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भारत और कनाडा के बीच बढ़ते तनाव से क्यों चिंतित हैं वीज़ा आवेदक
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी संवाददाता
पिछले साल भारत में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के समय भारत और कनाडा के बीच पैदा हुआ कूटनीतिक तनाव अब चरम पर पहुंच गया है.
इस सोमवार भारत और कनाडा दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को देश से निकालने का आदेश दिया है.
ख़ालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच को लेकर भारत और कनाडा के बीच चल रहे विवाद ने सोमवार रात उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब कनाडा ने दावा किया कि उसने अपने यहां तैनात छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने का फ़ैसला किया है.
इनमें कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा भी शामिल थे. हालांकि, भारत ने कनाडा के आरोपों को ख़ारिज करते हुए दावा किया था कि उसने ख़ुद ही अपने राजनयिकों को वापस बुलाया है.
भारत ने दिल्ली में कनाडा के मिशन से छह राजनयिकों को वापस कनाडा जाने को कहा है.
कनाडा के भारतीय एजेंसियों पर अपराधी समूहों के साथ मिलकर कनाडा में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, ख़ासकर ख़ालिस्तानी समर्थकों को निशाना बनाने के आरोप लगाने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.
हालांकि, भारत ने कनाडा के इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है. कनाडा की पुलिस और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने मीडिया को दिए बयानों में भारत के अपराधी समूह बिश्नोई गैंग का नाम लिया है.
इस बढ़े हुए कूटनीतिक तनाव के बीच, भारत से कनाडा जाने के प्रयास करने वाले लोगों के लिए परेशानियां बढ़ गई हैं.
भारत और कनाडा के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव से ख़ासकर भारत के पंजाब प्रांत में लोग चिंतित हैं. ये वो लोग हैं जिनके परिजन या तो कनाडा में रहते हैं या कनाडा जाने की तैयारी कर रहे हैं.
परेशान क्यों वीज़ा के आवेदक?
कनाडा जाने का प्रयास कर रहे लोगों को चिंता है कि मौजूदा तनाव उनके वीज़ा आवेदन को प्रभावित कर सकता है.
दिल्ली में, शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन स्थित वीज़ा प्रोसेसिंग सेंटर में कनाडा के वीज़ा काउंटर पर बाक़ी देशों के मुक़ाबले कम भीड़ है.
सेंटर के बाहर बैठे पंजाब के पटियाला से आए करण अपने पिता विजय कुमार के वीज़ा एप्लीकेशन को लेकर चिंतित हैं.
उनके ताऊ के बेटे पिछले कई सालों से कनाडा में रहते हैं और उनकी तरक्की देखकर उनके पिता भी अब कनाडा में जाकर काम करना चाहते हैं.
करण कहते हैं, “मेरे पिता ने दो महीने पहले कनाडा के वीज़ा के लिए आवेदन दिया था. अब तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है. भारत और कनाडा के रिश्तों में आई दरार से हम चिंतित हैं.”
करण पंजाब के जिस इलाक़े से आते हैं, वहां के युवाओं में भारत के बाहर जाकर पढ़ने और वहीं बस जाने का क्रेज़ है.
उनके साथ उनके कुछ दोस्त भी आए हैं, जो जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देशों में जाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.
करण कहते हैं, "मेरे ताऊ के बेटे ने मेरे पिता के लिए कनाडा में काम की व्यवस्था की है, स्पांसर करने के दस्तावेज़ भी भेजे, लेकिन अब हमें लगता है कि उनकी वीज़ा एप्लीकेशन लटक गई है."
वीज़ा नियमों में कोई बदलाव नहीं
हालांकि, भारत और कनाडा के बीच बढ़े तनाव की वजह से कनाडा ने अपने वीज़ा नियमों में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है.
कनाडा के वीज़ा प्रक्रिया में देरी पहले से ही वीज़ा आवेदकों के लिए चिंता का विषय रही है.
स्वतंत्र वीज़ा काउंसलर प्रिया सिंह कहती हैं, “जी-20 के दौरान भारत और कनाडा के बीच जो राजनयिक तनाव बढ़ा था, उसका असर वीज़ा आवेदनों पर देखने को मिला है. कनाडा के वीज़ा के बारे में जानकारी लेने वालों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, लेकिन इस सबके बावजूद जिन लोगों को जाना है, वो प्रयास कर ही रहे हैं.”
प्रिया सिंह ख़ासतौर पर उन लोगों की मदद करती हैं, जो अपने परिवार से मिलने के लिए या पढ़ने के लिए कनाडा जाना चाहते हैं.
प्रिया कहती हैं, “कनाडा में जीवनसाथी को बुलाने के नियमों में भी बदलाव हुआ है. अब वहां साथ रहने के लिए वो लोग ही जीवनसाथी को बुला सकते हैं जो कम से कम दो साल का कोर्स वहां कर रहे हों.”
हालांकि, प्रिया सिंह ये भी मानती हैं कि ताज़ा तनाव का क्या असर होगा ये आगे चलकर पता चलेगा.
प्रिया कहती हैं, “भारत से लोग, ख़ासकर पंजाब और गुजरात से सबसे ज़्यादा कनाडा जाते हैं. कनाडा पढ़ने के लिए जाने वाले अधिकतर लोग वहीं बसना चाहते हैं.”
