बिपरजोय तूफ़ान से जुड़े पांच सवाल और उनके जवाब

बिपरजॉय

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गुजरात में तूफ़ान बिपरजोय पर हाइअलर्ट जारी किया गया है. आशंका है कि अरब सागर से आ रहा ये तूफ़ान अगले दो दिनों में गुजरात में लैंडफॉल करेगा.

पूर्वानुमान के मुताबिक भारत के कई राज्यों में तेज़ हवाएं और बारिश हो सकती हैं.

लोगों को समुद्र किनारे जाने से मना किया गया है. मछुआरों को भी समुद्र में नहीं जाने की हिदायत दी गई है.

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आइए पढ़ते हैं इस तूफ़ान के बारे में उठ रहे पाँच प्रश्न और उनके उत्तर -

1. कितना ख़तरनाक है ये तूफ़ान?

मौसम विभाग के मुताबिक आशंका है कि तूफ़ान 14 जून तक उत्तर की ओर बढ़ेगा और फिर “उत्तर-उत्तर पूर्व की ओर बढ़ते हुए सौराष्ट्र, कच्छ, मांडवी (गुजरात) और कराची (पाकिस्तान) के बीच 15 जून को पहुंचेगा.”

मौसम विभाग के मुताबिक तूफ़ान की अत्याधिक स्पीड 125 से 135 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच हो सकती है.

ये स्पीड 150 किलोमीटर प्रतिघंटा तक भी जा सकती है.

मौसम विभाग के मुताबिक तूफ़ान “बेहद गंभीर” है. तूफ़ानों के वर्गीकरण के हिसाब से गंभीरता की नंबर दो श्रेणी में है.

गुजरात के कच्छ, द्वारका, जामनगर, पोरबंदर, राजकोट, मोरबी और जूनागढ़ में 14 से 15 जून तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है.

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2. सरकार क्या तैयारियां कर रही है?

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी किए गए बयान में बताया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय चौबीसो घंटे स्थिति की समीक्षा कर रहा है.

केंद्र राज्य सरकार और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में है.

एनडीआरएफ ने 12 टीमों को तैनात कर दिया है, जो नावों, पेड़ काटने वालों, दूरसंचार उपकरणों आदि से लैस हैं.

इसके अलावा 15 टीमों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा है.

भारतीय तट रक्षक और नौसेना ने राहत, खोज और बचाव कार्यों के लिए जहाजों और हेलीकाप्टरों को तैनात किया है.

सेना की वायु सेना और इंजीनियर टास्क फ़ोर्स इकाइयां, नावों और बचाव उपकरणों के साथ, स्टैंडबाय पर हैं.

विमान और हेलीकॉप्टर तट पर लगातार निगरानी कर रहे हैं.

आपदा राहत दल और सेना, नौसेना और तटरक्षक बल के चिकित्सा दल भी मदद के लिए तैयार खड़े हैं.

चक्रवात

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बयान में गया गया है कि गुजरात में मुख्यमंत्री स्तर पर जिला प्रशासन के साथ समीक्षा बैठकें की जा चुकी हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य का पूरा प्रशासन तंत्र मुस्तैद है.

साथ ही, कैबिनेट सचिव और गृह सचिव गुजरात के मुख्य सचिव और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.

प्रधानमंत्री को चक्रवात से निपटने के लिए गुजरात सरकार द्वारा किए गए उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई.

बैठक में गृह मंत्री, प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव, कैबिनेट सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.

पीएम मोदी ने बैठक के बाद एक ट्वीट में लिखा, “हमारी टीमें संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी सुनिश्चित कर रही हैं और आवश्यक सेवाओं का रखरखाव सुनिश्चित कर रही हैं.”

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3. पाकिस्तान में कितना होगा असर

पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सोमवार दोपहर को चक्रवात कराची से लगभग 600 किमी, थट्टा से 580 किमी और मारा से 710 किमी की दूरी पर स्थित था और लगभग सात किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रहा था.

यह भी बताया गया है कि तूफान का केंद्र में वर्तमान में 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चला रही हैं, जिसके कारण 35 से 40 फीट की लहरें उठ रही हैं.

विभाग के अनुसार, समुद्र की सतह के तापमान सहित वर्तमान मौसम की स्थिति तूफान की तीव्रता को बनाए रखने में मदद कर रही है.

सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने सिंध के तटीय इलाकों का दौरा करने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि तूफान के कारण कराची में आधे घंटे में 60 मिमी बारिश हो सकती है.

पाकिस्तान

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उन्होंने कहा कि कराची में 70 से ज्यादा बेहद खतरनाक इमारतों से लोगों को निकालने की योजना है जबकि सजवाल ज़िले के तीन इलाकों से 60 हजार लोगों को निकालने की योजना है.

कई दूसरे इलाकों में भी 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से हवाएं चल सकती हैं, और इमारातों और दूसरी ज़रूरी सुविधाओं पर असर पड़ेगा.

मौसम विज्ञानी डॉ. सरदार सरफराज के अनुसार, बिपरजॉय 1999 के चक्रवात का एक एक्शन रिप्ले है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि ये तूफ़ान उसी रास्ते से गुज़र रहा है जिस रास्ते से 1999 में आया था और इसकी रफ़्तार भी वैसी ही है.

1999 के तूफान को अपने इतिहास में सबसे खराब कहा जाता है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 189 लोग मारे गए, 150 लापता हुए और 138,000 घर तबाह हो गए थे.

इस तूफान के कारण 256,000 हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई और पीड़ितों को लंबे समय तक अस्थायी राहत शिविरों में रहना पड़ा था.

बिपरजॉय

4. बिपरजोय नाम क्यों?

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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बिपरजोय का मतलब बंगाली भाषा में आपदा होता है. ये नाम बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया था.

दरअसल बिपरजोय संस्कृत भाषा के विपर्यय शब्द से निकला है.

1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है.

डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है.

लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था. वजह ये थी कि ऐसा करना काफ़ी विवादास्पद काम था.

इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में काफ़ी सावधान और निष्पक्ष रहने की ज़रूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए.

साल 2004 में ये स्थिति तब बदल गई, जब डब्लूएमओ की अगुवाई वाला अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया और संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया.

इसके बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया.

इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी. हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए. यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है.

चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और ज़रूरत पड़ने पर सूची फिर से भरी जाती है.

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5. क्या अभी कोई नुकसान हुआ है?

तूफ़ान के असर से महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों में तेज़ हवाएं चल रही हैं.

मुंबई में भी तूफ़ान का असर दिखने लगा है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने बीएमसी के हवाले से बताया है कि आज (सोमवार को) मुंबई के जुहू बीच पर छह लोग समुद्र में डूब गए थे.

चक्रवात

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अधिकारियों ने बताया है कि इनमें से दो लोगों को बचाव दल ने बाहर निकाल लिया लेकिन चार लोग अब भी लापता हैं.

वहीं मुंबई एयरपोर्ट पर एक रनवे को बंद करना पड़ा है.

विमानों की आवाजाही पर असर पड़ा है, कई विमान देरी से उड़ रहे हैं और कुछ रो रद्द करना पड़ा है.

लोग सोशल मीडिया वेबासाइट पर इसे लेकर लगातार शिकायत कर रहे हैं.

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