तहव्वुर हुसैन राणा: मुंबई हमला मामले के लिए भारत जिसे अमेरिका से लाना चाहता है

तहव्वुर हुसैन राणा

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इमेज कैप्शन, मुंबई आतंकी हमला मामले में तहव्वुर राणा अमेरिका की जेल में बंद है.

साल 2008 के मुंबई हमले के अभियुक्त तहव्वुर हुसैन राणा की भारत प्रत्यर्पित करने के फ़ैसले से जुड़ी पुनर्विचार याचिका को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक राणा फ़िलहाल अमेरिका की जेल में हैं और उनके प्रत्यर्पण के मामले पर सुनवाई चल रही थी. मुंबई हमले में उनकी कथित भूमिका को लेकर भारत उन पर मामला चलाना चाहता है.

अमेरिका की कोर्ट ने तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे दी थी, जिसके बाद उन्होंने बीते साल 13 नवंबर को इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

तहव्वुर राणा को वर्ष 2013 में अपने दोस्त डेविड कोलमैन हेडली के साथ मुंबई के हमले को अंजाम देने और डेनमार्क में हमले की योजना बनाने के आरोप में दोषी पाया गया था.

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63 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिकी अदालत ने उन्हें 14 साल जेल की सज़ा सुनाई थी.

ये अभी स्पष्ट नहीं है कि राणा को कब तक भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा.

तहव्वुर हुसैन राणा कौन है और मुंबई के हमले में उसकी भूमिका क्या थी और दूसरे मामलों में उसे क्यों सज़ा मिली है? इससे संबंधित बीबीसी हिंदी की ये कहानी आगे पढ़िए जो 18 मई 2023 को पहली बार प्रकाशित हुई थी.

मुंबई हमला

ताज होटल

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इमेज कैप्शन, साल 2008 में ताज होटल समेत मुंबई की कई जगहों पर चरमपंथी हमले हुए थे.

26 नवंबर, 2008 की रात को 10 चरमपंथियों ने मुंबई की कई इमारतों पर एक साथ हमला किया था.

इस हमले में 164 लोग मारे गए. कार्रवाई में नौ चरमपंथी भी मारे गए.

भारत का आरोप है कि ये चरमपंथी पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े थे.

लेकिन इस हमले में अजमल कसाब बच गया, जिसे नवंबर 2012 में फाँसी दे दी गई.

भारतीय एजेंसियों की ओर से पाकिस्तानी-अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली के ख़िलाफ़ जारी जाँच में एक नाम बार-बार आ रहा था, और वो नाम था तहव्वुर हुसैन राणा.

शिकागो में कड़ी सुरक्षा के बीच चार हफ़्ते तक चले इस मुक़दमे के दौरान राणा के बारे में कई जानकारियाँ सामने आईं.

इसके दौरान राणा के बचपन के घनिष्ठ मित्र हेडली की पृष्ठभूमि के बारे में भी पता चला.

लेकिन इस मुक़दमे की सबसे अहम बात ये रही कि हेडली तहव्वुर राणा के ख़िलाफ़ सरकारी गवाह बन गया.

हेडली ने मुंबई हमले की योजना पर विस्तार से गवाही दी और अपने और राणा की भूमिकाओं के बारे में भी बताया.

पाकिस्तान में जन्म

तहव्वुर राणा

तहव्वुर हुसैन राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ और वहीं परवरिश हुई. मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद वो पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर में शामिल हो गए थे.

राणा की पत्नी भी डॉक्टर थीं. 1997 में दोनों पति-पत्नी कनाडा चले गए और 2001 में कनाडा के नागरिक बन गए.

2009 में अपनी गिरफ़्तारी से कुछ साल पहले राणा ने अमेरिका के शिकागो में एक इमीग्रेशन और ट्रैवल एजेंसी खोली. साथ ही कुछ दूसरे व्यवसाय भी शुरू किए.

