पहलवानों ने गंगा में मेडल बहाना किया स्थगित, आंदोलन में अब आगे क्या?

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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और एफ़आईआर के बाद प्रदर्शनकारी पहलवानों का कहना है कि वो पीछे नहीं हटेंगे और आगे भी उनका आंदोलन जारी रहेगा. हालांकि इस आंदोलन की रूपरेखा अब क्या होगी, इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है.
फिलहाल पहलवानों ने अपने मेडलों को गंगा नदी में बहाने के कार्यक्रम को पांच दिन के लिए स्थगित कर दिया है.
साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और कई खिलाड़ी अपने मेडलों को गंगा में बहाने के लिए हरिद्वार में हर की पौड़ी पहुंचे थे.
काफी देर तक खिलाड़ी हर की पौड़ी पर बैठे रहे. इस दौरान खिलाड़ियों की आंखों में आंसू दिखाई दिए.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान नेता नरेश टिकैत के समझाने के बाद कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला लिया गया है. पहलवानों ने अपने मेडल नरेश टिकैत को सौंप दिए हैं.
हरिद्वार जाने से पहले बजरंग पुनिया ने ट्वीट कर लिखा, "ये मेडल अब हमें नहीं चाहिए क्योंकि इन्हें पहनाकर हमें मुखौटा बनाकर सिर्फ अपना प्रचार करता है यह तेज सफेदी वाला तंत्र और फिर हमारा शोषण करता है. हम उस शोषण के खिलाफ बोलें तो हमें जेल में डालने की तैयारी कर लेता है.
"हम मेडलों को गंगा में बहाने जा रहे हैं, क्योंकि वह गंगा मां है. जितना पवित्र हम गंगा को मानते हैं उतनी ही पवित्रता से हमने मेहनत कर इन मेडलों को हासिल किया था."

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28 मई को भारत की नई संसद के उद्घाटन के दिन दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से संसद की तरफ़ मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारी पहलवानों और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया था. पुलिस ने जंतर-मंतर से पहलवानों का टेंट और मंच भी हटवा दिया है.
रविवार को पूरा दिन हिरासत में रखे जाने के बाद देर शाम अधिकतर प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया था. सोमवार को दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारी पहलवानों पर एफ़आईआर दर्ज की गई है.
इसी बीच सोमवार को प्रदर्शनकारी पहलवान दिनभर आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा करते रहे.

जंतर-मंतर पर सन्नाटा
पहलवानों के मंच को हटाने के अलावा दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से बाकी सभी लोगों को भी हटा दिया है. सोमवार को जंतर-मंतर भारी पुलिस बैरिकेडिंग में घिरा रहा और यहां सन्नाटा पसरा रहा.
कुछ पत्रकारों ने यहां जाने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया. जंतर-मंतर पर सैकड़ों यूट्यूब पत्रकार भी रहते हैं जो लोगों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं. ऐसे ही एक यूट्यूब चैनल के लिए काम करने वाले एक पत्रकार ने बीबीसी को बताया, “अब दिल्ली पुलिस यहां आने के लिए पीआईबी का प्रेस कार्ड मांग रही है, जो यूट्यूब पत्रकारों के पास नहीं है.”
सोमवार को दिल्ली पुलिस ने ये भी स्पष्ट किया कि अब पहलवानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने दिया जाएगा.

अक्तूबर 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदूषण और शोर-शराबे का हवाला देते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी.
संसद और केंद्रीय दिल्ली के क़रीब होने की वजह से जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों की पसंदीदा जगह रहा है और यह चर्चित प्रदर्शनों का केंद्र भी रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने मज़दूर किसान शक्ति संगठन की याचिका पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर लगे प्रतिबंध को तो हटा दिया था लेकिन रात में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी.
सोमवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की शर्तों को नहीं माना है और अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी जाएगी, ये अगर कहीं और प्रोटेस्ट करना चाहते हैं तो उस पर विचार किया जा सकता है.
दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता सुमन नलवा ने कहा, “38 दिन से प्रदर्शन चल रहा था, हम इन्हें सभी सुविधाएं मुहैया करा रहे थे. कल का दिन और समय बहुत महत्वपूर्ण था, नई संसद का उद्घाटन था. क़ानून व्यवस्था को लेकर कोई भी एजेंसी इस तरह के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे सकती. जब इन्होंने मार्च निकालने की कोशिश की तब इन्हें हिरासत में लिया गया.”
पहलवानों पर एफ़आईआर

