विवेक रामास्वामी ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही क्यों हुए बाहर, किसकी नाराज़गी पड़ी भारी

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डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के बाद डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएन्सी (डीओजीई) के गठन की घोषणा की थी और इसकी ज़िम्मेदारी टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क के साथ विवेक रामास्वामी को दी थी.
ट्रंप ने इसकी घोषणा करते हुए एलन मस्क को 'ग्रेट एलन मस्क' कहा था और विवेक रामास्वामी को 'देशभक्त अमेरिकी' बताया था. यह ज़िम्मेदारी मिलने पर विवेक रामास्वामी ने लिखा था- हम लोग नरमी से पेश नहीं आने वाले हैं.
लेकिन ट्रंप के शपथ लेते ही डीओजीई ने पहला फ़ैसला ख़ुद को लेकर लिया है. अब डीओजीई को केवल मस्क देखेंगे और विवेक रामास्वामी इससे बाहर हो गए हैं.
डीओजीई को ज़िम्मेदारी दी गई है कि वह सरकारी खर्चे में कटौती करे. ट्रंप के राष्ट्रपति की कमान संभालते ही डीओजीई से विवेक रामास्वामी के बाहर होने पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.
विवेक रामास्वामी के डीओजीई से बाहर होने की ख़बर पर कहा जाने लगा था कि एलन मस्क से उनके संबंध ठीक नहीं हैं. इस बीच ख़ुद विवेक रामास्वामी ने भी डीओजीई से बाहर होने पर प्रतिक्रिया दी है.
स्पेक्ट्रम न्यूज़ डीसी के पॉलिटिकल रिपोर्टर टेलर पॉर्पिलार्ज ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, ''ट्रंप-वांस ट्रांजिशन की प्रवक्ता अना केली ने एक बयान में मुझसे कहा- विवेक रामास्वामी ने डीओजीई को बनाने में अहम भूमिका निभाई है. विवेक एक निर्वाचित ऑफिस को हैंडल करने का इरादा रखते हैं. ऐसे में विवेक को डीओजीई से बाहर रहना होगा. पिछले दो महीने में डीओजीई को बनाने में विवेक की जो भूमिका रही, उसके लिए हम धन्यवाद देते हैं. उम्मीद है कि अमेरिका को फिर से महान बनाने में विवेक की भूमिका अहम होगी.''

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विवेक रामास्वामी ने क्या कहा?
विवेक रामास्वामी ने इसी पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा है, ''यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैंने डीओजीई को बनाने में मदद की. मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि एलन और उनकी टीम नई सरकार के साथ जटिलताओं को ख़त्म करने में कामयाब होंगे. ओहायो में अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर जल्द ही विस्तार से बताऊंगा. सबसे अहम यह है कि अमेरिका को फिर से महान बनाने में हम राष्ट्रपति ट्रंप को मदद करेंगे.''
रामास्वामी एक बायोटेक उद्यमी हैं. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में विवेक रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी की रेस में भी शामिल थे, लेकिन कोई भी कॉकस या प्राइमरी जीतने में नाकाम रहे थे.
इसके बाद विवेक रामास्वामी ने ट्रंप का समर्थन किया था. विवेक रामास्वामी अगले साल ओहायो के गवर्नर का चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं. जेडी वांस के उपराष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी सीनेट की सीट खाली हुई है और विवेक उनकी जगह ले सकते हैं.
ट्रंप ने डीओजीई को एक ग़ैर-सरकारी टास्क फोर्स के रूप में बनाया है, जिसका काम है कि सरकारी खर्चे कम करने की राह तलाशे और ग़ैर-ज़रूरी सरकारी एजेंसियों को बंद करने पर रिपोर्ट तैयार करे. विवेक रामास्वामी तो एफ़बीआई तक को बंद करने की वकालत करते रहे हैं. रामास्वामी महज़ 39 साल के अमेरिकी नागरिक हैं.
अमेरिकी न्यूज़ नेटवर्क सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने ही जेडी वांस के उपराष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी सीनेट सीट खाली होने पर विवेक रामास्वामी को नियुक्त करने की बात कही थी. 2026 में विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर का चुनाव लड़ सकते हैं. अपनी एक्स पोस्ट में भी विवेक ने इसके संकेत दिए हैं. लेकिन इससे पहले विवेक सीनेट सीट पर भी जा सकते हैं.

