अखिलेश यादव का बयान क्या इंडिया गठबंधन के लिए झटका है?- प्रेस रिव्यू

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'इंडिया' गठबंधन के सहयोगी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 2024 लोकसभा चुनाव पर अहम टिप्पणी की है.

द हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, अखिलेश यादव ने कहा कि अगर 'इंडिया' गठबंधन के तले बात आगे बढ़ती है तो सपा यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 65 पर चुनाव लड़ेगी.

अखिलेश यादव ने कहा कि 15 सीटों को गठबंधन के सहयोगियों के लिए छोड़ दिया जाएगा.

साल 2024 आम चुनावों में 28 विपक्षी दल इंडिया गठबंधन के तले साथ आए हैं.

ये दल मिलकर बीजेपी के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में उतरने की बात कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के अंदर इंडिया गठबंधन के चार राजनीतिक दल मैदान में होंगे- सपा, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और अपना दल (के).

अखिलेश ने कहा, ''सपा यूपी की सभी 80 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार है. अगर इंडिया गठबंधन कांग्रेस के साथ रहता है तो सपा यूपी की 65 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी.''

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''यूपी में बीजेपी को अकेले हराने का दम''

अखिलेश यादव ने ये बातें सपा के मुख्यालय में कहीं. अखिलेश राज्य की नई बनी एग्जीक्यूटिव कमिटी को संबोधित कर रहे थे.

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हिंदुस्तान टाइम्स ने बैठक में मौजूद पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया कि अखिलेश ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में सपा में पूरी क्षमता है कि वो अकेले बीजेपी को हरा सकती है. अगर चुनावों में बेईमानी ना हुई होती तो सपा 2022 विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने में सफल रहती. ऐसे में पार्टी पूरी नज़र बनाए रखे कि लोकसभा चुनावों में किसी तरह की बेईमानी ना हो पाए.''

बीते महीने इंडिया गठबंधन के दो सहयोगियों सपा और कांग्रेस के बीच दूरियां देखने को मिली थीं.

मध्य प्रदेश चुनावों में कांग्रेस के सपा के लिए सीट ना छोड़ने पर अखिलेश यादव की तरफ़ से नाराज़गी व्यक्त की गई थी.

बाद में सपा ने एमपी चुनावों में 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे.

इस बारे में पूछे जाने पर अखिलेश यादव ने कहा था, ''हमने कांग्रेस से एमपी में सिर्फ़ छह सीटें मांगी थीं. एमपी में सपा मज़बूत स्थिति में है. लेकिन कांग्रेस ने उस सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतार दिया, जहाँ 2018 चुनावों में सपा उम्मीदवार की जीत हुई थी. तो लोकसभा चुनाव आने दीजिए, हम भी देखेंगे.''

अखिलेश ने कहा कि एमपी में हमने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं और हम प्रचार के लिए जाएंगे.

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अखिलेश यादव ने सपा नेताओं को क्या सलाह दी

अखिलेश यादव ने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से बेतुके बयान देने से बचने के लिए कहा है.

अखिलेश बोले, ''राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों और नीतियों के तहत ही बयान दें. पार्टी के अंदर गुटबाज़ी ना करें बल्कि दल को बूथ और संगठन के स्तर पर मज़बूत करने का काम करें.''

सपा प्रमुख ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा- ''बीजेपी के फैलाए झूठ और प्रॉपेगैंडा का पर्दाफाश करें. सरकार जिन मोर्चों पर नाकाम साबित हुई है, उसके बारे में बताएं.''

सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने चेतावनी दी है कि अगर किसी ने पार्टी के अंदर गुटबाज़ी जैसी चीज़ की तो उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा.

शिवपाल यादव ने पार्टी को मज़बूत करने और सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर देने की बात कही.

अखिलेश यादव ने कहा- असल जंग बूथ लेवल पर होगी. अगर हम चौकन्ना और मज़बूत बने रहे, सपा को जीतने से कोई नहीं रोक सकता.

अखिलेश जिस पार्टी बैठक में ये बातें बोल रहे थे, उसमें 300 सदस्य हैं. ये कमिटी अगस्त महीने में ही बनाई गई है.

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कांग्रेस को अखिलेश ने क्या संदेश दिया?

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, अखिलेश यादव ने इंडिया गठबंधन को लेकर कहा कि अगर विधानसभा चुनावों में जीत मिल भी जाती है, तब भी किसी तरह का भ्रम ना पालें.

