वर्ल्ड कप मिशन पर रोहित-विराट कोहली की टीम, क्या कोई विरोधी इसे रोक पाएगा?

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- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत ने पाकिस्तान पर वर्ल्ड कप में सात विकेट से जीत हासिल की. इस वर्ल्ड कप में यह भारत की लगातार तीसरी जीत है. इस जीत के साथ ही पॉइंट टेबल में भारतीय टीम शीर्ष पर पहुंच गई है.
भारत पहले ही वनडे रैंकिंग में नंबर-1 है.
उसने टूर्नामेंट का आग़ाज़ रैंकिंग में नंबर-3 ऑस्ट्रेलिया को हराकर किया तो बीती रात नंबर-2 पर बैठे पाकिस्तान को रौंद डाला.
भारत-पाकिस्तान के बीच इस मुक़ाबले की चर्चा महीनों पहले शुरू हो गई थी पर जब दोनों भिड़े तो नतीजा वही आया जो 1992 से बदस्तूर होता आया है.
31 साल पहले पाकिस्तान के साथ वर्ल्ड कप में जीत का सिलसिला मोहम्मद अज़हरूद्दीन के नेतृत्व में शुरू हुआ था, रोहित शर्मा की टीम ने उसे बरकरार रखा है.

शोएब अख़्तर हुए दुखी
पाकिस्तान की शुरुआत दुरुस्त थी लेकिन वो थोड़ी धीमी गति से रन बना रहे थे. हालांकि 155 रन तक केवल दो विकेट गिरे थे पर अगले 36 रन जोड़ने में बाबर आज़म की पूरी टीम पवेलियन लौट गई.
रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख़्तर ने पाकिस्तान की ख़राब बल्लेबाज़ी पर तीखी प्रतिक्रिया दी.
वो बोले, "पाकिस्तान के सभी बल्लेबाज़ों को बेहतरीन प्लेटफॉर्म मिला पर टीम इसे भुना नहीं पाई. पाकिस्तान के पास वो टैलेंट नहीं था जो लंबा स्कोर करता. एक बहुत अच्छे ट्रैक और बैटिंग विकेट पर पाकिस्तान के हाथों मैच फिसलता देख कर दिल दुखता है."
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क्या बोले बाबर और रोहित?
पाकिस्तान की बल्लेबाज़ी लड़खड़ाने पर मैच के बाद कप्तान बाबर आज़म खुद बोले, "अच्छी साझेदारी के साथ शुरुआत अच्छी हुई थी. हमने सामान्य क्रिकेट खेलने और पार्टनरशिप करने की कोशिश की पर अचानक विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हुआ और हम बहुत कम स्कोर ही खड़ा कर सके. हमने जिस तरह से शुरुआत की थी हमारा टारगेट 280-290 रन था लेकिन मध्यक्रम का चरमराना हमें महंगा पड़ा. (गेंदबाज़ी में) हम नई गेंद से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके."
191 पर पाकिस्तान का आउट हो जाना न केवल खेल के जानकारों बल्कि ख़ुद विपक्षी कप्तान रोहित शर्मा को भी अचंभित कर गया.

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मैच के बाद रोहित बोले भी, "यह 190 की पिच नहीं थी. एक समय हमें 280-290 का स्कोर बनता दिख रहा था."
वर्ल्ड कप की यह भारतीय टीम न केवल काग़ज़ पर बल्कि मैदान में भी बहुत मज़बूत दिख रही है.
सबसे पहले बात गेंदबाज़ों की...

भारतीय गेंदबाज़ी 'रॉक सॉलिड'
मैच में बुमराह ने जब मोहम्मद रिज़वान को अपनी धीमी स्लो कटर से चकमा देते हुए उनके ऑफ़ स्टंप को उखाड़ दिया तो उसकी खूब तारीफ़ हुई.
मैच के बाद बुमराह बोले, "मैंने देखा जड्डू की गेंद घूम रही थी, तो मैंने मेरी स्लोअर को स्पिनर की स्लोअर गेंद के तरह इस्तेमाल किया. मैंने सोचा इससे रन बनाने में मुश्किल होगी और यह काम कर गया. गेंदबाज़ी के दौरान कुछ समय ऐसा भी आया जब गेंद को रिवर्स स्विंग मिल रहा था."
मैच के बाद पूर्व कोच रवि शास्त्री ने बुमराह की तारीफ़ में कहा, "वे दिमाग़ से गेंदबाज़ी करते हैं."
पाकिस्तान अगर केवल 191 रन बना सका तो इसकी वजह ये थी कि भारतीय गेंदबाज़ी का नेतृत्व किसी एक ने नहीं बल्कि पांचों गेंदबाज़ों ने आगे बढ़ कर किया.
जब भी किसी को बॉलिंग का मौक़ा दिया जाता वो विकेट झटक लेता.
आलम ये था कि बुमराह, सिराज, कुलदीप, पंड्या और जडेजा में से जिसने भी गेंद थामी उसने एक नहीं दो दो विकेटें निकालीं.
ये वो ही गेंदबाज़ हैं जिन्होंने पाकिस्तान के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया को भी ऑलआउट किया है. टूर्नामेंट में अब तक भारतीय गेंदबाज़ों ने तीन मैच में 28 विकेटें ली हैं.
साथ ही इस मैच के ख़त्म होने के बाद जसप्रीत बुमराह (7 विकेट) इस वर्ल्ड कप में अब तक सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं. तो इस फेहरिस्त में पांचवें नंबर पर रवींद्र जडेजा भी उनका साथ दे रहे हैं.
अभी शार्दुल ठाकुर और मोहम्मद शमी सरीखे गेंदबाज़ डग आउट में भी हैं. शमी वनडे में सबसे तेज़ 100 विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज़ हैं तो शार्दुल को विकेट पर जमीं जोड़ी को अपनी गेंदबाज़ी से तोड़ने के लिए जाना जाता है.
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हार्दिक गेंद हाथ में लेकर क्या बोल रहे थे?
इस मैच में पाकिस्तान की बल्लेबाज़ी के दौरान जब हार्दिक पंड्या इमाम उल-हक़ को गेंद डाल रहे थे तब वे गेंद को अपने दोनों हाथों में बीच थामते हुए कुछ कहते देखे गए.
इसके बाद वो स्टंप्स की ओर गेंद डालने के लिए दौड़े. जैसे ही उन्होंने अपनी गेंद डाली इमाम उल-हक़ आउट हो गए.
इसके बाद यह शॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
मैच के बाद हार्दिक से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "वो ख़ुद को गाली दे रहे थे कि गेंद जगह पर डालो."
वे बोले, "मैं ख़ुद को मोटिवेट कर रहा था कि थोड़ा जगह पर बॉलिंग डालो. ज़्यादा चीज़ें करने मत जाओ. बेसिकली ख़ुद को गालियां दे रहा था."

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भारत की दमदार बैटिंग-बॉलिंग लाइनअप
इस टूर्नामेंट में जहां गेंदबाज़ों ने जमकर पसीने बहाए हैं वहीं बल्लेबाज़ों का नेतृत्व ख़ुद कप्तान आगे बढ़ कर रहे हैं.
कप्तान रोहित ने शून्य बना कर इस वर्ल्ड कप की शुरुआत की थी. लेकिन अगले दो मैचों में शतक और अर्धशतक जमा दिए.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टॉप ऑर्डर फिसला तो मध्यक्रम ने जीत की बागडोर संभाली तो पहले अफ़ग़ानिस्तान और अब पाकिस्तान के ख़िलाफ़ स्वयं कप्तान ने आगे बढ़ कर नेतृत्व किया.
कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली पूरी लय में दिख रहे हैं. तो शुभमन गिल की वापसी हो चुकी है और पाकिस्तान के साथ भले ही वो बड़ा स्कोर नहीं कर सके पर गेंद अच्छी तरह से हिट कर रहे थे.
वहीं के एल राहुल, श्रेयस अय्यर और हार्दिक पंड्या ने भी बैट से जितना मौक़ा मिला उसमें खरे उतरे.

