कनाडा में ‘नाज़ियों’ की मौजूदगी और हिटलर को यूक्रेन की मदद का क्या है इतिहास

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- Author, नदीन यूसिफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, टोरंटो
कनाडा की संसद द्वारा नाज़ी जर्मनी के साथ मिलकर लड़ने वाले एक पूर्व यूक्रेनी सैनिक की तारीफ़ करने से यूक्रेन के इतिहास का एक विवादित भाग और कनाडा में उससे सम्बंधित स्मारक फिर चर्चा में आ गए हैं.
इसी हफ़्ते कनाडा की संसद में यूक्रेनी पूर्व सैनिक यारोस्लाव हुन्का की तारीफ़ की गई जिन्होंने नाज़ी जर्मनी की सैन्य यूनिट में काम किया था. नाज़ी जर्मनी के अर्धसैनिक संगठन शुट्ज़स्टाफ़ेल (एसएस) के तहत साल 1943 में गठित इस यूनिट का नाम ‘14वीं वॉफ़ेन ग्रेनेडियर डिविज़न’ था. इसे ‘गैलेसिया डिविज़न’ भी कहा जाता है.
संसद में यारोस्लाव हुन्का की मौजूदगी का यहूदी समूहों और अन्य सांसदों ने एक स्वर में विरोध किया था. इसके बाद यारोस्लाव को न्योता देने वाले सांसद एंथनी रोटा ने हाउस ऑफ़ कॉमन्स के स्पीकर पद से यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया कि उन्हें अपनी ग़लती पर अफ़सोस है.
लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब सबसे ज़्यादा यूक्रेनी प्रवासियों वाले देश कनाडा में इस बात पर चर्चा छिड़ी हो कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूक्रेन की भूमिका क्या थी.
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान गैलिसिया डिविज़न में सेवाएं दे चुके कई पूर्व यूक्रेनी सैनिकों के सम्मान में कनाडा के कई हिस्सों में स्मारक बने हैं.
यहूदी समूह लंबे समय से इन स्मारकों का विरोध करते रहे हैं. उनका कहना है कि इस डिविज़न में काम करने वालों ने अडोल्फ़ हिटलर के प्रति निष्ठावान रहने का प्रण लिया था और या तो वे नाज़ी जर्मनी के अपराधों में शामिल रहे हैं या उन्होंने ख़ुद भी अपराधों को अंजाम दिया है.
लेकिन ये पूर्व सैनिक कुछ यूक्रेनियों के लिए वे स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्होंने यूक्रेन को आज़ाद करवाने के लिए सोवियत संघ के ख़िलाफ़ नाज़ी जर्मनी का साथ दिया था.

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विवादास्पद इतिहास
वॉफे़न-एसएस की गैलिसिया डिविज़न ऐसी सैन्य इकाई थी जो यहूदी नागरिकों के नरसंहार समेत कई अत्याचारों में शामिल पाई गई है.
युद्ध के दौरान यूक्रेन में 10 लाख से ज़्यादा यहूदी मारे गए थे. उनमें से ज़्यादातर को नाज़ी जर्मनी और उनके सहयोगियों ने उनके घर के पास ही गोली मारी थी.
गैलिसिया डिविज़न पर युद्ध अपराधों के आरोप लगे हैं मगर इसके सदस्यों को कभी किसी अदालत में दोषी नहीं पाया गया. यहूदी समूहों ने वॉफ़ेन-एसएस में काम कर चुके यूक्रेनी पूर्व सैनिकों की याद में कनाडा में स्मारक बनाने की निंदा की है. उनका कहना है कि यह होलोकॉस्ट (यहूदी नरसंहार) में भाग लेने वालों का महिमामंडन करना है.
ऐसा एक स्मारक ओंटारियो के ओकविल में एक निजी यूक्रेनी कब्रिस्तान में बना है. इसमें गैलिसिया डिविज़न का प्रतीक चिन्ह भी लगाया गया है. एक अन्य स्मारक द्वितीय विश्वयुद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व यूक्रेनी सैनिकों ने अलबर्टा के एडमॉन्टन में बनाया है.
एडमॉन्टन में एक और स्मारक है जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रवादी नेता और नाज़ियों का साथ देने वाले रोमन शुखेविच की प्रतिमा है. इनकी यूनिट पर यहूदी और पोलिश लोगों के नरसंहाकर का आरोप है.