अखिलेश ने कहा कि पाँच साल पहले जिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा किया था, उसके बाद हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी.

सपा सरकार में मंत्री रहे आईपी सिंह ने कहा, ''कांग्रेस देश में इतनी मज़बूत हो गई है कि उसे विधानसभा चुनावों के नतीजे की तारीख़ तीन दिसंबर के बाद इंडिया गठबंधन या सहयोगी दलों की ज़रूरत नहीं होगी. ये वही कांग्रेस है जो दिसंबर 2018 में तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव जीती थी और इन राज्यों की 65 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें हार गई थी.''

आईपी सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी यूपी में अपनी सीट पर सपा की मदद से जीत पाई थीं.

सुप्रीम कोर्ट

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सत्ता में बैठी पार्टी ही क्यों मिलता है सबसे ज़्यादा चंदा?- सुप्रीम कोर्ट

चुनावी बॉन्ड के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

द इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, इस सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि चुनावी चंदे का एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक दल के पास ही क्यों जाता है? इसकी वजह क्या है?

सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''ये सरकार की नहीं मेरी निजी राय है कि शायद चंदा देने वाले लोग नीतियों और गवर्नेंस के आधार पर ये तय करते हों.''

मेहता ने ही आंकड़ों का हवाल देते हुए कहा था कि सत्ताधारी दल को सबसे ज़्यादा चंदा मिलता है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा, ''चुनावी बॉन्ड के साथ दिक़्क़त ये है कि ये सिलेक्टिव गुमनामी और सिलेक्टिव गोपनीयता मुहैया करवाती है. फंडिंग करने वालों की जानकारी स्टेट बैंक के पास भी रहती है और ये जानकारी क़ानून से जुड़ी एजेंसियों के पास भी पहुंच सकती है.''

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''पैसा कहां से आ रहा है, इस बारे में जानकारी नहीं है. बॉन्ड का असली मालिक कौन है, ये भी नहीं पता. ये रुपये कहां ख़र्च किए जा रहे हैं, ये भी नहीं पता.''

चुनावी बॉन्ड योजना की क़ानूनी वैधता का मामला सुप्रीम कोर्ट में आठ साल से ज़्यादा वक़्त से लंबित है.

माना जा रहा है कि 2024 चुनाव से पहले इस मामले में फ़ैसला अगर आया तो इसका असर चुनावों में भी देखने को मिल सकता है.

इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को चंदा देने का एक वित्तीय ज़रिया है. यह एक वचन पत्र की तरह है जिसे भारत का कोई भी नागरिक या कंपनी भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से ख़रीद सकता है और अपनी पसंद के किसी भी राजनीतिक दल को गुमनाम तरीक़े से दान कर सकता है.

जीएसटी

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जीएसटी कलेक्शन में रिकॉर्ड वृद्धि

द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, अक्तूबर महीने में जीएसटी कलेक्शन में 13 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है.

अक्तूबर महीने में एक लाख 72 हज़ार करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ है.

अप्रैल 2023 में भी 1.87 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था.

जुलाई 2017 में शुरू करने के बाद ये दूसरी बार है जब इतना ज़्यादा जीएसटी कलेक्शन हुआ है.

अक्तूबर 2022 में एक लाख 52 हज़ार करोड़ रुपये की तुलना में ताज़ा कलेक्शन 13 फ़ीसदी ज़्यादा है.

वित्त वर्ष 2023-24 में औसत मासिक जीएसटी संग्रह 1.66 लाख करोड़ रुपये रहा है. यह पिछले साल की तुलना में 11 फ़ीसदी ज़्यादा है.

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मर्ज़ी के बगैर आइब्रो बनवाई तो पति ने सऊदी से दिया तीन तलाक

द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, सऊदी अरब से एक व्यक्ति ने कानपुर में मौजूद अपनी पत्नी को वीडियो कॉल के दौरान तीन तलाक दे दिया.

अखबार लिखता है कि गुलशबा नाम की महिला कानपुर में रहती हैं और पति की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाकर उन्होंने अपनी आईब्रो बनवाई थी.

ख़बर के मुताबिक़, इससे नाराज़ होकर सऊदी अरब में मौजूद मोहम्मद सलीम ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था.

ये घटना चार अक्तूबर की बताई जा रही है. गुलशबा की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है.

गुलशबा ने अपने ससुराल वालों पर भी दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.

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