सुरंग में फंसे बेटे के लिए पत्नी के गहने गिरवी रख पहुंचे पिता ने कहा- दुआ मांग रहा हूँ

- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उत्तरकाशी से
उत्तराखंड की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को अभी भी निकाला नहीं जा सका है.
सुरंग में ड्रिलिंग के लिए लगाई गई ऑगर मशीन के कुछ हिस्से टूट कर रेस्क्यू पाइप में फंस गए थे इसलिए ड्रिलिंग रुक गई थी. फिर प्लाज्मा मशीन की मदद ली गई. लेकिन इससे भी बात नहीं बनी और आखिरकार मैनुअल ड्रिलिंग करनी पड़ी.
इस बीच, फंसे हुए मजदूरों के परिजन टनल के बाहर उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं वो हताश होते जा रहे हैं.
सुरंग के अंदर फंसे अपने परिवार के सदस्यों की हिफाजत की दुआ करते इन लोगों के लिए एक-एक पल भारी गुजर रहा है.
सुरंग के बाहर अपनों के बाहर आने का इंतजार करते लोगों में यूपी के लखीमपुर खीरी के मनजीत चौधरी के पिता भी शामिल हैं, जो पत्नी के गहने गिरवी रख कर यहां पहुंचे हैं.
उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि यहां का किराया जुटा सकें.
मनजीत मुंबई में ब्रिज कंस्ट्रक्शन में काम करने वाले अपने एक बेटे को खो चुके हैं और अब किसी भी कीमत पर दूसरे को नहीं खोना चाहते हैं.
बीबीसी संवाददाता से अपना दर्द बयां करते हुए उन्होंने कहा, ''चादर फैला कर ऊपर वाले से यही दुआ करता हूं कि बेटा जल्द से जल्द सुरंग से निकल जाए. मैं जी भर कर उसे देख लेना चाहता हूं.’’
'चाहता हूं कि निकलने के बाद बेटा खेती करे या दुकान चलाए'

मनजीत के पिता ने बताया कि उनकी सुरंग में फंसे बेटे से बात हुई है. बेटे ने पिता से कहा कि वो ठीक हैं. उन्होंने परिवार के बारे में जानकारी ली और कहा कि वो हौसला बनाए रखें.
वो परिवार वालों के बारे में ही पूछ रहे थे. कह रहे थे कि परिवार वाले हिम्मत रखें वो बाहर निकल आएंगे. वो खुद से ज्यादा परिवार वालों के बारे में सोच रहे हैं.
मनजीत कहते हैं कि यहां से निकलने के बाद वो चाहेंगे कि उनके बेटे खेती-किसानी करें या कहीं छोटी दुकान खोल ले.
मनजीत के पिता ने कहा,‘’हम चाहते हैं कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्याय करें.’’
मनजीत के पिता के साथ उनके भाई और एक और दूसरा शख्स है. ये शख्स पहले यहां काम कर चुका है.
कहां तक पहुंचा है मजदूरों को निकालने का काम?

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी इलाक़े में बनाई जा रही सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से काम चला.
बचावकर्मी ड्रिलिंग मशीन के ज़रिए मज़दूरों तक पहुँचने का प्रयास किया गया. इस दौरान कई बार बचावकर्मियों को निराशा होना पड़ा.
इन मज़दूरों को सुरक्षित बाहर निकालने का ऑपरेशन शुरू से ही काफ़ी चुनौती भरा था.
सुरंग के भीतर मिट्टी काफ़ी ढीली है. वहां पत्थर भी खिसकते रहते हैं. इसके साथ ही सुरंग के निर्माण के दौरान लगाये गए सरिये काटना भी मुश्किल साबित हो रहा है.
शुक्रवार को बचावकर्मी सही दिशा में बढ़ते दिख रहे थे. लेकिन तभी ड्रिलिंग मशीन मलबे के साथ मिले मिश्रित धातु के टुकड़ों में फंसने के बाद सुरंग के अंदर टूट गई.
इसके बाद सोमवार सुबह मशीन को पूरी तरह से हटा दिया गया था.
इस बीच, बचावकर्मियों ने मजदूरों तक पहुंचने के लिए पहाड़ के ऊपर से खुदाई लंबवत (वर्टिकल) खुदाई शुरू की.
अधिकारियों ने ये भी कहा है कि वे मज़दूरों तक तेज़ी से पहुंचने के लिए मैन्युअल (हाथ से) खुदाई सहित अन्य तकनीकों के बारे में भी विचार कर रहे हैं.
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?

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घटनास्थल पर मौजूद माइक्रो टनलिंग एक्सपर्ट क्रिस कूपर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा है, “हम ऑगर मशीन के टूटे हुए टुकड़ों को निकाल रहे हैं, कई पाइप हैं, उन्हें भी काटना है. लगभग तीन घंटे का समय इसमें लग सकता है उसके बाद हमें हाथों से टनल को काटना होगा."
"इसमें कितना वक्त लगेगा ये हम नहीं बता सकते. ये ग्राउंड की परिस्थिति पर निर्भर करता है. आर्मी इस ऑपरेशन को सुपरवाइज़ कर रही है. 30 मीटर की वर्टिकल ड्रिलिंग की जा चुकी है.”
इसके अलावा पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ़ और रिटायर्ड बीआरओ डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने बताया है, “ऑगर जो फंसा था उसे पूरा निकाल लिया गया है लेकिन डेढ़ मीटर की डैमेज पाइप है जो अभी भी फंसी है उसे निकालने का काम जारी है. वो हो जाएगा तो हम हाथों से टनल खोदेंगे. और बची हुई दूरी को धीरे-धीरे खोदेंगे. उम्मीद है जल्द से जल्द ये काम पूरा होगा.”
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