बेन स्टोक्स: न्यूज़ीलैंड में जन्मे क्रिकेटर की कहानी, जिन्होंने इंग्लैंड को दो-दो बार बनाया वर्ल्ड चैम्पियन

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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क़रीब एक महीने पहले की ही बात है. वर्ल्ड टी-20 के लिए इंग्लैंड की टीम में बेन स्टोक्स की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे थे.
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और जाने-माने कॉमेंटेटर माइकल अथर्टन ने स्काई स्पोर्ट्स से यहाँ तक कह दिया कि टी-20 टीम में बेन स्टोक्स अनफ़िट हैं
हालांकि गनीमत ये रही है कि उनका अपना क्रिकेट खेलने का अनुभव विश्लेषण करने में भी काम आया और उन्होंने ये ज़रूर कहा कि यह एक बिग टूर्नामेंट है और बेन स्टोक बिग गेम प्लेयर हैं.
क़रीब एक महीने के बाद बेन स्टोक्स ने अथर्टन ही नहीं क्रिकेट की दुनिया को एक बार फिर से बताया कि मौजूदा फ़िटनेस और दमखम की बदौलत वे किसी भी टीम में अनफ़िट नहीं हो सकते.
माइकल अथर्टन के भरोसे को सही साबित करते हुए उन्होंने बड़े मौक़े पर ज़िम्मेदारी भरा खेल दिखाते हुए अपनी टीम को दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बना दिया.
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इंग्लैंड की टीम बेन स्टोक्स पर किस क़दर निर्भर रही, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान की तूफ़ानी ओपनिंग जोड़ी के सामने नई गेंद से गेंदबाज़ी की कमान बेन स्टोक्स ने संभाली.
इतना ही नहीं जिस मोहम्मद हारिस को सबसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ आंका जा रहा था, उसे पवेलियन वापस भेजने के लिए एक बेहतरीन कैच लपका और तनाव के पलों में विकेट पर टिक इंग्लैंड की जीत सुनिश्चित करने के बाद ही पवेलियन लौटे.
मैच की पहली गेंद से लेकर आख़िरी गेंद तक बेन स्टोक्स ही बेन स्टोक्स नज़र आए.
पहले चार ओवर की गेंदबाज़ी में 32 रन देकर एक विकेट झटका. पावर प्ले में पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों को कोई आज़ादी नहीं लेने दी.
मोहम्मद हारिस का बाउंड्री के क़रीब कैच लपका और टीम को जीत दिलाने के लिए 49 गेंदों और पाँच चौके एवं एक छक्के की मदद से नाबाद 52 रनों की पारी खेली.
जो खिलाड़ी बीते डेढ़ साल से टी-20 का हिस्सा नहीं रहा हो, जो वनडे क्रिकेट से संन्यास ले चुका हो, वह क्रिकेटर इससे ज़्यादा क्या ही कमाल दिखा पाएगा. लेकिन बेन स्टोक्स ने यह सब कर दिखाया.
यही वजह है कि न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तान और क्रिकेट की चतुराई में याद आने वाले क्रिकेटर स्टीफ़न फ्लेमिंग ने क्रिकेट वेबसाइट क्रिकइंफो से कहा है कि बेन स्टोक्स दबाव के पलों में एक चैंपियन खिलाड़ी हैं.
इस टूर्नामेंट में बेन स्टोक्स का बल्ला केवल फ़ाइनल मुक़ाबले में आकर बोला हो, ऐसी बात भी नहीं थी, उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ बेहद महत्वपूर्ण मुक़ाबले में टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान निभाया था, 36 गेंदों पर नाबाद 42 रन की पारी के दौरान उन्होंने टीम को जीत दिला कर ही दम लिया था.

