दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान का दूतावास बंद होने की ये थी असली वजह? - प्रेस रिव्यू

अफ़ग़ान दूतावास

हाल ही में नई दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान का दूतावास बंद होने को लेकर इकोनॉमिक टाइम्स ने ख़बर दी है कि भले ही अफ़ग़ान राजनयिकों ने इसके लिए भारत को ज़िम्मेदार बताया था, मगर इसकी असल वजह कुछ और थी.

इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, अफ़ग़ान राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई ने जिन्होंने हाल ही में भारत सरकार से 'असहयोग' का हवाला देते हुए दूतावास को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की थी, उसका संबंध आंतरिक मतभेदों और 20 से ज़्यादा राजनयिकों द्वारा पश्चिमी देशों में शरण लेने की कोशिशों से था.

मामुन्दज़ई और उनकी टीम के जाने से दूतावास के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि मुंबई के महावाणिज्य दूत ज़ाकिया वरदाक ने ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान' का प्रतिनिधित्व करने वाले नई दिल्ली दूतावास के कामकाज की देखरेख करना शुरू कर दिया है.

वरदाक ने एक बयान में कहा, "हमने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और नई दिल्ली में अफ़ग़ान दूतावास के स्थानीय कर्मचारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि दूतावास अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए काम करना जारी रखेगा.”

ख़बर के मुताबिक़, ईटी को पता चला है कि भले ही वरदाक के इस क़दम की ज़िम्मेदारी तालिबान ने ली है, लेकिन 2019 से भारत में तैनात इस राजनयिक ने अफ़ग़ानों के 'व्यापक हितों' के लिए हैदराबाद के अपने सहयोगी के साथ अफ़ग़ान दूतावास का कामकाज संभालने की पहल की थी.

वे दोनों ही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि तालिबान के शासन वाले इस्लामी अमीरात का.

तालिबान के सत्ता में आने से पहले अफ़ग़ानिस्तान का नाम 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान' या अफ़ग़ानिस्तान इस्लामिक गणराज्य था, जिसे तालिबान ने 'एमिरेट ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान ' या अफ़ग़ानिस्तान अमीरात कर दिया था.

भारत ने अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है. भारत काबुल में एक समावेशी सरकार बनाने की वकालत कर रहा है.

भारत ने ज़ोर देकर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ़ किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

काबुल में भारत की एक तकनीकी टीम मौजूद है जो अगस्त 2021 में वहां मानवीय सहायता मुहैया करवाने में आगे रही है. अफ़ग़ानिस्तान की छात्राओं के लिए भारत ऑनलाइन कक्षाएं भी दे रहा है.

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'भारत पर दोष डालने की कोशिश'

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अफ़ग़ानिस्तान के नई दिल्ली स्थित दूतावास ने अपना संचालन बंद करने की घोषणा के दो महीने बाद, पिछले शुक्रवार को इस दूतावास को स्थायी तौर पर बंद करने का एलान किया था और भारत सरकार से इस परिसर में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ अफ़ग़ानिस्तान का झंडा फहराने की अनुमति मांगी थी.

मामुन्दज़ई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था, "नई दिल्ली में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफ़ग़ानिस्तान के दूतावास को भारत सरकार की लगातार चुनौतियों के कारण 23 नवंबर 2023 से नई दिल्ली में अपने राजनयिक मिशन को स्थायी रूप से बंद करने की घोषणा करते हुए खेद हो रहा है.”

अख़बार लिखता है, “लेकिन मामुन्दज़ई के आरोपों में सामने से दिख रही बातों के अलावा भी कुछ और है. जब से तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में ग़नी की सरकार को हटाया है, तब से मामुन्दज़ई के नेतृत्व में दिल्ली में अफ़ग़ान दूतावास के 28 राजनयिक ने पश्चिमी देशों से शरण मांगी हैं. मामुन्दज़ई ख़ुद लंदन में रह रहे हैं और उनका परिवार भी वहीं रहता है."

ख़बर के अनुसार, इन राजनयिकों ने पश्चिमी देशों में शरण लेने की बातचीत शुरू की और इस प्रक्रिया में मदद के लिए भारत सरकार से भी संपर्क किया. लेकिन भारत ने कहा कि वह अफ़ग़ान नागरिकों या अन्य के इस तरह के क़दमों का समर्थन नहीं कर सकता.

अख़बार के अनुसार, उसे पता चला है कि मामुन्दज़ई और अन्य राजनयिक आंतरिक सत्ता संघर्ष और भ्रष्टाचार में शामिल थे, जबकि पूरा दोष भारत पर डालने की कोशिश की गई.

'इसराइल के पास एक साल से था हमास के हमले का प्लान'

इसराइल और हमास के बीच जारी जंग के बीच एक ख़बर यह आई है कि इसराइल को सात अक्टूबर को किए गए हमास के हमले की योजना की एक साल पहले ही भनक लग गई थी.

बिज़नस स्टैंडर्ड की ख़बर के अनुसार, दस्तावेजों, ईमेल और साक्षात्कारों से पता चलता है कि इसराइली अधिकारियों को 7 अक्टूबर के हमले के लिए हमास की युद्ध योजना एक साल से ज़्यादा समय पहले ही हासिल हो गई थी. मगर इसराइली सेना और ख़ुफ़िया अधिकारियों ने यह कहते हुए इसे ख़ारिज कर दिया कि हमास के लिए इसे अंजाम दे पाना बहुत मुश्किल होगा.

क़रीब 40 पन्नों के एक दस्तावेज़ को इसराइली अधिकारियों ने 'जेरिको वॉल' कोड-नाम दिया है. इस दस्तावेज़ में बिंदु-दर-बिंदु उसी तरह के भीषण हमले का ज़िक्र किया गया है, जिसमें लगभग 1,200 लोगों की मौत हो गई थी.

इसराइल हमास जंग

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अख़बार के अनुसार, द न्यूयॉर्क ने इस अनुवादित दस्तावेज़ की पड़ताल की है. इसमें हमले की तारीफ़ का ज़िक्र नहीं है, लेकिन इसमें ग़ज़ा के आसपास इसराइली घेराबंदी तोड़ने, इसराइली शहरों पर कब्ज़ा करने और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर एक व्यवस्थित हमला करने का ज़िक्र किया गया है.

हमास ने इस ब्लू प्रिंट को बहुत ही सटीक ढंग से ज़मीन पर उतारा. इस दस्तावेज़ में हमले की शुरुआत में बहुत सारे रॉकेट दागने, सिक्यॉरिटी कैमरों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन इस्तेमाल करने, सीमा पर ऑटोमैटिक मशीन गन इस्तेमाल करने, बड़े पैमाने पर पैराग्लाइडर्स के माध्यम से इसराइल में बंदूकधारी उतारने और मोटरसाइकल सवार हमलावर भेजने की बात की थी और 7 अक्टूबर को ऐसा ही हुआ.

निखिल गुप्ता की गिरफ़्तारी को लेकर नई जानकारी

कथित तौर पर ख़ालिस्तान समर्थक अमेरिकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश रचने के मामले में अमेरिकी अदालत में अभियुक्त बनाए गए निखिल गुप्ता को लेकर एक नई जानकारी आई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुप्ता पर अमेरिकी अदालत में मुक़दमा दायर किए जाने के कुछ दिन पहले ही उन्हें चेक गणराज्य ने अमेरिका को सौंप दिया था.

इसमें कहा गया है कि गुप्ता को प्राग की उच्च सुरक्षा वाली एक जेल से नवंबर के बीच में ही अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में ट्रांसफ़र कर दिया गया था और ये सब न्यू यॉर्क की अदालत में उनपर मुक़दमा दर्ज करने से पहले किया गया.

ख़बर के अनुसार, गुप्ता को प्राग हवाई अड्डे पर 30 जून को चेक गणराज्य के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था. वह व्यापार और पर्यटन के लिए यहां थे, लेकिन चेक गणराज्य में ड्रग्स पर अंकुश लगाने के लिए काम करने वाली एजेंसी के अधिकारियों को कहीं से उनके नशीले पदार्थों की तस्करी के कथित इतिहास की सूचना मिली थी.

उन्हें हिरासत में लेने के बाद चेक अधिकारियों ने प्राग में भारतीय दूतावास को बताया कि अमेरिकी अदालत के आदेश के आधार पर निक गुप्ता नाम के एक शख़्स को हिरासत में लिया गया है.

अमेरिकी अदालत में दाख़िल अभियोग में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर एक लाख डॉलर कैश के बदले एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की सुपारी देने के आरोप लगाए गए हैं.

अदालत में पेश दस्तावेज़ के मुताबिक़, निखिल गुप्ता ने भारत सरकार के लिए काम करने वाले एक अधिकारी के कहने पर अमेरिका में एक हिटमैन से संपर्क किया और उसे एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या का कॉन्ट्रैक्ट दिया.

पैसे

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इमेज कैप्शन, अभियोग में ये भी दावा किया गया है कि निखिल गुप्ता पर गुजरात में एक आपराधिक मामला चल रहा है जिसमें मदद के बदले वो भारतीय अधिकारी के लिए न्यूयॉर्क में हत्या करवाने के लिए तैयार हो गए थे.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है हेट स्पीच - चीफ़ जस्टिस

भारत के चीफ़ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा है कि हेट स्पीच यानी नफ़रत फैलाने वाले भाषण और ऑनलाइन ग़लत सूचनाएं फैलाने वालों को कभी भी संविधान के तहत ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का संरक्षण नहीं मिल सकता.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, चीफ़ जस्टिस ने शुक्रवार को कहा कि डिजिटल युग में कल्याणकारी अधिकारों तक पहुंच के नाम पर किसी व्यक्ति की निजता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है, भले ही उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो.

चीफ़ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़

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उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकारों की वकालत करने वाले समूहों द्वारा असहमति जताने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए निजी कंपनियों के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने का चलन बढ़ने के कई विनाशकारी असर हो सकते हैं, क्योंकि ये ग़ैर ज़िम्मेदार संस्थाएं उन शक्तियों का भंडार बन जाती हैं, जो पहले सिर्फ़ सरकारों को संविधान या मतदाताओं से मिलती थीं.

उन्होंने कहा, "संविधान और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह माने जाने वाले सरकारी तत्वों के विपरीत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपेक्षाकृत अनियमित हैं. यह एक और नई चुनौती है जिसका डिजिटल स्वतंत्रता की वकालत करने वालों को समाधान खोजना है."

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