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ब्रॉड और एंडरसन: 'माय गॉड, शी इज़ ब्यूटीफुल' से लेकर टेस्ट क्रिकेट की सबसे ख़तरनाक जोड़ी बनने की कहानी
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्रिकेट की दुनिया में ये नज़ारा पहली अगस्त से नहीं दिखेगा. दोबारा कब दिखेगा, ये बात भी भरोसे से कोई कह नहीं सकता. एशेज़ सिरीज़ के अंतिम टेस्ट मैच के साथ क्रिकेट की दुनिया की सबसे ख़तरनाक जोड़ी टूट गई है.
स्टुअर्ट ब्रॉड ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को अलविदा कह दिया है. अपने पूरे करियर में वे जेम्स एंडरसन के साये में खेलते रहे लेकिन आख़िर में उन्होंने अपने सीनियर साथी को अकेला छोड़ दिया है.
जेम्स एंडरसन भी लंबे समय तक शायद ही दिखें लेकिन थोड़े दिन उनके खेलने की उम्मीद बनी हुई है क्योंकि वे उस मुकाम के क़रीब हैं, जहां तक कोई तेज़ गेंदबाज़ नहीं पहुंच सका है.
ये जोड़ी कितनी ख़तरनाक थी, इसका अंदाज़ा आंकड़ों से ही लगा लीजिए.
जेम्स एंडरसन बीते दो दशक के दौरान 183 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. एक तेज़ गेंदबाज़ के लिए इतने लंबे समय तक खेलते रहना ही करिश्मा है. एंडरसन इन मैचों में 690 विकेट झटक चुके हैं, यानी 700 टेस्ट विकेट के इतिहास रचने से वे महज 10 विकेट दूर हैं.
अगर वे इस मुकाम तक पहुंचते हैं तो क्रिकेट इतिहास में ये पहला मौका होगा जब कोई तेज़ गेंदबाज़ सात सौ विकेट के इतिहास को पार करेगा. जब एंडरसन छह सौ विकेट के मुकाम तक पहुंचे थे तब भी उन्होंने इतिहास बनाया था.
इस इतिहास तक पहुंचने वाले दूसरे तेज़ गेंदबाज़ रहे हैं स्टुअर्ट ब्रॉड. 167 टेस्ट मैचों में ब्रॉड के नाम 604 विकेट हैं.
347 मैच, 1294 विकेट
अब इन दोनों के आंकड़ों को जोड़ लीजिए. तो 347 टेस्ट मैचों में दोनों गेंदबाज़ ने मिलकर 1294 विकेट लिए हैं. बीते 17 सालों से दोनों गेंदबाज़ औसतन हर साल 75 विकेट चटकाते आए हैं. मारक क्षमता की बात रहने भी दें तो इतने लंबे समय तक कंसिस्टेंसी का ऐसा दूसरा उदाहरण शायद ही मिलेगा.
इस दौरान इन दोनों ने वनडे क्रिकेट में 467 विकेट आपस में बांटे हैं और 83 विकेट ट्वेंटी-20 क्रिकेट में भी हासिल किए हैं. यानी 1844 इंटरनेशनल विकेट. लेकिन कहते हैं कि आंकड़े कई बार पूरी कहानी नहीं बताते हैं. इसलिए विकेटों की संख्या की कहानी को अगर थोड़े समय के लिए हम भूल भी जाएं तो भी ब्रॉड और एंडरसन की कहानी बेमिसाल है.
मौजूदा एशेज़ सिरीज़ में जेम्स एंडरसन का जादू भले नहीं चल रहा हो लेकिन स्टुअर्ट ब्रॉड बीते एक साल में सबसे ज़्यादा विकेट झटकने वाले गेंदबाज़ हैं. चाहे जेम्स एंडरसन हों या फिर स्टुअर्ट ब्रॉड, कप्तान बेन स्टोक्स ने जब जब गेंद थमाई दोनों ओवर दर ओवर डालते नज़र आए. अब थोड़ा ठहर कर सोचिए.
जेम्स एंडरसन अभी 41 साल के हुए हैं और स्टुअर्ट ब्रॉड की उम्र है 37 साल. जिस दौर में एज को महज़ नंबर कहा जा रहा हो वहां याद कीजिए कि इससे पहले आपने कब इस उम्र के तेज़ गेंदबाज़ों को खेलते देखा था. तेज़ गेंदबाज़ों की कौन सी जोड़ी आपको याद आ रही है.
चलिए कोई बात नहीं, मैं आपको याद दिलाता हूं. ये बात आजकल की है भी नहीं, आज से कोई 23 साल, अगस्त 2000 में क्रिकेट की दुनिया में आख़िरी बार एक ख़तरनाक और उम्रदराज़ गेंदबाज़ की जोड़ी दिखाई दी थी. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ओवल मैदान में वेस्टइंडीज़ के कर्टनी वाल्श 37 साल की उम्र में गेंदबाज़ी कर रहे थे और उनके साथ 36 साल की उम्र में कर्टली एंब्रोस अपने करियर का आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे थे. वाल्श का सफ़र 39 साल आते आते थम गया था.
वाल्श पहले ऐसे तेज़ गेंदबाज़ थे जिन्होंने 500 विकेटों के मुकाम को हासिल किया था, जिसे ग्लेन मैक्ग्रा ने 563 के मुकाम तक पहुंचाया. वाल्श ने 17 साल के करियर में 519 विकेट चटकाए जबकि एंब्रोस ने 12 साल के करियर में 405 विकेट हासिल किए.
तो यक़ीन मानिए कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर लंबे रन अप के साथ नई और पुरानी गेंदों से दुनिया के शीर्ष बल्लेबाज़ों का इम्तिहान लेने वाले गेंदबाज़ शायद ही नज़र आएं.
वो पहली मुलाक़ात
इस जोड़ी के बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. 21 साल की उम्र के एक युवा तेज़ गेंदबाज़ को ट्वेंटी-20 क्रिकेट वर्ल्ड के दौरान युवराज सिंह ने छह गेंदों पर छह छक्के जड़ दिए थे. हर छक्के के बाद लंबा और चॉकलेटी मुस्कान वाला क्रिकेटर हैरान परेशान दिख रहा था.
कोई और गेंदबाज़ होता तो उसका तो बोरिया बिस्तर ही बंध जाता. लेकिन स्टुअर्ट ब्रॉड ने तो अपना टेस्ट डेब्यू ही नहीं किया था. लिहाजा उन्हें दूसरा नहीं, टेस्ट क्रिकेट में पहला ही मौका छह छक्के खाने के तीन महीने बाद मिला था. श्रीलंका के ख़िलाफ़ दिसंबर, 2007 में जब स्टुअर्ट ब्रॉड को टेस्ट क्रिकेट में मौका मिला, तो उस मैच में जेम्स एंडरसन को खेलने का मौका नहीं मिला था. हालांकि दोनों दौरे के दौरान टीम के अतिरिक्त खिलाड़ी के तौर पर बेंच पर बैठकर मैच देखते थे.
जेम्स एंडरसन ने अपनी आत्मकथा 'बॉल, स्लीप, रिपीट' में स्टुअर्ट ब्रॉड के साथ अपनी पहली मुलाकात के बारे में लिखा है. उन्होंने लिखा है, "मैं ब्रॉड के साथ अपनी पहली मुलाकात को कैसे भूल सकता हूं. सुनहरे बाल, चमकती नीली आंखें, परफैक्ट फिगर. मैंने यही सोचा, माय गॉड...शी इज़ ब्यूटीफुल."
इन दोनों को जनवरी, 2008 में वेलिंगटन में खेलने का जब मौका मिला था तो यह क्रिकेट विश्लेषकों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं था. उस दौर में इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ी की कमान स्टीव हर्मिसन और मैथ्यू होगार्ड के हवाले था. इन दोनों ने महज दो साल पहले ही एशेज़ सिरीज़ में इंग्लैंड को शानदार जीत दिलाई थी. लिहाजा उस वक्त उन्हें अनटचेबल क्रिकेटर माना जा रहा था लेकिन टीम संघर्ष कर रही थी.
जोड़ी कमाल की
ऐसे में टीम के कोच पीटर मूर ने अंदर बाहर हो रहे जेम्स एंडरसन के साथ, नए नवेले ब्रॉड को किस्मत आजमाने का मौका दिया. उनके इस फ़ैसले का क्या असर हुआ, इसे भी जेम्स एंडरसन ने बताया है. जेम्स ने लिखा है, "हम लोग तो इस बदलाव के लिए तैयार भी नहीं थे. सब अचंभित थे. अचंभे के साथ-साथ हम बेहद दबाव में आ गए थे. टीम की घोषणा से एक दिन पहले हमें बता दिया गया था, नेट्स पर हम स्टीव हर्मिसन को बिजली की रफ़्तार से गेंद डालते देख रहे थे."
