संसद का शीतकालीन सत्र: जगदीप धनखड़ का ज़िक्र कर क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे

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संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो गया है. यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा.
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई है.
अब सदन की कार्यवाही 2 दिसंबर को 11 बजे से शुरू होगी.
लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारे लगाने लगे थे और स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही को दोपहर 12 तक स्थगित कर दिया था.
इसके बाद कार्यवाही कुछ समय के लिए चली, लेकिन फिर हंगामा शुरू हो गया. यह देखते हुए स्पीकर ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी.
वहीं, राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया.
शीतकालीन सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें होंगी. सरकार इस सत्र में 13 महत्वपूर्ण बिल पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े विधेयक शामिल हैं.
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विशेष रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर हमलावर हैं.
विपक्ष बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की मौत और उन पर बढ़ते काम के दबाव जैसे मुद्दे भी उठा सकता है.
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अत्यधिक काम के दबाव के चलते देश के कई इलाकों में बीएलओ ने आत्महत्याएं की है.
सत्र में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम धमाके, नेशनल हेराल्ड केस में राहुल और सोनिया गांधी से जुड़ी नई एफआईआर, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण, नए लेबर लॉ और 'वोट चोरी' के मुद्दे पर भी विपक्ष बहस कर सकता है.
पीएम मोदी ने क्या कहा

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शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "संसद का ये शीतकालीन सत्र सिर्फ कोई रस्म नहीं है. ये राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के प्रयास चल रहे हैं, उसमें ऊर्जा भरने का काम ये शीतकालीन सत्र भी करेगा ."
उन्होंने कहा, "गत दिनों बिहार में जो चुनाव हुआ, उसमें मतदान का जो विक्रम हुआ, वो लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है. माताओं-बहनों की जो भागीदारी बढ़ रही है, ये अपने आप में एक नई आशा, नया विश्वास पैदा करती है."
पीएम ने कहा, "मेरी एक चिंता रही है लंबे समय से सदन में जो पहली बार चुनकर आए हैं, या जो युवा हैं, वैसे सभी दलों के सभी सांसद बहुत परेशान हैं, उन्हें अपने सामर्थ्य का परिचय कराने का अवसर नहीं मिल रहा है और न ही अपने क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बताने का मौका नहीं मिल रहा है."
"कोई भी दल हो हमें किसी को भी हमारी नई पीढ़ी के नौजवान सांसदों को, उन्हें अवसर देना चाहिए. इसलिए मेरा आग्रह रहेगा कि हम इन चीजों को गंभीरता से लें, ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है, जिसे करना है करता रहे, यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए."

पीएम ने कहा, "ये सत्र, संसद देश के लिए क्या सोच रही है, संसद देश के लिए क्या करना चाहती है, संसद देश के लिए क्या करने वाली है, इन मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए. विपक्ष भी अपना दायित्व निभाए, चर्चा में मजबूत मुद्दे उठाए और पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आएं."
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य ये है कि 1-2 दल तो ऐसे हैं कि वो पराजय भी नहीं पचा पाते. मैं सोच रहा था कि बिहार के नतीजों को इतना समय हो गया, तो अब थोड़ा संभल गए होंगे. लेकिन, कल जो मैं उनकी बयानबाजी सुन रहा था, उससे लगता है कि पराजय ने उनको परेशान करके रखा है."
राज्यसभा में खड़गे ने क्या कहा

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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति राधाकृष्णन को उनके पद संभालने पर बधाई दी.
उन्होंने कहा, "मुझे दुख हुआ कि सदन को पूर्व राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ जी को विदाई देने का अवसर नहीं मिला."
खड़गे ने कहा, "यह राज्यसभा सभापति के पद से उनका अचानक और अप्रत्याशित इस्तीफ़ा था, जो संसदीय इतिहास में बिल्कुल अभूतपूर्व घटना है."
सभापति को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "आप अपने आसन से उस तरफ ज्यादा न देखें, उसमें खतरा है. इधर आप नहीं देखेंगे तो भी खतरा है, इसलिए दोनों तरफ संतुलन बनाए रखेंगे तो अच्छा होगा."
सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक

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शीतकालीन सत्र से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ऑफिस में इंडिया गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई.
इस बैठक में राहुल गांधी समेत कई नेता मौजूद रहे. बैठक में संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर चर्चा की गई.

