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संजू सैमसन: एक पिता के संघर्ष और बच्चे को टॉप क्रिकेटर बनाने की चाहत की कहानी
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
''बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दिल्ली में खेले गए दूसरे टी20 मैच में जब मैं आउट हुआ तो मेरे एक दोस्त का मैसेज आया. वो बहुत गुस्से में था. उसने कहा, 'यार संजू,क्या कर रहा है? मेरा फोन का डेटा ख़त्म हो गया था. रिचार्ज करवा कर तेरा मैच लाइव देखा और तुम आउट हो गए! यार,ऐसा क्यों कर रहा है?''
''ये सुनकर पहले मुझे बहुत गुस्सा आया था कि क्यों ये मुझे क्रिकेट सिखा रहा है, मगर अब समझ में आता है कि लोग सच में चाहते हैं कि संजू अच्छा करे.''
ये वाक़या खुद के बारे में संजू सैमसन ने मुझे कुछ दिनों पहले बताया था तब मुझे लगा कि खिलाड़ियों पर बेहतर करने का दबाव कितना होता है.
स्टेडियम में हज़ारों दर्शक, टीवी सेट पर लाखों लोग और अपने करीबी चाहने वाले.
डरबन में खेले गए पहले टी20 मैच के दौरान संजू सैमसन ने बतौर ओपनर एक बार फिर शतक लगाया, तो खुशियां मनाने वाले सिर्फ उनके करीबी दोस्त या लाखों फैंस ही नहीं थे, बल्कि मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और हेड कोच गौतम गंभीर भी शामिल थे.
टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान रोहित शर्मा भी संजू के लगातार दूसरे शतक को देखकर बहुत खुश होंगे, क्योंकि एक मैच में सबसे ज्यादा 10 छक्के लगाने के उनके रिकॉर्ड की बराबरी उस खिलाड़ी ने की, जिसे रोहित काफी पसंद करते हैं.
क्या संजू भी रोहित की राह पर चलेंगे?
दरअसल रोहित को भी संजू में अपने शुरुआती दिनों का अक्स नज़र आता है, जब पूरी दुनिया उनकी प्रतिभा देखकर हतप्रभ हो जाती थी लेकिन उस हिसाब से मैदान में बड़ी पारियां देखने को नहीं मिलती थीं.
लगभग आधे दशक के संघर्ष के बाद, जब रोहित वनडे क्रिकेट में ओपनर बने तो उनके करियर की दिशा ही बदल गई और वो टेस्ट क्रिकेट में भी एक धुरंधर बल्लेबाज़ बन गए.
क्या संजू भी ठीक उसी तरह रोहित की राह पर चलेंगे? क्योंकि टी20 से ओपनर के तौर पर वो रिटायर हो चुके हैं और शायद बहुत ज़्यादा समय तक वनडे क्रिकेट भी न खेलें.
किंग्समीड में संजू की विध्वंसक पारी की बदौलत टीम इंडिया ने छक्कों और चौकों की बरसात कर दी. टीम ने कुल 17 चौके और 13 छक्के लगाए, जिसमें संजू का योगदान 7 चौकों और 10 छक्कों का रहा.
107 रनों की पारी के दौरान 29 साल के ओपनर संजू को 88 रन के लिए दौड़ने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी.
'बेटा अब तो गड्ढा नहीं है'
संजू ने अफ्रीका जाने से पहले एक ख़ास इंटरव्यू में अपने पिता के योगदान का दिलचस्प तरीके से ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, ''पिछले महीने जब मैं दिल्ली में फिरोजशाह कोटला में प्रैक्टिस करने जाने वाला था, उससे पहले पापा का फोन आया. मैं पहले मैच में सस्ते में आउट हो गया था. दूसरे मैच से ठीक पहले पापा ने कहा, ''बेटा, मैं तुम्हें एक कहानी बताता हूं.''
''पापा ने उस वक़्त की कहानी बताई जब हम दिल्ली में किंग्सवे कैंप, जीटीबी नगर में रहते थे, तो वहां मैं भी स्ट्रीट क्रिकेट खेलता था जैसे सब खेलते हैं. पापा फुटबॉलर होते हुए भी मुझे क्रिकेट सिखा रहे थे. वहां एक रोड थी, हमारे घर के सामने. उस रोड पर हम क्रिकेट खेलते थे. एक बार मैं आउट हो गया, बोल्ड हो गया.''
"पापा ने पूछा, 'तुम बोल्ड कैसे हो गए बेटा?' मैंने कहा, 'पापा, रोड पर एक गड्ढा था, बॉल उस गड्ढे से टकराकर नीचे रह गई और मैं बोल्ड हो गया'.''
उन्होंने कहा, ''अगले दिन जब मैं स्कूल से आ रहा था तो देखा कि पापा रोड पर कुछ काम कर रहे थे. मैंने सोचा, 'ये क्या हो रहा है!' जब मैंने पास जाकर देखा, तो पाया कि जहां गड्ढा था, वहां पापा अपने हाथ से सीमेंट लगा रहे थे. सीमेंट लगाया और पत्थर भी लगाया. फिर पापा ने कहा,''बेटा,अब तो गड्ढा नहीं है!''
सैमसन की बातों से साफ है कि उनके पिता ने सिर्फ उस दिन सड़क पर आई रुकावट को नहीं भरा, बल्कि ज़िंदगी के हर मोड़ पर जहां भी उन्हें बाधा दिखाई दी उनके परिवार ने उन्हें हौसला दिया है.
संजू ने बताया, ''मेरे पापा के कई दोस्तों ने कहा कि 'अरे, तुम इतनी मेहनत कर रहे हो अपने बच्चे के लिए. ये सब मुमकिन नहीं है. तुम जो सपना देख रहे हो, वो पूरा नहीं होगा. इंडियन क्रिकेट में अपने बेटे को कैसे पहुंचाओगे? ये नामुमकिन है. पापा से उनके दोस्त ये सब कहते थे कि ये सब छोड़ दो और बच्चे को किसी और काम में लगाओ, क्योंकि इंडियन क्रिकेट तुम्हारे लिए नहीं है'.''
पापा ने उन्हें जवाब देते हुए कहा, ''तुम देख लेना कुछ सालों बाद. मेरे हाथ में तो नहीं है, लेकिन कुछ सालों बाद देखना.''
संजू का सपना
संजू कहते हैं, "जब मैं फिरोज़शाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) पहुंचा, तो पापा ने कहा, 'बेटा, जिस दिन मैंने ये सोचा था, आज वो सपना सच हुआ है. आज के मैच में तुम्हें रन बनाने ही हैं.' इस कहानी से उन्होंने मुझे बताया कि क्रिकेट की क्या अहमियत है और किसी सपने को सच करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है.''
संजू भले ही दिल्ली के मैच में बड़ी पारी नहीं खेल पाए लेकिन उसके बाद हैदराबाद और फिर डरबन में लगातार दो टी20 शतक लगाने वाले पहले भारतीय बन गए.
न सिर्फ उनके पिता बल्कि हिंदुस्तान के हर क्रिकेट प्रेमी को अब उम्मीद होगी कि केरल का ये बल्लेबाज़ अपने आदर्श रोहित शर्मा की तरह टेस्ट क्रिकेट में भी वही जलवा दिखाए. संजू ने खुद माना है कि ये उनका अंतिम सपना है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित