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कुछ लोगों को ज़्यादा ठंड लगती है कुछ को कम, ऐसा क्यों होता है
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सर्दियों में कई इलाक़ों में कोहरा एक बड़ी समस्या बन जाता है. इसका असर कई बार ट्रेनों, हवाई यात्रा और सड़कों पर नज़र आता है. दिल्ली और इसके आसपास के इलाक़े में सर्दियों में एयर क्वालिटी (एक्यूआई) भी लोगों के सामने परेशानी खड़ी करता है.
लेकिन इन सबसे से दूर कुछ लोगों के लिए ठंड का मौसम ही एक संकट होता है और कई तरह के मीम बनने लगते हैं. ख़ासकर ठंड में नहाने और न नहाने से जुड़े किस्से सोशल मीडिया से लेकर मित्र मंडली और परिवार के सदस्यों के बीच खूब सुने और सुनाए जाते हैं.
कोई कहता है, "जीवन में कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए. मैं 15 दिनों से नहाने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन नहा नहीं पा रहा हूँ. फिर भी यह कोशिश जारी है."
कोई 'नहाने' को पानी की बर्बादी से जोड़कर ठंड में अपनी न नहाने की आदत को जायज ठहराने की कोशिश करता है तो कोई समय की कमी या अन्य बहाने बनाता है.
इस कहानी में हम जानने की कोशिश करेंगे कि आख़िर ऐसा क्यों होता है कि एक ही परिवार या एक ही इलाक़े में रहने वाले कुछ लोगों को ज़्यादा ठंड लगती है तो कुछ को कम?
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अगर दिल्ली या पटना जैसे शहरों की बात करें तो यहाँ सर्दियों में उत्तराखंड या हिमाचल से आए किसी शख्स को उतनी ठंड नहीं लगेगी, जितनी केरल या तमिलनाडु से आए किसी व्यक्ति को.
इसकी वजह भी साफ़ है लोगों का बचपन से जिस तरह के मौसम में रहना और पलना-बढ़ना होता है, उनका शरीर और आदतें भी उसी मौसम के मुताबिक़ होती जाती हैं.
लेकिन सर्दियों में हम कई बार देखते हैं कि एक ही परिवार या एक ही जगह से ताल्लुक रखने वाले लोगों में कुछ लोग ठंड से कांप रहे होते हैं, जबकि कुछ सामान्य नज़र आते हैं.
किन लोगों को लग सकती है ज़्यादा ठंड
ऐसे लोगों में किसी को बहुत ज़्यादा ठंड लगने और किसी को नहीं लगने के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या होती है?
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफ़ेसर संजय राय कहते हैं, "हर इंसान की बनावट अलग-अलग होती है. इसलिए किसी को ज़्यादा ठंड लग सकती है और किसी को कम. और आपका शरीर ठंड के प्रति कैसी प्रतिक्रिया करता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने ख़ुद को कैसे डेवलप किया है."
"आप अपने शरीर को जिस तरह से तैयार करेंगे, शरीर का व्यवहार भी वैसा ही होगा. किसी को कम या ज़्यादा ठंड लगने के पीछे सबसे बुनियादी वजह यही है."
संजय राय कहते हैं, "पहले गीजर नहीं होता था तो हम सर्दियों में भी आमतौर पर नॉर्मल पानी से नहाते थे. फिर शरीर को गीजर की आदत लग गई तो हम सर्दियों में गीजर के पानी से नहाते हैं. हो सकता है कि हमारे बच्चों ने अलग आदत विकसित कर ली हो तो वो सर्दी काफ़ी कम होने के बाद भी गीजर के पानी से नहाएंगे."
यह आदत हमें अपने आसपास या परिवार के लोगों में भी देखने को मिलती है, जिनमें कुछ लोग सर्दियों में भी नॉर्मल पानी से नहा लेते हैं, जबकि कुछ लोगों को नहाने के लिए गर्म पानी चाहिए होता है.
कई ऐसे भी लोग होते हैं जो बहुत ज़्यादा ठंड पड़ने पर नहाने से बचते हुए नज़र आते हैं.
दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टर मोहसिन वली कहते हैं, "ये क्या बात हुई कि आपको औरों से ज़्यादा ठंड लग रही है. अगर कोई ऐसा कहता है तो यह आमतौर पर आलस्य और दिमाग़ से जुड़ी हुई बात है."
डॉक्टर वली के मुताबिक़ थायरॉयड के मरीज, बहुत दुबले-पतले इंसान, शुगर के मरीज या बीपी कंट्रोल में रखने के लिए बीटा लॉकर जैसी दवा लेने वालों को ज़्यादा ठंड लग सकती है.
वो कहते हैं, "इनके अलावा अगर कोई स्वस्थ इंसान कहे कि उसे ज़्यादा ठंड लगती है तो इसका मतलब है कि उसकी बॉडी का हीट प्रोडक्शन कम है."
शरीर ख़ुद को करता है तैयार
हीट प्रोडक्शन का मतलब है कि आपका शरीर कितनी गर्मी पैदा कर रहा है. यह व्यायाम, कामकाज, शरीर में फ़ैट की मात्रा जैसी बातों पर निर्भर करता है.
अगर दो स्वस्थ भाइयों में एक को ज़्यादा ठंड लग रही है तो विशेषज्ञों के मुताबिक़ उसके शरीर का हीट प्रोडक्शन कम है जो मूल रूप से कम शारीरिक सक्रियता की वजह से होता है.
डॉक्टर संजय राय कहते हैं, "अगर किसी ने सड़ा या विषैला भोजन कर लिया हो तो उसे ख़ुद वॉमिटिंग आने लगेगी, क्योंकि शरीर उसे पेट से बाहर निकालना चाहता है. किसी की नाक में कुछ अजीब सा महसूस हो तो वह छींकने लगता है, क्योंकि नाक को उसे बाहर निकालना चाहता है."
संजय राय का कहना है, "शरीर हर तरह के माहौल के लिए ख़ुद को तैयार करता है. अगर ज़्यादा ठंड है तो शरीर भी उससे लड़ने के लिए ख़ुद को तैयार करता रहता है. और आपका शरीर किस तरह से तैयार होगा, यह आपकी आदतों पर निर्भर करता है."
ये भी हैं वजहें
कुछ लोग गर्मी के दिनों में एक से ज़्यादा बार भी नहाते हैं और यह उनकी आदत में शामिल होता है.
इसी तरह सर्दियों में कुछ लोग नहाने से बचते रहते हैं तो कुछ लोग केवल हाथ-पांव धोकर या बालों को गीला कर उसे नहाने के समान ही मान लेते हैं.
पुणे के डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज के प्रोफ़ेसर अमिताव बनर्जी कहते हैं, "ऐसे लोगों में ज़्यादा ठंड महसूस होना कई बातों पर निर्भर करता है. मसलन उस जगह का तापमान, आपने कैसे कपड़े पहने हैं, आप कितना पानी पीते हैं, क्योंकि पानी शरीर के तापमान को रेग्युलेट करता है और शारीरिक तौर पर आप कितने सक्रिय हैं."
वो कहते हैं, "एक ही इलाक़े के अलग-अलग लोगों को कम या ज़्यादा ठंड लगने के पीछे उनकी सबसे बड़ी वजह उनकी आदत होती है लेकिन हर किसी का शरीर हर वक़्त फंक्शन करता है और हर शरीर अलग होता है, इसलिए अलग-अलग लोगों को कम या ज़्यादा ठंड लग सकती है."
उनका कहना है, "जिसके शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम होगा उसे दूसरों के मुक़ाबले ज़्यादा ठंड लग सकती है. इसी तरह जिसके शरीर में ज़्यादा फैट होगा उसे कम ठंड लग सकती है."
अमिताव बनर्जी कहते हैं, "70-80 साल के बुजुर्ग ज़्यादा शारीरिक परिश्रम नहीं कर सकते यानी उनकी फ़िज़िकल एक्टिविटी कम हो जाती है तो ऐसे लोगों को ज़्यादा ठंड लगती है."
इसके अलावा ठंड महसूस होना बॉडी-मास इंडेक्स पर भी निर्भर करता है और शरीर के अपने मेटाबॉलिक रेट पर भी. ज़्यादा मसल्स वाले लोगों को कम ठंड लग सकती है.
यही नहीं आपने किस तरह के कपड़े पहने हैं यह भी बताता है कि आपको कितनी ठंड महसूस होगी. शरीर का जितना हिस्सा ख़ुला रहेगा मसलन, हथेली, पांव, सिर तो उन सबसे आपके शरीर का तापमान बाहर निकलेगा, जिससे आपको ज़्यादा ठंड महसूस हो सकती है.
इसके अलावा कुछ लोग जाड़े में अपनी शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं, कुछ लोग लंबे समय तक रज़ाई के अंदर रहते हैं, इससे उनका शरीर तो गर्म रहता लेकिन ठंड को सह पाने की उनकी आदत बदल जाती है.
इसलिए अगर आप स्वस्थ हैं लेकिन आपने भी ऐसी कोई आदत डाल ली है तो सर्दियों में आप भी बाथरूम में फ्लोर पर पानी गिराएंगे, ताकि बाहर लोगों को लगे कि आप नहा रहे हैं.
डॉक्टरों की मानें तो इससे बचने का सबसे सही तरीका है कि अपनी आदत बदलें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.