You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारत और पाकिस्तान के बीच पहला वनडे, बेशुमार रोमांच, कांटे का मैच और क्या देखने को मिला
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
वर्ल्ड कप 2023 के सबसे बड़े मुक़ाबले में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हरा दिया है.
पाकिस्तान की टीम ने 192 रन की चुनौती रखी जिसे भारत ने सिर्फ़ तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया.
वनडे वर्ल्ड कप क्रिकेट में ये आठवां मौका है जब भारत ने पाकिस्तान को हराया है, दिलचस्प ये भी है कि अब तक हर बार कामयाबी भारतीय टीम को मिली है, जबकि वनडे क्रिकेट के आंकड़े इससे उलट हैं.
वनडे इतिहास में अब तक दोनों टीमों के बीच 135 मुक़ाबले हुए हैं और इसमें 73 मैचों में पाकिस्तान को जीत मिली है. जबकि भारतीय टीम को महज 57 मैचों में कामयाबी मिली है.
लेकिन दोनों टीमों के बीच पहला वनडे कब खेला गया था. उस दिलचस्प मुक़ाबले में क्या कुछ देखने को मिला था? बता दें कि उस मैच ने रोमांच की वो बुनियाद रखी जिसका असर अब तक दोनों देशों के बीच होने वाले हर मुक़ाबले में महसूस किया जाता है.
भारत और पाकिस्तान के बीच पहला वनडे मैच एक अक्टूबर, 1978 को पाकिस्तान के क्वेटा शहर के अयूब नेशनल स्टेडियम में खेला गया था.
अब इस मैच के बारे में बात करें, उससे पहले यह देखना होगा कि दोनों टीमों के बीच किस तरह का दबाव रहा होगा.
दरअसल, इस सिरीज़ से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच एक नहीं बल्कि दो-दो युद्ध हो चुके थे और बांग्लादेश का गठन हो चुका था.
1978 की सिरीज़ इस लिहाज से निर्णायक थी क्योंकि दोनों टीमें एक दूसरे के सामने 17 साल के लंबे अंतराल के बाद खेल रही थी.
इससे पहले पाकिस्तान की टीम 1961 में भारत का दौरा किया था और तब दोनों टीमों के बीच पांच टेस्ट मैच खेले गए थे और पांचों मैच ड्रॉ रहे थे.
साठ और सत्तर का दौर
इसके बाद भारत चीन का युद्ध हुआ. फिर 1965 और 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और इसके सात साल बाद दोनों टीमों के बीच सिरीज़ हुई.
इस सिरीज़ से पहले 1975 में वनडे क्रिकेट का वर्ल्ड कप भी हुआ लेकिन दोनों टीमों की आपसी भिड़ंत नहीं हुई.
भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट की बात हो तो राजनीति की बात अपने आप शामिल हो ही जाती है.
1978 में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिरीज़ भी इसलिए हो सकी, क्योंकि 1971 के समय दोनों देशों की हुकूमत को संभालने वाले सत्ता से बाहर चुके थे.
जिया उल हक पाकिस्तान में सरकार में थे और भारत में जनता पार्टी की सरकार थी, दोनों देशों ने आपसी संबंधों को पटरी पर लाने के लिए क्रिकेट कूटनीति का सहारा लिया और भारतीय क्रिकेट टीम तीन टेस्ट और तीन वनडे की सिरीज़ खेलने पाकिस्तान गईं.
पहले टेस्ट मुक़ाबले खेले गए और पाकिस्तान ने तीन टेस्ट मैचों में दो टेस्ट जीत कर सिरीज़ जीत ली.
टेस्ट सिरीज़ गंवाने के बाद बारी वनडे क्रिकेट की थी. एक अक्टूबर, 1978 को खेला गया था भारत और पाकिस्तान के बीच पहला वनडे मुक़ाबला.
उस दौर के कई लोगों के ज़हन में इस मैच की याद अब भी बाकी हैं. इस मैच ने भारतीय क्रिकेट को निश्चित तौर पर एक नया मुकाम दिया.
कपिल देव का पहला मैच
भारत के कप्तान बिशन सिंह बेदी ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला लिया. इस मैच में भारत की ओर से तीन खिलाड़ियों को डेब्यू करने का मौका मिला.
चेतन चौहान, सुरेंद्र अमरनाथ और कपिल देव.
