पुतिन की भारत यात्रा क्यों है अहम और विदेशी मीडिया इस पर क्या लिख रहा है

जुलाई 2024 में रूस के दौरे पर राष्ट्रपति पुतिन के साथ संवाद करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, बीते साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दौरे पर गए थे

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत का राजकीय दौरा करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बातचीत होगी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में रात्रिभोज देंगी.

ये साल 2021 के बाद पहली बार होगा जब व्लादिमीर पुतिन भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत में होंगे.

भारत और रूस के बीच एक 'विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' है और दोनों ही राष्ट्र कई अहम मौक़ों पर एक-दूसरे के साथ खड़े हुए नज़र आए हैं.

राष्ट्रपति पुतिन की इस यात्रा के दौरान भारत और रूस अतिरिक्त एस-400 सिस्टम और सुखोई-57 लड़ाकू विमानों को लेकर रक्षा समझौते पर बात आगे बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा रूस के कच्चे तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर भी वार्ता हो सकती है.

राष्ट्रपति पुतिन की ये यात्रा रूस और भारत को परमाणु ऊर्जा, तकनीक और कारोबार के क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा का मौक़ा भी देगी.

रूस के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोफ़ ने रूस के सरकारी टीवी से बात करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा पर ज़ोर देते हुए कहा है कि ये यात्रा 'भव्य और कामयाब होगी.'

राष्ट्रपति पुतिन की ये भारत यात्रा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का भी संकेत देती है. यूक्रेन युद्ध के बीच रूस को अलग-थलग करने के पश्चिमी देशों के दबाव को भारत टालता रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ़ भी लगाए हैं और प्रतिबंध भी लगाए हैं और अमेरिका और भारत के संबंधों पर इनका असर भी हुआ है.

विश्लेषक भी मान रहे हैं कि पुतिन की ये यात्रा भारत और रूस के रक्षा संबंधों को और मज़बूत कर सकती है और वैश्विक सुरक्षा को नया आकार दे सकती है.

भारत के राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन से बात करते हुए पूर्व राजनयिक मेजर जनरल (रिटायर्ड) मंजीव सिंह पुरी ने कहा, "दुनिया के दो अहम देशों रूस और भारत का उच्चतम स्तर पर एक साथ आना ख़ास तौर पर महत्वपूर्ण है."

उन्होंने कहा, "हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस से मिले हथियारों, ख़ासकर एस-400 ने भारत के लिए अहम भूमिका निभाई. अति उन्नत लड़ाकू विमान एसयू-57 को लेकर भी हर तरह की बात हो रही है. दोनों देश ऐतिहासिक रूप से ही सहयोगी नहीं हैं बल्कि परमाणु ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में नई साझेदारी की तरफ़ भी बढ़ रहे हैं."

इससे पहले पुतिन कब आए थे भारत?

साल 2021 में आख़िरी बार भारत आए थे रूस के राष्ट्रपति पुतिन, तस्वीर हैदराबाद हाउस में उनकी पीएम मोदी से हुई मुलाकात की है

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इमेज कैप्शन, साल 2021 में आख़िरी बार भारत आए थे रूस के राष्ट्रपति पुतिन, तस्वीर हैदराबाद हाउस में उनकी पीएम मोदी से हुई मुलाक़ात की है
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यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले भारत और रूस दोनों ही शीर्ष नेताओं के सालाना सम्मेलन करते रहे थे. हालांकि राष्ट्रपति पुतिन के यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देने के बाद दिसंबर 2022 में भारतीय शीर्ष नेतृत्व ने पुतिन के साथ बैठक नहीं की थी. ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में शीर्ष सूत्रों के हवाले से ये दावा किया था.

पिछले साल अक्तूबर 2024 में जब रूस ने ब्रिक्स देशों का सम्मेलन किया तब पुतिन और मोदी की मुलाक़ात हुई थी. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2024 में अपनी पहली रूस यात्रा की थी और इस दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाक़ात हुई थी. ये नरेंद्र मोदी की अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान पहली द्विपक्षीय यात्रा भी थी.

कीएव के एक बच्चों के अस्पताल पर रूस के मिसाइल हमले के एक दिन बाद पुतिन और मोदी की मुलाक़ात अंतरराष्ट्रीय आक्रोश के माहौल में हुई थी. उस वार्ता के दौरान पुतिन ने मोदी को गले लगाया था और अपना 'दोस्त' कहा था.

नरेंद्र मोदी की रूस की दो यात्राओं के बाद पुतिन की संभावित भारत यात्रा को लेकर मीडिया में रिपोर्टें आई थीं.

रूस और भारत के संबंधों और पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा पर प्रकाशित एक लेख में ब्लूमबर्ग ने लिखा था, "इस साल जब प्रधानमंत्री मोदी रूस में पुतिन से मिलने गए तब अमेरिका में इसे लेकर चिंताएं पैदा हुईं. अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति को परित्यक्त (अछूत) करना चाहता है. हालांकि अमेरिका ये भी समझता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए उसे भारत की ज़रूरत है."

भारत-रूस की पुरानी दोस्ती

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इमेज कैप्शन, चीन के तियानजिन में सितंबर में हुई शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन की बैठक में भी पीएम मोदी और पुतिन की मुलाक़ात हुई थी

शीत युद्ध के दौर से ही भारत और रूस के क़रीबी संबंध रहे हैं. भारत रूस के हथियारों के सबसे बड़े ख़रीदारों में से एक है.

