राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान के बीच समाजवादी पार्टी में भारी उठापटक, आठ विधायकों पर बोले अखिलेश

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उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के बीच समाजवादी पार्टी में टूट-फूट के हालात देखने को मिल रहे हैं.
समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज कुमार पांडे ने मंगलवार को पार्टी के चीफ़ व्हिप से इस्तीफ़ा दे दिया है.
पांडे ने अखिलेश यादव को लिखे ख़त में कहा है, ''आपने मुझे उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी का चीफ़ व्हिप नियुक्त किया था. मैं इस पोस्ट से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ. कृपया मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार कीजिए.''
मनोज कुमार पांडे रायबरेली के उचाहार से विधायक हैं. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार में पांडे कैबिनेट मंत्री भी रहे थे. पांडे उन आठ विधायकों में शामिल थे, जो सोमवार को अखिलेश यादव की डिनर पार्टी में शामिल नहीं हुए थे.
राज्यसभा की 15 सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है. इनमें 10 सीटें उत्तर प्रदेश, चार सीटें कर्नाटक और 1 सीट हिमाचल प्रदेश की है.
उत्तर प्रदेश में एक सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुक़ाबला होने के कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि मतदान से पहले सपा प्रमुख की ओर से रखे गए डिनर में पार्टी के आठ विधायक शामिल नहीं हुए.
समाजवादी पार्टी में जारी उठापटक पर अखिलेश यादव ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, ''सरकार के ख़िलाफ़ खड़े होने में साहस चाहिए होता है. दबाव हर किसी पर बनाया जाता है."
सपा प्रमुख ने कहा, "ये कौन नहीं जानता कि बीजेपी जीतने के लिए कोई भी हथकंडा अपनाएगी. जिस बीजेपी ने चंडीगढ़ में बेईमानी की हो, जिस तरह से वोट ख़राब किए गए. उस समय सीसीटीवी ना होता तो बीजेपी को इस तरह से कोई बदनाम होते नहीं देख पाता.''
मैं किसी की अंतरात्मा के बारे में नहीं जानता. जो भोज में नहीं आए, कोई बात नहीं. जो लोग चले गए, हो सकता है उन्हें धमकाया गया हो. कुछ फ़ायदा देने की भी बात कही हो.
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा, ''जहां यूपी का सवाल है तो राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने वोट लेने के लिए सब कुछ किया. सरकार के ख़िलाफ़ खड़े होने में उन लोगों में साहस नहीं रहा होगा. जो लोग गए हैं, उन पर कार्रवाई होगी. बहुत कम लोगों के पास हिम्मत होती है कि वो सरकार के सामने खड़े हों."
"मैं किसी की अंतरात्मा के बारे में नहीं जानता हूं. जो भोज में नहीं आए, कोई बात नहीं. जो लोग चले गए, उनको हो सकता है, धमकाया गया हो. कुछ फ़ायदा देने की बात कही गई होगी. पैकेज के बारे में भी सुन रहे हैं.''
अखिलेश यादव ने कहा, ''यूपी में जो लोकसभा चुनाव होने जा रहा है, वो जनता देख रही है. छात्रों के पेपर लीक हो गए, तो क्या इसे जनता भूल जाएगी? क्या इलाहाबाद में युवाओं पर लाठियां नहीं चलीं?''
राज्यसभा चुनाव का असर क्या लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा? इस पर अखिलेश यादव ने कहा, ''इसका कोई असर नहीं होगा. हम और मज़बूती के साथ सामने आएंगे. हमारे पास देने को कुछ नहीं है. जो लोग गए हैं, वो क्यों गए हैं. मुझे नहीं मालूम. हो सकता है कि दोनों का हेडक्वॉर्टर एक हो. मैं नहीं जानता हूं कि कौन कहाँ गया है."
"जनता देख रही है. लगभग 60 लाख बच्चे घर चले गए, जिनका पेपर लीक हुआ. 60 लाख के मां-बाप को जोड़ लें तो एक करोड़ 80 लाख होगा. इसको 80 से भाग दें तो दो लाख 25 हज़ार वोट हर सीट पर बीजेपी का कम हुआ है.''
अखिलेश यादव ने कहा, ''कुछ पैकेज ऐसे होते हैं जो दिखते नहीं हैं. हम लोकसभा चुनाव में जा रहे हैं. अब जनता के बीच जा रहे हैं. जनता सब देख रही हैं. प्रेस के साथियो, अपनी अंतरात्मा से ये बता देना कि किसको क्या पैकेज मिला है.''
पहले से ही तेज़ थीं अटकलें