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2019 में इंग्लैंड को बनाया था चैंपियन
हालांकि कुछ साल पहले ही क्रिकेट की दुनिया ने बेन स्टोक्स का जलवा देखा था.
ऐसा जलवा जो कम ही क्रिकेटरों को नसीब होता है. साल 2019 में बेन स्टोक्स ने नाबाद 84 रनों की पारी के ज़रिए न्यूज़ीलैंड से लगभग जीत छीन ही ली थी.
हालांकि मैच टाई होने पर नतीजा सुपर ओवर में निकला और बेन स्टोक्स की बल्लेबाज़ी ने टीम को वर्ल्ड चैंपियन का ख़िताब पहली बार दिला दिया.
क्रिकेट खेल को जन्म देने वाले देश का वर्ल्ड चैंपियन का सपना लंबे समय से पूरा नहीं हो पा रहा था.
1975 से वर्ल्ड कप का सिलसिला शुरू हुआ और 44 साल के लंबे इंतज़ार के बाद बेन स्टोक्स ने टीम को कामयाबी दिलाई.
महज़ तीन साल के भीतर उन्होंने वर्ल्ड टी-20 का ख़िताब भी इंग्लैंड को दिलाने में अहम भूमिका अदा की.
ये भी दिलचस्प संयोग है कि इंग्लैंड क्रिकेट की दुनिया की इकलौती टीम बन गई है, जिसने एक ही समय में वनडे वर्ल्ड कप और टी-20 वर्ल्ड कप के ख़िताब पर क़ब्ज़ा जमाया हुआ है.
यह एहसास कितना सुखद हो सकता है, इसका अंदाज़ा वर्ल्ड टी-20 जीतने के बाद प्रेजेंटेशन समारोह में बेन स्टोक्स के बयान से लगाया जा सकता है.
उन्होंने कहा, “मुझे काफ़ी गर्व है. आप आम तौर पर वर्ल्ड कप नहीं जीतते हैं, ऐसे में दो वर्ल्ड कप जीतना बहुत ख़ास है.”

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न्यूज़ीलैंड से है बेन स्टोक्स का कनेक्शन
2019 में वर्ल्ड कप में जीत दिलाने के बाद बेन स्टोक्स को इंग्लैंड में जगह-जगह सम्मानित किया जाने लगा था.
बेन स्टोक्स ने अपनी पुस्तक 'ऑन फ़ायर' में बताया है कि ऐसे सम्मानों में एक सम्मान से वे परेशान हो गए थे.
दरअसल जिस बेन स्टोक्स के चलते न्यूज़ीलैंड के हाथों से वर्ल्ड कप फिसल गया था, उन्हीं बेन स्टोक्स का नामांकन 2019 के न्यूज़ीलैंडर ऑफ़ द ईयर सम्मान के लिए किया गया था.
इस सम्मान के नामांकन से बेन स्टोक्स ने अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी.
उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है, “मैंने एक सार्वजनिक बयान जारी करके अपना नाम वापस लिया था. मैं ने कहा इस सम्मान के लिए नामांकित होने पर मुझे बहुत गर्व हो रहा है.
मुझे न्यूज़ीलैंड और माओरी संस्कृति से जुड़े होने पर काफी गर्व है. लेकिन इस सम्मान के लिए मेरा नामांकित होना ठीक नहीं है.
मैंने इंग्लैंड को वर्ल्ड कप दिलाने में मदद की है, अब मेरा जीवन इंग्लैंड में स्थापित हो गया है, उस इंग्लैंड में जहां मैं 12 साल की उम्र से रह रहा हूं.”
न्यूज़ीलैंड में जन्मे बेन स्टोक्स कैसे पहुंचे इंग्लैंड

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बेन स्टोक्स ने अपनी एक अन्य पुस्तक फ़ायरस्टार्टर- 'मी, क्रिकेट एंड हीट ऑफ़ द मोमेंट' में लिखा है, “ मैं हमेशा से ही खुद को इंग्लिश मानता रहा हूं.
हालांकि मेरा जन्म क्राइस्टचर्च में हुआ है. मेरे माता-पिता खुद को कीवी मानते रहे हैं. लेकिन 15 साल की उम्र में जब से मैंने प्रोफेशनल खेल में खुद को आजमाने का फ़ैसला किया तब से ही मैं हमेशा इंग्लैंड की टीम में आना चाहता था.”
बेन स्टोक्स के पिता को इंग्लैंड के रग्बी कोच के तौर पर नौकरी मिली थी और वे परिवार सहित जब इंग्लैंड आए तब बेन स्टोक्स 11 साल पूरे कर चुके थे.
इंग्लैंड को 2019 में वर्ल्ड चैंपियन दिलाने के अलावा ऐशेज सिरीज़ में जीत दिलाने में बेन स्टोक्स की बल्लेबाज़ी का अहम योगदान रहा.
उन्होंने ना केवल ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के सामने ज़ोरदार बल्लेबाज़ी की बल्कि अपनी बल्लेबाज़ी के दम पर टीम को असंभव जीत भी दिलाई.
हेंडिंग्ले टेस्ट में 11 चौक्के और आठ छक्के की मदद से बेन स्टोक्स ने जो नाबाद 135 रनों की पारी खेली, उसे किसी भी इंग्लिश क्रिकेटर की सबसे बेहतरीन टेस्ट पारियों में गिना जाता है.
2019 का साल क्रिकेट की दुनिया में बेन स्टोक्स की कामयाबी के साल के तौर पर ही याद किया जाता है. विजडन क्रिकेट ने भी बेन स्टोक्स को 2019 और 2020 में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर आंका.
एक बेहतरीन ऑलराउंडर

