स्टुअर्ट ब्रॉड ने आख़िर कब संन्यास का मन बनाया था?

    • Author, स्टीफ़न शेमिल्ट
    • पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट्स

कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो बड़े मौके पर अपना जलवा बिखरने के लिए जाने जाते हैं. स्टुअर्ट ब्रॉड की पहचान ऐसे ही क्रिकेटर की रही है.

मौजूदा एशेज सिरीज़ के अंतिम टेस्ट के अंतिम दिन का खेल सोमवार को होना है.

इस मैच के ख़त्म होने से दो दिन पहले शनिवार को इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने इस मैच को अपने लिए बड़ा मौका बना लिया. उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को अलविदा कहने की घोषणा कर दी.

ओवल के मैदान के तीसरे दिन का जब खेल ख़त्म हुआ तब वो इंग्लैंड की जर्सी पहने हुए थे. उन्होंने अपना पैड उतारा ही था. नॉट आउट बल्लेबाज़ के तौर पर पवेलियन लौटे थे.

इसके बाद उन्हें गेंदबाज़ का इंतज़ार था. ऐसे ही पलों में उन्होंने कहा, ‘बहुत हुआ, एशेज के पांचवें टेस्ट के बाद यह सिलसिला थम जाएगा.

हालांकि उन्होंने खुद को एक मौका ज़रूर दिया कि आख़िरी बार ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को तहस नहस कर सकें.

हालांकि रविवार को ऑस्ट्रेलियाई सलामी जोड़ी ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया, लेकिन ब्रॉड के सामने डेविड वॉर्नर को चलता करने और अपनी टीम को एक और एशेज़ टेस्ट में जीत दिलाने का मौका ज़रूर है.

यह कितना दिलचस्प संयोग है कि जो लड़का कभी अपने पिता को एशेज़ सिरीज़ की तैयारियों में व्यस्त देखा करता था, वह खुद एशेज़ सिरीज़ के ज़ोरदार क्रिकेटर के तौर पर अपने करियर को अलविदा कह रहा है.

अपने संन्यास की घोषणा पर ब्रॉड ने कहा, “मैं शीर्ष स्तर पर खेलते हुए खेल को अलविदा कहना चाहता था. ओवल मैदान में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मुक़ाबले से मजेदार कुछ नहीं होता. मेरे ख़्याल से यह सही समय है. ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने मैं अपना सबसे बेहतर देने की कोशिश करता हूं. एक-एक पल का संघर्ष मुझे बहुत पसंद रहा है. दर्शकों का उत्साह भी देखते बनता है.”

ब्रॉड ने ये भी बताया कि वे हमेशा से तेज़ गेंदबाज़ बनना चाहते थे. उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि एक अच्छा गेंदबाज़ बनने के लिए मेरा भरोसा आसमान में होना चाहिए. मैं आपसे वादा करके कह सकता हूं कि जब भी मैं ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी करने उतरा, हर एक गेंद फेंकते समय मेरा भरोसा आसमान में ही था.”

संन्यास का फैसला महज 24 घंटे पहले

वैसे ये जानना दिलचस्प है कि ब्रॉड ने अपने संन्यास का फ़ैसला, दुनिया को बताने से महज 24 घंटे पहले लिया था. उन्होंने सबसे पहले ये जानकारी टीम के कप्तान बेन स्टोक्स को दी.

ब्रॉड के पुराने साथी और नई गेंद से उनके जोड़ीदार जेम्स एंडरसन को जब पता चला, तो उन्हें लगा कि ब्रॉड मजाक़ कर रहे हैं. जो रूट को बताते वक्त ब्रॉड का गला रूंध गया, इसके बाद उन्होंने टीम के वॉर्म अप के दौरान युवा खिलाड़ी बेन डकेट को सबको बताने की ज़िम्मेदारी दी.

शनिवार को ओवल के खेल के दौरान पूरी इंग्लैंड की टीम को मालूम था कि ब्रॉड अपना आख़िरी मैच खेल रहे हैं.

लिहाजा जब ब्रॉड बल्लेबाज़ी करने क्रीज़ पर उतरे तो मार्क वुड ने कहा कि उनके साथ क्रीज पर रहना बड़े सम्मान की बात है. इस पारी में ब्रॉड अपने जोड़ीदार एंडरसन के साथ ही पवेलियन लौटे.

तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर ब्रॉड की कामयाबी की कहानी, आंकड़े खुद बताते हैं. 167 टेस्ट मैचों में उनके नाम 602 विकेट हैं.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ओवल टेस्ट में वे विकेटों की संख्या को थोड़ा बढ़ा भी सकते हैं.

टेस्ट इतिहास में वे पांचवें सबसे कामयाब गेंदबाज़ हैं, तेज़ गेंदबाज़ों की सूची में उनसे ज़्यादा विकेट केवल जेम्स एंडरसन के नाम हैं.

वे टेस्ट क्रिकेट में शेन वॉर्न के बाद महज दूसरे ऐसे क्रिकेटर हैं जिनकी झोली में पांच सौ से ज़्यादा टेस्ट विकेट और तीन हज़ार से ज़्यादा टेस्ट रन हैं.

इंग्लैंड के लिए दो बार टेस्ट मैचों में हैट्रिक लेने वाले वे इकलौते गेंदबाज़ हैं. इतना ही नहीं इंग्लैंड को चार बार एशेज़ सिरीज़ में जीत दिलाने में उनका अहम योगदान रहा है.

वैसे बतौर क्रिकेटर ब्रॉड की पहचान केवल आंकड़ों तक नहीं सिमटती. वे एक नेचुरल टैलेंट वाले क्रिकेटर रहे. क्रिकेट फैंस में भी वे ख़ासे लोकप्रिय रहे हैं.

तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर वे वैसे क्रिकेटर रहे हैं जिनकी तुलना ‘अनस्टॉपेबल फोर्स’ के रूप में की जाती रही है. उनकी गेंदबाज़ी के स्पैल के दौरान क्रिकेट का रोमांच बढ़ता रहा है.

स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के...

चाहे वो 2009 का ओवल टेस्ट रहा हो, या फिर 2013 का चेस्टर-ली-स्ट्रीट का मैच हो या फिर 2015 का ट्रेंट ब्रिज़ का मुक़ाबला हो, ये एशेज़ टेस्ट आज भी ब्रॉड की गेंदबाज़ी के लिए याद किए जाते हैं.

इतना ही नहीं, साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ वांडरर्स टेस्ट हो, या 2011 में नॉटिंघम का टेस्ट या फिर 2013 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ लॉर्ड्स का टेस्ट हो.

ब्रॉड इन मुक़ाबलों में चैंपियन गेंदबाज़ बन कर उभरे.

उन्होंने इंग्लैंड के लिए पारी में छह विकेट झटकने का कारनामा, सबसे ज़्यादा 12 बार करके दिखाया है.

ब्रॉड का जन्म प्रीमैच्योर बेबी के तौर पर हुआ था. निर्धारित समय से 12 सप्ताह पहले उनका जन्म हुआ था. जन्म के समय उनका वजह दो पाउंड दो औंस ही था.

लेकिन वे इंग्लिश क्रिकेट में किसी विशालकाय कद वाले क्रिकेटर के तौर पर उभरे. टीनएज में वे क्लब क्रिकेट खेलने ऑस्ट्रेलिया गए और वहां से लौटने के बाद वे टेस्ट इतिहास के सबसे महान गेंदबाज़ों की सूची में शामिल हुए.

हालांकि ब्रॉड के लिए सब कुछ चमकदार ही नहीं रहा. टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू से तीन महीने पहले उनके करियर में वह बदनुमा दाग़ आया, जिससे उनका पीछा शायद ही कभी छूटे.

पहले टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका में भारत के युवराज सिंह ने ब्रॉड के एक ही ओवर में छह छक्के जड़ दिए थे.

हालांकि ब्रॉड के संन्यास पर युवराज सिंह ने ना केवल उन्हें याद किया है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए बधाई भी दी है.

21 साल की उम्र में किसी युवा तेज़ गेंदबाज़ का करियर, डूब सकता था. लेकिन स्टुअर्ट ब्रॉड ने ना केवल वापसी की, बल्कि अपने पांव टिकाए रखे.

करियर के शुरुआती दिनों में कहा जाता था कि ब्रॉड को उनकी लंबाई के चलते बहुत फायदा होता है, लेकिन उनमें ग्लेन मैक्ग्रा जैसी मारक क्षमता नहीं है.

ये बात कुछ हद तक सही भी थी, क्योंकि 167 टेस्ट मैचों में 74वें मैच तक ब्रॉड की गेंदबाज़ी का औसत 30 के आसपास था.

वे तीन साल तक इंग्लैंड के टी-20 कप्तान भी रहे. टीम ने जितने मैच जीते, उससे कहीं ज़्यादा मैचों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

इसमें 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान बांग्लादेश में नीदरलैंड के हाथों मिली हार भी थी. ये उनके करियर का आख़िरी टी-20 मैच था.

इसके बाद 2015 के वनडे वर्ल्ड कप में उन्होंने दो वनडे मैच खेले और इस टूर्नामेंट में भी इंग्लैंड की टीम शुरुआती दौर में ही बाहर हो गई थी.

जब लगा कि करियर ख़त्म

इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान टेस्ट क्रिकेट पर केंद्रित कर दिया. यही वजह है कि वे सचिन तेंदुलकर, जेम्स एंडरसन, रिकी पॉन्टिंग और स्टीव वॉ के बाद सबसे ज़्यादा टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी बने.

उनके करियर में ऐसे भी मौके आए जब विश्लेषकों ने उनके करियर समाप्ति की घोषणा कर दी. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ 2020 में पहले टेस्ट के लिए वे टीम से बाहर भी किए गए.

दो साल बाद इंग्लैंड की टीम एक बार वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ खेल रही थी और एंड्रयू स्ट्रॉस, टेस्ट टीम के लिए रीसेट बटन दबा चुके थे, तब ब्रॉड को एक बार फिर से बाहर रखा गया. तब भी कयास लगाए गए कि उनका करियर ख़त्म होने वाला है.

यहां से वापसी करने के बाद ओवल टेस्ट तक ब्रॉड कुल 65 विकेट झटक चुके हैं. इतने विकेट किसी और तेज़ गेंदबाज़ ने नहीं लिए हैं.

सच्चाई यही है कि इंग्लैंड के चयनकर्ता ब्रॉड की टक्कर का दूसरा गेंदबाज़ नहीं तलाश पाए हैं. ब्रॉड जैसे कैरेक्टर वाले खिलाड़ी की तलाश भी बहुत दूर की बात दिख रही है.

ऑस्ट्रेलिया में ब्रॉड को नापसंद करने वाले भी खूब हैं, इसकी एक वजह 2013 के ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में आउट होने के बाद भी उनका क्रीज़ से वापस नहीं लौटना था.

ऑस्ट्रेलियाई टीम के रिव्यू ख़त्म हो चुके थे, ब्रॉड ने उसका फ़ायदा उठाया था और 2022 में होबार्ट टेस्ट में उन्होंने स्काई कैमरे पर नाराजगी जाहिर करते हुए रोबोट को हटाने की मांग की थी.

वे अपनी भावनाओं को जाहिर करने वाले क्रिकेटर के तौर पर जाने जाते रहे हैं.

लॉर्ड्स टेस्ट में जॉनी बेरिस्टो को विवादास्पद ढंग से स्टंप आउट दिए जाने के बाद जब वे क्रीज़ पर बल्लेबाज़ी करने उतरे तो उन्होंने हर ऑस्ट्रेलियाई से झगड़ने के अंदाज़ तक बहस की.

लेकिन बीते सप्ताह जब ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ मार्नस लाबुशेन को बल्लेबाज़ी करते वक्त सामने बैठे दर्शकों से मुश्किल हो रही थी तो ब्रॉड ही दर्शकों के पास समझाने गए और उन्हें साइट स्क्रीन से दूर बैठने के लिए मनाया.

हालांकि इसी टेस्ट में जब इंग्लैंड के गेंदबाज़ों की किस्मत साथ नहीं दे रही थी, तो ब्रॉड ने लाबुशेन के विकेट की गिल्लियां बदल दीं, अगले ही गेंद पर लाबुशेन आउट हो गए.

एशेज़ सिरीज़ में इंग्लैंड के सबसे कामयाब गेंदबाज़

ब्रॉड की विदाई ऐसे वक्त में हो रही है जब ऐशेज़ सिरीज़ ऑस्ट्रेलिया के पास ही है, लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि इस सिरीज़ में वे एंडरसन के साये से पूरी तरह बाहर दिखे हैं.

इस सिरीज़ में एंडरसन बहुत कामयाब नहीं रहे हैं. उनके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर 37 साल के ब्रॉड, इंग्लैंड के लिए सबसे कामयाब गेंदबाज़ बन कर उभरे हैं.

ब्रॉड और एंडरसन की जोड़ी, बेहद कामयाब रही है लेकिन जब जब ब्रॉड, एंडरसन की गैरमौजूदगी में खेले, उनका प्रदर्शन ज़्यादा बेहतर रहा.

ब्रॉड की विदाई के साथ इंग्लैंड की टेस्ट टीम में बदलाव का दौर शुरू हो गया है.

मौजूदा टीम के आठ खिलाड़ियों की उम्र 32 साल से ज़्यादा है. बेन स्टोक्स की कप्तानी में इंग्लिश टीम के खेलने का अंदाज़ बदला है, लेकिन नई टीम के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती अलग होगी.

नई टीम में चाहे जिसे मौका मिले, लेकिन स्टोक्स को ब्रॉड जैसा दूसरा फ़ाइटर नहीं मिलेगा.

ब्रॉड ने अपने संन्यास की घोषणा में कहा, “जब मैं छोटा था तब मार्टिन जॉनसन और स्टुअर्ट पियर्से जैसे फुटबॉल दिग्गज़ मेरे आदर्श थे. मैं जब भी उनको खेलते देखता, उनके पैशन और ड्राइव को पसंद करता.”

“मैंने ऐसा कभी नहीं चाहा कि भीड़ में, या घर पर टीवी देख रहा, रेडियो सुन रहा कोई शख़्स ये कहे कि वह अपना सबकुछ नहीं झोंक रहा है. मैं जानता हूं कि मैं सबसे बेहतर खिलाड़ी नहीं हूं. लेकिन मैं अपनी क्षमता के मुताबिक कुछ भी हासिल करने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगाता रहा हूं.”

“मैंने अपना दिल और आत्मा इस खेल को दी है. मैं मैदान में कभी सुस्त हो गया था, ऐसा कहने वाले फ़ैंस मेरे ख़्याल में ज़्यादा नहीं होंगे.”

ब्रॉड का अपने बारे में ये आकलन, सच्चाई के क़रीब ही है. वे एक शानदार क्रिकेटर रहे, बेहतरीन गेंदबाज़ रहे और सबसे बढ़कर प्रतिस्पर्धा करने के मामले में वे लाजवाब रहे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)