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चेक गणराज्य की राजधानी प्राग की यूनिवर्सिटी में गोलीबारी, 15 लोगों की मौत
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में स्थित चार्ल्स यूनिवर्सिटी में मास शूटिंग में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि बंदूकधारी भी मारा गया है.
रॉयटर्स की ख़बर के अनुसार, हमले के दौरान यूनिवर्सिटी कर्मचारियों को कमरे में ही रहने के लिए कहा गया. स्टूडेंट्स ने बताया कि उन्होंने खुद को क्लासरूम में बंद कर लिया था.
चेक पुलिस का कहना है कि हमलवार यूनिवर्सिटी के आर्ट्स फ़ैकल्टी का स्टूडेंट था.
एक चेक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमलावर का शव यूनवर्सिटी के आर्ट्स फ़ैकल्टी में पाया गया है.
उन्होंने ये भी बताया कि मास शूटिंग में 24 लोग घायल हुए हैं. माना जा रहा है कि बंदूकधारी विदेश में हुए इसी तरह के जनसंहार से प्रेरित था.
पुलिस का कहना है कि इस घटना का किसी अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी कार्रवाई से संबंध नहीं है.
पुलिस के अनुसार, बंदूकधारी की उम्र 24 साल थी और वो प्राग से 21 किलोमीटर गांव का रहने वाला था. घटना से पहले संदिग्ध के पिता का शव दिन में ही बरामद हुआ था.
चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पॉवेल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि वो इस घटना से 'सदमे' में हैं. उन्होंने पीड़ितों के परिवारों और संबंधियों के प्रति संवेदना ज़ाहिर की.
उन्होंने सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करने के लिए प्राग वासियों को 'शुक्रिया' कहा.
‘गोलियों की आवाज़ सुनते ही छिपने को दौड़े’
ट्रूरो के रहने वाले 18 साल के जो हेलैंड अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मानने प्राग आए हुए थे और वो शूटिंग के समय पड़ोस की सड़क पर थे.
उन्होंने कहा, “हमने गोलियों की आवाज़ सुनी और पुलिस ने जब सबको भागने के लिए शोर मचाया तो हम छिपने के लिए मेट्रो की ओर दौड़े. यह बहुत डरावना था.”
“अचानक सभी लोग दौड़ने लगे थे. हमें नहीं पता था कि वहां क्या हो रहा है. हमने देखा कि पुलिसकर्मी तेज़ी से हमारी तरफ़ आ रहे थे. वे चिल्लाए ‘दौड़ो’.”
प्राग के स्थानीय समयानुसार 3.40 बजे राजधानी में मास शूटिंग की ख़बरें आनी शुरू हो गई थीं.
पुलिस ने शुरू में कहा कि वो सेंट्रल प्राग में स्थित चार्ल्स यूनिवर्सिटी में गोलीबारी की घटना को लेकर कार्रवाई कर रही है और कई लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं.
सदमे में लोग
पीए न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, प्राग में अपने हनीमून पर आए एक ब्रिटिश दंपत्ति 34 साल के टॉम लीस और उनकी 31 साल की पत्नी रैचेल घटना के वक़्त पास के ही रेस्तरां में थे.
टॉम ने बताया, “चेक पुलिसकर्मी अपनी भाषा में चिल्ला रहे थे. मैंने उन्हें अंग्रेज़ी में बात करने को कहा और उन्होंने बताया कि दूसरी तरफ़ एक शूटर लोगों को गोली मार रहा है, आप लोग छिप जाएं.”
“जिस रेस्तरां में हम थे वहां का स्टाफ़ शांत बना रहा और जल्द से सारी लाइटें बंद कर दीं, यह जगह शांत थी. हमारे लिए ये थोड़ा अजीब था.”
टॉम ने बताया कि उनकी पत्नी 'अभी भी सदमे' में हैं.
उन्होंने कहा कि अब वो सीधे घर जाएंगे और अपने सभी संबंधियों को उन्होंने बता दिया है कि वो सुरक्षित हैं.
प्राग की ऐतिहासिकता
पॉल किर्बी, यूरोप डिज़िटल एडिटर
चार्ल्स यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फ़ैकल्टी ऐतिहासिक प्राग के केंद्र में स्थित है. यहीं पर रिवर वल्तावा के ऊपर 14वीं शताब्दी पुराना चार्ल्स ब्रिज है और बिल्कुल पास में ओल्ड टाउन स्क्वायर है.
ओल्ड टाउन पर्यटकों में पूरे साल काफ़ी लोकप्रिय रहता है और क्रिसमस के दौरान यहां भीड़ रहती है. इस समय क्रिसमस की दुकानें ओल्ड टाउन स्क्वायर और वेंसेसलास स्क्वायर में लगी हैं.
यूनिवर्सिटी और इसकी फ़ैकल्टी का इतिहास पुराना है. इसी यूनिवर्सिटी के दर्शनशास्त्र के एक छात्र जान पालाच ने 1969 में सोवियत कब्ज़े के ख़िलाफ़ खुद को आग लगा ली थी. फ़ैकल्टी के पास चौराहे पर उनका नाम दर्ज है.
इस यूनिवर्सिटी में पूरी दुनिया से स्टूडेंट्स पढ़ने आते हैं. क्रिसमस की छुट्टियों से पहले कल से अकादमिक सेमेस्टर समाप्त होने वाला था.
घटना के दौरान क़रीब 200 स्टूडेंट्स को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है.
आज़ादी के बाद सबसे घातक हमला
30 साल पहले चेक गणराज्य की आज़ादी के बाद यह सबसे घातक हमला था.
इससे पहले दिसम्बर 2029 में ओस्त्रावा में एक अस्पताल में एक आदमी ने ट्रॉमा क्लीनिक के वेटिंग रूम में अचानक गोली चलानी शुरू कर दी थी, जिसमें चार पुरुष और दो महिलाएं मारी गई थीं. इसके बाद उसने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली.
फ़रवरी 2015 में एक स्थानीय व्यक्ति ने चेक गणराज्य के एक कस्बे में स्थित रेस्तरां में गोलीबारी की, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी.
हालांकि चेक गणराज्य में मास शूटिंग आम बात नहीं है, लेकिन बंदूक से शिकार करना लोकप्रिय है.
2019 में चेक सरकार ने यूरोपीय संघ की ओर से सेमी ऑटोमेटिक राइफ़ल के निजी इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध को पटलने की असफल कोशिश की थी.
पूरे यूरोप में जिहादी हमलों के बाद यूरोपीय संघ ने ये कदम उठाया था.
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