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स्टोक्स की सबसे बड़ी ख़ासियत उनका बेहतरीन ऑलराउंडर होना है, वे दाएं हाथ से मध्यम गति के तेज़ गेंदबाज़ हैं, तो बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज़ के तौर पर उनके पास हर शाट खेलने की काबिलियत है.
मौजूदा समय में उनकी तुलना इयन बॉथम और एंड्रूय फ्लिंटॉफ़ जितना दमदार ऑलराउंडर माना जाता है.
जो रूट के कप्तानी से हटने के बाद बेन स्टोक्स को टेस्ट टीम की कप्तानी भी सौंपी गई है. जिसके बाद उन्होंने मानसिक तनाव को कम करने के लिहाज से वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की.
लेकिन ज़ाहिर तौर पर उनमें अभी भी काफ़ी क्रिकेट बाक़ी है. लेकिन क्रिकेट के मैदान पर मिली ये कामयाबी बेन स्टोक्स को कोई अचानक नहीं मिल गई थी.
क्रिकेट के मैदान में उनका आत्मविश्वास चकनाचूर भी हुआ.
जब 2016 के वर्ल्ड टी-20 फ़ाइनल में वेस्टइंडीज़ को आख़िरी ओवर में जीत के लिए 19 रन बनाने थे.
बेन स्टोक्स गेंदबाज़ी करने आए तो तब तक नामालूम रहे बल्लेबाज़ क्रेग ब्रैथवेट ने चार गेंदों पर चार छक्के लगाकर टीम को वर्ल्ड चैंपियन बना दिया.
क्रिकेट की दुनिया ने बेन स्टोक्स को घुटनों के बल शर्म में डूबा हुआ देखा. लेकिन इस अनुभव से बेन स्टोक्स जल्दी उबर गए और उनका नाम इंग्लैंड के ज़ोरदार क्रिकेटरों में होने लगा.
हालांकि इस दौरान सितंबर, 2017 में ब्रिस्टल के एक पब में दो लोगों के साथ मारपीट में बेन स्टोक्स ना केवल अभियुक्त बने बल्कि जेल भी गए.
इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड ने उन पर तीस हज़ार पाउंड का जुर्माना लगाया और आठ मैचों की पांबदी भी. इसके चलते 2018 तक वे क्रिकेट के मैदान से दूर ही रहे.
लेकिन उसके बाद उन्होंने जो वापसी की है, उसमें ख़ूबसूरत मोड़ आते चले जा रहे हैं. 2019 में ही बेन स्टोक्स बीबीसी के स्पोर्ट्स पर्सानलटी ऑफ़ द ईयर भी आंके गए थे.
मौजूदा समय में वे आईसीसी के टेस्ट ऑलराउंडर की रैंकिंग में दूसरे पायदान पर हैं.
मौजूदा समय में बतौर नंबर छह बल्लेबाज़ किसी टेस्ट पारी में सबसे बड़ी पारी खेलने और छठे विकेट के लिए सबसे अधिक रनों की साझेदारी करने का रिकॉर्ड बेन स्टोक्स के नाम ही है.
सर्वकालिक महान ऑलराउंडरों में शुमार इयन बॉथम बेन स्टोक्स की तारीफ़ करते हुए उन्हें स्पेशल वन बता चुके हैं, बॉथम के मुताबिक स्टोक्स अपने पूरे करियर में स्पेशल वन बने रहेंगे.
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