'पुतिन-मोदी मुलाक़ात से यूरोपीय देश और ट्रंप परेशान', पुतिन के भारत दौरे पर बोला रूसी मीडिया

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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
शुक्रवार 5 दिसंबर को रूसी सरकारी टीवी के करंट अफ़ेयर्स टॉक शो की होस्ट ने पुतिन के भारत दौरे पर यूरोपीय मीडिया की टिप्पणियों का ज़िक्र करते हुए उन पर तंज़ किया.
रूसिया 1 चैनल के कार्यक्रम '60 मिनट' में होस्ट ओल्गा स्काबेयेवा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस गर्मजोशी से पुतिन का स्वागत किया उससे 'रूस के विरोधी परेशान हो गए होंगे.'
स्काबेयेवा ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा, "रूस से नफ़रत करने वाले लोग बौखलाए हुए हैं. वे रूस को अलग-थलग करने में नाकाम रहे, और इतना भव्य स्वागत उन सभी पश्चिमी देशों के लिए और ट्रंप के लिए भी अपमान बन गया."
उन्होंने कहा, " ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश की थी लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ."
इसके बाद उन्होंने पश्चिमी अख़बारों के हवाले से कहा, "पुतिन का दिल्ली दौरा दुनिया भर में सुर्ख़ियां बना रहा है. फ्रांस का अख़बार ल मोंद लिखता है कि मोदी पश्चिमी दबाव के बावजूद रूसी राष्ट्रपति को रेड कार्पेट स्वागत देकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक मिसाल पेश कर रहे हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि "जर्मनी के फ्रैंकफुर्टर आलगेमाइने (एफ़ए) की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने वाले अमेरिका को मोदी ने एक अप्रिय संदेश दिया है."
स्काबेयेवा ने आगे कहा, "यह दौरा इतना ज़्यादा सफल रहा कि ब्रिटेन ने इसे पश्चिम के लिए एक कूटनीतिक अपमान के रूप में देखा."
उन्होंने कहा, "टेलीग्राफ़ ने पुतिन के स्वागत की तुलना दो महीने पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बेहद ठंडे और नाकाम दौरे से की. उस वक्त मोदी ने अपने मेहमान को यह याद दिलाया था कि उनका असली दोस्त कौन है, जब उन्होंने पुतिन को उनके जन्मदिन पर बधाई दी थी."
कार्यक्रम के बाद के हिस्से में स्काबेयेवा ने कहा कि "रूस और भारत के बीच बढ़ती नज़दीकी अब अमेरिका को बेचैन कर रही है."
'मानो परमाणु बम फट गया हो...'

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विदेश मामलों के टिप्पणीकार अलेक्सी नौमोव ने कहा कि पुतिन का भारत दौरा "डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक आत्ममंथन करने वाला क्षण" है.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ट्रंप जब देखते हैं कि रूस-भारत संबंध बेहतर हो रहे हैं तो वो सचमुच थोड़ा दांत पीस रहे होते हैं."
चैनल वन के शो 'व्रेम्या पोकाज़ेत' (समय ही आगे बताएगा) की को-होस्ट ओलेस्या लोसेवा ने कहा कि, "पश्चिमी पत्रकारों ने उनके लिए तय की गई गाइडलाइंस के मुताबिक़ पुतिन के भारत दौरे के बारे में तुरंत ही लिखना शुरू कर दिया मानो ये उनके लिए एक चैलेंज रहा हो."
पश्चिमी मीडिया की कई रिपोर्टों का हवाले देने के बाद लोसेवा ने कहा, "देखिए, उनके यहां कैसी लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं? मानो परमाणु बम फट गया हो. उनके लिए यह शायद बहुत जटिल है. वे अभी तक यह नहीं समझ पाए हैं कि वे कहाँ जा रहे हैं, फिर भी वे ऐसे रास्ते पर बढ़ते जा रहे हैं जिसकी कोई मंज़िल ही नहीं है."
बाद में उन्होंने कहा, "फ्रांसीसी चैनल फ़्रांस 24 ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मोदी ने खुद जाकर व्लादिमीर पुतिन का स्वागत किया, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जाता है… इससे स्वाभाविक रूप से आपसी भरोसे और अनौपचारिकता का स्पष्ट संकेत मिलता है."
उनके को-होस्ट रुसलान ओस्ताश्को ने कहा कि पश्चिमी मीडिया में 'कुछ हद तक बौखलाहट' देखी गई. उन्होंने कहा, "पश्चिमी देशों ने सब कुछ आज़माया. भारत पर रूस के साथ व्यापार को लेकर प्रतिबंध लगाने से लेकर हर तरह के राजनीतिक दबाव तक. लेकिन कुछ भी काम नहीं आया."
'पुतिन का दौरा वैश्विक परिघटना'

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विश्लेषक व्लादिमीर कोर्निलोव ने कहा कि पुतिन का भारत दौरा 'वास्तविक अर्थों में एक वैश्विक घटना' है.
उन्होंने कहा, "यह बात पश्चिम में भी मानी जा रही है. मैं यूरोपीय प्रकाशनों में इस समय लगातार टिप्पणियां पढ़ रहा हूँ कि असल में अलग-थलग कौन है? इतने लंबे समय से हम चिल्ला रहे थे कि रूस पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है, एक बहिष्कृत देश बन गया है. और अब यह सामने आ रहा है कि चीन, भारत, अमेरिका, अफ़्रीका, दुनिया के तमाम बड़े खिलाड़ी रूस के साथ दोस्ताना या घनिष्ठ रिश्ते बनाए हुए हैं और असल में यूरोपीय देश अलग खड़े दिख रहे हैं. वे ख़ुद हाशिये पर पहुंच गए हैं. यह स्थिति यूरोप के लिए कई सवाल खड़े करती है."
रूस के कारोबारी अख़बार कोमरसेंट और सरकार समर्थक दैनिक इज़वेस्तिया ने भी इस दौरे को लेकर पश्चिमी मीडिया की चुनिंदा टिप्पणियां प्रकाशित कीं. कोमर्संट ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से लिखा कि "पुतिन और मोदी रिश्ते मज़बूत कर रहे हैं, जिससे ट्रंप नाराज़ हैं,"
जबकि इज़वेस्तिया ने ब्लूमबर्ग के हवाले से कहा कि पुतिन और मोदी ने 'अमेरिकी दबाव के बावजूद मुलाक़ात की'
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















