अनसूया सेनगुप्ता: भारतीय अभिनेत्री जो कान में अवॉर्ड जीतकर चर्चा में हैं

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भारतीय अभिनेत्री अनसूया सेनगुप्ता को कान फ़िल्म समारोह की अन-सर्टेन रिगार्ड श्रेणी में बुल्गारियाई निर्देशक कोन्सटेंटिन बोजानोव की फ़िल्म ‘द शेमलेस’ के लिए अनसर्टेन कैटगिरी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला है.
अनसर्टेन कैटगिरी कान फ़िल्म समारोह के आधिकारिक सिलेक्शन का एक सेक्शन है. यह सल्ले डेबूस्सी द्वारा चलाया जाता है. यह सेक्शन 1978 में जाइल्स जैकब ने पहली बार पेश किया.
इस सेक्शन में असाधारण और गैर पारंपरागत शैली की 20 फिल्मों को पेश किया जाता है.
अनसर्टेन कैटगिरी का मक़सद नई तरह की फिल्मों को खोजना है. इसके साथ ही इस मिशन का मक़सद नए ट्रेंड और नए सिनेमा को सामने लाना है. 2024 में इस कैटगिरी में 18 नई फीचर फिल्मों को जगह दी गई.
अवॉर्ड सेरेमनी के बाद अनसूया भारत वापिस लौट आई हैं. रविवार, 26 मई को दिल्ली एयरपोर्ट पर समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है. अभी तो मैं बस परिवार के पास वापिस जाना चाहती हूं. आप लोगों का बहुत शुक्रिया. मैं दो दिन आराम करना चाहती हूं.”
फिल्म ‘द शेमलेस’ दिल्ली के वेश्यालय में काम कर रही रेणुका की कहानी है जो एक रात एक पुलिसवाले का क़त्ल कर फ़रार हो जाती है.
रेणुका उत्तर भारत में वेश्याओं के एक समुदाय में शरण लेती हैं, जहां उनकी मुलाक़ात देविका से होती है. देविका एक कम उम्र की युवती हैं जो वेश्या का जीवन जीने को मजबूर हैं.
रेणुका और देविका साथ मिलकर क़ानून और समाज से बचने के लिए एक ख़तरनाक रास्ते पर निकल पड़ती हैं. उनका मक़सद है आज़ाद होना.
भारतीय किरदारों पर बनीं फ़िल्म 'द शेमलेस' में दो मुख्य किरदार भारतीय महिलाएं हैं. इस फिल्म सदियों पुरानी देवदासी प्रथा की झलक भी दिखाती है.

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सेक्स वर्करों की ज़िंदगी पर कई फ़िल्में बनी हैं और बॉलीवुड फ़िल्मों में सेक्स वर्करों के किरदार छोटी या बड़ी भूमिका में नज़र आते रहे हैं.
बुल्गारियाई निर्देशक की इस फ़िल्म में अनसूया सेनगुप्ता के ज़बरदस्त अभिनय ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक दिला दिया है.
जादवपुर यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातक अनसूया सेनगुप्ता कोलकाता की हैं. शुरुआत में उनका इरादा अभिनय की दुनिया में करियर बनाने का नहीं था. वो पत्रकारिता करना चाहती थीं.
लेकिन 2013 में वो मुंबई पहुंची और यहां उन्होंने फ़िल्मों के लिए प्रोडक्शन डिज़ाइनर का काम करना शुरू कर दिया.
‘मॉय कोलकाता’ को दिए एक साक्षात्कार में अनसूया ने बताया था, “जो प्रोजेक्ट मेरे दिल के क़रीब हैं उनमें संजीव शर्मा की सात उचक्के (2016) और श्रीजीत मुखर्जी की 'फॉरगेट मी नॉट' शामिल हैं.”
अनसूया ने साक्षात्कार में बताया था कि उनकी ज़िंदगी में बहुत कुछ क़िस्मत से हुआ है. जैसे उनकी ज़िंदगी के प्यार यशदीप से मिलना और फिर उनसे शादी करना.

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अनसूया को रेणुका का किरदार मिलना भी एक संयोग ही था. ये सब एक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ.
उन्होंने साक्षात्कार में बताया कि उन्हें फ़ेसबुक मित्र बोज़ानोव से हिंदी फ़िल्म में ऑडिशन के लिए निमंत्रण मिला.
एक इंस्टाग्राम पोस्ट में अनसूया ने लिखा है, “जून 2020 में कॉन्स्टेंटिन ने मुझे मैसेज किया और कहा कि वो अपनी आगामी फ़िल्म 'द शेमलेस' के मुख्य किरदार के लिए मेरा ऑडिशन लेने में रुचि ले रहे हैं.”
अनसूया ने लिखा, “मेरा पहला जवाब था- क्यों”
अनुसुया ने अपना ऑडिशन टेप भेजा और कोन्सटेंटिन बोज़ानोव ने तुरंत हां बोल दिया.
इस फ़िल्म को नेपाल और मुंबई में शूट किया गया है.

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वैरायटी की रिपोर्ट के मुताबिक़ पुरस्कार मिलने के बाद अनसूया ने इसे भारत के क्विर समुदाय को समर्पित किया है.
उन्होंने कहा, “बराबरी के लिए, लड़ने के लिए आपको क्विर होना ज़रूरी नहीं है, ग़ुलामी दयनीय होती है, ये समझने के लिए आपको ग़ुलाम होना ज़रूरी नहीं है. हमें सिर्फ और सिर्फ़ एक बहुत मर्यादित इंसान होना होता है.”
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