छह महीने की सज़ा भी सुनाई.
मोहम्मद यूनुस इन सभी आरोपों को ख़ारिज करते हैं. वो इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं.
अब जब शेख़ हसीना देश छोड़ चुकी हैं तो मोहम्मद यूनुस के लिए हालात पूरी तरह बदल गए हैं. वो अब इस मुल्क की नई अंतरिम सरकार के प्रमुख हैं.
इसी सप्ताह एक इंटरव्यू में मोहम्मद यूनुस ने कहा, "देश में अभी कोई सरकार नहीं है. लोकतांत्रिक मूल्यों के मुताबिक़ सत्ता का हस्तांतरण हो इसके लिए अंतरिम सरकार बनाई जा रही है. इस अंतरिम सरकार का काम होगा कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जाएं."
"ये एक बड़ा काम है क्योंकि बीते कई सालों से देश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं हुए. अब तक लोग अपना नेता नहीं चुन पा रहे थे, अब लोगों के पास मौक़ा होगा कि वो अपना नेता चुनें और वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करें. बीते कई सालों से युवा मतदताओं को वोट देने से रोका गया है."
बांग्लादेश में चुनावों की विश्वसनीयता
बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते रहे हैं.
इस साल जनवरी में बांग्लादेश के चुनावों को विदेशी पर्यवेक्षकों ने निष्पक्ष बताया लेकिन बांग्लादेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बीएनपी ने चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया था.
बीएनपी की मांग थी कि चुनाव केयरटेकर सरकार की निगरानी में हों ताकि चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके लेकिन शेख़ हसीना सरकार ने इस मांग को पूरा करने से इनकार कर दिया.
वीना सीकरी कहती हैं कि "ये सभी मुद्दे उनके घरेलू मुद्दे हैं लेकिन भारत ने हमेशा ही सत्ता में रहने वाली सरकार के साथ काम किया है."
संजय भारद्वाज भी मानते हैं कि भारत के लिए तीन चीज़ें अहम हैं- सुरक्षा, काउंटर टेररिज़म और ऐसी सरकार जो कट्टरपंथी ना हो.
वो कहते हैं, "ये तीनों चीज़ें भारत के लिए अहम हैं. जब तक कोई भी देश इन चीज़ों पर काम करने को तैयार है भारत उसके साथ काम करेगा."
बांग्लादेश में चुनाव कब होंगे ये आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन इस अंतरिम सरकार के पास चुनाव कराने के साथ-साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी ये है कि वो अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा को रोके.
भारत सरकार भी इस मामले पर विशेष ज़ोर दे रही है. इसका ज़िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहम्मद यूनुस को दिए गए अपने संदेश में भी किया है.
मोहम्मद यूनुस ने भी अंतरिम नेता चुने जाने के बाद कहा है "किसी पर भी हमला नहीं होगा और ये मेरा बतौर नेता पहला क़दम होगा."
देखना होगा कि मोहम्मद यूनुस कितनी जल्दी बांग्लादेश में स्थिरता लेकर आ पाते हैं और ऐसे में आने वाले वक्त में भारत के बांग्लादेश के रिश्ते कैसे होंगे.
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