You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सुखबीर सिंह बादल पर हमला: किसने चलाई गोली, पुलिस ने क्या-क्या बताया?
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर गोली चलाई गई है.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन के मुताबिक़, गोली चलाने वाला व्यक्ति भीड़ में था.
पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया, ''सुखबीर सिंह बादल पर गोली चलाने वाले हमलावर नारायण सिंह चौड़ा को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. पुलिस ने हमले को नाकाम कर दिया है. सुरक्षा घेरे को और दुरुस्त कर दिया गया है. चौड़ा कुछ करते, उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.''
अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने पूरे मामले पर कहा, ''पुलिस की सतर्कता और तैनाती के कारण यह हमला नाकाम रहा. पंजाब पुलिस के ऋषपाल सिंह, जसबीर और परमिंदर ने सतर्कता दिखाई और हमले को नाकाम कर दिया.''
''हमलावर नारायण सिंह चौड़ा का आपराधिक अतीत रहा है. उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. सुखबीर सिंह बादल की सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम किए गए हैं.''
घटना के जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें हमलावर को सुखबीर सिंह बादल के काफ़ी क़रीब देखा जा सकता है.
वीडियो में दिख रहा है कि जैसे ही हमलावर ने पिस्तौल निकाला, सुरक्षाकर्मी उसकी ओर बढ़ा और उसे रोक दिया. इसी बीच गोली चलने की आवाज़ भी सुनाई देती है.
समाचार एजेंसियों के वीडियो में देखा जा सकता है कि सुखबीर बादल पैर में चोट लगने के कारण व्हीलचेयर पर बैठकर दरबार साहिब के बाहर सेवा कर रहे थे.
सुखबीर सिंह बादल को सोमवार को अकाल तख़्त की ओर से धार्मिक सज़ा सुनाई गई थी.
कौन है गोली चलाने वाला शख़्स?
बीबीसी सहयोगी पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन के मुताबिक़ अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने गोली चलने की पुष्टि की है.
उन्होने कहा कि जब सुखबीर सिंह बादल दरबार साहिब के गेट पर सेवारत थे, तो उन पर हमले की कोशिश की गई थी.
पुलिस के मुताबिक़ गोली चलाने वाले का नाम नारायण सिंह चौड़ा है. नारायण सिंह खालिस्तान आंदोलन के दौरान सक्रिय थे.
नारायण सिंह कथित तौर पर खालिस्तान लिबरेशन फ़ोर्स और अकाल फ़ेडरेशन से जुड़े हैं.
चौड़ा बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में भी अभियुक्त थे. पुलिस ने उन्हें 2013 में गिरफ़्तार किया था.
नारायण सिंह चौड़ा "कॉन्सपिरेसी अगेंस्ट खालिस्तान" पुस्तक के लेखक भी हैं.
पुलिस ने क्या बताया?
इस मामले पर पंजाब के एडीसीपी हरपाल सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''हमारे पास सुरक्षा के पुख़्ता इंतजाम थे. सुरक्षा को लेकर कमिश्नर की ओर से सख़्त निर्देश जारी किए गए थे.''
हरपाल सिंह ने दावा किया कि पुलिस पहले से ही हमलावर पर नज़र रख रही थी.
उन्होंने कहा, "हम सुबह सात बजे से ही यहाँ सुरक्षा व्यवस्था देख रहे थे. सुरक्षा कारणों से सुखबीर सिंह बादल की घेराबंदी कर रखी थी."
हरपाल सिंह ने कहा, “हमलावर नारायण सिंह चौड़ा हैं, जिन्हें मंगलवार को दरबार साहिब के आसपास घूमते देखा गया था. बुधवार को वह सबसे पहले दरबार साहिब में मत्था टेकने गए थे.”
उन्होंने कहा, “उनकी ओर से कोई सीधी गोलीबारी नहीं हुई क्योंकि हमारे सुरक्षाकर्मी सतर्क थे. हम सतर्क थे और उसकी गतिविधियों पर पहले से ही नज़र रख रहे थे."
अकाली दल ने क्या कहा?
शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता डॉ.दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि उनकी पार्टी बादल पर हुए जानलेवा हमले की निंदा करता करती.
उन्होंने कहा कि ये पंजाब के लिए बहुत बड़ी घटना है.
चीमा ने कहा, "पूरी घटना की न्यायिक जाँच होनी चाहिए. हमें राज्य सरकार पर भरोसा नहीं है. मेरा सवाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के डीजीपी से है. किसी को इस घटना की ज़िम्मेदारी लेनी होगी."
पंजाब से कांग्रेस के सांसदों ने भी हमले की आलोचना की है.
पंजाब कांग्रेस के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वढ़िंग ने कहा, "ऐसा नहीं होना चाहिए था. मैं इसे राज्य सरकार की नाकामी मानता हूँ."
चंड़ीगढ़ से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की है.
बादल और उनके साथियों को अकाल तख़्त की सज़ा
इससे पहले पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल को सोमवार को अकाल तख़्त की ओर से धार्मिक सज़ा सुनाई गई थी.
अकाल तख़्त सिख धर्म से जुड़ी सबसे बड़ी धार्मिक संस्था है और उसे ये अधिकार है कि वो अपराधों के लिए किसी भी सिख को तलब करे और उसके ख़िलाफ़ धार्मिक सज़ा का एलान करे, जिसे ‘तन्खाह’ कहते हैं
सिख परंपराओं के अनुसार, अगर कोई सिख, सिख धर्म के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ काम करता है या सिख समुदाय की भावनाओें के विपरीत काम करता है तो उसे अकाल तख़्त की ओर से धार्मिक सज़ा सुनाई जा सकती है.
दो दिसंबर को सिख प्रतिनिधियों और सिखों के पाँच प्रमुख धर्म स्थलों के मुखिया की अकाल तख़्त में मीटिंग हुई थी.
इसी मीटिंग में सुखबीर बादल समेत 2007 से 2017 के बीच उनके कैबिनेट में मंत्री रहे अधिकांश लोगों को धार्मिक सज़ा दी गई.
मंगलवार को इसी के तहत अकाली नेताओं ने दरबार साहिब में सेवा दी.
सुखबीर बादल को पैर में चोट लगी है इसलिए उन्हें स्वर्ण मंदिर के गेट पर बरछा लेकर पहरा देने की सज़ा मिली है. इसी के तहत वो बुधवार को मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे थे.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)