इससे पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में विपक्ष के प्रमुख नेता शामिल हुए थे.
इस दौरान पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने कहा, "हम विपक्षी पार्टियों की बात सुनेंगे. यह शीतकालीन सत्र है, हम उम्मीद करते हैं कि सब लोग ठंडे दिमाग से काम करेंगे और गरमागरम बहस से बचेंगे."
एसआईआर मुद्दे पर भी रिजिजू ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं बताऊँगा कि चर्चा के लिए सरकार कौन से मुद्दे लाएगी. चुनाव आयोग अपना काम करता है और मैं उनका स्पोक्सपर्सन नहीं हूं."
किन मुद्दों पर चर्चा चाहती है कांग्रेस?

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सर्वदलीय बैठक के बाद समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "भाजपा लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं को खत्म करने पर तुली है. शीतकालीन सत्र सिर्फ 19 दिन का है, जिसमें से सिर्फ 15 दिन ही चर्चा हो पाएगी. यह शायद अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा. इस सत्र के आयोजन में देरी भी हुई है और इसलिए ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को डिरेल करना चाहती है."
उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा की बात उठाई है कि इस शीतकालीन सत्र में सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो. इसमें सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा आता है. दिल्ली में जो ब्लास्ट हुआ, वो कहीं ना कहीं कानूनी और गृह विभाग की विफलताओं का एक बहुत बड़ा परिणाम है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि सरकार इस पर शोर्ट ड्यूरेशन चर्चा चाहती है."
गोगोई ने कहा, "दूसरा है लोकतंत्र की सुरक्षा. जिस प्रकार से भारत के विभिन्न राज्यों से चुनाव आयोग, चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और उसके बाद राजनीतिक पक्षपात कर रहा है, तो क्या भारत में चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक रूप से चलेगी, वोटर लिस्ट की सुरक्षा, चुनाव की सुरक्षा पर भी एक चर्चा हो."
"हमारी तीसरी मांग स्वास्थ्य की सुरक्षा की है. जिस प्रकार से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. चौथा विषय आर्थिक सुरक्षा है. जो किसान, श्रमिक है. उसे ना तो उचित मूल्य मिल रहा है. ना कारखाने में सुरक्षा मिल रही है."
"पांचवा विषय प्राकृतिक सुरक्षा का है. जिस प्रकार से बाढ़, लैंड स्लाइड आ रहे हैं. कोई तैयारी नहीं है. हमने हमारी विदेश नीति की बात भी उठाई है. हम देख रहे हैं कि दूसरे देशों के अनुसार भारत विदेश नीति बना रहा है. किसी को अच्छा नहीं लगा कि भारत रूस से कम दामों पर तेल ले रहा है, तो उस देश के अनुसार हम अपनी नीति को बदलने की कोशिश कर रहे हैं."
"एक देश पड़ोस में ही सेना पर और पैसे खर्च कर रहा है. इन्वेस्ट कर रहा है, लेकिन हम तैयार नहीं हैं. आज हमारा बेटा भी सुरक्षित नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में जिस प्रकार से तैयार होना चाहिए. हमने सदन के अंदर एक बार भी सुचारू रूप से चर्चा नहीं की."
गोगोई ने कहा, "कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि पूरी संसदीय मर्यादा को दफनाने का काम वर्तमान की सरकार कर रही है. डिरेल कर रही है. भारत के लोकतंत्र की कब्र खोद रही है. इस विषय पर सारे विपक्षी दल एकजुट हैं."
अहम विधेयक पेश

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में मणिपुर वस्तु और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया.
पहला विधेयक मणिपुर में लागू वस्तु और सेवा कर कानून 2017 में कुछ बदलाव करने के लिए पेश किया गया है.
इसे संशोधन विधेयक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मौजूदा कानून में सुधार और अपडेट करता है.
इससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए जीएसटी की प्रक्रिया सरल हो सकती है. वहीं कुछ वस्तुओं या सेवाओं पर नया कर लगाया जा सकता है या छूट दी जा सकती है.
वहीं दूसरा विधेयक केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 में बदलाव करने के लिए पेश किया गया है. इससे सिगरेट, गुटखा, पान मसाला जैसे तंबाकू सामान पर जीएसटी को बढ़ाया जाएगा.
इसके अलावा वित्त मंत्री ने हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 पेश किया.
इसका मकसद कुछ खास मशीनों और प्रक्रियाओं पर कर लगाना है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















