प्रभा अत्रे: किराना घराने की दिग्गज कलाकार जिन्होंने शास्त्रीय गायन को दी नई ऊंचाई

किराना घराने की जानी-मानी गायिका डॉक्टर प्रभा अत्रे का शनिवार को पुणे में निधन हो गया. वो 91 साल की थीं.

शनिवार (13 जनवरी) को तड़के सोते समय पुणे स्थित घर पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा.

इसके बाद इलाज के लिए पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका देहांत हो चुका था.

प्रभा अत्रे के परिजन अमेरिका में हैं, इसलिए उनका अंतिम संस्कार परिजन के भारत आने के बाद किया जाएगा.

डॉक्टर प्रभा अत्रे की ख्याति सरहदों से कहीं आगे थी. वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित थीं. अत्रे ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई.

किराना घराने की गायिका प्रभा अत्रे ने पुणे के आईएलएस लॉ कॉलेज से क़ानून में स्नातक किया. उन्होंने संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की.

कुछ वर्षों तक उन्होंने आकाशवाणी में भी काम किया. इसके बाद वो मुंबई में एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और बाद में संगीत विभाग की प्रमुख बनीं.

शास्त्रीय संगीत को दी नई ऊंचाई

डॉ अत्रे का जन्म 13 सितंबर, 1932 को पुणे में हुआ था. गायन के साथ-साथ उन्होंने नृत्य का भी प्रशिक्षण लिया था.

उन्होंने विजय करंदीकर, सुरेशबाबू माने और हीराबाई बडोडेकर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली.

उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण (2022) मिल चुका है. इससे पहले उन्हें पद्म श्री (1990), पद्म भूषण (2002) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिले.

उन्होंने संगीत पर कुल 11 किताबें लिखीं.

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को बनाए रखने के लिए उन्होंने डॉ. प्रभा अत्रे फाउंडेशन की स्थापना की थी.

शास्त्रीय संगीत की शिक्षा के लिए उन्होंने स्वरमयी गुरुकुल नामक संस्था की भी स्थापना की थी.

'किराना घराने की ख़ासियत बरकरार रखी'

वरिष्ठ पत्रकार मुकुंद संगोराम ने बीबीसी मराठी को बताया कि किराना घराना अन्य संगीत घरानों से अलग था.

संगोराम ने कहा, "किराना घराने के गायक स्वर और भाव पर पूरा ध्यान देते हैं. इससे उनकी गायकी में विशिष्टता आती है. उनकी गायकी में एक अलग गुण होता है. वह खुद एक बंदिशकारा थीं. यानी वो गीत लेखन और गायन दोनों करती थीं. मूल रूप से, उन्होंने संगीत का बहुत अध्ययन किया. उसके बाद, उन्होंने संगीत कार्यक्रमों की ओर रुख किया,''

सांगोराम ने कहा, "डॉ. प्रभा अत्रे ने संगीत के क्षेत्र में बौद्धिक अध्ययन भी किया. उन्होंने इस विषय में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और कुछ वर्षों तक प्रोफेसर के रूप में काम किया. इसलिए, उन्होंने अपने गायन के माध्यम से संगीत का आदर्श विचार प्रस्तुत किया."

आर्य संगीत प्रसारक मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीनिवास जोशी ने एक बयान में प्रभा अत्रे की मृत्यु पर दुख व्यक्त किया.

जोशी ने कहा, "प्रभा अत्रे की गायकी में किराना घराने की विशेषताएं थीं. वह एक महान संगीतकार भी थीं. वह पिछले कई सालों से सवाई गंधर्व उत्सव में गाती थीं, वह हमेशा हमें आशीर्वाद देती थीं."

शास्त्रीय गायक रघुनंदन पनाशिकर ने कहा,"प्रभाताई की आवाज अद्वितीय थी, इसलिए उनके गायन ने कई लोगों पर प्रभाव छोड़ा. मेरी पीढ़ी, मेरे पहले की पीढ़ी और मेरे बाद की पीढ़ी तीनों पीढ़ियों पर डॉ. प्रभा अत्रे के गायन की छाप है. उनकी गायकी और गायन दोनों पर उनसे अच्छी बातचीत होती थी. .”

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