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नई दिल्ली ज़िला पुलिस ने प्रदर्शनकारी पहलवानों और उनके समर्थकों पर एफ़आईआर की है.
एफ़आईआर में दावा किया गया है कि कि पहलवानों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया.
पुलिस की तरफ़ से लिखी गई इस एफ़आईआर में ये दावा भी किया गया है कि पहलवानों ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई भी की.
दिल्ली पुलिस ने साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट, और बजरंग पुनिया समेत प्रदर्शनकारियों और धरने के आयोजकों पर ये एफ़आईआर दर्ज की है.
आईपीसी की कई धाराओं के अलावा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत ये एफ़आईआर दर्ज की गई है.
इसमें पहलवानों और प्रदर्शनकारियों पर दंगा भड़काने, ग़ैरक़ानूनी जमावड़ा करने, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारी के आदेश का उल्लंघन करने, सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाने और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए हैं.
आंदोलन में आगे क्या?
दिल्ली पुलिस ने रविवार देर शाम प्रदर्शनकारी पहलवानों और उनके समर्थकों को छोड़ दिया था.
रविवार को एक बयान में साक्षी मलिक ने कहा था कि वो पीछे नहीं हटेंगे और वापस जंतर-मंतर पर लौटेंगे, लेकिन सोमवार को दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया कि अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने दिया जाएगा.
सोमवार के बाद से पहलवानों की तरफ़ से कोई बयान नहीं आया. बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक पहलवान और उनके समर्थक दिनभर आगे की रणनीति बना रहे थे. इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी दूरी बनाये रखी.
दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन को आंदोलन की शक्ल देने पर भी विचार हुआ है. हालांकि कोई अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है.
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सोमवार देर रात एक बयान जारी कर साक्षी मलिक ने कहा है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है, ये आगे भी जारी रहेगा.
साक्षी मलिक ने अपने बयान में कहा, “हम शांतिपूर्वक मार्च कर रहे थे, पुलिस ने हमें हिरासत में लिया और हमारे ऊपर ही एफ़आईआर कर दी, जबकि हमने किसी संपत्ति को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाया. एक महिला के ऊपर बीस-बीस फ़ोर्स थी, आप समझ सकते हैं कि उन्होंने हमारे साथ कितनी ज़्यादती की है, आप ये वीडियो में भी देख सकते हैं.”
“अपने समर्थकों को हम बताना चाहते हैं कि सोमवार को पूरा दिन हमने इस पर विचार किया कि आगे हमारा आंदोलन कैसे चले. हमने ये तय किया है कि हम पीछे नहीं हटेंगे, आगे भी आंदोलन जारी रहेगा, आगे जो भी होगा हम जल्द ही आपको बता देंगे, आप हमारा ऐसे ही समर्थन बनाए रखें.”
विपक्ष और किसान संगठनों का समर्थन

विपक्षी दलों, किसान संगठनों और हरियाणा की खाप पंचायतों ने प्रदर्शन कर रहे पहलवानों का समर्थन किया है. भारत के कई चर्चित एथलीटों और खिलाड़ियों ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है.
हरियाणा में पहलवानों के समर्थन में खाप पंचायतों की बैठक भी हुई है. वहीं राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर भी डट गए थे.
राकेश टिकैत ने बीबीसी से बातचीत में कहा है, “किसान पहलवान बेटियों के साथ हैं, वो जो निर्णय लेंगी हम पूरी ताक़त से उनका साथ देंगे. ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाएंगे.”

क्या है पूरा मामला?
इस पूरे मामले की शुरुआत 18, जनवरी 2023 को हुई. देश के प्रमुख पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर आवाज़ उठाई. उन्होंने रेसलिंग फ़ेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए.
इन आरोपों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, वित्तीय अनियमितताएं, खिलाड़ियों के साथ बुरा बर्ताव और मनमाना रवैया शामिल था, लेकिन सबसे गंभीर आरोप यौन शोषण से जुड़े थे.
तब विनेश फोगाट ने रोते हुए कहा था कि बृजभूषण शरण सिंह और कोच, नेशनल कैंप में महिला रेसलर्स का यौन उत्पीड़न करते हैं.
फोगाट ने कहा था, "वे हमारी निजी ज़िंदगी में दखल देते हैं और परेशान करते हैं. वे हमारा शोषण कर रहे हैं."
इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए तब बृजभूषण सिंह ने कहा था कि 'किसी भी एथलीट का यौन शोषण नहीं हुआ है और अगर यह सच साबित होता है तो वे फांसी पर लटकने को तैयार हैं.'
लेकिन खिलाड़ियों के गंभीर आरोपों को देखते हुए केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने तब पहलवानों के साथ मुलाक़ात की और 23 जनवरी को आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय निरीक्षण समिति बनाई.
समिति को चार हफ्तों के अंदर जांच पूरी करने को कहा गया था, फिर इसकी समय सीमा को दो और हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया.
जिसके बाद अब खिलाड़ियों का कहना है कि समिति को बने तीन महीने हो गए हैं, लेकिन समिति ने क्या जांच की और उस जांच में क्या निष्कर्ष निकाला, ये अभी तक सामने नहीं आया है.
आरोप हैं कि इसके उलट जांच रिपोर्ट से जानकारियां मीडिया में लीक की जा रही हैं, जबकि निरीक्षण समिति की ये रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं है.
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