तालिबान क्या पाकिस्तान को हमले का जवाब देगा

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- Author, फ़रहत जावेद
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद
25 दिसंबर की सुबह की शुरुआत अफ़ग़ानिस्तान की ओर से पाकिस्तान को उसके कथित हवाई हमले का जवाब देने की धमकी से हुई, जिसके बाद से दोनों देशों में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है.
अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान की सेना ने अफ़ग़ान प्रांत पकतीका के ज़िला बरमल में हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए एक शरणार्थी कैंप पर बमबारी की, जिसमें कई लोग मारे गए और कई ज़ख़्मी हुए हैं.
दूसरी और पाकिस्तान की सेना के जनसंपर्क विभाग 'आईएसपीआर' या पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से ऐसे किसी भी हमले की फ़िलहाल न तो पुष्टि की गई है और ना ही खंडन किया गया है.
बुधवार की सुबह अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से इस कथित हमले के बारे में तीन पोस्ट की गई. इन्हें अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख़्वारिज़्मी और तालिबान सरकार के केंद्रीय प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद की ओर से रीपोस्ट भी किया गया.

अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के बयान में यह दावा भी किया गया कि इस हमले में मारे गए और घायल होने वालों में से अधिकतर का संबंध वज़ीरिस्तान के शरणार्थी कैंप से था, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.
बयान के अनुसार, "अफ़ग़ानिस्तान इस हमले की निंदा करता है और इसको साफ़ तौर पर आक्रमण और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के ख़िलाफ़ समझता है. पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि इस तरह की कार्रवाई समस्या का हल नहीं."
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान अपनी धरती की रक्षा को अपना अधिकार समझता है और इस 'कायराना कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा.'
अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी दूतावास के कर्ताधर्ता को तलब किया और अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत पकतीका के ज़िला बरमल में पाकिस्तानी फ़ौजी जहाज़ की कथित बमबारी पर अपने सख़्त विरोध का पत्र भी उनके हवाले किया.
अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक बयान में कहा कि इस तरह की 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना कार्रवाई का निश्चित तौर पर परिणाम भुगतना होगा.'
पकतीका कहाँ है?

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पकतीका पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच की सीमा डूरंड लाइन पर स्थित अफ़ग़ानिस्तान का पूर्वी प्रांत है जो पाकिस्तान के तीन ज़िलों से सटा हुआ है.
इनमें बलूचिस्तान प्रांत का ज़िला ज़ोब और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के दो ज़िले दक्षिणी वज़ीरिस्तान और उत्तरी वज़ीरिस्तान शामिल हैं.
ध्यान रहे कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान ही वह ज़िला है, जहाँ इस महीने 21 दिसंबर को एक फ़ौजी चौकी पर हमला हुआ था, जिसमें 16 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. पाकिस्तान ने इस हमले का आरोप सीमा पार से आने वाले चरमपंथियों पर लगाया था.
पाकिस्तान ने सरकारी तौर पर अब तक इस हवाई हमले के बारे में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है जबकि अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वह इन हमलों का बदला लेने का अधिकार रखता है.
याद रहे कि यह पहला मौक़ा नहीं जब अफ़ग़ानिस्तान की ओर से पाकिस्तान पर अपने सीमा क्षेत्र का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है.

