ताजमहल में होने वाले उर्स के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिका – प्रेस रिव्यू

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अखिल भारतीय हिंदू महासभा (एबीएचएम) नाम के एक दक्षिणपंथी संगठन ने ताजमहल में होने वाले उर्स (सूफ़ी संत की पुण्यतिथि पर होने वाला समारोह) को रोकने के लिए आगरा कोर्ट का रुख़ किया है.
साथ ही संगठन ने उर्स में शामिल होने के लिए लोगों को ताजमहल में मुफ्त प्रवेश दिए जाने को रोकने के लिए भी कोर्ट से गुहार लगाई है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार याचिकाकर्ता का कहना है कि ताजमहल की देखरेख का काम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के ज़िम्मे है और एएसआई की ज़िम्मेदारी में मौजूद किसी ऐतिहासिक धरोहर में धर्मिक काम नहीं किया जाना चाहिए.
मुगल शासक शाहजहां की मौत के दिन को याद करते हुए ताजमहल में हर साल उर्स मनाया जाता है. तीन दिन का ये ख़ास समारोह इस साल फ़रवरी 6 से लेकर 8 तारीख तक होना है.
इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील अनिल कुमार तिवारी ने कहा, "एबीएचएम के डिविजन प्रमुख मीना दिवाकर और जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कोर्ट में याचिका दी है. उर्स मनाने को लेकर समिति के ख़िलाफ़ पर्मानेन्ट रोक की मांग की गई है."
अख़बार ने एबीएचएम के प्रवक्ता संजय जाट का बयान भी छापा है. वो कहते हैं कि ये याचिका एक आरटीआई (सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी) के आधार पर दी गई है जिसमें कहा गया है न तो मुग़लों ने और न ही ब्रितानियों ने कभी ताजमहल के भीतर उर्स मनाने की इजाज़त दी थी.
ये आरटीआई आगरा शहर में रहने वाले एक इतिहासकार राज किशोर राजे ने दी थी. उन्होंने एएसआई से पूछा था कि ताजमहल के परिसर के भीतर उर्स मनाने और नमाज़ पढ़ने की इजाज़त किसने दी थी.
अमेरिका के साथ हुए ड्रोन समझौते के तार गुपतवंत सिंह पन्नू के मामले से जुड़े

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इसी सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसने भारत को 31 एमक्यू-9बी ड्रोन बेचने के सौदे को मंज़ूरी दे दी है.
इस मामले से जुड़ी एक ख़बर हिंदुस्तान टाइम्स ने छापी है. अख़बार लिखता है कि विदेश मामलों की सीनेट समिति के प्रमुख बेन कार्डिन ने कहा है कि उन्होंने प्रस्तावित ड्रोन समझौते को होल्ड पर रखा था लेकिन अमेरिकी सरकार के भरोसा देने के बाद उन्होंने ये होल्ड हटा लिया है.
उनका कहना है कि "अमेरिकी सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत सरकार" अमेरिका में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साज़िश में एक भारतीय अधिकारी के शामिल होने के आरोपों की "पूरी जांच के लिए प्रतिबद्ध है."
इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उन्होंने 31 एमक्यू-9बी ड्रोन सौदे के बारे में कांग्रेस को औपचारिक तौर पर जानकारी दे दी है. इस सौदे के तहत भारत को मानवरहित विमानों के साथ-साथ, उनमें लगने वाली मिसाइलें और दूसरे उपकरण भी बेचे जाने हैं.
लेकिन ये सौदा अभी भी खटाई में पड़ सकता था, क्योंकि अगर अगले 30 दिनों तक कांग्रेस के किसी सदस्य ने इस सौदे पर आपत्ति नहीं जताई तभी इस सौदे पर आख़िरी मुहर लगने का रास्ता साफ हो सकता था.
इसके लिए विदेश मामलों की सीनेट समिति के सदस्य जेम्स रिच (रिपब्लिकन सदस्य) और विदेश मामलों की हाउस समिति के चेयर माइकल मैक्कॉल (रिपब्लिकन सदस्य) पहले ही अनुमति दे चुके हैं. अब बेन कार्डिन की अनुमति के बाद इस सौदे के अंजाम तक पहुंचने की बात एक तरह से तय हो गई है.
मणिपुर को लेकर आएगा महत्वपूर्ण फ़ैसला- सीएम बीरेन सिंह