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के कच्चे तेल पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के प्रतिबंधों के बाद से भारत रूसी तेल के सबसे बड़े ख़रीदार के रूप में भी उभरा है.

व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित यात्रा पर ब्लूमबर्ग ने अपने लेख में कहा था, "अगर पुतिन भारत जाते हैं तो यह उनके विदेश यात्राएं करने को लेकर बढ़ते विश्वास को भी दिखाता है, ख़ासकर पिछले साल मार्च में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के यूक्रेन में किए युद्ध अपराधों के लिए उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी करने के बाद से."

भारत आईसीसी का सदस्य नहीं है और उसके वारंट को लागू करने के लिए बाध्य नहीं है. बावजूद इसके साल 2023 में जब भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन हुआ था तब पुतिन उसमें शामिल नहीं हुए थे.

हालांकि सितंबर 2024 में जब पुतिन ने मंगोलिया की यात्रा की थी तब उसने आईसीसी के वारंट को लागू नहीं किया था. मंगोलिया आईसीसी का सदस्य देश है और वारंट लागू ना करने को लेकर उसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना भी करना पड़ा था.

अब 4-5 दिसंबर को निर्धारित 23वें भारत-रूस सालाना सम्मेलन के लिए पुतिन के भारत दौरे को लेकर अंतरारष्ट्रीय मीडिया में कहा जा रहा है कि ये यात्रा मुश्किल समय में हो रही है.

फॉरेन पॉलिसी पत्रिका ने एक लेख में कहा है, "पुतिन के आगमन के निकट भारत ने अपनी काफी रणनीतिक पूंजी ख़र्च की है."

इस उद्देश्य से, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महीने मॉस्को गए थे. यहां उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के साथ-साथ पुतिन से भी मुलाक़ात की.

इससे पहले अगस्त में जयशंकर और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी मॉस्को की यात्राएं की थीं.

पुतिन का यह भारतीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच वार्ता विफल रही थी. ट्रंप और पुतिन ने अगस्त में अलास्का में बैठक की थी जिसका कोई ख़ास नतीजा नहीं निकला था.

अलास्का में हुई इस बैठक के बाद से ट्रंप प्रशासन लगातार सीमित मात्रा में हथियार नेटो सहयोगियों के माध्यम से यूक्रेन भेज रहा है. इसी महीने अमेरिका ने यूक्रेन को पहले उपलब्ध करवाई गई पेट्रियट मिसाइलों के अपग्रेड भी उपलब्ध करवा दिए हैं.

क्या होगा ट्रंप का क़दम?

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल ख़रीदने की वजह से भारत पर जुर्माने के तौर पर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है

फॉरेन पॉलिसी में प्रकाशित लेख में स्टेनफ़र्ड यूनिवर्सिटी के हूवर इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो सुमित गांगुली ने लिखा है, "भारत और रूस दोनों एक-दूसरे के क़रीब आ रहे हैं क्योंकि दोनों ही अमेरिका से दबाव महसूस कर रहे हैं."

हालांकि ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की रूस के यूक्रेन युद्ध के प्रति अडिग नीति को नहीं अपनाया है और हाल ही में एक शांति योजना की घोषणा भी की है, जिसमें यूक्रेन को काफी रियायतें देनी पड़ेंगी. फिर भी रूस अमेरिका से असंतुष्ट है क्योंकि अमेरिका लगातार यूक्रेन को समर्थन देता रहा है.

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल ख़रीद रहा है और इस वजह से हाल के महीनों में भारत ट्रंप प्रशासन के निशाने पर है. हालांकि कई विश्लेषक ये भी मानते हैं कि ट्रंप की नाराज़गी की असली वजह यह है कि मई में पाकिस्तान के साथ संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य संघर्ष को समाप्त करने का श्रेय मोदी ने ट्रंप को नहीं दिया.

फॉरेन पॉलिसी के लेख में कहा गया है, "भारत-पाकिस्तान संकट समाप्त होने के बाद, रिपोर्टों के मुताबिक़, मोदी ने ट्रंप के चार फ़ोन कॉल नहीं उठाए. इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने भारत के कई उत्पादों पर 50 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगा दिए और दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते धराशाई हो गए."

भारत और अमेरिका के संबंधों में आई इस गिरावट के बीच भारत का रूस की तरफ़ से खुलकर हाथ बढ़ाना हैरानी की बात नहीं है.

इस लेख में कहा गया है, "कई रिपोर्टों से ये संकेत मिल रहे हैं कि अगले सप्ताह होने वाला सम्मेलन महत्वपूर्ण होगा. इस सम्मेलन के दौरान कई सौदों और समझौतों पर चर्चा होगी. इनमें सुखोई-57 लड़ाकू विमानों को लेकर समझौता भी शामिल है."

पुतिन की इस भारत यात्रा के दौरान हो सकता है दोनों देशों के बीच चर्चा में चल रहे सभी समझौतों और सौदों पर हस्ताक्षर भले ना हों लेकिन कुछ मामलों में नतीजे निकलने की उम्मीद ज़रूर है.

पुतिन की नई दिल्ली की इस यात्रा से भारत और रूस दोनों की तरफ़ से दुनिया को एक संदेश ज़रूर जाएगा कि 'दोनों के ही पास शक्तिशाली दोस्त हैं.'

फॉरेन पॉलिसी ने लिखा है, "निश्चित रूप से ये संदेश अमेरिका तक पहुंचेगा लेकिन ट्रंप भारत और रूस के बीच आ रही इस नई गर्मजोशी पर क्या प्रतिक्रिया देंगे, ये अनिश्चित है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.