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एयर इंडिया प्लेन क्रैश की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया क्या कह रहा है?
अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के विमान हादसे पर एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट की दुनिया भर में चर्चा हो रही है और अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने इसकी कवरेज की है.
शुरुआती जांच में पाया गया कि क्रैश से कुछ ही सेकेंड पहले दोनों इंजन के 'फ़्यूल कट ऑफ़ स्विच' बंद हो गए थे. इस वजह से इंजन में फ़्यूल पहुंचना बंद हो गया और विमान हादसे का शिकार हो गया. रिपोर्ट में भी कहा गया है कि यह स्थिति 'बेहद दुर्लभ' है.
दुनिया भर में मौजूद मीडिया संस्थानों में से अधिकतर ने फ़्यूल कंट्रोल स्विच और पायलटों के बीच हुई बातचीत पर ज़ोर दिया है, जो कि शुरुआती जांच का अहम बिंदु भी है.
ब्रिटिश मीडिया संस्थान द टेलीग्राफ़ ने पायलट की बातचीत को रिपोर्ट में हाइलाइट किया जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स, गार्डियन और फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने उड़ान के दौरान प्रक्रिया में ख़ामियों, ट्रेनिंग से जुड़ी बातों और फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़एए) की एडवाइज़री को अहमियत दी है.
'स्विच ग़लती से बंद नहीं हो सकते'
अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीएनएन ने कहा कि भारत के विमान हादसे से ठीक पहले इंजन को फ़्यूल मिलना बंद हो गया था.
सीएनएन ने हादसे के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए सुरक्षा विश्लेषक डेविड सूसी के हवाले से बताया कि फ़्यूल स्विच इस तरह बनाए गए हैं कि उन्हें जानबूझकर ही चालू या बंद किया जा सके. उन्होंने कहा कि 'ऐसे मामले बेहद कम होते हैं जब सभी फ़्यूल स्विच ग़लती से बंद हो जाएं.'
सूसी ने कहा, "पिछले कुछ सालों में इन स्विचों को इस तरह बेहतर बनाया गया है कि वे ग़लती से न चालू और न ही बंद हो पाएं."
इस एयरक्राफ़्ट के मुख्य पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल थे और उनके साथ फ़र्स्ट ऑफ़िसर के तौर पर क्लाइव कुंदर भी मौजूद थे.
डीजीसीए के मुताबिक़ कैप्टन सुमित सभरवाल के पास 8200 घंटे तक विमान उड़ाने का अनुभव था, जबकि सहयोगी पायलट क्लाइव कुंदर के पास भी 1100 घंटे तक विमान उड़ाने का अनुभव था.
ब्रिटेन के अख़बार द टेलीग्राफ़ ने प्रारंभिक जांच से संबंधित रिपोर्ट का शीर्षक लिखा- 'जानलेवा हादसे से ठीक पहले एयर इंडिया के पायलट ने पूछा था कि फ़्यूल की सप्लाई क्यों बंद हुई.'
द टेलीग्राफ़ ने लिखा, "अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों को ब्लैक बॉक्स का डेटा डाउनलोड करने, उसका विश्लेषण करने और जानकारी साझा करने की धीमी प्रक्रिया को लेकर नाराज़गी है."
रिपोर्ट में एविएशन सेफ़्टी इन्वेस्टिगेटर डेविड ली का बयान शामिल किया गया है.
डेविड ली कहते हैं, "जांच में यह देखा जाएगा कि कहीं किसी पायलट ने जानबूझकर ऐसा तो नहीं किया या फिर स्विच का इस्तेमाल ग़लती से तो नहीं हुआ. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं स्विच में कोई इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक ख़राबी तो नहीं थी."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे ही कुछ स्विच में पहले लॉक होने की समस्या दिख चुकी है और यह भी जांच का हिस्सा होगा.
'पायलट फ़्यूल स्विच बंद नहीं करेगा'
रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने अमेरिका के एविएशन सेफ़्टी एक्सपर्ट जॉन कॉक्स से बातचीत की है. जॉन कॉक्स के मुताबिक़, फ़्यूल बंद करने वाले स्विच और उनसे जुड़े फ़्यूल वॉल्व के लिए अलग-अलग पावर सिस्टम और वायरिंग होती है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में एक और अमेरिकी एविएशन सेफ़्टी एक्सपर्ट जॉन नैंस कहते हैं, "कोई भी पायलट फ़्यूल वाले स्विच को फ़्लाइट के दौरान बंद नहीं करेगा."
क़तर के मीडिया संस्थान अल जज़ीरा ने शुरुआती जांच रिपोर्ट के हवाले से बताया कि "एयर इंडिया की जिस फ़्लाइट का पिछले महीने टेकऑफ़ के तुरंत बाद हादसा हुआ, उसके इंजनों के फ़्यूल कंट्रोल स्विच टकराने से ठीक पहले 'रन' से 'कटऑफ' पोज़िशन में चले गए थे."
अल जज़ीरा ने जांच में एक 'कमी' की ओर भी इशारा किया है.
रिपोर्ट में लिखा गया है, "शुरुआती रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि अहमदाबाद से लंदन जा रही इस फ़्लाइट में स्विच 'कटऑफ़' पोज़िशन में कैसे चला गया."
न्यूयॉर्क टाइम्स ने जांच में सामने आई बातों का गहराई से विश्लेषण किया, जिसमें प्रक्रिया से जुड़ी ग़लतियां, कॉकपिट की बातचीत और सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल शामिल हैं.
इस रिपोर्ट की हेडलाइन है- 'एयर इंडिया विमान के टकराने से पहले फ़्यूल बंद हो गया था'
हालांकि अख़बार ने यह भी कहा कि पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाक़ी है.
एएआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक़, कॉकपिट रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता है, "तुमने फ़्यूल क्यों बंद किया?", जवाब मिलता है, "मैंने नहीं किया."
न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है, "फ़्यूल स्विचों में सेफ्टी लॉक होता है, जिससे उन्हें ग़लती से बंद नहीं किया जा सकता- यानी इंसानी दख़ल तय है, जानबूझकर या ग़लती से. तकनीकी ख़राबी, प्लेन से छेड़छाड़ या फ़्यूल की मिलावट जैसी बातों को फ़िलहाल जांच में ख़ारिज कर दिया गया है."
रिपोर्ट में कहा गया है, "एफ़एए ने 2018 में फ़्यूल स्विचों को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन इसे ख़तरनाक स्थिति नहीं माना था. अभी जांच जारी है, अंतिम निष्कर्ष आना बाक़ी है."
शुरुआती जांच में क्या पता चला?
पिछले महीने हुए एयर इंडिया विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट शनिवार को जारी हुई थी. इस रिपोर्ट को भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने जारी किया है.
15 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक़, विमान के दोनों फ़्यूल कंट्रोल स्विच, विमान के टेक ऑफ़ होते ही कट-ऑफ़ पोज़िशन में चले गए थे.
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे पायलट से पूछता है कि उसने 'कट-ऑफ़ क्यों किया?'
जवाब में दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया. रिपोर्ट में यह साफ़ नहीं है कि इनमें कौन-सी आवाज़ किस पायलट की है.
उड़ान के समय विमान को को-पायलट उड़ा रहे थे, जबकि कैप्टन निगरानी कर रहे थे.
एयर इंडिया की फ़्लाइट में सवार होने से पहले पायलटों और क्रू का टेस्ट किया गया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे विमान उड़ाने के लिए फ़िट हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पायलट मुंबई के थे और उड़ान से एक दिन पहले अहमदाबाद पहुंचे थे. उन्हें पर्याप्त आराम मिला था.
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है.
इस हादसे में विमान में और ग्राउंड पर कुल मिलाकर कम से कम 260 लोगों की मौत हुई थी. सिर्फ़ एक यात्री-ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश सुरक्षित बच पाए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित