गौतम गंभीर के बयान और भारत को दक्षिण अफ़्रीका से मिली करारी हार के मायने

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
सात मैचों के दौरान पांच मैचों में हार. 1959 के बाद यह पहला मौक़ा है जब टीम इंडिया को घरेलू मैदान पर लगातार इतनी शिकस्त झेलनी पड़ी है.
वह तो भला हो वेस्टइंडीज़ जैसी कमज़ोर टीम का, जो न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीका सिरीज़ के बीच में आई और शुभमन गिल और उनके साथियों को दो जीत नसीब हुई.
हालांकि, ये दो जीत भी आसानी से नहीं मिली थीं बल्कि इसके लिए भी टीम इंडिया को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.
वहीं दक्षिण अफ्रीका ने 25 साल बाद भारत को फिर से भारतीय ज़मीं पर खेली गई टेस्ट सिरीज़ में 2-0 से मात दी.
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इस हार के बाद हमने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज़ रविचंद्रन अश्विन से बात की.
उन्होंने कहा, ''इंग्लैंड के ख़िलाफ साल 2012-13 में जब हमने घरेलू ज़मीं पर टेस्ट सिरीज़ हारी थी तब वह मेरी पहली सिरीज़ हार थी और मैं इतना दुखी था कि मैंने कसम खायी कि अगली बार अगर घरेलू मैदान पर हारा तो टेस्ट क्रिकेट छोड़ दूंगा. और दुर्भाग्य से मेरे साथ यही हुआ, पिछले साल न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ हम 0-3 से हारे."
"मुझे उम्मीद है कि टीम इंडिया इस हार से आहत होकर ऐसा सबक ले कि फिर से हम इस तरह से न हारें. लेकिन, मैं आप सबको आगाह भी करना चाहूंगा कि बहुत ज़्यादा उम्मीदें न पालें क्योंकि अभी जिस तरह के खिलाड़ी आपके पास हैं, टेस्ट क्रिकेट में वैसा दबदबा हासिल करना फिर से आसान नहीं होने वाला है. आपको संयम दिखाना होगा.''
बीसीसीआई से पूछे जाने चाहिए सवाल
लेकिन अगर भारतीय क्रिकेट टीम को भविष्य के लिए ख़ुद को तैयार करना है, तो ख़ुद से ही कई कड़े सवाल करने होंगे. साथ ही बीसीसीआई के शीर्ष प्रबंधन से भी सवाल किए जाने चाहिए.
टीम इंडिया ने नवंबर महीने की शुरुआत में, ऑस्ट्रेलिया में सफ़ेद गेंद (टी20) की सिरीज़ ख़त्म की और तुरंत भारत लौटते ही उन्हें कोलकाता में लाल गेंद (टेस्ट क्रिकेट) की चुनौती के लिए जुटना पड़ा.
यह गंभीर स्थिति थी क्योंकि पूरा कोचिंग स्टाफ़ और कप्तान शुभमन गिल बिना पर्याप्त तैयारी के टेस्ट मोड में ढलने की कोशिश कर रहे थे.
अब सवाल यहां ये उठता है कि क्या बीसीसीआई ने विश्व टेस्ट चैंपियन दक्षिण अफ़्रीका को हल्के में ले लिया? क्या उन्हें लगा कि जैसी आसान जीत वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ मिली, वैसे ही नतीजे दक्षिण अफ्रीका के साथ भी मिल जाएंगे?

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दक्षिण अफ़्रीका की टीम को अपनी जीत पर कितना भरोसा था, यह उनके कोच के एक बयान से ही पता चल गया, जहां उन्होंने भारत को घुटने पर लाने वाली बात कही.
अपने इस बयान में दक्षिण अफ़्रीका के कोच शुकरी कोनराड ने कहा था, ''हम चाहते थे कि भारतीय टीम मैदान पर अधिक समय बिताए. हम चाहते थे कि वे घुटनों के बल आ जाए और हम मैच उनके हाथ से बिल्कुल बाहर करना चाहते थे.''