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विवेक की कौन सी बात पसंद नहीं आई?
अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि विवेक रामास्वामी अगले हफ़्ते ओहायो के गवर्नर के चुनाव में जाने की घोषणा कर सकते हैं. एनवाईटी ने लिखा है, ''ट्रंप ने जब डीओजीई की ज़िम्मेदारी एलन मस्क के साथ विवेक रामास्वामी को दी थी, तब से ही कहा जा रहा था कि मस्क और रामास्वामी में बहुत ज़्यादा ग़ैर-बराबरी है. विवेक की तुलना में मस्क के पास बहुत ज़्यादा संपत्ति है और प्रोफाइल भी बहुत ऊपर है.''
विवेक रामास्वामी की कुल नेटवर्थ एक साल पहले 96 करोड़ डॉलर थी जबकि मस्क की कुल नेटवर्थ 449 अरब डॉलर है. विवेक रामास्वामी और एलन मस्क ने डीओजीई के ज़रिए अमेरिका के फेडरल बजट में दो ट्रिलियन डॉलर की कटौती की घोषणा की थी. हालांकि कई लोग इस कटौती को हक़ीक़त से ज़्यादा कल्पना के रूप में देखते हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ''ट्रंप के क़रीबियों का कहना है कि रामास्वामी कंजर्वेटिव्स से सोशल मीडिया पर एच-1 बी वीज़ा को लेकर उलझ रहे थे और यह ट्रंप को पसंद नहीं आया. रामास्वामी हाई स्किल्ड वर्कर्स को एच-1 बी वीज़ा देने का समर्थन कर रहे थे, लेकिन ट्रंप के कई समर्थक इसका विरोध कर रहे हैं.
विवेक रामास्वामी ने दिसंबर में एक्स पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें कहा था कि अमेरिकी संस्कृति प्रतिभाशाली लोगों की तुलना में औसत दर्जे के लोगों को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में एच-1 बी वीज़ा ज़रूरी है.
रामास्वामी ने लिखा था, ''हम मैथ ओलंपियार्ड चैंप की जगह प्रोम क्वीन को ज़्यादा तवज्जो दे रहे हैं या पढ़ाई-लिखाई से ज़्यादा जोक में लगे हुए हैं. ऐसे में हम बेस्ट इंजीनियर नहीं पैदा कर सकते. हमें साइंस पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है न कि वीकेंड में कार्टून पर. ज़्यादा किताबें और कम टीवी की नीति अपनानी चाहिए. हमें मॉल की संस्कृति से दूर होने की ज़रूरत है.''
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि विवेक रामास्वामी की इस टिप्पणी को दूसरों को नीचा दिखाने के रूप में देखा गया था.

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कौन हैं विवेक रामास्वामी
वोक किताब के लेखक, करोड़ों के मालिक और उद्यमी विवेक रामास्वामी का कहना है कि वो नए अमेरिकी सपने के लिए एक सांस्कृतिक आंदोलन शुरू करना चाहते हैं.
उनका मानना है कि अगर एक-दूसरे को साथ लाने के लिए कुछ बड़ा नहीं है तो विविधता का कोई मतलब नहीं है.
39 साल के रामास्वामी का जन्म ओहायो में हुआ था. उन्होंने हार्वर्ड और येल से पढ़ाई की और बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करोड़ों रुपये कमाए. इसके बाद उन्होंने एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाई.
उन्होंने बायोटेक कंपी रोयवेंट साइंसेज की स्थापना की जो अब सात अरब डॉलर की हो चुकी है.
वो एक इन्वेस्टमेंट फर्म के भी सह-संस्थापक हैं.
विवेक की शादी अपूर्वा से हुई है और वो ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में सर्जन और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. विवेक अपने परिवार के साथ कोलंबस में रहते हैं. उनके दो बेटे हैं.
विवेक रामास्वामी का जन्म प्रवासी भारतीय माता-पिता के परिवार में हुआ.
'हिन्दुस्तान टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उनका परिवार केरल से अमेरिका गया था.
उनके पिता वी गणपति रामास्वामी ने कालीकट के नेशनल इंस्टीट्यूट से ग्रेजुएशन के बाद इंजीनियर के तौर पर काम किया. उनकी मां ने अमेरिका में एक मनोचिकित्सक के तौर पर काम किया.
2023 में अयोवा स्टेट फेयर में विवेक ने बताया था कि उनकी मां ने अमेरिकी नागरिकता ली है जबकि उनके पिता के पास अब भी भारतीय पासपोर्ट है.
रामास्वामी पहले रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति उम्मीदवार पद की दौड़ में थे. लेकिन अयोवा कॉकस में चौथे नंबर पर आने के बाद उन्होंने अपना अभियान छोड़ दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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