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शानदार फ़ील्डिंग
बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी के साथ ही यहां यह भी चर्चा करनी चाहिए कि भारतीय टीम फील्ड में भी शानदार कर रही है.
रोहित ने पहले मैच में जीत के बाद कहा भी था कि टीम ने अपनी फील्डिंग पर जम कर मेहनत की है और वो बखूबी मैदान में भी दिख रहा है.
जो नियमित 11 खिलाड़ी मैच खेलते हैं उनके अलावा जब भी किसी सब्सटिट्यूट को बुलाया जाता है वो गाहे बगाहे अपनी ज़ोरदार फील्डिंग से हैरान करता दिखता है.
निश्चित चौके को सिंगल या डबल में तब्दील कर भारतीय फील्डर्स ने लगता है विपक्षी टीम पर दबाव डालने की एक और कला में महारथ हासिल कर ली है.
कुल मिलाकर यह टीम खेल के सभी डिपार्टमेंट में अपनी पकड़ को अब तक बेहद मजबूत किए हुए है. लिहाजा उसे हराना आसान नहीं दिख रहा.
साथ ही अपने घरेलू मैदानों पर भारतीय टीम की जीत का नायाब रिकॉर्ड रहा है. पिछले 25 वनडे में से केवल पांच में ही उसे शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

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तो क्या यहां से भारत को कोई टीम हरा पाएगी?
आगे आने वाले मुख्य मुक़ाबले न्यूज़ीलैंड, इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका जैसी इस वर्ल्ड कप में दमदार प्रदर्शन कर रही टीमों के ख़िलाफ़ होने हैं. तो एशिया कप के फ़ाइनल में खेलने वाली श्रीलंका की टीम से भी सामना होगा.
वैसे श्रीलंका की टीम ख़ुद ही एक बड़ी परेशानी से जूझ रही है. उसके सामने नए कप्तान चुनने की चुनौती है क्योंकि दासुन शनाका चोट की वजह से पूरे वर्ल्ड कप से ही बाहर हो गए हैं.
साथ ही प्रदर्शन के लिहाज से देखें तो उसकी हालत इतनी बदतर है कि (पाकिस्तान के ख़िलाफ़) 344 रन का पहाड़ खड़ा करने के बावजूद वो मैच हार गई.
इंग्लैंड की टीम ने बांग्लादेश को हराया ज़रूर पर वो न्यूज़ीलैंड से पहला मैच बुरी तरह से 9 विकेट से हार गई थी.
हालांकि पिछले महीने ही उन्होंने किवी टीम को लगातार तीन वनडे में हराया था.
भारत के साथ इंग्लैंड ने इस साल एक भी मैच नहीं खेले हैं. पर भारत के ख़िलाफ़ यहां उसका रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है.
भारत में (भारत के साथ) जो पिछले 25 मैच उसने खेले हैं उसमें से केवल पांच में उसे जीत मिली है.

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बात अगर न्यूज़ीलैंड की करें तो निश्चित रूप से इस टीम ने इस वर्ल्ड कप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है.
उसने न केवल इंग्लैंड, बांग्लादेश, नीदरलैंड्स को हराया है बल्कि पिछले लगातार छह वनडे से हारी नहीं है.
हालांकि भारत से भारत में खेलने का उसका रिकॉर्ड बहुत ख़राब रहा है. अब तक उसने 38 मैचों में केवल आठ जीत हासिल की है.
पिछले 17 मैचों में तो न्यूज़ीलैंड को केवल तीन में ही जीत नसीब हुई है.
जहां तक रिकॉर्ड का सवाल है तो दक्षिण अफ़्रीका ही एकमात्र ऐसी टीम है जिसका भारत में भारत के ख़िलाफ़ बढ़िया रिकॉर्ड रहा है.
यहां दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर होती रही है. इस साल दोनों टीमें आपस में नहीं भिड़ी हैं पर पिछले साल भारत में खेले गए तीन में से दो मैच भारत ने जीते थे. वहीं पिछले 10 मुक़ाबले में यह 6-4 से दक्षिण अफ़्रीका के हक़ में रहा है.
भारत का अगला मुक़ाबला बांग्लादेश से है और अंतिम लीग मैच नीदरलैंड्स से.
रोहित शर्मा अपनी टीम के साथ जीत के रथ पर सवार ज़रूर हैं पर वो यह कहते भी हैं कि "यह क्रिकेट है जिसमें कोई भी टीम किसी भी टीम को हरा सकती है. कोई भी विपक्षी टीम आपको हरा सकती है. हमें उस मुक़ाबले में अच्छा खेलना होगा. पहले क्या हुआ और भविष्य में क्या होगा ये मायने नहीं रखता."
यानी रोहित वास्तविकता से भली भांति परिचित हैं और यह उस कुशल नेतृत्व की तरह है जो अपने क़दम फूंक फूंक कर रखना जानता है.
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