वह कहती हैं, "लोगों में कनाडा जाने को लेकर क्रेज़ इसलिए है ,क्योंकि वहां स्थायी निवासी बनने के नियम यूरोपीय देशों या अमेरिका के मुक़ाबले आसान हैं. लेकिन भारत और कनाडा के बीच बढ़े मौजूदा तनाव के कारण कनाडा जाने का इरादा रखने वाले लोगों में चिंताएं तो है हीं.”
वीज़ा आवेदकों की चिंता
एक चिंता ये भी है कि कहीं, कनाडा आगे चलकर अपने नियमों में बदलाव ना कर दे और वहां स्थायी निवासी बनने की प्रक्रिया और मुश्किल ना हो जाए.
वीज़ा सेंटर के बाहर बैठी एक युवती, जो कनाडा में दाख़िला लेकर वहां पढ़ाई करने और वहीं बसने का इरादा रखती है.
अपना नाम ना ज़ाहिर करते हुए कहती है, “कनाडा में एज़ुकेशन लेने के बाद वहां काम मिलना और फिर स्थायी निवासी बनना आसान है. मैं वहां जाकर रहना चाहती हूं, इसलिए ही कनाडा में एडमिशन लेने का प्रयास कर रही हूं. लेकिन ये चिंता भी मन में है कि अगर आगे चलकर कनाडा ने नियम बदल दिए तो क्या होगा.”
पंजाब के फ़िरोज़पुर ज़िले के ढाना शहीद गांव निवासी सिमरतपाल सिंह ने बीबीसी पंजाबी से बात करते हुए अपनी चिंताएं ज़ाहिर की.
सिमरतपाल सिंह की बहन कनाडा के सरे शहर में रहती हैं. पिछले साल उनके बेटे का जन्म हुआ था जिसे देखने के लिए वो कनाडा जाना चाहते हैं.
सिमरतपाल कहते हैं, “कनाडा का वीज़ा हासिल करना पहले जितना आसान था अब नहीं रहा. मैं पिछले तीन महीने से वीज़ा का इंतज़ार कर रहा हूं. भारत और कनाडा के बीच जो तनाव चल रहा है, उसका सीधे तौर पर या अप्रत्यक्ष रूप से वीज़ा प्रक्रिया पर असर पड़ ही रहा है.”
सिमरतपाल कहते हैं, “मैं पहली बार अपने भांजे को देखने जा रहा हूं लेकिन मुझे डर है कि कहीं भारत और कनाडा के बीच का ये तनावपूर्ण माहौल इसमें बाधा ना बन जाए.”
वहीं, फ़िरोज़पुर की जीरा तहसील के सोढ़ीवाला गांव की रहने वाली अमरजीत कौर ने बताया कि उनकी बेटी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में रहती है और इसी महीने उसे बच्चा होने वाला है.
अमरजीत कौर, इस वक़्त अपनी बेटी के साथ रहना चाहती थीं.
अमरजीत कहती हैं, “मां और बच्चे की देखभाल के लिए मुझे अक्टूबर में कनाडा में होना था. लेकिन फ़ाइल प्रोसेसिंग में लंबा समय लगने के कारण वीज़ा अभी नहीं आया है.”
अमरजीत कहती हैं, “दोनों देशों के बीच बढ़े राजनीतिक तनाव से हमारे जैसे लोगों के आवेदन प्रभावित नहीं होने चाहिए.”
वीज़ा काउंसलर पारुल सिंह कहती हैं, “पहले वीज़ा आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में आमतौर पर पंद्रह दिन से एक महीना तक लगता था. लेकिन अब पारिवारिक वीज़ा आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में छह महीने तक का समय लग रहा है, जो बहुत ज़्यादा है.”
क्या कहते हैं आंकड़े?
बहुत से भारतीय कनाडा जाने का इरादा रखते हैं.
इसी साल प्रकाशित एक रिपोर्ट में नेशनल फ़ाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी ने बताया था कि साल 2013 से 2023 के बीच भारत से कनाडा जाने वालों की तादाद 32828 से बढ़कर 139715 पहुंच गई थी. यानी पिछले एक दशक में भारत से कनाडा जाने वालों की संख्या 326 प्रतिशत बढ़ी है.
वहीं, पिछले दो दशक के दौरान कनाडा के विश्वविद्यालयों में भारतीय आवेदकों की संख्या 5800 प्रतिशत बढ़ी है.
साल 2000 में कनाडा के कॉलेजों में 2181 भारतीय छात्र पढ़ रहे थे. ये संख्या 2021 में 128928 थी.
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है, इनमें भी अधिकतर लोग पंजाब से हैं.
2021 के आंकड़ों के मुताबिक़, कनाडा में चौदह लाख से अधिक भारतीय हैं, जो कुल आबादी का 4.4 प्रतिशत हैं.
भारतीय मूल के सबसे ज़्यादा लोग टोरंटो में रहते हैं. आंकड़़ों के मुताबिक़ टोरंटो में क़रीब पांच लाख भारतीय हैं.
कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की आबादी साल 2016 से 2021 के बीच 38 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. ये कनाडा में आबादी के लिहाज़ से सबसे तेज़ी से बढ़ता नस्लीय समूह है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित