ब्यूटी इंडस्ट्री की जानी मानी शख़्सियत इस उद्योग को 'सेक्सिस्ट' क्यों मानती हैं?

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- Author, एमीलिया बटरली
- पदनाम, बीबीसी 100 वीमेन
हुडा कटान जब सार्वजनिक जगहों पर जाती हैं तो उनके प्रशंसक उनका इस तरह स्वागत करते हैं जैसा आम तौर पर शीर्ष म्यूजीशियन या हॉलीवुड के फ़िल्मी सितारों का होता है.
अपने कॉस्मेटिक ब्रांड हुडा ब्यूटी के 10वें सालगिरह के मौके पर उन्होंने एफ़िल टॉवर के नजदीक पेरिस की एक बिल्डिंग को अधिग्रहित किया है और उसके अंदर हर चीज़ को हॉट पिंक में बदल डाला है.
वहां के मेक-अप स्टेशन उनके उत्पादों से भरे हुए हैं, चारो ओर खूबसूरत चमकीले नियोन साइन हैं और हर जगह सुंदर लोग.
जब वो पहुंचती हैं तो सड़क पर खड़े उनके प्रशंसक चिल्लाने लगते हैं. अंदर, जब वो सीढ़ियां चढ़ती हैं, वहां आमंत्रित एनफ़्लूएंसर और मेकअप प्रोफ़ेशनल उनके नाम के नारे लगाने लगते हैं- "हु-डा, हु-डा, हु-डा."
लोग उनके साथ सेल्फ़ी लेने के लिए लाइन लगाए हुए हैं, कुछ की आंखों में खुशी के आंसू छलक जाते हैं जब वो उन्हें गले लगाती हैं. इन सबके दौरान काटन की मुस्कुराहट थमती नहीं है.
महिलाओं को वस्तु मानना

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इस साल बीबीसी 100 वीमेन की उस सूची में शामिल लोगों में काटन भी शुमार हैं, जिसमें दुनिया भर की 100 प्रेरणादाई और प्रभावी महिलाओं के नाम शामिल किए जाते हैं.
हुडा काटन का एक अरब डॉलर का कॉस्मेटिक बिज़नेस है और इंस्टाग्राम पर उनका सबसे बड़ा मेक अप ब्रांड है जिस पर पांच करोड़ फ़ालोवर हैं.
लेकिन वो सौंदर्य प्रसाधन उद्योग और सोशल मीडिया दोनों की तीखी आलोचना करती हैं.
वो कहती हैं, “मुझे लगता है कि सौंदर्य प्रसाधन उद्योग सेक्सिस्ट है. यह कई बार महिलाओँ को वस्तु की तरह पेश करता है. यह वास्तव में महिलाओँ को सिर्फ उनके रूप रंग तक सीमित कर सकता है.”
वो कहती हैं ‘तड़क भड़क को पसंद’ करने वाली महिला के तौर पर वो जानती हैं कि रूप रंग के आधार पर उनके बारे में धारणा बनाना कितना हताशाजनक होता है.
लेकिन वो स्वीकार करती हैं कि लोगों के बारे में बहुत जल्द धारणा बना लेना सामूहिक विफलता है- और इस पर उनकों काम करने की ज़रूरत है.
जब वो पहली बहार बिज़नेस वीमेन बनीं, वो कहती हैं कि उन्होंने पाया कि उद्योग में कुछ लोगों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया.
वो कहती हैं, "मैंने बहुत कठिन संघर्ष किया. अक्सर जब हम मीटिंग में होते तो लोग मुझसे सीधे मुख़ातिब होने की बजाय मेरे पति से बात करते और मुझे पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते."
उनके पति कहते, "मुझसे नहीं उनसे बात करिए." वो बताती हैं कि लोग तब भी उनसे मुख़ातिब होकर अपनी बात जारी रखते.
काली त्वचा