कपिल देव के जलवे तो क्रिकेट की दुनिया में हमेशा याद किए जाएंगे. लेकिन चेतन चौहान और सुरेंद्र अमरनाथ ने भी भारतीय क्रिकेट में छोटा ही सही उपयोगी योगदान दिया है.
सुरेंद्र अमरनाथ 1976 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपने पहले ही टेस्ट में शतक जमाकर क्रिकेट इतिहास में अपने पहले ही टेस्ट में शतक जमाने वाले पिता लाला अमरनाथ और पुत्र सुरेंद्र अमरनाथ की जोड़ी बना चुके थे.
वनडे क्रिकेट में उन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले वनडे से शुरुआत की, तो ये पहला मौका था जब भारत की ओर से दो भाइयों की जोड़ी किसी वनडे मैच में एक साथ खेल रही थी. सुरेंद्र और मोहिंदर अमरनाथ ने मैदान पर उतरते ही एक इतिहास बना दिया.
भारत ने निर्धारित 40 ओवरों में सात विकेट पर 170 रन बनाए. भारत की पारी में सबसे ज़्यादा रन मोहिंदर अमरनाथ के बल्ले से निकले.
उन्होंने 61 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 51 रन बनाए थे. दूसरे नंबर पर सुरेंद्र अमरनाथ थे.
सुरेंद्र अमरनाथ ने 41 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 37 रन बनाए.
यानी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहली हॉफ़ सेंचुरी मोहिंदर अमरनाथ के बल्ले से निकली थी.
मैन ऑफ़ द मैच अमरनाथ
हालांकि दोनों भाईयों की जोड़ी को विकेट पर एक साथ खेलने का मौका नहीं मिला था. चेतन चौहान की शुरुआत अच्छी नहीं रही, वे महज दो रन बना सके थे.
और कपिल देव ने अपनी शुरुआती पारी में नाबाद 13 रन बनाए थे. जबकि दिलीप वेंगसरकर ने 34 रनों की पारी खेली थी.
पाकिस्तान की टीम ने जब बल्लेबाज़ी शुरू की तो माजिद ख़ान शुरू से ही जम गए थे. एक समय पाकिस्तान ने एक विकेट के नुकसान पर 82 रन बना लिए थे.
महज सात रनों के भीतर मोहिंदर अमरनाथ ने दोनों को पवेलियन भेज दिया. माजिद ख़ान ने 50 रन बनाए जबकि ज़हीर अब्बास के बल्ले से 26 रन निकले.
अमरनाथ ने आठ ओवरों में 38 रन देकर दो विकेट लिए, वे मैन ऑफ़ द मैच आंके गए.
छह साल बाद 1983 के वर्ल्ड कप में मोहिंदर अमरनाथ ने जो ऑलराउंड खेल दिखाया था, उसकी छाप वे पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले ही वनडे में दे चुके थे.
वहीं आउट स्विंग गेंदों का कपिल देव ने भी जादू जगाना शुरू किया था. पहली बार लगा था कि भारतीय क्रिकेट को तेज़ गेंदबाज़ मिल गया.
आठ ओवरों में 27 रन देकर कपिल देव ने इमरान ख़ान के तौर पर अपना पहला विकेट लिया था. इमरान ख़ान बोल्ड हो गए थे.
जबकि कप्तान बिशन सिंह बेदी ने आठ ओवरों में 44 रन देकर दो विकेट लिए. भारत के दूसरे गेंदबाज़ करसन घावरी ने आठ ओवरों में 35 रन देकर दो विकेट लिए.
कपिल ने किया इमरान को आउट
वसीम बारी और सरफ़राज़ नवाज़ की जोड़ी ने नौवें विकेट के लिए नॉटआउट 27 रन जोड़कर पाकिस्तान को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया था.
लेकिन लो स्कोरिंग मुक़ाबले में भारतीय गेंदबाज़ों ने आख़िरी समय तक नियंत्रण बनाए रखा और पाकिस्तान की टीम 40 ओवरों में आठ विकेट पर महज 166 रन बना सकी.
ये मैच भारत ने महज चार रन से जीता था. भारत की इस जीत में मोहिंदर अमरनाथ के ऑलराउंड खेल के बाद जिस दूसरे खिलाड़ी का सबसे अहम योगदान था, वे थे एस. वेंकटराघवन.
वेंकटराघवन को विकेट भले नहीं मिला हो लेकिन आठ ओवरों की गेंदबाज़ी में उन्होंने महज 14 रन दिए थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)