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भारतीय क्रिकेट में होने वाली है पैसों की बरसात, कितनी बढ़ेगी बीसीसीआई की कमाई?
- Author, चंद्रशेखर लूथरा
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
क्रिकेट की दुनिया में इन दिनों एशेज सिरीज़ के रोमांच की चर्चा है, भारतीय क्रिकेट टीम के वेस्टइंडीज़ में खेलने की चर्चा भी हो रही है.
इन सबके बीच में आने वाले महीनों में भारत में होने वाले वर्ल्ड कप क्रिकेट को लेकर भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
भारतीय क्रिकेट भले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया से पार नहीं पा सकी हो लेकिन वर्ल्ड कप को लेकर उसकी दावेदारी को सबसे मज़बूत माना जा रहा है.
वर्ल्ड कप के आयोजन में अभी कुछ महीने बाक़ी हैं लेकिन इस महीने हुई इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की बैठक में ही ये तय हो गया है कि आने वाले दिनों में भारतीय क्रिकेट बोर्ड का दबदबा दुनिया भर में रहेगा.
इस महीने डरबन में हुई बैठक के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड को आईसीसी की सालाना आमदनी में से 38.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी.
यह रकम वैसे 231 मिलियन डॉलर के आसपास है, जो क़रीब 2,000 करोड़ रुपये होगी.
यह रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि दस साल पहले बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर एन. श्रीनिवासन ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड- तीनों मुल्क को मिलाकर इस हिस्सेदारी की मांग की थी.
हालांकि ये मॉडल लागू नहीं हुआ लेकिन उनकी मांग का असर ये हुआ कि बीसीसीआई को 2015 से 2023 तक आईसीसी की आमदनी में 22 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलती रही.
दरअसल, 2015 में शशांक मनोहर जब आईसीसी प्रमुख बने तो उन्होंने तीन देशों को सबसे ज़्यादा आमदनी देने वाले मॉडल को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि इससे अमीर बोर्ड, अमीर होता जाएगा और ग़रीब बोर्ड और ग़रीब.
आईसीसी के नए बदलाव में यह नहीं बताया गया कि दूसरे सदस्य देशों को किस तरह से हिस्सेदारी मिलेगी, लेकिन यह कहा गया है कि प्रत्येक सदस्य देशों को पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा पैसा मिलेगा.
अब बीसीसीआई को 38.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी. यह इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को मिलने वाले 41 मिलियन डॉलर की तुलना में क़रीब छह गुना ज़्यादा है.
एशेज में रोमांचक क्रिकेट खेलने वाली टीम का बोर्ड 6.89 प्रतिशत के साथ आईसीसी से हिस्सेदारी में दूसरे पायदान पर है.
जबकि तीसरे स्थान पर मौजूद ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड को 6.25 प्रतिशत के साथ 37.53 मिलियन डॉलर मिलेंगे.
यानी दूसरे और तीसरे पायदान के बोर्ड को जितनी रकम आपस में मिलाकर मिलेगी, उससे तीन गुना ज़्यादा अकेले भारतीय क्रिकेट बोर्ड की हिस्सेदारी होगी.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को 5.75 प्रतिशत यानी 34.5 मिलियन डॉलर की रकम मिलेगी.
इसके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, साउथ अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड, ज़िंबाब्वे, वेस्ट इंडीज़ और आयरलैंड को पांच प्रतिशत से कम की राशि से संतोष करना होगा.
ऐसे में एक सवाल यह ज़रूर उठता है कि बीसीसीआई को इतनी ज़्यादा हिस्सेदारी कैसे मिल रही है, इसका जवाब भी जगजाहिर है.
पिछले लंबे समय से, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल की आमदनी का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा भारतीय बाज़ार से ही आता है.
वैसे बीसीसीआई की आमदनी दूसरे बोर्डों की तुलना में बहुत ज़्यादा भले दिख रही है, लेकिन वास्तविकता में इतनी आमदनी नहीं होगी.
इसकी सबसे बड़ी वजह आईसीसी टूर्नामेंट के दौरान सरकार से बीसीसीआई को किसी तरह की कर रियायत नहीं मिलना है.
आईसीसी से ज़्यादा आमदनी मिलेगी लेकिन...
सौरव गांगुली की अध्यक्षता के समय, बीसीसीआई के एक अनुमान के मुताबिक, अगर भारत सरकार ने 2023 के वर्ल्ड कप आयोजन के लिए बीसीसीआई को कर में रियायत नहीं दी तो बोर्ड को कम से 955 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.
सरकार ने मैचों के प्रसारण से होने वाली आमदनी पर 21.84 प्रतिशत टैक्स लगाने का फ़ैसला लिया है.
