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कनाडा के हिन्दू मंदिर में लोगों पर हमले को लेकर क्या कह रहे हैं वहाँ के सिख नेता
कनाडाई मीडिया के अनुसार, रविवार को ब्रैम्पटन शहर के हिंदू मदिर में हिसंक झड़प के मामले में एक स्थानीय पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है.
इस हिसंक झड़प में खालिस्तान समर्थकों का हाथ बताया जा रहा है.
पुलिस के मुताबिक़ मंदिर के बाहर प्रदर्शन करने के आरोप में तीन लोगों के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज किया गया है.
पील पुलिस अधिकारी रिचर्ड चिन की ओर से कनाडाई न्यूज़ आउटलेट 'सीबीसी न्यूज़’ को भेजे ई-मेल में बताया गया है कि पुलिस को प्रसारित हो रहे उस वीडियो के बारे में पता है, जिसमें एक ऑफ-ड्यूटी पुलिस अफसर प्रदर्शन में शामिल दिख रहा है. सीबीसी के अनुसार, उस पुलिस अफ़सर को निलंबित कर दिया गया है.
कनाडा के सिख नेता क्या कह रहे हैं?
ट्रूडो सरकार की सहयोगी रही न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है.
जगमीत सिंह ने एक्स पर लिखा, ''कनाडा में हर व्यक्ति को अपने पूजास्थल में जाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. मैं हिंदू सभा मंदिर पर हमले की निंदा करता हूं. हिंसा कहीं भी हो ग़लत है. मैं तमाम समुदायों के नेताओं की ओर से शांति के लिए की गई अपील का समर्थन करता हूं.''
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने जगमीत सिंह की प्रतिक्रिया पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,'' जगमीत मामले को उलझा रहे हैं. यह हर ‘कनाडाई’ का मामला नहीं है. हिंदू गुरुद्वारा पर हमले नहीं कर रहे हैं. ये कहने का मतलब क्या है कि हिंसा कहीं भी ग़लत है. ये उनके सहयोगी ख़ालिस्तानियों की ओर से की गई हिंसा को संदर्भ से हटा कर देखने का मामला है.''
कनाडा के एक और सिख नेता और मिसिसाऊगा के सांसद इकविंदर सिंह गहीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर और माल्टन की श्री गुरु सिंह सभा पर जो ग़ैर-क़ानूनी हरकत के साथ अभद्रता हुई वो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. हर कनाडाई नागरिक को पूरी स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है. ऐसी कार्रवाइयों की निंदा होनी चाहिए. मैं लोगों से शांति की अपील करता हूं.
जगमीत सिंह की जड़ें पंजाब के बरनाला ज़िले में ठिकरिवाल गांव से जुड़ी हैं.
उनका परिवार 1993 में कनाडा चला गया था.
भारत में 1984 में सिख विरोधी दंगे को लेकर जगमीत हमेशा से मुखर रहे हैं. कनाडा में इसे लेकर निकाली गई कई झांकियों पर भारत ने विरोध जताया था. इसमें इंदिरा गांधी के पुतले को गोली मारते दिखाने वाली झांकियां भी शामिल हैं.
दिसंबर 2013 में जगमीत सिंह को अमृतसर आने के लिए भारत ने वीज़ा नहीं दिया था.
2013 में जब भारत सरकार ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार किया था तो टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ''मैं 1984 के दंगा पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाने की बात करता हूँ इसलिए भारत सरकार मुझसे ख़फ़ा रहती है. 1984 का दंगा दो समुदायों के बीच का दंगा नहीं था बल्कि राज्य प्रायोजित जनसंहार था.''
ट्रूडो पर क्या बोले कैप्टन अमरिंदर सिंह
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ब्रैम्पटन के मंदिर पर हमले का हवाला तो नहीं दिया है लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर कहा,''जो सरकार राजनीतिक फ़ायदे के लिए आतंकवादी या अलगाववादी आंदोलन को संरक्षण देती है वो गै़र ज़िम्मेदार है और एक हद तक आपराधिक है.''
''इस बारे में काफ़ी मज़बूत धारणाएं हैं कि ट्रूडो अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए पंजाबियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने ये अहसास नहीं हो रहा कि ख़ुद उनके देश और भारत में पंजाबियों के साथ उनका प्रेम घट रहा है. ''
''एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति को दशकों से दोनों देशों के बीच की एक मज़बूत दोस्ती को अस्थिर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.''
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ब्रैम्पटन के हिंदू मंदिर पर हमले का पीएम मोदी की ओर से विरोध पर सोशल मीडिया एक्स पर लिखा,''कनाडा और भारत के संबंधों को 2023 से ही पटरी से उतारने की प्रक्रिया में ट्रूडो ने ख़ुद निजी तौर पर भारत के ख़िलाफ़ हमला किया है. लेकिन मोदी द्विपक्षीय विवाद को लेकर सार्वजनिक तौर पर बोलने से बचते रहे थे. लेकिन अब उधर से धक्का देने के बाद आख़िरकार उन्हें बोलना पड़ा.''
भारत और कनाडा के बिगड़ते रिश्ते
दरअसल पिछले कुछ समय से कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की ओर मंदिरों के बाहर प्रदर्शन करने के कई मामले सामने आए हैं.
भारत का कहना है कि कनाडा में ट्रूडो सरकार खालिस्तान समर्थकों की ओर से भारत विरोधी प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही है. उसने भारतीय राजनयिकों के ख़िलाफ़ समर्थकों के प्रदर्शन को लेकर भी नाराजगी जताई है.
भारत ने हिंदू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन और हमलों पर भी गंभीर चिंता जताई है.
भारत और कनाडा के रिश्ते तब और बिगड़ गए जब पिछले साल पिछले साल जून में खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में वैंकूवर के नज़दीक बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
कनाडा के प्रधानमंत्री ने इस हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था. इन आरोपों को लेकर भारत और कनाडा के बीच संबंध इतने नाजुक स्तर पर चले गए कि दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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