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इस साल मार्च में अफ़ग़ान तालिबान ने कहा था कि पाकिस्तानी जहाज़ों ने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा में पकतीका और ख़ोस्त के इलाक़ों में बमबारी की.
इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया था कि इस ऑपरेशन में हाफ़िज़ गुल बहादुर ग्रुप से संबंध रखने वाले आतंकवादी लक्ष्य बनाए गए थे.
इस हमले के बाद अफ़ग़ान सरकार के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में दावा किया था कि पाकिस्तान के हवाई हमले में पांच महिलाएं और तीन बच्चे मारे गए.
ध्यान रहे कि पाकिस्तान का यह कहना है कि चरमपंथ की लहर बढ़ने की वजह ग़ैर क़ानूनी घोषित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की ओर से अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल है, जिसे रोकने में अफ़ग़ान सरकार नाकाम रही है. उसका यह भी कहना है की सीमा पार से चरमपंथी पाकिस्तान के सुरक्षा बलों, चीनी और पाकिस्तान नागरिकों के ख़िलाफ़ हमले करते हैं.
पाकिस्तानी प्रशासन के अनुसार उनकी ओर से बार-बार अफ़ग़ानिस्तान को सबूत दिए गए मगर तालिबान सरकार पाकिस्तान की आशंका दूर न कर सकी और इसके बाद यह ग्रुप ज़्यादा आज़ादी से अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हमले कर रहा है.
जून 2024 में बीबीसी उर्दू को दिए गए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ कह चुके हैं कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ठिकानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई जारी रखेगा.
उनका कहना था कि अगर भविष्य में ऑपरेशन अज़्म-ए-इस्तेहकाम के तहत ज़रूरत महसूस हुई तो अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.
अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में पाकिस्तान को 'जवाब देने' की बात की गई है. इसके बाद यह सवाल पैदा होता है कि अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान के ख़िलाफ़ क्या जवाबी कार्रवाई कर सकता है?
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच तनाव की वजह क्या है?

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बीबीसी ने यही सवाल एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी से किया, जिन्होंने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि पाकिस्तान अंतिम विकल्प के तौर पर अफ़ग़ान सरज़मीन में कार्रवाई करता है.
उन्होंने कहा, "हम इससे पहले बार-बार अफ़ग़ान सरकार को सबूत के साथ यह बता रहे हैं कि उनकी सरज़मीन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो रही है. हमने हर बार सबूत दिए और अफ़ग़ानिस्तान को हमारे रक्षा मंत्री ने भी कहा कि पहले के सहयोग के कारण वह टीटीपी को उनके हाथ बांधने की इजाज़त न दें."
"लेकिन ऐसा लगता है कि अफ़ग़ान तालिबान के बस में नहीं कि वह टीटीपी को रोक सकें और ख़ुद उनकी आंतरिक सरकारी समस्याएं भी बहुत हैं."
लेकिन उन्होंने यह दावा भी किया कि वजह कुछ भी हो "पाकिस्तान यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि वहां से आतंकवादी आएं और हमारे फ़ौजी जवानों और आम नागरिकों को निशाना बनाएं."
पाकिस्तान पहले भी आरोप लगाता रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में टीटीपी के ठिकाने हैं और अफ़ग़ान धरती पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों और देश में हमले के लिए इस्तेमाल हो रही है. अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों का खंडन करती है.
पाकिस्तान की उम्मीदों के उलट काबुल में तालिबान की सरकार आने के बाद पाकिस्तान में चरमपंथियों के हमले बढ़े हैं.
पाकिस्तान सेंटर फ़ॉर कॉन्फ़्लिक्ट ऐंड सिक्योरिटी के अनुसार इस साल अब तक सबसे अधिक हमले नवंबर में हुए हैं, जिनमें 240 लोग मारे गए. इनमें लगभग 70 सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं.
अफ़ग़ानिस्तान क्या जवाब देगा?
अफ़ग़ानिस्तान की सशस्त्र सेना के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन पिछले साल सितंबर में अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय के इंस्पेक्टर जनरल लतीफ़ुल्लाह हकीमी ने यह दावा किया था कि अफ़ग़ान थल और वायु सेना में एक लाख सत्तर हज़ार सैनिक शामिल हैं.
इससे पहले फ़रवरी 2022 में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए कहा था कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक 'ग्रैंड आर्मी' बना रहा है.
उन्होंने यह भी कहा था कि तालिबान उन 21 हेलिकॉप्टरों और जहाज़ों में से आधे की मरम्मत कर चुका है जिन्हें अमेरिकी सैनिक 2021 में अफ़ग़ानिस्तान से लौटने के दौरान इस्तेमाल न करने की हालत में छोड़ गए थे.
उनके अनुसार अमेरिकी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से लौटने के बाद अफ़ग़ान तालिबान ने तीन लाख से अधिक हल्के हथियार, 26 हज़ार भारी हथियार और लगभग 61 हज़ार फ़ौजी गाड़ियों का कंट्रोल अपने पास लिया लेकिन इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
इससे पहले नवंबर 2021 में सत्ता में आने के बाद तालिबान सरकार ने एक पत्र जारी करते हुए अफ़ग़ान आर्मी के विभिन्न 'कोर' के नाम बदलकर इस्लामी नाम रखे थे. उन्हीं में से एक 313 बद्री यूनिट के नाम से जानी जाती है जिसका वीडियो भी उस समय सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
उस वीडियो में अफ़ग़ान तालिबान के अधिकारी उस यूनिट की यूनिफ़ॉर्म पहने देखे जा सकते थे जिन्होंने आधुनिक हथियार उठा रखे थे. इस यूनिट को अफ़ग़ान सशस्त्र सेनाओं की स्पेशल यूनिट के तौर पर जाना जाता है.
ध्यान रहे कि अमेरिकी और नेटो सेनाओं के अफ़ग़ानिस्तान से अचानक लौट जाने के बाद उन फ़ोर्सेज़ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों की एक बड़ी संख्या यहीं रह गई थी. कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के अनुसार यह सैनिक साज़ो-सामान तालिबान लड़ाकों ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.
इनमें आधुनिक राइफ़ल से लेकर कुछ हेलीकॉप्टर तक शामिल थे. इसके अलावा बॉडी आर्मर सूट, कम्यूनिकेशन का सामान, शोल्डर माउंट ग्रेनेड लॉन्चर और रात के अंधेरे में देखने में मददगार उपकरण भी शामिल थे.

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लेकिन इस सब के बावजूद पाकिस्तान में विश्लेषक समझते हैं कि काबुल में अफ़ग़ान सरकार पाकिस्तान के ख़िलाफ़ औपचारिक कार्रवाई करने की क्षमता नहीं रखती है.
बीबीसी से बात करते हुए पत्रकार अक़ील यूसुफ़ज़ई कहते हैं कि सन 2021 के बाद से अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के दो तरह के स्टैंड सामने आ रहे हैं.
उन्होंने कहा, "एक तो वह इस बात से ही इनकार कर रहे हैं कि टीटीपी उनकी धरती इस्तेमाल कर रही है हालांकि पूर्व आईएसआई चीफ़ जनरल फ़ैज़ हमीद के दौर में जब पाकिस्तान ने टीटीपी के साथ वार्ता की थी तो वह तो काबुल में ही हुई."
"एक तरफ़ तो यह नैरेटिव है कि ऐसा हो ही नहीं रहा लेकिन निजी मुलाक़ातों में यही अफ़ग़ान तालिबान कहते हैं कि टीटीपी उनके लिए भी ख़तरा है और उनके ख़िलाफ़ वह कुछ नहीं कर सकते."
अक़ील यूसुफ़ज़ई का कहना है कि अफ़ग़ान सरकार के पास इस समय इतनी क्षमता नहीं कि वह पाकिस्तान के अंदर कोई सैनिक कार्रवाई करे जिससे सीमा पर तनाव या युद्ध की स्थिति पैदा हो.
वह कहते हैं, "दूसरी बात यह हो सकती है कि वह टीटीपी को, और विशेष तौर पर हक़्क़ानी नेटवर्क के जरिए मज़बूत करें. पाकिस्तान में टीटीपी के हमले बढ़ सकते हैं और वह भी तभी मुमकिन होगा जब तालिबान सरकार टीटीपी के साथ खड़ी हो जाए. यह अब एक खुली सच्चाई है कि तालिबान सरकार का सुरक्षा नेटवर्क टीटीपी को एक प्रॉक्सी के तौर पर इस्तेमाल करता है."
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों में बातचीत भी शुरू हुई है और उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में सीमा पर तनाव के बारे में बातचीत होगी. इसके बाद ही यह कहा जा सकता है कि अफ़ग़ान सरकार आख़िर किन विकल्पों पर विचार कर रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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