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पहलगाम हमला: शांति की अपील करने वाली हिमांशी को ट्रोल्स ने निशाना क्यों बनाया?
- Author, सुमेधा पाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"हम नहीं चाहते कि लोग मुसलमानों या कश्मीरियों के ख़िलाफ़ जाएं. हम शांति चाहते हैं और केवल शांति. बेशक, हम न्याय चाहते हैं, जिन्होंने ग़लत किया है उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए."
पत्रकारों के सामने ये बात हिमांशी नरवाल ने कही थी.
वही हिमांशी, जिन्होंने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले में अपने पति, भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को खो दिया.
एक मई को विनय नरवाल का 27वां जन्मदिन था. उसी दिन हिमांशी ने यह बयान दिया. लेकिन इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा है. उन पर अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं, यहां तक कि हिंसा की धमकियां भी दी गई हैं.
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राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान
अब इस ट्रोलिंग का मामला राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया है. महिला आयोग ने कहा है कि किसी महिला को उसकी वैचारिक अभिव्यक्ति या व्यक्तिगत जीवन के आधार पर ट्रोल करना सही नहीं है.
आयोग ने अपने बयान में कहा है, "इस आतंकी हमले से पूरा देश आहत और क्रोधित है. लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल को उनके एक बयान के संदर्भ में सोशल मीडिया पर जिस प्रकार से निशाना बनाया जा रहा है, वह अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है."
आयोग ने कहा है कि किसी भी तरह की सहमति या असहमति को शालीनता और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ ज़ाहिर किया जाना चाहिए.
इस पूरे मामले पर बीबीसी ने हिमांशी नरवाल से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनके परिवार से जुड़े लोगों ने बताया, "अभी हिमांशी बात करने की स्थिति में नहीं हैं."
'ट्रोलिंग के सहारे ध्रुवीकरण की राजनीति'
हिमांशी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रोलिंग की सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निंदा की है.
एक्टिविस्ट कविता कृष्णन कहती हैं, "कुछ दिन पहले तक हिमांशी और उनके पति विनय की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल थी. लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे और इंसाफ़ की माँग कर रहे थे. आज वही लोग हिमांशी के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दे रहे हैं और उनके देश प्रेम पर सवाल उठा रहे हैं."
उनका मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद ''मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक माहौल बनाना है, इन सबके बीच जब हिमांशी जैसी कोई महिला इस नैरेटिव को ख़ारिज करती है तो वे एक टारगेट बन जाती हैं."
वो कहती हैं, "जेएनयू से जोड़कर उनका नाम उछालने की कोशिश की जा रही है. ऐसा कर उन्हें एक देशविरोधी के रूप में पेश करने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय से दक्षिणपंथी सोशल मीडिया हैंडल्स करते रहे हैं."
महिला आयोग के बयान के बाद ये भी मांग उठ रही है कि जो लोग सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां करते हैं, उनका सिर्फ़ खंडन नहीं, बल्कि भड़काऊ बयानबाज़ी करने वाले हैंडल्स पर कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए. संगठनों ने इस मामले में ऐसे हैंडल्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की भी मांग की है.
ऐसे ही एक संगठन से जुड़ी राजनीतिक विश्लेषक जगमती सांगवान इस ट्रोलिंग पर कहती हैं, "बार-बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की ट्रोलिंग और धमकी भरे बयान सामने आते हैं. इन घटनाओं से यही सवाल उठता है कि क्या हमारे पास हेट स्पीच को कंट्रोल करने का कोई तरीका नहीं रह गया है? इसके साथ-साथ बड़ी ज़िम्मेदारी इन प्लेटफॉर्म्स की भी बनती है."
अलग-अलग पार्टी के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है और कार्रवाई की मांग की है.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने नरवाल के लिए लिखा है, ''उन्हें गालियां दी जा रही हैं, ट्रोल किया जा रहा है और नफ़रत का शिकार बनाया जा रहा है क्योंकि उन्हें नफ़रत के बजाय न्याय की मांग की. वह अपने पति की यादों के साथ जीवन बिताने को मजबूर है, और ये बीमार ट्रोल्स उसे और नफ़रत दे रहे हैं.''
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने भी हिमांशी का समर्थन करते हुए, एफ़आईआर दर्ज कराने की मांग की है.
हालांकि ट्रोलिंग के बीच सोशल मीडिया पर ऐसे भी लोग हैं जो हिमांशी के बयान का समर्थन कर रहे हैं.
एक व्यक्ति ने एक्स पर लिखा, "विनय नरवाल अमर रहे, हिमांशी नरवाल ज़िंदाबाद. ये देश विनय और हिमांशी जैसे लोगों की वजह से मजबूत है न कि अभद्र ट्रोलर्स की वजह से."
कुछ लोगों ने ये भी लिखा, "इस ट्रोलिंग की वजह से अंतत: पाकिस्तान समर्थित आंतकवादियों की मंशा ही पूरी हो रही है."
हिमांशी के अलावा दूसरे भी बने निशाना
हिमांशी अकेली नहीं हैं जो ट्रोलिंग का निशाना बनी हैं.
पहलगाम हमले के बाद ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा भी ट्रोलिंग का शिकार हुए थे, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम को भारत आने का न्योता दिया था.
सोशल मीडिया पर इस मामले को जिस तरह से बढ़ावा मिला, ऐसे में नीरज चोपड़ा को बयान जारी करना पड़ा था.
इस विवाद पर नीरज चोपड़ा ने कहा था, "मैं कम बोलने वाला आदमी हूं, इसका मतलब ये नहीं है कि जो ग़लत है मैं उसके ख़िलाफ़ नहीं बोलूंगा. ख़ासकर तब जब सवाल देश के प्रति मेरे प्यार और परिवार के सम्मान पर उठाए जा रहे हों."
"मैंने अरशद को जो निमंत्रण भेजा, वो एक एथलीट का दूसरे को भेजा निमंत्रण था. न इससे कुछ ज़्यादा, न इससे कम. ''नीरज चोपड़ा क्लासिक'' का मकसद ये था कि सर्वश्रेष्ठ एथलीट्स को भारत बुलाया जाए और हमारे देश में वर्ल्ड क्लास खेल आयोजन हो पाएं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित