वंदे भारत ट्रेनों के उद्घाटन कार्यक्रम पर इतने करोड़ रुपये हुए ख़र्च

इमेज स्रोत, ANI
- Author, अर्जुन परमार
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, गुजराती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने गुजरात यात्रा के दौरान अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में कई परियोजनाओं के साथ-साथ दस नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई थी.
इसके साथ ही वंदे भारत ट्रेन सेवाओं की कुल संख्या देश में 100 तक पहुंच गई है.
हालांकि वंदे भारत ट्रेनें अपनी गति, फीचर्स और डिज़ाइन को लेकर चर्चा के केंद्र में रही हैं, लेकिन एक ऐसी बात है जिसके बारे में कम लोगों को ही पता है.
यह कि इन ट्रेनों के उद्घाटन समारोह पर कितना सार्वजनिक पैसा ख़र्च हुआ है?
दस कार्यक्रमों पर 1.89 करोड़ ख़र्च

इमेज स्रोत, ANI
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का इस्तेमाल करते हुए बीबीसी ने पाया कि भारतीय रेलवे ने पिछले दो सालों में अकेले वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने वाले दस कार्यक्रमों पर 1.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
इसका मतलब है कि औसतन हर कार्यक्रम पर करीब 19 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. आरटीआई के ज़रिए इससे पहले के साल का ब्यौरा भी मांगा गया था, जिसे उपलब्ध नहीं कराया गया है.
वंदे भारत ट्रेनों को भारत की ‘पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन’ करार दिया गया है, जो 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पटरी पर दौड़ सकती हैं.
पीएम मोदी ने साल 2019 में नई दिल्ली और वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी. उसके बाद कई बार वे व्यक्तिगत तौर पर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ऐसा कर चुके हैं.
भारतीय रेलवे के मुताबिक़ दूसरे देशों की तरह कम खर्चे पर यात्रियों को आराम, सुरक्षा और उनके अनुभव को बेहतर बनाने के इरादे से वंदे भारत ट्रेनों को शुरू किया गया था.
सबसे पहले बीबीसी ने भारतीय रेलवे में आरटीआई लगाई. आवेदन में भारतीय रेलवे से जनवरी 2019 से वंदे भारत ट्रेनों को लेकर किए गए कार्यक्रमों में खर्च रुपयों का विवरण मांगा गया था.
रेल मंत्रालय ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया. उन्होंने दावा किया कि वे सटीक जानकारी देने में असमर्थ हैं, क्योंकि पीएम मोदी ने वंदे भारत ट्रेन सेवाओं को लॉन्च करने के अलावा उसी समारोह में कई अन्य परियोजनाओं की भी शुरुआत की थी.
किस ज़ोन में कितना पैसा खर्च हुआ?

इमेज स्रोत, ANI
इसके बाद बीबीसी ने देशभर के लगभग सभी रेलवे ज़ोनों को कवर करते हुए अलग-अलग रेलवे ज़ोन और कोंकण रेलवे को मिलाकर कुल 17 आरटीआई आवेदन दायर किए.
इनमें से सिर्फ छह की तरफ़ से बीबीसी को जवाब मिला.
मिली जानकारी के विश्लेषण से पता चलता है कि 2022 और 2023 में वंदे भारत ट्रेनों से जुड़े दस कार्यक्रमों के आयोजन पर ही 1.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
आरटीआई के मुताबिक कोंकण रेलवे ने साल 2023 में दो वंदे भारत ट्रेनों के लॉन्च कार्यक्रम पर 1 करोड़ 6 लाख 23 हज़ार रुपये खर्च किए हैं. इसमें खाने-पीने पर हुआ खर्च शामिल नहीं है.
2022 में दो वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने के लिए आयोजित कार्यक्रमों पर दक्षिण पश्चिम रेलवे ने 49 लाख 29 हज़ार 682 रुपये खर्च किए.
2023 में दो वंदे भारत ट्रेनों के उद्घाटन कार्यक्रम पर दक्षिण-मध्य रेलवे ज़ोन ने 16 लाख 58 हजार 983 रुपये खर्च किए.
इसके अलावा पिछले दो सालों में सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, नॉर्दन रेलवे ने क्रमश: 4,46,083 रुपये, 7,44,084 रुपये और 5,52,450 रुपये खर्च किए हैं.
वहीं अपने लिखित जवाब में दक्षिण पश्चिम रेलवे ज़ोन ने बताया कि उसने 2023 में वंदे भारत ट्रेन के साथ-साथ अन्य रेलवे संपत्तियों पर 9 लाख 5 हज़ार 915 रुपये अलग से भी खर्च किए हैं.
खर्चे का विवरण मांगने के बावजूद भी रेलवे की तरफ से मोटे तौर पर आंकड़े दिए गए.
हालांकि पूर्वी, पूर्वी मध्य, पूर्वी तट, उत्तर मध्य, उत्तर पूर्व, पूर्वोत्तर सीमांत, उत्तर पश्चिमी, दक्षिणी, दक्षिण पूर्वी, दक्षिण पूर्व मध्य और पश्चिम मध्य रेलवे ने सवालों का जवाब नहीं दिया है.
मैदान में इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां

इमेज स्रोत, ANI
पूर्व रेलवे कर्मचारी और आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस के अनुसार, “रेलवे पिछले कुछ सालों से इस तरह के बड़े आयोजनों को करने के लिए इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को काम दे रही है. ये एजेंसियां आयोजन में खाने-पीने की व्यवस्था, उपकरण, फिल्मिंग और प्रसारण जैसे कामों को संभालती हैं. यह सुनिश्चित किया जाता है कि इन आयोजनों में व्यक्तिगत रूप ये या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बड़ी भीड़ खींची जाए.”
इसके अलावा बीबीसी ने कुछ और रेलवे अधिकारियों से भी बात की. उन्होंने कहा कि पहले इस तरह के बड़े उद्घाटन कार्यक्रम नहीं होते थे और रेलवे साधारण सा कार्यक्रम कर प्रेस विज्ञप्ति और विज्ञापन जारी करता था.
रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आर.एन. मल्होत्रा ने कहा कि अब इन कार्यक्रमों पर ज्यादा राजनीतिक रंग चढ़ गया है.
उन्होंने कहा, “मुझे याद नहीं है कि मेरे कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई हो.”
एक अन्य पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “रेलवे को ऐसे आयोजनों पर खर्च करने की बजाय अपने खुद की प्रचार विंग पर भरोसा करना चाहिए, ताकि कम लागत में नागरिकों को जागरूक किया जा सके.”
पश्चिमी रेलवे की यूज़र्स कमेटी के सदस्य अनिल तिवारी को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने नामित किया था.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उद्घाटन कार्यक्रमों पर गैर ज़रूरी खर्च किया गया है.
तिवारी ने कहा, “वंदे भारत से पहले शताब्दी, दूरंतो और गरीब रथ समेत कई ट्रेनें बहुत कम धूमधाम के साथ शुरू की गई थीं. यह एक नया चलन है.”
'पहले मिठाई बांटना काफी होता था'

इमेज स्रोत, ANI
बीबीसी से बात करते हुए, रेलवे के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “बेशक नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाते वक्त कार्यक्रम हुआ करते थे, लेकिन बड़े पैमाने पर समारोह आयोजित नहीं किए जाते थे. पहले कुछ यात्रियों के बीच मिठाइयों को बांटना ही काफी माना जाता था.”
पिछली रिपोर्ट्स का विश्लेषण करने के बाद बीबीसी को पता चला कि 10 सितंबर 2009 को तत्कालीन रेलवे मंत्री ममता बनर्जी ने देश की पहली नॉन स्टॉप सुपरफास्ट दूरंतो एक्सप्रेस चलाई थी.
16 अप्रैल, 2002 को तत्कालीन रेलवे मंत्री नीतीश कुमार ने भी अन्य मंत्रियों की तरह आधिकारिक तौर पर कई ट्रेनों का शुभारंभ किया. हालांकि इन कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं थी.
हमने रेल मंत्रालय को एक ईमेल भेजकर अनुरोध किया कि वे हमारे आरटीआई आवेदन में हमारे उन सवालों के जवाबों के साथ साथ पूर्व अधिकारियों के बताए बिंदुओं पर भी जवाब दें, जो अभी तक नहीं दिए गए हैं.
अभी तक बीबीसी को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
अपने बयानों में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उनके बजट में सुधार हुआ है, जिसके चलते वे ज्यादा लोगों तक पहुंच पा रहे हैं.
पीआईबी की एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2003-04 की तुलना में सरकार ने 2023-24 वित्तीय वर्ष के दौरान रेलवे के लिए बजटीय आवंटन को तीस गुना बढ़ा दिया है.
आधिकारिक बयानों में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि नई ट्रेनें शुरू करने के साथ साथ तेज़ी से पटरियां बिछाने और रेलवे परिचालन में सुरक्षा के स्तर को बढ़ाने के ज़रूर कदम उठाए गए हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