कुछ स्मारक 1970 और 1980 के दशक में बने हैं और उनमें हाल के सालों में तोड़फोड़ भी हुई है. कुछ पर लाल रंग के पेंट से ‘नाज़ी’ लिखा गया था.

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स्मारकों पर क्यों बंटी है राय?
अलबर्टा विश्वविद्यालय में पूर्वी यूरोप के इतिहास के प्रोफ़ेसर डेविड मार्पल्स कहते हैं कि इसे समझने के लिए युद्ध के दौरान यूक्रेन के इतिहास और कनाडा में मौजूद यूक्रेनी प्रवासियों के स्वरूप को समझना होगा.
प्रोफ़ेसर मार्पल्स बताते हैं, “दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान लाखों यूक्रेनियों ने सोवियत संघ की रेड आर्मी में काम किया था मगर हज़ारों अन्य ने जर्मनी का पक्ष लेते हुए उनकी गैलिसिया डिविज़न में सेवाएं दी थीं.”
जिन लोगों ने जर्मनी का साथ दिया, उन्हें लगता था कि इससे उन्हें सोवियत संघ से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र मिलेगा.
1932-33 में यूक्रेन में एक भीषण अकाल पड़ा था जिसे होलोडोमोर कहते हैं. इसमें 50 लाख यूक्रेनियों की जान चली गई थी. इसमें सोवियत संघ की भूमिका को लेकर यूक्रेनियों में बहुत नाराज़गी थी.
प्रोफ़ेसर मार्पल्स बताते हैं कि 1930 के दशक में ब्रिटेन समेत ज़्यादातर यूरोपीय देशों में अति दक्षिणपंथी विचारधारा का उभार हो रहा था और यूक्रेन भी इससे अछूता नहीं था.
फिर युद्ध में जर्मनी के बाद गैलिसिया डिविज़न के सैनिकों ने मित्र देशों की सेना के आगे आत्मसमर्पण किया तो उन्हें कनाडा में आने की इजाज़त दे दी गई. यहूदी समूहों ने उस समय भी इस क़दम की आलोचना की थी.
यूक्रेनी मूल के कुछ कनाडाई नागरिक इन सैनिकों और गैलिसिया डिविज़न को देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले ‘राष्ट्रीय नायक’ मानते हैं.
उनका यह भी कहना है कि इन लोगों ने कुछ ही समय के लिए नाज़ी जर्मनी का साथ दिया था जबकि वे स्वतंत्र यूक्रेन के लिए सोवियत और जर्मनी, दोनों से जंग लड़ रहे थे.
मगर यहूदी समुदाय इसे अलग नज़रिये से देखता है.
बनी ब्रिथ कनाडा के नेता माइकल मोस्तिन ने बीबीसी से कहा, “मुख्य बात यह है कि यह यूनिट, 14वीं एसएस यूनिट, नाज़ी थी.”
कनाडा में इस बारे में एक आयोग भी बनाया गया था. 1985 में बने इस आयोग को उन आरोपों की जांच की ज़िम्मेदारी दी गई थी जिनमें कहा जा रहा था कि कनाडा तो नाज़ी युद्ध अपराधियों की शरणगाह बन गया है.
अगले साल इस कमीशन द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि ऐसे कोई सबूत नहीं हैं कि नाज़ियों की ओर से लड़ने वाले यूक्रेनियों ने किसी युद्ध अपराध को अंजाम दिया हो.
रिपोर्ट में कहा गया था कि सिर्फ गैलिसिया डिविज़न का सदस्य होना इस बात को साबित करने के लिए नाकाफ़ी है कि उन्होंने कोई अत्याचार किया है.
यहूदी समूह और कुछ इतिहासकार तभी से इस रिपोर्ट के नतीजों का विरोध करते आ रहे हैं.
प्रोफ़ेसर मार्पल्स कहते हैं कि जिस समय यह रिपोर्ट तैयार हुई, उस समय यूक्रेन और रूस में मौजूद द्वितीय विश्वयुद्ध के दस्तावेज़ों को हासिल नहीं किया जा सकता था. लेकिन जबसे वे दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए हैं, तबसे इस विषय पर शोध किए जाने को बढ़ावा मिला है.
उन्होंने कहा, “इसके बाद ही कुछ शोधों से पता चला कि जिन लोगों ने गैलिसिया डिविज़न में काम किया था, भले ही उन्हें कभी दोषी नहीं पाया गया मगर वे युद्ध अपराधों में शामिल थे.”
रूसी दुष्प्रचार के निशाने पर यूक्रेन का इतिहास
यह ऐतिहासिक चर्चा जैसे ही 21वीं सदी में दाख़िल हुई, रूस द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार के कारण चीज़ें और पेचीदा हो गईं. यूक्रेन सरकार पर रूस ‘नाज़ी’ होने का झूठा आरोप लगाता है ताकि वह यूक्रेन पर हमले को सही ठहरा सके.
प्रोफ़ेसर मार्पल्स कहते हैं कि भले ही यूक्रेन में अभी भी अति दक्षिणपंथी चरमपंथ मौजूद है लेकिन यह उतना ज़्यादा नहीं है, जितना रूस लोगों को दिखाना चाह रहा है. साथ ही, यूक्रेन में चुने गए लोग किसी भी धुर दक्षिणपंथी समूह से नहीं जुड़े हैं.
वह कहते हैं, “रूस ने कहानी को बहुत आसान रूप में पेश कर दिया है.”
कनाडा में मौजूद यूक्रेनी समूह कहते हैं कि स्मारकों को लेकर चल रहा विवाद और संसद में यारोस्लाव हुन्का के आने का विरोध इसी दुष्प्रचार का नतीजा है.
साल 2017 में जब यूक्रेन और रूस के बीच तनाव चरम पर था, तब कनाडा में रूसी दूतावास ने यूक्रेनी स्मारकों की यह कहते हुए आलोचना की थी कि कनाडा नाज़ियों के साथियों को श्रद्धांजलि दे रहा है.
एडमॉन्टन में यूक्रेनियन यूथ यूनिटी कॉम्प्लेक्स में यूक्रेनी पूर्व सैनिक शुखेविच की प्रतिमा लगी है. इस कॉम्प्लेक्स के प्रवक्ता तारस पॉडिलस्की कहते हैं कि कनाडा के राजनेताओं द्वारा हुन्का का विरोध करना रूस के दुष्प्रचार का नतीजा है.
वह कहते हैं कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हुन्का किसी युद्ध अपराध में शामिल रहे हों.
पॉडिलस्की कहते हैं, “यह शख़्स रूस द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार के शिकार हो गए हैं.”
वहीं, बनी ब्रिथ के नेता मोस्तिन का कहना है कि वह मानते हैं कि इस सम्बंध में इतिहास काफ़ी पेचीदगियों भरा है.
लेकिन उन्होंने कहा कि नाज़ियों से सम्बंध होना कोई ऐसी बात नहीं है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को इसका जश्न मनाने दें या लीपापोती करने दें.
पूर्वी यूरोपीय देशों द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यहूदियों के नरसंहार में अपनी भूमिका को कमतर दिखाने की होलोकॉस्ट का अध्ययन करने वाले विद्वानों ने हाल के सालों में कड़ी आलोचना की है.
कनाडा में मौजूद यहूदी समूहों और इन स्मारकों को बनाने वाले यूक्रेनी मूल के कनाडाई नागरिकों का कहना है कि उनके बीच इस विषय पर कई बार चर्चा हुई है.
हालांकि, दोनों का कहना है कि वे कोई रास्ता नहीं निकाल सके.
पॉडिलस्की कहते हैं, “यह स्मारक हमारी अपनी संपत्ति पर है, सार्वजनिक संपत्ति पर नहीं है. और हमारे लिए यह यूक्रेनी स्वतंत्रता का प्रतीक है. हम जानते हैं कि इन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया था. ”
वहीं मोस्तिन कहते हैं कि उन्हें लगता है कि कनाडा की संसद में हुई हाल की घटना दिखाती है कि नाज़ी इतिहास को लेकर कनाडा के लोगों की जानकारी में कुछ कमियां हैं.
वह कहते हैं, “कनाडा में ऐसी स्थिति है कि नाज़ी अपराधियों के यहां आने को लेकर हमें अपने ही इतिहास का पता नहीं है.”
मोस्तिन और कनाडा में यहूदी समुदाय के अन्य लोगों ने इस इतिहास की फिर से पड़ताल करने की मांग की है.
वह कहते हैं, “यह महत्वपूर्ण है कि इस विषय पर हमारे प्रधानमंत्री अच्छे नेतृत्व का प्रदर्शन करें क्योंकि यहूदी समुदाय कई दशकों से इसकी मांग कर रहा है."
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