'स्तनपान पीड़ा' जिसके बारे में लोग बात करने से बचते हैं

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- Author, फे नर्स
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बच्चों में विभिन्न बीमारियों को दूर रखने के मकसद से स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए 'ब्रेस्ट इज़ बेस्ट' जैसे मुहावरे का इस्तेमाल दशकों से हो रहा है, लेकिन स्तनपान के कारण महिला को होनेवाली पीड़ा के बारे में कम ही बात होती है.
कई महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराने की इच्छुक भी होती हैं लेकिन इस तरह के कुछ कारणों से वो नियत समय से पहले ही स्तनपान बंद करने को मजबूर हो जाती हैं.
ऐसी ही कई महिलाओं ने बीबीसी से बात करके स्तनपान के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में अपने अनुभव शेयर किए.
उन्होंने स्तनपान की पीड़ा के कारण स्तनपान रोकने का फ़ैसला लेने और इसके बाद की उदासी और लज्जा के बारे में भी विस्तार से बताया.

स्तनपान कराने को लेकर डर
जेम्मा मुनफ़ोर्ड ने 2017 में अपने बेटे मैक्स को जन्म दिया.
वो कहती हैं कि उन्होंने अपने बच्चे को स्तनपान कराने के लिए काफी कुछ पहले से प्लान कर रखा था, लेकिन तीसरे दिन से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
मुनफ़ोर्ड याद करती हैं, "मैं अपने बच्चे को पकड़े सोफ़ा पर बैठी हुई थी और अपने आप को रोने से रोक नहीं पाई."
मुनफ़ोर्ड कहती हैं की अगले दो हफ्ते उनके लिए 'नरक' जैसे थे और वो हर बार बेटे को स्तनपान कराने से डरती थीं.
हालात ऐसे हो गए कि आख़िर में मुनफ़ोर्ड को अपने घर आए हुए मेहमानों को जाने के लिए कहना पड़ा ताकि वो अकेले में बेडरूम को चारों तरफ परदे से ढंककर बच्चे को स्तनपान कराने की कोशिश कर सकें.
वो कहती हैं "स्तनपान कराने का अनुभव मुझे थकाऊ और शर्मनाक लगा."

'टंग-टाई' की समस्या
मुनफ़ोर्ड के बेटे को 'टंग-टाई' की समस्या थी. इसके ही कारण मुनफ़ोर्ड को अपने बच्चे को स्तनपान कराने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था.
'टंग-टाई' एक ऐसी स्थिति को कहा जाता है जहां जीभ को मुंह से जोड़ने वाली त्वचा की पट्टी सामान्य से अधिक सख्त होती है, इसके कारण स्तनपान के लिए स्तन पर बच्चे की पकड़ बना पाना लगभग असंभव हो जाता है.
मुनफ़ोर्ड कहती हैं कि स्तनपान नहीं हो पाने के कारण कुछ हफ़्ते के बाद मैक्स का वज़न कम होना शुरू हो गया. मैक्स को फिर से अस्पताल न ले जाना पड़े, इसलिए मुनफ़ोर्ड ने उसे फ़ार्मूला मिल्क पिलाना शुरू करने का फै़सला किया.
दो साल बाद मुनफ़ोर्ड की दूसरी संतान बेटी के रूप में पैदा हुई. मैक्स की तरह उनकी बेटी को 'टंग टाई' की समस्या नहीं थी फिर भी मुनफ़ोर्ड दो दिन बाद से बेटी को स्तनपान कराने के फै़सले को जारी नहीं रख सकीं.
मुनफ़ोर्ड स्तनपान नहीं करा पाने की पीड़ा से आज भी प्रभावित हैं. इसके बारे में वो कहती हैं "मैं एक सबसे स्वाभाविक और अनोखी चीज़ करने में सक्षम नहीं थी जो केवल एक माँ कर सकती है. इसके कारण मुझे तब शर्म महसूस हुई और अभी भी होता है."
वो यह भी कहती है कि ऐसा वो इसलिए महसूस कर रही हैं क्योंकि हो सकता है वह प्रसव के बाद होने वाले अवसाद से पीड़ित हों और उन्हें उस वक्त इसका पता नहीं चल सका हो.

'ब्रेस्टफीडिंग ग्रीफ़ या स्तनपान पीड़ा' क्या है?
स्तनपान की पीड़ा पर क़िताब लिखनेवाली सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ता, प्रोफे़सर एमी ब्राउन स्तनपान के अनुभवों से जुड़ी उदासी की भावना को आम बताती हैं.
वो कहती हैं "कई महिलाएं स्तनपान कराना उस समय से बहुत पहले बंद कर देती हैं जितना उन्होंने सोचा होता है. इस कारण वो निराशा महसूस करती हैं."
जबकि वर्तमान में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) किसी भी नवजात को जीवन के पहले छह महीनों के लिए विशेष तौर पर स्तनपान करवाने की ज़रूरत पर बल देता है.
यूनिसेफ़ का भी कहना है कि स्तनपान शिशुओं में अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसआईडीएस), बचपन के मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे के जोखिम को कम करता है.
यूनिसेफ़ के आंकड़ों के मुताबिक, छह महीने तक के बच्चों को स्तनपान कराने के मामले में दक्षिण एशिया 60 फ़ीसदी की दर के साथ सबसे आगे है.
यही आंकड़ा पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में 58 फ़ीसदी है जबकि लातिन अमेरिका और केरीबियन में 43 फ़ीसदी है.
वहीं यह आंकड़ा पश्चिमी और सेंट्रल अफ्रीका में 40 फ़ीसदी, पूर्वी यूरोप और सेंट्रल एशिया में 36 फ़ीसदी तो मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में 35 फ़ीसदी बताया गया है.
आंकड़े क्या कहते हैं?

