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ऑस्ट्रेलिया ने समंदर किनारे मिले मलबे को लेकर भारत का लिया नाम
ऑस्ट्रेलिया में समुद्र के किनारे मिली एक बड़ी गुंबदनुमा धातु की वस्तु को लेकर अब ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने नया दावा किया है.
ऑस्ट्रेलिया की स्पेस एजेंसी ने कहा है कि समुद्र तट पर मिली वस्तु का भारत से संबंध हो सकता है.
ग़ौरतलब है कि 14 जुलाई को भारत की स्पेस एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. इस लॉन्चिंग में पीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल किया गया था.
कुछ दिनों के बाद ही ऑस्ट्रेलिया के तट पर एक धातुनुमा वस्तु मिली थी जिसको लेकर दावा किया गया था कि ये पीएसएलवी रॉकेट का ही टुकड़ा है.
हालांकि उस समय ऑस्ट्रेलिया की अंतरिक्ष एजेंसी ने इसके भारत से जुड़े होने की पुष्टि नहीं की थी.
उस समय ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने कहा था कि यह मलबा किसी विदेशी स्पेस लॉन्च व्हिकल का हो सकता है जो समुद्र में गिर गया हो लेकिन एजेंसी आगे का विश्लेषण करने के लिए दुनिया की बाक़ी अंतरिक्ष एजेंसियों के संपर्क में है.
ऑस्ट्रेलिया ने अब क्या कहा
ऑस्ट्रेलिया की अंतरिक्ष एजेंसी ने सोमवार को ट्वीट करके जानकारी दी है कि उसके समुद्र तट पर मिली वस्तु का संबंध भारत से हो सकता है.
एजेंसी ने ट्वीट किया है, “वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के जूरियन बे के नज़दीक समुद्र तट पर मिली वस्तु को लेकर हमने निष्कर्ष निकाला है. ऐसा अनुमान है कि यह पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (पीएसएलवी) के थर्ड स्टेज का मलबा हो सकता है. पीएसएलवी मीडियम लिफ़्ट लॉन्च व्हीकल है जिसे इसरो संचालित करता है.”
इसके बाद एजेंसी ने जानकारी दी है कि इस मलबे को लेकर वो इसरो के साथ काम कर रही है और इसको लेकर ज़्यादा जानकारी अगले चरणों में निकलकर आएगी, साथ ही संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष संधियों के दायित्वों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने अगले ट्वीट में लोगों से अपील की है कि वो अगर कोई और संदिग्ध कचरा देखें तो स्थानीय प्रशासन को और ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी को वेबसाइट पर सूचित करें.
एजेंसी ने कहा है कि वो बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता से लेकर मलबे को निपटाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके बारे में बताना जारी रखने को लेकर वो प्रतिबद्ध है.
इसरो ने अभी तक इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया है.
क्या है मामला
ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से 250 किलोमीटर दूर समुद्र तट पर 15 से 16 जुलाई के बीच ये वस्तु मिली थी. तब से ही इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे थे.
ये बेलनाकार वस्तु क़रीब ढाई मीटर चौड़ी थी और तीन मीटर लंबी थी. जब से ये समंदर किनारे मिली थी, स्थानीय निवासी इसे देखने के लिए उत्साहित थे.
शुरुआत में ये कयास लगाये गए थे कि ये लापता हुए विमान एमएच 370 का मलबा हो सकता है. ये विमान साल 2014 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के तटीय इलाक़े से दूर समंदर के क़रीब लापता हो गया था, इसमें 239 यात्री सवार थे.
लेकिन विशेषज्ञों ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि ये किसी कमर्शियल विमान का हिस्सा नहीं है और संभवतः ये किसी रॉकेट का हिस्सा हो सकता है जो कभी हिंद महासागर में गिरा होगा.
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की अंतरिक्ष एजेंसी ने एक बयान में कहा था कि हो सकता है कि ये किसी विदेशी स्पेस लांच व्हिकल से गिरा होगा.
इसरो ने क्या कहा था
इसके बाद ये कयास लगाये जाने लगे कि ये पीएसएलवी का फ्यूल टैंक हो सकता है.
भारत की अंतरिक्ष संस्था इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन) नियमित तौर पर पोलर सैटेलाइट लांच व्हिकल्स (पीएसएलवी) का इस्तेमाल करती है.
इसके बाद चर्चा होने लगी कि ये चंद्रयान के लान्च रॉकेट का हिस्सा हो सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना था कि ये चीज़ कई महीनों तक पानी के भीतर रही है.
जो तस्वीरें सामने आई थीं वो भी इस तर्क का समर्थन करती थीं क्योंकि इसकी सतह पर कई शंख लगे दिखाई दे रहे थे.
इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने बीबीसी से कहा था कि इस चीज़ को लेकर कोई रहस्य नहीं है और ये स्पष्ट है कि ये किसी रॉकेट का ही हिस्सा है.
“ये पीएसएलवी का हिस्सा हो सकता है या किसी और रॉकेट का. जब तक हम इसे देखेंगे नहीं और इसका परीक्षण नहीं करेंगे, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है.”
ऑस्ट्रेलिया के प्रशासन ने भी इसके बारे में और अधिक जानकारियां नहीं जारी की थीं.
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