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में हलचल के बीच क्रॉस-वोटिंग को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं. सपा के प्रवक्ता ने कहा है कि इन विधायकों के रुख़ का पता मतदान के समय ही लगेगा.
दरअसल, सोमवार शाम को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने विधायकों के लिए डिनर रखा था और बैठक बुलाई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि पार्टी ने राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया को लेकर ये बैठक बुलाई थी.
मगर इसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ़ व्हिप) मनोज पांडे और सात अन्य विधायक नहीं पहुंचे.
पीटीआई के अनुसार, इन विधायकों के नाम हैं- मुकेश वर्मा, महाराजी प्रजापति, पूजा पाल, राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मनोज पांडे ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिए गए त्यागपत्र में लिखा है, “हमें समाजवादी पार्टी विधान मंडल दल यूपी विधान सभा का ‘मुख्य सचेतक’ नियुक्त किया गया था. मैं मुख्य सचेतक के पद से त्यागपत्र दे रहा हूं.”
इससे पहले, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने माना कि सात विधायकों ने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से आयोजित डिनर और बैठक में शिरकत नहीं की. हालांकि, उन्होंने इन विधायकों के नाम नहीं बताए.
जब उनसे पूछा गया कि क्या अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल, जो कि सपा की विधायक हैं, क्या वह भी शामिल हुईं, इस पर चौधरी ने कहा कि वह बैठक में नहीं थीं, उनकी यादव से अलग से बैठक हुई थी.
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पल्लवी पटेल ने राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन देने का भरोसा दिया है.
उन्होंने ने ये भी कहा कि जो विधायक बैठक में नहीं आए, उनका असली रुख़ मंगलवार को होने जा रहे मतदान के दौरान ही पता चलेगा.
चौधरी ने भरोसा जताया कि समाजवादी पार्टी के तीनों उम्मीदवारों को जीत हासिल होगी.
बीजेपी के इस उम्मीदवार पर टिकी हैं निगाहें

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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में मंगलवार को 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होगा. यहां भारतीय जनता पार्टी ने आठ जबकि समाजवादी पार्टी ने तीन उम्मीदवार उतारे हैं.
इस समय राज्यसभा में राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के पास सात और समाजवादी पार्टी के पास तीन सांसद चुनकर भेजने की क्षमता है, लेकिन बीजेपी की ओर से आठवें उम्मीदवार संजय सेठ को उतारे जाने से एक सीट पर मामला दिलचस्प हो गया है.
संजय सेठ उद्योगपति हैं और समाजवादी पार्टी के नेता रहे हैं. वह साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे.

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403 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी और सपा प्रमुख दो बड़ी पार्टियां हैं. बीजेपी के पास 252 और सपा के पास 108 विधायक हैं. सपा की सहयोगी पार्टी कांग्रेस के पास दो सीटें हैं.
बीजेपी के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के पास 13 सीटें हैं, जबकि निषाद पार्टी के पास छह, राष्ट्रीय लोक दल के पास नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पास छह, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास दो और बीएसपी के पास एक सीट है. अभी चार सीटें खाली हैं.
बीजेपी की ओर से उतारे गए बाक़ी उम्मीदवार हैं- पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह, पूर्व सांसद चौधरी तेजवीर सिंह, उत्तर प्रदेश बीजेपी के महासचिव अमरपाल मौर्य, पूर्व मंत्री संगीता बलवंत, पूर्व विधायक साधना सिंह, आगया के पूर्व मेयर नवीन जैन और पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी.
वहीं, समाजवादी पार्टी ने सांसद जया बच्चन, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आलोक रंजन और दलित नेता रामजी लाल सुमन को मैदान में उतारा है.
पीटीआई के मुताबिक़, एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने जाने के लिए 37 पहली प्राथमिकता के वोट पाना ज़रूरी होती है.

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चुनाव आयोग ने 15 राज्यों में राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव करवाने की घोषणा की थी. इनमें से 41 सीटों पर निर्विरोध सांसद चुन लिए गए थे, बची हुई 15 सीटों पर आज मतदान हो रहा है.
कर्नाटक में चार सीटों पर मतदान होगा जहां पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां कांग्रेस तीन और बीजेपी एक सीट जीतने को लेकर आश्वस्त है. मगर एक सीट पर जनता दल (सेक्युलर) नेता और रियल एस्टेट कारोबारी डी. कुपेंद्र रेड्डी ने मुक़ाबले को रोमांचक बना दिया है.
यहां जीतने के लिए उम्मीदवार को पहली वरीयता के 45 वोट पाना ज़रूरी है. कर्नाटक में कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं, बीजेपी पास 66 और जनता दल सेक्युलर के पास 19. अगर जेडीएस कुपेंद्र रेड्डी को जिताना चाहती है तो उसे अपने 19 विधायकों और बीजेपी के बचे हुए वोटों के अलावा पांच और वोटों की ज़रूरत होगी.
हिमाचल प्रदेश में 68 विधायकों में से कांग्रेस के पास 40 और बीजेपी के पास 25 हैं. तीन विधायक निर्दलीय हैं. यहां उम्मीदवार को जीतने के लिए 35 वोट चाहिए.
यहां कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी के मुक़ाबले भारतीय जनता पार्टी ने हर्ष महाजन को उतारा है, जो पहले कांग्रेस में रहे हैं.
यहां कांग्रेस जीत को लेकर आश्वस्त है, हालांकि कांग्रेस विधायकों का एक वर्ग असंतुष्ट बताया जा रहा है.
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