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शेख़ हसीना के हटते ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू किस हाल में हैं?
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफ़ा देने और देश छोड़कर चले जाने के कुछ ही घंटों बाद, राजधानी ढाका में एक शख़्स को उनकी रिश्तेदार ने घबराकर फ़ोन किया.
अविरूप सरकार बांग्लादेशी हिंदू हैं, जो 90 फ़ीसदी मुसलमान आबादी वाले बांग्लादेश में रहते हैं.
अविरूप की बहन के पति का निधन हो चुका है और वह एक बड़े संयुक्त परिवार में रहती हैं.
ये परिवार ढाका से लगभग 100 किलोमीटर दूर नदियों से घिरे ज़िले नेत्रोकोना में रहता है.
अविरूप सरकार ने मुझे उस फ़ोन कॉल के बारे में बताया, "बहन डरी हुई सुनाई पड़ रही थीं. बहन ने कहा कि उनके घर पर भीड़ ने हमला कर दिया है और लूटपाट की है."
उनकी बहन ने बताया कि लाठी-डंडों के साथ करीब 100 लोगों की भीड़ उनके घर में घुसी और फर्नीचर, टीवी के साथ ही बाथरूम फ़िटिंग्स तक तोड़ दीं. घर के दरवाज़े तोड़ दिए गए.
बाहर जाने से पहले ये लोग घर में रखा सारा पैसा और गहने लूटकर गए. हालांकि भीड़ ने वहां मौजूद 18 लोगों में से किसी के साथ भी मारपीट नहीं की. इन 18 लोगों में से करीब 6 बच्चे भी थे.
लूट के सामान के साथ निकलने से पहले भीड़ इन लोगों पर चिल्लाकर बोली, "तुम लोग आवामी लीग के वंशज हो! तुम्हारे कारण इस देश की हालत खराब है. तुम्हें देश छोड़ देना चाहिए."
हिंदू निशाने पर क्यों?
अविरूप सरकार ने मुझे बताया कि उन्हें धक्का ज़रूर लगा लेकिन इस घटना से वह इतने भी हैरान नहीं हैं.
वह कहते हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को आमतौर पर शेख़ हसीना की पार्टी आवामी लीग का समर्थक माना जाता है और उनपर इस्लामिक देश में अक्सर विरोधियों की ओर से हमले होते रहते हैं.
शेख़ हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद सोशल मीडिया में हिंदुओं की संपत्ति और मंदिरों पर हमले से जुड़ी ख़बरों की बाढ़ आ गई.
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छह अगस्त को संसद में बताया, "जो बात सबसे अधिक परेशान करने वाली है वो वहां रह रहे अल्पसंख्यक हैं. उनकी दुकानों और मंदिरों पर कई जगह हमले की जानकारी मिली है. हालांकि, अभी इस बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली है."
हालांकि, इन सबके बीच कई युवा मुस्लिम भी इस बर्बरता को रोकने के लिए हिंदुओं के घरों और धार्मिक स्थलों की रक्षा करने के लिए आगे आ रहे हैं.
अविरूप सरकार ने मुझे बताया, "बांग्लादेशी हिंदू आसानी से निशाना बनते हैं. जब-जब आवामी लीग सत्ता खोती है, उनपर (हिंदुओं) हमले होते हैं."
ये पहली बार नहीं है जब अविरूप की बहन के घर पर हमला हुआ है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों में साल 1992 में उस वक्त भी हमले हुए थे जब भारत के अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ. उस समय भी अविरूप की बहन के घर में भीड़ ने तोड़फोड़ की थी.
इसके बाद के दशकों में भी हिंदुओं पर कई हमले हुए.
बांग्लादेश के सियासी संकट से जुड़ी ख़बरें:
मुसलमान कर रहे हिंदुओं की रक्षा
बांग्लादेश के एक मानवाधिकार समूह एन ओ सलिश केंद्र के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2013 से लेकर सितंबर 2021 के बीच हिंदू समुदाय पर 3,679 हमले हुए. इसमें तोड़फोड़, आगजनी और निशाना बनाकर की गई हिंसा शामिल है.
साल 2021 में हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों पर दुर्गा पूजा के दौरान हुए हमले के बाद मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा था, "बांग्लादेश में पिछले कई सालों से व्यक्तियों पर लगातार हमले, सांप्रदायिक हिंसा और अल्पसंख्यकों घरों-पूजास्थलों को बर्बाद करना ये दिखाता है कि ये देश अल्पसंख्यकों की रक्षा करने के अपने दायित्व को पूरा करने में विफल रहा है."
सोमवार को अविरूप सरकार के परिवार के दूसरे सदस्यों को भी हिंसा का सामना करना पड़ा.
ढाका से करीब 120 किलोमीटर दूर किशोरगंज में उनके माता-पिता के घर को हिंसा से बचा लिया गया. इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं, "क्योंकि हमार परिवार वहां जाना-माना है और पड़ोस में हम सभी को जानते हैं."
अविरूप सरकार कहते हैं कि उनकी मां एक स्कूल चलाती हैं. उन्हें अपने बिज़नेस पार्टनर का फ़ोन आया जिसने कहा कि लोग उन संपत्तियों की सूची बना रहे हैं, जिनपर हमला करना है.
पार्टनर ने कहा, "आपका नाम उस सूची में नहीं है लेकिन आप थोड़ा ध्यान रखिए."
बाद में अविरूप के पिता ने देखा कि एक छोटी सी भीड़ उनके घर के बाहर लोहे के गेट के पास जमा हो रही थी. उन्होंने परिवार को अंदर बंद कर दिया था.
अविरूप कहते हैं, "मेरे पिता ने किसी को कहते सुना कि वहां मत जाओ, वहां कुछ नहीं करना है." इसके बाद भीड़ छिटक गई.
लेकिन कुछ दूरी पर किशोरगंज के नोगुआ इलाक़े में हिंदुओं के घरों में लूटपाट की ख़बरें आईं.
सरकार कहते हैं, "मैंने सुना है कि वहां करीब 20-25 घरों पर हमला किया गया. मेरे हिंदू दोस्त की सोने की दुकान का दरवाज़ा तोड़कर लोग घुसे और सभी गहने लूट ले गए. हालांकि, वे तिजोरी तोड़ या लूटकर ले जा नहीं सके."
आगे क्या?
ढाका से करीब 200 किलोमीटर उत्तर में शेरपुर ज़िले के एक मोहल्ले में अविरूप सरकार की पत्नी का घर भी ख़तरे की जद में था.
हालांकि, उनके घर पर हमला नहीं हुआ, लेकिन भीड़ ने पड़ोस में एक हिंदू के घर को लूट लिया. अच्छी बात ये रही कि जैसे ही हिंसा की ख़बर फैली, स्थानीय मुसलमानों ने हिंदू घरों और मंदिरों के चारों ओर सुरक्षा घेरा सा बना लिया.
वह कहते हैं, "पूरे बांग्लादेश में ये हो रहा है. मुसलमानों ने हिंदुओं की संपत्ति की रक्षा की है."
लेकिन चीज़ें यहीं ख़त्म नहीं हुईं. सोमवार को रात होते-होते ढाका में अविरूप सरकार के 10 मंज़िला अपार्टमेंट के बाहर भी भीड़ का जुटना शुरू हो गया.
अविरूप अपनी पत्नी और बच्ची के साथ यहां रहते हैं. अविरूप को लगा कि ये लोग उन्हीं की बिल्डिंग में रहने वाले आवामी लीग के एक काउंसलर को ढूंढने वहां आए थे.
अविरूप सरकार ने कहा, "मैं छठे फ्लोर की बालकनी में आया और देखा कि भीड़ बिल्डिंग पर पत्थर फेंक रही है और दरवाज़े को तोड़ने की कोशिश में है. दरवाज़े अच्छी तरह से बंद थे, इसलिए वे लोग अंदर घुस नहीं पाए. पार्किंग में खड़ी कुछ गाड़ियों और खिड़कियों के शीशों को बस नुक़सान पहुंचा."
अविरूप सरकार की बहन ने उन्हें बताया कि फिलहाल उनके परिवार को डर है कि और हमले हो सकते हैं.
उन्होंने सेना में अपने एक दोस्त को फ़ोन किया और ये अपील की कि सैन्य वाहन उनके पड़ोस में लगातार गश्त करता रहे.
वह कहते हैं, "ये बहुत पीड़ादायक समय है. यहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है और हमें फिर से निशाना बनाया जा रहा है."
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