वैश्विक स्तर पर छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को स्तनपान कराने का आंकड़ा 48 फ़ीसदी तक पहुंच गया है, जो पिछले दशक से 10 फ़ीसदी ज्यादा है.
दीप्ति, जो सात महीने की गर्भवती हैं, उम्मीद करती हैं कि इस बार अपने दूसरे बच्चे को स्तनपान कराने का अनुभव पहले से बच्चे से बेहतर होना चाहिए.
दीप्ति के पहले बच्चे का जन्म 2021 में हुआ था. उनके बेटे को भी 'टंग-टाई' की समस्या का सामना करना पड़ा था.
इस कारण दीप्ति को भी अपने पहले बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान स्तन पर बच्चे की पकड़ बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.
हालांकि, हालात ठीक होने के बाद भी दीप्ति को समस्याएं होती रहीं. इसके बाद दीप्ति ने भी बच्चे को बोतल से दूध पिलाने का फै़सला किया.
इस अनुभव को याद करते हुए दीप्ति कहती हैं कि उनकी दिनचर्या थकाऊ हो गई थी. हर दो घंटे में जब भी वो बच्चे को बोतल से दूध पिलाती थीं उन्हें यह एक विफलता की तरह लगता था. उन्हें लगता था जैसे वो एक अच्छा काम नहीं कर रही हैं.
स्तनपान कराने वाली अपनी दोस्तों के बीच अपने बच्चे को बोतल से दूध पिलाने के कारण दीप्ति लज्जा का बोध भी करती थीं.
दीप्ति कहती है "हालांकि किसी दोस्त ने कभी मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं कहा लेकिन अपने दोस्तों की तरह अपने बच्चे को स्तनपान न करा पाने को लेकर मैं हमेशा खुद को उदास महसूस करती थी."
कुछ महिलायें क्यों बंद कर देती हैं स्तनपान कराना?

मुनफ़ोर्ड और दीप्ति के बच्चों को 'टंग-टाई' की समस्या थी लेकिन कई और भी कारण हैं जिसके कारण माओं को अपने बच्चों को स्तनपान कराने में संघर्ष करना पड़ता है.
इनमें 'टंग-टाई' के कारण स्तन पर बच्चों की ठीक से पकड़ न बन पाने के अलावा फटे या रक्तस्राव वाले निपल्स और कम या फिर ज्यादा दूध का होना भी आम समस्याएं हैं.
कुछ मामलों में स्तनों में अत्यधिक दूध के कारण मास्टिटिस नाम का एक संक्रमण पाया गया है. इसके कारण स्तनपान करते समय महिला को दर्द होता है.
इंटरनेशनल लैक्टेशन कंसल्टेंट एसोसिएशन की लिसा मैंडेल स्तनपान के समय होने वाली समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं को परामर्श देने का काम करती हैं.
वह कहती हैं कि महिलाओं को जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी स्तनपान को लेकर ज़रूरी सलाह और सहायता देनी चाहिए.
वो बताती हैं "समस्याएं किसी भी प्रकार की हो सकती हैं. उदाहरण के लिए थाइरॉइड के कारण अगर किसी मां के शरीर में दूध कम बन रहा है तो इसकी पहचान कर इसका इलाज किया जा सकता है. इसके बाद माँ में दूध बनने में सुधार होने की संभावना बढ़ जाती है."
लिसा यह भी कहती हैं कि स्तनपान के समय किसी प्रकार दर्द नहीं होना चाहिए और अगर ऐसा होता है तो इसका मतलब है बच्चे की पकड़ स्तन पर ठीक से नहीं बन पा रही है.
साथ ही स्तनपान न करा पाने को किसी भी सूरत में माँ की विफलता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
वो बताती हैं कि स्तनपान "कभी भी दर्दनाक नहीं होना चाहिए और यह एक संकेत है कि एक बच्चा अच्छी तरह से दूध पी रहा है."
फीड यूके की निदेशक क्लेयर मर्फ़ी का कहना है कि शिशु को खिलाना-पिलाना सीधा और आसान काम नहीं है, इसलिए हमें हमेशा महिलाओं की मदद करनी चाहिए.
मर्फ़ी कहती हैं "एक ऐसा माहौल जिसमें माएं खुद को दोषी मानने लगती हैं और उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है, किसी को फायदा नहीं पहुचाता, न तो माँ को और न ही बच्चे को."
अब दीप्ति अपने होने वाले बच्चे को फिर से स्तनपान कराने की योजना बना रही हैं. लेकिन साथ ही वो स्पष्ट भी करती हैं कि इस बार वह खुद को उस दबाव में नहीं रखेंगी.
दीप्ति कहती हैं "मैं 100 फ़ीसदी कोशिश करूंगी क्योंकि अब मेरे पास अनुभव है. मैं उन चीज़ों से गुज़र चुकी हूँ."
स्तनपान कराने में दिक्कत होने पर क्या करें?
सामान्य स्तनपान में होने वाली दिक्कत पर महिलायें एनएचएस की एक मार्गदर्शिका का सहारा ले सकती हैं.
इसमें स्तनपान से जुड़ी सामान्य परेशानियों जैसे कि सोर निपल्स, स्तन पर बच्चों की ठीक पोज़िशनिंग और स्तनों में कम या अधिक दूध के होने को लेकर जानकारी दी गई है.
इस बारे में यूनिसेफ़ की वेबसाइट पर भी वीडियो ट्यूटोरियल और अन्य संसाधन को देखकर मदद ली जा सकती है.
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