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काटन सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में समावेशी और प्रतिनिधित्व को लेकर धीमी प्रगति से नाख़ुश हैं.
वो इराक़ से टेनेसी में आए प्रवासियों की बेटी के रूप में पली बढ़ीं. वो कहती हैं कि उन्हें हमेशा ये जताया गया कि वो आकर्षक नहीं थीं.
काटन कहती हैं कि उनके लिए ये सबसे अहम है कि वे अपने उत्पादों को गहरे रंग में पेश करें और ऐसे फ़ाउंडेशन बेचें जो त्वचा के विभिन्न रंगों से मेल खाए.
लेकिन वो स्वीकार करती हैं कि इस दिशा में पूरा उद्योग कुछ हद तक शायद सही दिशा में बढ़ रहा है लेकिन वो कहती हैं कि ये ”कछुए की गति” है.
"निर्माताओं के साथ मैं लैब में रही हूं और मैंने उनसे कहा कि मुझे त्वचा के गाढ़े रंग वाला उत्पाद चाहिए. और मैंने देखा कि उन्होंने ठीक वैसे ही काले पिगमेंट को इसमें डाला, लेकिन लोगों की त्वचा कई अलग अलग रंगों से मिलकर बनी होती है."
"मैं सोचती हूं कि अभी भी समझदारी की कमी है. और यह वास्तव में निर्माताओं पर निर्भर करता है और कुछ ब्रांडों पर भी."
'डोपामाइन हैकिंग'

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काटन की सफ़लता का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी है, जहां वो मेक अप ट्यूटोरियल और रिव्यू साझा करती हैं. इसके अलावा दुबई में अपने घर पर परिवार और दोस्तों के साथ बिताए पलों को भी साझा करती हैं.
उनकी व्यवस्थित जीवनशैली, ब्यूटी ब्लॉगर के रूप में उनके शुरुआती दिनों से हुए स्वाभाविक विकास का नतीजा है.
शुरू में उन्हें सोशल मीडिया से बहुत लगाव था. वो कहती हैं, "मैं सोचती थी कि ये सबसे अच्छी चीज है. ये विचारों को लोकतांत्रिक बनाता है. यह हर किसी को अपनी आवाज़ उठाने का मौका देता है. ये ऐसी जगह मानी जाती है जहां लोग एक दूसरे से जुड़े रहते हैं."
वो कहती हैं कि इसकी बजाय अब "यह एक डोपामाइन हैकिंग एल्गोरिद्म बन चुका है ताकि लोग अपनीं आंखों को स्क्रीन से हमेशा चिपकाए रखें. "
अब वो सोशल मीडिया से बहुत गहरे तौर पर निराश हैं, "क्या अब मैं सोशल मीडिया से सहमत हूं? क्या ये भविष्य के लिए अच्छा है? नहीं, मैं ऐसा नहीं समझती. मुझे अब ऐसा नहीं लगता."
उनके हिसाब से इसकी सबसे बड़ी समस्या है कि वो महिलाओं पर परफ़ेक्ट होने का दबाव पैदा करता है.
काटन कहती हैं, “मुझे लगता है कि समाज महिलाओं को लेकर हमेशा ही सख़्त रहा है, लेकिन अब सोशल मीडिया के ज़माने में उम्मीदें कुछ ज़्यादा ही हैं. जब मैं सोशल मीडिया पर जाती हूं तो कभी कभी मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि मैं कभी भी पर्याप्त सुंदर नहीं हो सकती. मैं कभी भी पर्याप्त सफलता हासिल नहीं कर सकती.”
वो "100 प्रतिशत" स्वीकार करती हैं कि इस लिहाज से वो इस समस्या का हिस्सा हैं लेकिन उनका कहना है कि वो इसकी शिकार भी हैं.
"अपने लुक के लिए पहचाने जाने वाले व्यक्ति के रूप में आप कभी कभी अपनी छवि में पूरी तरह कैद हो जाती हैं."
वो कहती हैं कि लोग ये उम्मीद करने लगते हैं कि आपके नाखून सुघड़ हों, बाल और त्वचा के रंग बिल्कुल परफ़ेक्ट हों, जबकि सच्चाई ये नहीं है.
"मैंने लंबे समय तक महसूस किया कि मैं अपने इंस्टाग्राम हैंडल की कैदी थी. मैंने महसूस किया कि चलो अब मैं बाहर जाती हूं, मैं हुडा ब्यूटी हूं. कभी कभी मैं खुद को हुडा अगली (बदसूरत) महसूस करती हूं."
राजनीतिक विचार

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सोशल मीडिया पर भारी लोकप्रियता के कारण काटन जो कुछ भी कहती हैं उससे लोग आकर्षित होते हैं.
वो कहती हैं, “जैसे जैसे मेरी आवाज़ की पहुंच व्यापक हुई और प्लेटफ़ॉर्म से भी बड़ी हो गई, मुझे कुछ बातें कहने की ज़रूरत महसूस होने लगी.”
"महिलाओं पर असर होने वाली चीजों से मैं प्रभावित होती हूं और साथ ही अपने समुदाय को प्रभावित करने वाली चीजों से भी."
जब ये इंटरव्यू हुआ, उसी समय सात अक्टूबर को हमास का इसराइल पर हमला हुआ और उसके बाद ग़ज़ा पर हमले शुरू वाले थे.
इसराइल पर हमले में 1200 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया.
हमास प्रशासित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, तबसे अबतक ग़ज़ा में 14,000 से अधिक मारे जा चुके हैं, जिनमें 4,500 बच्चे थे.
जब यह संघर्ष और तेज़ हुआ, काटन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को फ़लस्तीन के समर्थन के लिए इस्तेमाल किया, जिस पर सकारात्मक टिप्पणियां आईं और आलोचनाएं भी.
उन्होंने जुलाई में बीबीसी 100 वीमेन को बताया था, “मैं कुछ राजनीतिक चीजों को लेकर मुखर हूं. मैं खुद को राजनीतिक एक्सपर्ट नहीं मानती. लेकिन जब मैं कुछ देखती हूं और उसके बारे में कुछ जानती हूं तो निश्चित तौर पर उसे पोस्ट करना चाहती हूं.”
यहां तक कि इसराइल-ग़ज़ा में मौजूदा हालात पैदा होने से पहले, काटन मध्य पूर्व में मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाती रही हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस इलाक़े के राजनीतिक मुद्दों पर बहुत बात हुई नहीं है.
वो कहती हैं, “कभी कभी मैं बिल्कुल परेशान हो जाती हूं जब मैं चीजों को घटित होते देखती हूं. कभी कभी लगता है- क्या मेरी पास सही सूचना है? क्या मैं इसे पोस्ट कर सकती हूं? लेकिन मैं हमेशा जितना हो सकता है, पोस्ट करना चाहती हुं.”
सोशल मीडियाः असुरक्षित जगह

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जब भी मैसेज भेज कर लोग उनसे पूछते हैं- "आपकी ज़िंदगी इतनी परफ़ेक्ट कैसे है?" वो ईमानदारी से जवाब देती हैं कि ऐसा नहीं है.
काटन कहती हैं, “सोशल मीडिया को सुरक्षित बनाने की ज़रूरत है. हालांकि यह सुरक्षित माहौल इंस्टाग्राम पर है लेकिन हमें इसे सुरक्षित बनाना होगा.”
वो बताती हैं कि वो अक्सर सोशल मीडिया को बंद कर देती हैं, अपने स्क्रीन टाइम को सीमित कर देती हैं और अपनी 12 साल की बेटी को इससे दूर रखती हैं.
"कभी कभी वो पीठ पीछे सोशल मीडिया पर जाती है, लेकिन मैं उसकी बेचैनी से भांप जाती हूं कि वो कब ऑनलाइन थी और कब नहीं."
अपनी ज़िंदगी का काफ़ी हिस्सा पर सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर बिताने के बावजूद, कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें वो व्यक्तिगत रखती हैं जैसे अपने मुस्लिम धर्म को लेकर.

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