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बीते कई महीनों से नस्लीय हिंसा झेल रहे मणिपुर को लेकर केंद्र सरकार कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसला ले सकती है. ये कहना है प्रदेश के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का.
हिंदुस्तान टाइम्स में ही छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार शनिवार को उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की जिसके बाद उन्होंने ये जानकारी दी. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया है कि सरकार क्या फ़ैसले लेने वाली है.
शाह से मुलाक़ात के बाद बीरेन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा- "निश्चिंत रहिए, मणिपुर के लोगों के हित में भारत सरकार कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसले लेने वाली है."
अख़बार लिखता है कि शनिवार को बीरेन सिंह ने राजधानी दिल्ली में गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों के साथ भी बैठक की, जिसके बारे में उन्होंने बताया कि "मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए रणनीतिक कदमों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई."
बीते साल तीन मई को प्रदेश में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच झड़पें शुरू हुई थीं जिन्होंने जल्द हिंसक रूप ले लिया, तब से ही प्रदेश में तनाव है. यहां हुई हिंसा में अब तक 210 लोगों की मौत हो चुकी है और 50 हज़ार से अधिक लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है.
प्रदेश की 32 लाख की आबादी में मैतेई बहुसंख्यक हैं, जो इम्फाल के आसपास की घाटियों में बसे हैं. वहीं आबादी की 43 फ़ीसदी हिस्सा कुकी समुदाय का है जो पहाड़ों में बसे हैं.
पूरी तरह आरटीआई से बाहर नहीं सीबीआई- हाई कोर्ट

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दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई पूरी तरह से सूचना का अधिकार क़ानून (आरटीआई एक्ट) से बाहर नहीं है और भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में उसे मांगे जाने पर जानकारी मुहैया करानी होगी.
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार आरटीआई क़ानून की धारा 24 (जिसके तहत कुछ संस्थाओं पर आरटीआई बाध्यकारी नहीं होता) के बारे में कोर्ट ने कहा कि ये धारा बताती है कि सीबीआई जैसी संस्थाओं का नाम इस क़ानून के दूसरे शेड्यूल में है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ऐसी संस्थाओं पर ये क़ानून पूरी तरह लागू नहीं होता.
30 जनवरी को दिए एक आदेश में हाई कोर्ट जज जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "धारा 24 इस बात की इजाज़त देता है कि आवेदन के ज़रिए मांगने पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जानकारी दी जाए. आरटीआई क़ानून के दूसरे शेड्यूल में संस्थाओं को जानकारी देने से छूट दी गई है, लेकिन ये इस पर लागू नहीं होता."
नवंबर 2019 में केंद्रीय सूचना कमिश्नर ने सीबीआई से कहा था कि वो एम्स के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में मौजूद दवा की दुकान के लिए खरीदे गए कीटनाशक और फॉगिंग की दवा में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी मुहैया कराए. ये जानकारी इंडियन फ़ॉरेस्ट सर्विस के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने मांगी थी, उस वक्त वो एम्स में चीफ़ विजिलेंस अधिकारी थे.
सीबीआई ने उनकी दरख्वास्त पर गौर नहीं किया जिसके बाद उन्होंने केंद्रीय सूचना कमिश्नर से अपील की.
सीबीआई ने इसके ख़िलाफ़ कोर्ट का रुख़ किया था. उसका कहना था कि धारा 24 के अनुसार वो जानकारी मुहैया कराने के लिए बाध्य नहीं है.
खाप हमारी संस्कृति- उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़

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शनिवार को उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हरियाणा के सूरजकुंड में एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए कहा कि "खाप हमारी संस्कृति है, ये हमारी सभ्यता की गहराई का प्रतीक है. कुछ छोटी-मोटी घटनाओं के आधार पर इसका मूल्यांकन नहीं किया जा सकता."
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने कहा कि "हमारी खाप संस्कृति को देखिए, आप खाप के इतिहास में जाएंगे तो पाएंगे कि खाप सकारात्मक है."
उन्होंने हरियाणा के अखाड़ों (धार्मिक नेताओं के संगठन) की भी तारीफ की और कहा कि "इनका गौरवशाली इतिहास रहा है."
कार्यक्रम में उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था पर भी बात की और कहा, "कनाडा, इंग्लैंड और फ्रांस को पीछे छोड़ कर आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. अगले दो-तीन सालों में भारत जापान और जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा."
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