भारत में कर संबंधी नियमों के मुताबिक, किसी तरह की रियायत का प्रावधान नहीं है, इसके चलते बीसीसीआई को 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप के आयोजन के दौरान भी 193 करोड़ रुपये कर चुकाने पड़े हैं.
हालांकि बीसीसीआई की ओर से कहा जाता रहा है कि ये मामला आईसीसी ट्राइब्यूनल में है.
हालांकि सौरव गांगुली और जय शाह के कार्यकाल की इस बात के लिए आलोचना होती है कि इन दोनों ने इस पूरे मामले को उपयुक्त ढंग से हैंडल नहीं किया है.
हालांकि पिछले साल दोनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मिले थे, जिसमें सरकार ने साफ़ साफ़ कहा कि बीसीसीआई को शुद्ध लाभ की जगह कुल आमदनी पर आयकर का भुगतान करना होगा.
हालांकि आईसीसी के प्रावधानों के मुताबिक मेजबान देश को, आईसीसी टूर्नामेंट के आयोजन के दौरान सरकार से कर में रियायत मिल सकती है लेकिन इस मामले को लेकर बीसीसीआई में अभी स्पष्टता नहीं दिख रही है.
हालांकि सभी को उम्मीद यही है कि जय शाह के बीसीसीआई सचिव रहते हुए, आख़िरी पलों में कोई ना कोई रास्ता निकल आएगा और बीसीसीआई पर बहुत ज़्यादा टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा.
एकसमान भुगतान
आईसीसी की बैठक में आमदनी में हिस्सेदारी के अलावा एक और अहम फ़ैसला लिया गया.
अब सभी इंटरनेशनल क्रिकेट टूर्नामेंट में पुरुष और महिलाओं को एक समान इनामी रकम मिलेगी.
बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने पिछले साल इंटरनेशनल मुक़ाबलों के लिए एकसमान मैच फीस लागू करने की घोषणा की थी.
हालांकि ऐसी घोषणाओं में भी कुछ पेंच रह जाते हैं.
इंटरनेशनल स्तर के मुक़ाबलों के लिए मैच फीस तो पुरुष और महिला क्रिकेट में बराबर कर दी गई है लेकिन खिलाड़ियों के अनुबंध और दोनों टीमों के मैचों की संख्या में बहुत अंतर अभी भी बना हुआ है.
इसके बावजूद इसे महिला और पुरुष क्रिकेट में बराबरी की दिशा में एक बहुत बड़ा क़दम माना जा रहा है.
50 ओवरों के वर्ल्ड कप की तो 2019 में इंग्लैंड को चैंपियन बनने पर 28.4 करोड़ रुपये की इनामी रकम मिली थी.
जबकि उपविजेता न्यूज़ीलैंड को 14.2 करोड़ रुपये मिले थे.
इसकी तुलना में महिला वर्ल्ड कप में 2022 की चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम को करीब 10 करोड़ रुपये की इनामी रकम मिली थी जबकि उपविजेता इंग्लैंड को 4.5 करोड़ रुपये मिले थे.
आईसीसी की ओर से कहा गया है कि 2030 तक सभी टूर्नामेंट की इनामी रकम महिला और पुरुषों के लिए एकसमान होगी.
टी-20 लीग की संख्या बढ़ेगी
इसके अलावा आईसीसी की बैठक में दुनिया भर में होने वाले टी-20 लीग को लेकर भी चर्चा हुई.
जिस टी-20 क्रिकेट लीगों के प्रस्ताव को पारित किया जा चुका है, उनमें पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाने का फ़ैसला हुआ है.
इसमें आईएलटी 20, एमएलसी और कनाडा प्रीमियर लीग जैसे टूर्नामेंट शामिल हैं.
हालांकि टी-20 लीग की बढ़ती संख्या को देखते हुए, ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे बड़ी संख्या में टी-20 क्रिकेट के एक्सपर्ट क्रिकेटर इन टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए अपनी अपनी टीमों से संन्यास की घोषणा नहीं करें.
प्रत्येक टीम को घरेलू और एसोसिएट सदस्य देशों के कम से कम सात क्रिकेटर खिलाने होंगे.
अमेरिका में इन दिनों मेजर क्रिकेट लीग के मैच खेले जा रहे हैं जबकि आने वाले दिनों में सऊदी अरब भी ऐसी लीग की शुरुआत की योजना बना रहा है.
ऐसे में आईसीसी की कोशिश इंटरनेशनल क्रिकेट को बचाने और संभालने की भी है.
यही वजह है कि लीग आयोजित करने वाले बोर्ड को विदेशी खिलाड़ियों के घरेलू बोर्ड को भी निश्चित रकम चुकानी होगी.
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