यूपीएससी इंटरव्यू से पहले मां का हुआ निधन, पहले प्रयास में बेटे ने हासिल की दूसरी रैंक- प्रेस रिव्यू

यूपीएससी सिविल सेवा में इस बार दूसरी रैंक अनिमेष प्रधान ने हासिल की है

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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आ चुके हैं. इस बार आदित्य श्रीवास्तव ने इस परीक्षा में टॉप किया है.

आदित्य श्रीवास्तव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने शुरू हो गए हैं.

यूपीएससी सिविल सेवा में इस बार दूसरी रैंक अनिमेष प्रधान ने हासिल की है. अनिमेष ने ये सफलता अपने पहले प्रयास में हासिल की है.

द इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अनिमेष प्रधान पर रिपोर्ट की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, अनिमेष जब यूपीएससी इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे, उस महीने उनकी मां की कैंसर के कारण मौत हो गई थी.

अनिमेष 24 साल के हैं. वो बोले- सब्र और दृढ़ता से उन्हें मुश्किल हालात से निपटने में मदद मिली.

अनिमेष ओडिशा से हैं. वो कहते हैं- मेरी तैयारी में मां ने सबसे ज़्यादा साथ दिया, मैं यूपीएससी अपनी मां के लिए निकालना चाहता था.

'मेरी मां को मुझ पर गर्व हो सके'

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अनिमेष इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बोले, ''मुझे मालूम था कि उनके पास अब कुछ दिन ही बचे हैं. वो लास्ट स्टेज के कैंसर से जूझ रही थीं. मैं यूपीएससी में जल्द से जल्द पास होना चाहता था ताकि मेरी मां को मुझ पर गर्व हो सके.''

अनिमेष ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एनआईटी राउरकेला से बीटेक की पढ़ाई की है.

सिविल सेवा परीक्षा में अनिमेष का वैकल्पिक विषय समाजशास्त्र था. अनिमेष कहते हैं, ''मेरी समाज और समाज शास्त्र के मुद्दों में हमेशा रुचि रही है. बीटेक की पढ़ाई के दौरान हमारा सामाजिक विज्ञान का एक पेपर होता था, इसी के ज़रिए मुझे इस विषय के बारे में पता चला.''

अनिमेष ने कहा है कि उन्होंने यूपीएससी के लिए किसी तरह की कोचिंग क्लास नहीं ली है.

अनिमेष ने कहा, ''मैंने 2022 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी. मैं रोज़ छह-सात घंटे पढ़ता था. मैंने अपनी पूरी पढ़ाई ओडिशा में की है.''

अनिमेष ने ओडिशा कैडर को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है.

2015 में पिता की हुई थी मौत

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आईएएस बनने के बाद अपने इरादे पर अनिमेष कहते हैं, ''मैं ज़मीन पर जाकर लोगों के लिए काम करना चाहता हूं ताकि उनकी ज़िंदगी बदले. मैं लोगों की शिक्षा की बेहतरी और स्वास्थ्य लिए काम करना चाहता हूं, ख़ासकर पिछड़े इलाकों में.''

अनिमेष ने यूपीएससी में संसदीय बहस, मीडिया और पत्रकारिता, फ्री स्टाइलिंग डांस को अपना शौक बताया था.

फिलहाल अनिमेष इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में नौकरी कर रहे हैं.

अनिमेष के पिता का साल 2015 में निधन हो गया था, तब अनिमेष 11वीं क्लास में थे.

वो कहते हैं- मां-बाप को खोना असहनीय दर्द है, मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना चाहता था ताकि उनको मुझ पर गर्व हो सके.

यूपीएससी की तैयारी कर रहे लोगों को क्या सलाह देंगे?

अनिमेष ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे लोगों को सलाह दी है कि वो ख़ुद से एक सवाल पूछें- यूपीएससी की तैयारी शुरू क्यों की थी?

वो कहते हैं- मुश्किलें आएंगी पर मज़बूत बने रहना है. प्रेरित करने वालों का साथ बनाए रखना है.

ओडिशा से 20 साल बाद कोई यूपीएससी टॉपर्स में आया है. साल 2003 में रूपा मिश्रा ने पहली रैंक हासिल की थी.

टॉप-5 में तीन आईपीएस ट्रेनी

 पहली रैंक हासिल करने वाले आदित्य श्रीवास्तव

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इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने यूपीएससी रिज़ल्ट पर एक और रिपोर्ट की है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपीएससी की 1016 नियुक्तियों में से 352 यानी क़रीब एक तिहाई महिलाएं हैं. टॉप 10 में आए लोगों में क़रीब छह महिलाएं हैं.

दो साल बाद इस बार टॉप पर एक पुरुष प्रतियोगी का चयन हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार लिखता है कि पहली रैंक हासिल करने वाले आदित्य श्रीवास्तव के अलावा दो और आईपीएस ट्रेनी टॉप-5 में हैं.

आदित्य श्रीवास्तव आईआईटी कानपुर से पोस्ट ग्रेजुएट हैं और जब रिजल्ट आया, तब वो आईपीएस की ट्रेनिंग कर रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम पर क्या कहा

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वीवीपैट पर्चियों के 100 फीसदी मिलान की मांग और ईवीएम के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए पेपर बैलेट की वापसी के विचार पर असहमति जताई. कोर्ट ने कहा कि मशीन सटीक नतीजे देती है बशर्ते इंसानी दखल ना हो.

जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा- इंसानी कमज़ोरी और पूर्वाग्रह दिक़्क़त पैदा कर सकते हैं.

कोर्ट ने कहा- हमने देखा है कि जब बैलेट पेपर था, तब क्या होता था.

कोर्ट एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

इस संस्था का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, ''हम यह नहीं कह रहे हैं कि ईवीएम में हेरफेर की जा रही है या की गई है. हम कह रहे हैं कि उन्हें मैनिपुलेट किया जा सकता है. ईवीएम और वीवीपैट दोनों में एक प्रोग्रामेबल चिप होती है.''

इसके अलावा भूषण ने कहा कि ईवीएम को बनाने वाली दो पीएसयू के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में बीजेपी के सदस्य हैं.

प्रशांत भूषण ने ये भी कहा कि कई देशों में पूरा चुनाव बैलेट पेपर से होता है. बेंच ने पूछा, ''जर्मनी की आबादी कितनी है.''

कोर्ट ने कहा कि इन देशों की आबादी कम है और भारत की इससे तुलना करना गलत होगा.

रायबरेली, कैसरगंज में बीजेपी, कांग्रेस के उम्मीदवारों का एलान कब

सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी

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लोकसभा चुनाव 2024 की पहली वोटिंग 19 अप्रैल को होनी है.

मगर सबसे ज़्यादा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की दो चर्चित सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है.

कैसरगंज और रायबरेली सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, इन सीटों पर 20 मई को चुनाव होने हैं. नामांकन दाखिल करने की आख़िरी तारीख़ तीन मई है.

रायबरेली से गांधी परिवार चुनाव लड़ता रहा है. मगर इस बार सोनिया गांधी ने रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया है. 2014, 2019 में भी इस सीट पर बीजेपी कांग्रेस को हरा नहीं सकी थी.

बीजेपी संभवत: कांग्रेस के उम्मीदवार के नाम का एलान किए जाने की प्रतीक्षा कर रही है.

यूपी कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मनीष हिंदवी ने कहा- कांग्रेस आलाकमान सही वक़्त आने पर इस बारे में फैसला लेगी, पार्टी ने चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है.

वहीं कैसरगंज सीट पर बीजेपी के बृजभूषण शरण सिंह सांसद रहे हैं. बीते महीनों में उन पर महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.

इस सीट पर बृजभूषण शरण की मज़बूत पकड़ बताई जाती है. मगर बीजेपी ने अब तक इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है.

बसपा और सपा ने भी इस सीट पर अपने उम्मीदवार का नाम नहीं बताया है.

माना जा रहा है कि ये सभी दल बीजेपी के फ़ैसले के बाद ही कदम उठाएंगी. वैसे यूपी की एक चर्चित सीट अमेठी भी है, जहां से राहुल गांधी साल 2019 में स्मृति इरानी के ख़िलाफ़ हार गए थे.

इन चुनावों में बीजेपी ने स्मृति इरानी को फिर टिकट दिया है. मगर कांग्रेस ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है.

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