भारत के वॉन्टेड चरमपंथी की पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हत्या - प्रेस रिव्यू

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पाकिस्तान समेत अन्य देशों में रह रहे भारत के वांछित अपराधियों की हत्या किए जाने के सिलसिले में अब एक और नाम जुड़ गया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ख़बर दी है कि 2018 में जम्मू कश्मीर के सुंजवान में भारतीय सेना के कैंप पर हमले के कथित मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर ख़्वाजा शाहिद उर्फ़ मियां मुजाहिद की पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हत्या कर दी गई है.
सुंजवान में हुए हमले में भारतीय सेना के पांच जवानों समेत छह लोगों की मौत हुई थी.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि नीलम घाटी के रहने वाले मुजाहिद का तीन दिन पहले अज्ञात बंदूकधारियों ने अपहरण कर लिया था, जिसके बाद पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई में हड़कंप मच गया था.
अख़बार लिखता है कि मुजाहिद के शव पर टॉर्चर किए जाने के निशान मिले हैं. अभी तक किसी भी संगठन ने इस हत्या की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
पिछले दिनों पाकिस्तान के सियालकोट में मौलवी शाहिद लतीफ़ की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, जिन्हें भारत वर्ष 2016 में पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड मानता था.

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तो जेल से चलेगी दिल्ली की सरकार: आतिशी
आम आदमी पार्टी के मंत्रियों का कहना है कि अगर जांच एजेंसियां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार करती हैं, तो सरकार तिहाड़ जेल से चलाई जाएगी और कैबिनेट की बैठकें भी जेल परिसर में होंगी.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, आम आदमी पार्टी के विधायकों ने केजरीवाल के प्रति समर्थन दिखाने के लिए दिल्ली विधानसभा में एक बैठक आयोजित की.
इस बैठक में केजरीवाल भी मौजूद थे.
मंत्री आतिशी ने कहा, “बीजेपी के नेता खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को जेल भेजा जाएगा. सभी विधायकों ने एक स्वर में कहा है कि अगर बीजेपी किसी साज़िश के तहत अरविंद केजरीवाल को जेल भेजती है, तो उन्हें इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए.''
वो बोलीं, ''केजरीवाल को दिल्ली के लोगों ने चुना है और ज़रूरत पड़ने पर वह तिहाड़ से सरकार चलाएंगे. दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल को बहुमत दिया है, किसी पार्टी या चिह्न को नहीं."
दिल्ली की एक्साइज़ पॉलिसी में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अक्टूबर को अरविंद केजरीवाल को समन भेजकर 2 नवंबर से पहले पेश होने को कहा था.
केजरीवाल ने इस समन को अवैध बताया था और ईडी के सामने पेश न होकर एक चुनावी रैली को संबोधित करने मध्य प्रदेश चले गए थे.
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर अधीर रंजन ने की शिकायत

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कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखकर शिकायत की है कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर उन्हें अंधेरे में रखा गया था.
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली हाई पावर चयन समिति में शामिल अधीर रंजन ने राष्ट्रपति को लिखा है, “केंद्रीय सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में सभी लोकतांत्रिक नियमों, परंपराओं और प्रक्रियाओं को ताक पर रख दिया गया.”
अधीर रंजन का कहना है कि सरकार ने न तो उनसे कोई चर्चा की और न ही उन्हें चयन की कोई सूचना दी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मी ने सोमवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हीरालाल समरिया को मुख्य सूचना आयुक्त की शपथ दिलाई थी.

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विधेयक अटकाने वाले राज्यपालों से ख़फ़ा सुप्रीम कोर्ट
राज्यपालों द्वारा महत्वपूर्ण विधेयकों को रोकने के चलते इस तरह के मामलों के कोर्ट में पहुंचने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाख़ुशी जताई है.
चीफ़ जस्टिस की डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सोमवार को कहा, “यह ध्यान देने लायक गंभीर मामले हैं. राज्यपालों से काम करवाने के लिए किसी को कोर्ट आने की ज़रूरत क्यों पड़नी चाहिए?”
उन्होंने कहा, “ये मसले राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के बीच सुलझाए जाने चाहिए. हम सुनिश्चित करेंगे कि संविधान का पालन हो.”
द हिंदू की ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह आपत्ति विशेषकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों, जैसे कि पंजाब, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना को लेकर की है.
चीफ़ जस्टिस ने कहा, "गवर्नरों और मुख्यमंत्रियों समेत सभी को थोड़ा आत्ममंथन करना चाहिए. राज्यपालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें जनता ने नहीं चुना है."
अदालत पंजाब सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राज्यपाल पर कुछ अहम क़ानूनों को रोकने का आरोप लगा था.

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अपने नाम पर नहीं रखना स्टेडियम का नाम- ममता
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि उन्हें किसी स्टेडियम का नाम अपने नाम पर रखने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहती कि किसी सरकारी योजना का नाम अपने या माता-पिता के नाम पर रखें.
पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, “मैं ऐसा नहीं चाहती क्योंकि जितना हो पाता है, मैं लोगों की उतनी मदद करती हूं.”
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर ममता ने कहा कि उन्हें पैसों की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा, "मुझे बतौर सीएम डेढ़ लाख रुपये वेतन और सात बार सांसद रहने चलते सवा लाख पेंशन मिलती है."
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