दूसरा बड़ा सवाल, जो कोच, कप्तान और चयनकर्ताओं के सामने खड़ा है, वह यह कि टीम इंडिया को घरेलू मैदान पर जीत के लिए हमेशा स्पिनर फ्रेंडली पिचों की ज़रूरत क्यों पड़ती है?
तीसरा अहम सवाल यह कि क्या नीतिश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों को 'ऑलराउंडर' बताकर टेस्ट इलेवन में शामिल करना वाकई सही निर्णय है?
टेस्ट क्रिकेट में ऑलराउंडर वही कहलाता है जो अपने दम पर या तो पांच विकेट लेने की क्षमता रखता हो या फिर शतक लगाकर मैच बचाने या जिताने की योग्यता रखता हो.
वॉशिंगटन सुंदर ने सिरीज़ में जुझारू पारियां ज़रूर खेलीं, पर विरोधी टीम के ऑफ़-स्पिनर साइमन हार्मर की तुलना में उनके पास दो मैचों में सिर्फ एक ही विकेट था, जो कि गंभीर सवाल खड़े करता है.
गौतम गंभीर की आलोचना

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सबसे अधिक आलोचना निश्चित तौर पर कोच गौतम गंभीर की हो रही है. मैच के बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए तो उन्होंने साफ़ कहा कि "अगर बीसीसीआई को ऐसा लगता है कि मैं ठीक पसंद नहीं हूं तो वह फ़ैसला कर सकते हैं. भारतीय क्रिकेट महत्वपूर्ण है, मैं नहीं."
लेकिन साथ ही कोच यह भी याद दिलाना नहीं भूले कि इंग्लैंड में 2-2 की बराबरी, चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप में जीतें भी उनकी कोचशिप में ही आयी हैं.
गौतम गंभीर के इस बयान पर अश्विन का कहना है, "मैं जानता हूं कि भारतीय क्रिकेट में हमेशा हमें एक बलि का बकरा चाहिए. हमें ऐसा टागरेट चाहिए होता है जिस पर हर कोई अपनी झुंझलाहट निकाल सकता हो. ऐसे में गंभीर एक आसान ज़रिया हैं. लेकिन एक सवाल मैं आपसे ये करना चाहता हूं कि अगर पूरी सिरीज़ में आपके बल्लेबाज़ों में से एक शतक तक न निकाल सके, तो इसके लिए कोच को कितना ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.''
वह कहते हैं, ''हां, मैं मानता हूं कि रणनीति के लिहाज़ से चूक हुई है, लोग मेरे, विराट और रोहित के रिटायरमेंट से भी इसे जोड़ रहे हैं लेकिन मैं ये कहूंगा कि हमारा खेल को छोड़ना अतीत की बात है. उस पर बहस से अब कोई मतलब नहीं है. फ़िलहाल भारतीय क्रिकेट के हर सदस्य को ये गंभीरता से सोचना पड़ेगा कि हमारे पास स्पिन खेलने वाले बल्लेबाज़ नहीं हैं और भविष्य में हमें गेंदबाज़ी के मोर्चे पर भी परेशानी होगी.''
पिछले चौदह मैचों में टीम इंडिया ने प्रयोग करते हुए 1 या 2 नहीं बल्कि 7 बल्लेबाज़ खिलाए हैं, जो हैरतअंगेज़ है.
आठ महीने का वक़्त

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विश्व टेस्ट चैंपियनशिप प्वाइंट्स टेबल में भारतीय टीम अब पांचवें स्थान पर आ गई है. टीम के सामने घरेलू मैदान में अगली और इकलौती टेस्ट चुनौती साल 2027 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होने वाली पांच मैचों की सिरीज़ होगी.
जून 2026 में भी अफ़ग़ानिस्तान के साथ एक टेस्ट मैच होना है. लेकिन असली परीक्षा न्यूज़ीलैंड में दो टेस्ट की वह सिरीज़ होगी, जहां टीम इंडिया 2009 के बाद से अब तक कोई सिरीज़ नहीं जीत सकी है.
कुल मिलाकर, रेड बॉल क्रिकेट में इस समय टीम इंडिया पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. एकमात्र सुकून की बात यह है कि पोस्टमार्टम करने और आगे की राह तय करने के लिए भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के पास लगभग आठ महीने का समय है.
अब देखना यह है कि क्या इस दौरान टीम में आमूल-चूल बदलाव किए जाते हैं या नहीं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