"मैं तो कुछ मैच खेल चुका था, ब्रॉड तो बहुत ज़्यादा दबाव में था. लेकिन उसकी आंखों में सपना भी था, वह जिन लोगों के साथ नेट्स पर था, उन्हें वह पहले टीवी पर ही देखा करता था. हम दोनों ने अपना सबकुछ झोंक दिया. पीटर मूर के भरोसे को कायम रखा."
इंग्लैंड ने ये मुक़ाबला 126 रन से जीता था, एंडरसन ने पहली पारी में 5 विकेट लिए थे, जबकि ब्रॉड को एक विकेट मिला था. दूसरी पारी में दोनों ने दो-दो विकेट चटकाए थे. यहां से शुरू हुआ सफ़र 31 जुलाई, 2023 तक जारी रहा.
इन दोनों की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह ये रही कभी, इन दोनों के बीच आपस में एक दूसरे को कमतर साबित करने की होड़ नहीं दिखी.
जेम्स एंडरसन किसी मेंटॉर की भांति स्टुअर्ट ब्रॉड को संभालते रहे.
एंडरसन ने अपनी आत्मकथा में ब्रॉड पर एक पूरा चैप्टर लिखा है.
इसमें उन्होंने बताया है, "हम कभी गेंदबाज़ के तौर पर एक दूसरे से होड़ लेते नहीं दिखे. हमारी क्षमताएं भी अलग-अलग थीं. या कहूं, हम दोनों एक दूसरे के लिए कभी ख़तरा नहीं बने. ब्रॉड हमेशा बाउंस और सीम के साथ गेंदबाज़ी करने में यक़ीन करते रहे और मेरा भरोसा हमेशा स्विंग में रहा. इसलिए हमलोगों में हमेशा एक संतुलन रहा."
हर मैच यादगार
जेम्स एंडरसन की आत्मकथा में एक चैप्टर यह भी शामिल किया गया, जो ब्रॉड ने एंडरसन के बारे में लिखा है. ब्रॉड ने लिखा है, "करियर के शुरुआती दौर में मुझे तेज़ गेंदबाज़ों की आपसी होड़ की कहानियां सुनने को मिली थीं कि किस तरह एंड्रयू कैडिक और डेरेन गॉफ़ एक दूसरे को कमतर दिखाने की कोशिश करते थे और इतना ही नहीं एक दूसरी की कामयाबी को सेलिब्रेट भी नहीं करते थे. लेकिन एंडरसन और मेरा साथ, हमेशा टीम के लिए रहा. हम ये सोचते कि विकेट चाहे जिसे मिले, हमें दूसरी टीम को समेट कर आराम करने, कॉफी पीने का मौका मिलेगा."
वैसे क्या दिलचस्प संयोग है कि क्रिकेट के दो बेहतरीन गेंदबाज़ों की इस जोड़ी ने पहला कमाल क्रिकेट की पिच पर गेंदबाज़ी करते हुए नहीं बल्कि बल्लेबाज़ी में दिखाया था. 21 अप्रैल, 2007 को वर्ल्ड कप के मुक़ाबले में इंग्लैंड की टक्कर वेस्टइंडीज़ की टीम से थी. क्रिस गेल और ड्वेन स्मिथ की पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी के चलते वेस्टइंडीज़ की टीम ने 300 रन बना दिए.
जेम्स एंडरसन जब बल्लेबाज़ी करने उतरे तब इंग्लैंड को जीत के लिए तीन रन चाहिए थे और दूसरे छोर पर स्टुअर्ट ब्रॉड थे. चार गेंदों पर तीन रन बनाकर ब्रॉड ने ये मैच इंग्लैंड को जीता दिया था. जीत का जश्न मनाते दोनों साथ लौटे थे.
सोलह साल बाद ओवल के मैदान में जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड आख़िरी बार एक साथ जश्न मनाते दिखे. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने आख़िरी दो विकेट लेकर अपनी टीम को एक शानदार जीत दिलाई.
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