अदालत में बताया गया कि शिकागो में डेविड कोलमैन हेडली के साथ उनकी पुरानी दोस्ती फिर से शुरू हो गई थी.

हेडली ने जब मुंबई पर हमले की तैयारी शुरू की, तो उन्हें 2006 से 2008 तक कई बार रेकी के लिए मुंबई आना पड़ा.

किसी को शक न हो कि वो मुंबई बार-बार क्यों जा रहे हैं, उसने राणा की ट्रैवल एजेंसी की शाखा मुंबई में खोली.

राणा के बारे में ये भी जानकारी सामने आई कि उन्होंने ऐसा लश्कर के कहने पर किया था.

मुंबई हमले में छह अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे. अमेरिकी नागरिकों को मारने में मदद करने सहित 12 आरोपों पर राणा को सज़ा मिली.

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इमेज कैप्शन, राणा को अमेरिका में दो अलग-अलग साज़िशों में शामिल होने के लिए 14 साल जेल की सज़ा दी गई.

एफ़बीआई ने पकड़ा

अमेरिक जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने राणा और हेडली को अक्तूबर 2009 में शिकागो एयरपोर्ट पर पकड़ा था.

एफ़बीआई का दावा है कि वे दोनों जिलैंड्स-पोस्टेन नाम के अख़बार के कार्यालयों पर हमला करने डेनमार्क के लिए एक फ़्लाइट पकड़ने जा रहे थे.

जिलैंड्स-पोस्टेन अख़बार ने पैग़ंबर मोहम्मद के विवादास्पद कार्टून प्रकाशित किए थे.

पूछताछ के दौरान मुंबई हमलों में उनकी मिली-भगत की पुष्टि हुई.

इस तरह राणा को दो अलग-अलग साज़िशों में शामिल होने के लिए 14 साल जेल की सज़ा दी गई.

राणा को मुंबई हमलों की साज़िश के अलावा डेनिश अख़बार पर हमले की योजना में मदद करने का भी दोषी पाया गया था.

राणा ने हेडली को कोपेनहेगन में 'फ़र्स्ट वर्ल्ड' के कार्यालय की एक शाखा स्थापित करने की अनुमति दी.

अक्तूबर 2009 में गिरफ़्तारी के बाद के बयान में राणा ने स्वीकार किया था कि पाकिस्तान में होने वाले लश्कर के प्रशिक्षण शिविरों में हेडली ने भाग लिया था.

डेविड हेडली

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इमेज कैप्शन, मुंबई हवाई अड्डे पर सीसीटीवी द्वारा लिया गया फ़ुटेज.

हेडली की स्वीकारोक्ति

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हेडली ने भी यह माना था कि उन्होंने 2002 और 2005 के बीच पाँच अलग-अलग मौक़ों पर पाकिस्तान में लश्कर के प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया था.

2005 के अंत में हेडली को लश्कर के सदस्यों से निगरानी करने के लिए भारत की यात्रा करने के निर्देश मिले.

हेडली ने अगले तीन साल में पांच बार भारत की यात्रा की थी.

अमेरिकी शहर शिकागो में अटॉर्नी जनरल की ओर से जारी किए गए एक बयान के मुताबिक़, "2006 की शुरुआती गर्मियों में, हेडली और लश्कर के दो सदस्यों ने उनकी गतिविधियों के कवर के रूप में मुंबई में एक इमीग्रेशन ऑफ़िस खोलने पर चर्चा की."

"हेडली ने गवाही दी थी कि उन्होंने शिकागो की यात्रा की और अपने स्कूल के दोस्त राणा से भारत में संभावित लक्ष्यों की खोज करने के बारे में सलाह मशविरा किया."

हेडली ने राणा से मुंबई में 'फ़र्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज़' का दफ़्तर खोलने की बात की थी ताकि उन लोगों की अपनी गतिविधियों के कवर के रूप में उस दफ़्तर का इस्तेमाल किया जा सके.

गवाही के दौरान हेडली ने कहा था, "जुलाई 2006 में, मैं राणा से मिलने के लिए शिकागो गया था और उसे उस मिशन (मुंबई पर हमले) के बारे में बताया था जो लश्कर ने मुझे सौंपा था."

"राणा ने मुंबई में एक "फ़र्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज़" केंद्र स्थापित करने की मेरी योजना को मंज़ूरी दी थी और उसे पांच साल का बिज़नेस वीज़ा प्राप्त करने में मदद की थी."

हालांकि, फ़रवरी 2016 में बॉम्बे सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में वीडियो लिंक के माध्यम से गवाही देते हुए, हेडली ने दावा किया था कि उन्होंने मुंबई हमलों से कुछ महीने पहले ही राणा को अपनी गतिविधियों के बारे में सूचित किया था.

हेडली

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इमेज कैप्शन, मुंबई की अपना पहली यात्रा के दौरान हेडली के पास ताज में रुकने लायक पैसे नहीं थे.

अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा?

राणा को सज़ा सुनाये जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के सहायक अटार्नी जनरल लिसा मोनाको ने अदालत के फ़ैसले के बाद कहा था, "आज का फ़ैसला इस बात को दर्शाता है कि जिस तरह से हम आतंकवादियों और उनके संगठनों का पीछा करते हैं, हम उन लोगों का भी पीछा करेंगे जो एक सुरक्षित दूरी से उनकी हिंसक साज़िशों को अंजाम देते हैं."

मोनाको का कहना था, "तहव्वुर राणा ने अमेरिका में अपने बेस से डेविड हेडली को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की थी. यह जानते हुए कि वे विदेशों में हमले की योजना बना रहे थे."

"मैं कई एजेंटों, विश्लेषकों और अभियोजकों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने आज के नतीजे लाने में मदद की."

राणा के वकील चार्ली स्विफ़्ट ने उस समय कहा था कि सरकारी गवाह बनने से पहले तक हेडली और राणा बहुत क़रीबी दोस्त थे.

राणा के वकील ने हेडली के ख़िलाफ़ इलज़ाम लगाते हुए कहा था कि वो 'एक मक्कार और चालबाज़ शख्श हैं जिन्होंने राणा जैसे सीधे आदमी को फंसा दिया.'

तब चार्ली स्विफ़्ट ने मुझसे कहा था, "हेडली चालबाज़ और मास्टर मैनिपुलेटर हैं जिसने डॉ राणा को मूर्ख बनाया था."

कोलमैन हेडली (बाएं) और तहव्वुर हुसैन राणा.

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इमेज कैप्शन, स्कूल से निकलने के बाद दोनों पहली बार 2006 में शिकागो में मिले.

राणा और हेडली बचपन के दोस्त

यह सच है कि राणा और हेडली बचपन से ही दोस्त थे और दोनों ने एक ही स्कूल में पांच साल तक पढ़ाई की थी.

स्कूल से निकलने के बाद दोनों पहली बार 2006 में शिकागो में मिले.

शिकागो में चले मुक़दमे में इस बात का पता चला कि राणा के मुक़ाबले हेडली लश्कर के लिए अधिक बढ़-चढ़ कर काम करते थे.

अदालत में दोनों के बयानों से ये साफ़ होता है कि लश्कर ने 2005 में मुंबई और कोपेनहेगेन में एक साथ चरमपंथी हमले की योजनाएं बनाई थीं. इन दोनों योजनाओं में राणा की भी हिस्सेदारी थी.

मुंबई हमले में उसकी भूमिका हेडली और लश्कर की मुंबई पर हमले में मदद करने तक सीमित थी.

लेकिन डेनमार्क वाले मामले में दोनों ने ख़ुद हमले की योजना बनाई थी और उसको अंजाम देने डेनमार्क के लिए रवाना होने वाले थे.

लेकिन, उससे पहले ही उसे शिकागो हवाई अड्डे पर पकड़ लिया गया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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