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वो मुल्क जिसे नया 'दुबई' कहा जा रहा है: 'लगता है पूरे देश ने लॉटरी जीत ली है'
- Author, लियोनार्डो पेरिज़ी
- पदनाम, बीबीसी ब्राज़ील
शिव मिसिर और हेमंत मिसिर उस वक़्त 19 और 16 साल के थे जब वो 1982 में अपने मूल स्थान गुयाना छोड़कर कनाडा चले गए थे.
जब उन्होंने गुयाना छोड़ा था तो उनके दिल और दिमाग में एक ही बात थी और वह यह कि वे अपना भविष्य खुद बनाने जा रहे हैं.
उन्होंने उस समय दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक (गुयाना) को पीछे छोड़ दिया और बेहतर जीवन की तलाश में हजारों अन्य युवा नागरिकों की तरह एक विकसित देश में चले गए.
वहां कमाए गए पैसों से उन्होंने अपने परिवार का भरण-पोषण करना शुरू किया और रियल एस्टेट और फाइनेंस में अपना करियर बनाया.
लेकिन इसके 39 साल बाद 2021 में उन्होंने अपने पुराने फैसले से उलट राह पकड़ ली. शिवा अब 60 साल के हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, "अब (गुयाना) वापस जाने का समय आ गया है."
हाल के वर्षों में गुयाना की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले अरबों पेट्रो-डॉलर ने दोनों भाइयों को अपने देश वापस लाने का लालच दिया है.
उन्होंने देश की राजधानी, जॉर्जटाउन में महंगी संपत्तियों की बिक्री और किराये में विशेषज्ञता वाली एक रियल एस्टेट कंपनी बनाई.
शिव और हेमंत गुयाना के नए मध्यम वर्ग के दो प्रतिनिधि हैं. ये देश में तेल की खोज शुरू होने के बाद हाल के वर्षों में विकसित देशों से लौटे हैं.
साल 2019 से पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश (गुयाना) दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है.
अभूतपूर्व आर्थिक विकास
गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तर में सूरीनाम और वेनेजुएला के बीच स्थित एक देश है.
इसकी आबादी आठ लाख से अधिक है. शुरू में ये गन्ना उत्पादन के लिए एक डच उपनिवेश के रूप में उभरा.
डच लोगों के बाद यहां ब्रिटिश आए और साल 1966 तक ये ब्रितानी उपनिवेश रहा. उसी साल ये एक स्वतंत्र देश के रूप में उभरा.
साल 2015 में अमेरिकी तेल कंपनी एक्सॉन मोबिल ने गुयाना के तट पर बड़े तेल भंडार के खोज की घोषणा की. इस तेल भंडार का आर्थिक रूप से दोहन किया जा सकता था.
इसके बाद के सालों में एक्सॉन मोबिल, अमेरिकन हेस और चीनी कंपनी सीएनओओसी के कंसोर्शियम ने गुयाना के तट से 200 किलोमीटर की दूरी पर कुएं खोदे.
दुबई से तुलना
अब तक इस देश में लगभग 11 अरब बैरल तेल भंडार की खोज की जा चुकी है, लेकिन हालिया अनुमान के मुताबिक यह मात्रा 17 अरब बैरल तक पहुंच सकती है.
यह ब्राज़ील के मौजूदा 14 बिलियन बैरल के तेल भंडार से अधिक होगा. साल 2019 तक गुयाना की अर्थव्यवस्था कृषि, सोने और हीरे के खनन पर आधारित थी.
हालाँकि, तेल की खोज खोज से प्राप्त राजस्व ने देश की समग्र विकास दर या जीडीपी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना शुरू कर दिया.
साल 2020 में ब्राज़ील के तत्कालीन वित्त मंत्री पाउलो गुएडेज़ ने गुयाना की तुलना संयुक्त अरब अमीरात के उस शहर से की, जो तेल संपदा का प्रतीक बन गया है.
पाउलो गुएडेज़ ने तब ये कहा था, "यह क्षेत्र का नया दुबई है." और इस संबंध में जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो वाकई गौर करने लायक हैं.
'जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर'
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि 2019 और 2023 के बीच देश की जीडीपी 5.17 बिलियन डॉलर से बढ़कर 14.7 बिलियन डॉलर हो जाएगी, जो लगभग 184 प्रतिशत की वृद्धि है.
अकेले साल 2022 में जीडीपी ग्रोथ रेट 62 फीसदी रही है.
इसी तरह, प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (देश की संपत्ति निवासियों की संख्या से विभाजित) 2019 में 6,477 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022 में 18,199 अमेरिकी डॉलर हो गई है.
अधिक तुलना के लिए, यह आंकड़ा 2022 में ब्राजील की प्रति व्यक्ति जीडीपी के दोगुने से अधिक और ग्वाटेमाला की प्रति व्यक्ति जीडीपी तीन गुना से अधिक है.
गुयाना के लिए विश्व बैंक की प्रतिनिधि डेलिता डोरेटी ने बीबीसी को बताया कि गुयाना से बहुत उम्मीदें हैं.
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है जैसे देश ने लॉटरी जीत ली है और यह जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है."
तेल की वजह से आए विकास के परिणामस्वरूप, देश की अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
आईएमएफ के मुताबिक 2022 में गैर-तेल जीडीपी ग्रोथ 11.5 फीसदी है. इसका असर राजधानी जॉर्जटाउन जैसे प्रमुख शहरों में दिख रहा है.
क्रेन और निर्माण श्रमिकों को अस्पतालों, राजमार्गों, पुलों और बंदरगाहों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ-साथ देश में बनाई जा रही मैरियट और बेस्ट वेस्टर्न जैसी अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय होटल श्रृंखलाओं पर काम करते देखा जा सकता है.
नए राजमार्गों के साथ-साथ, देश में निर्माण स्थलों की मांग को पूरा करने के लिए ट्रैक्टर, उत्खनन और अन्य भारी निर्माण उपकरणों से भरे दर्जनों नवनिर्मित गोदाम हैं.
एक नया मध्यम वर्ग
इसी आर्थिक विकास के कारण ही मिसिर भाइयों ने गुयाना लौटने का फैसला किया, हालांकि स्थायी रूप से नहीं.
साल 2021 तक, दोनों अपना नया व्यवसाय चलाने के लिए अक्सर टोरंटो (कनाडा) और जॉर्जटाउन के बीच यात्रा करते रहे.
वह बताते हैं कि तेल राजस्व ने उभरते मध्यम वर्ग और देश के मौजूदा अभिजात्य वर्ग दोनों के लिए अवसर पैदा किए हैं.
मिसिर कहते हैं, "लोग सुरक्षित महसूस करने लगे हैं. उन्हें लगता है कि वे किसी ऐसी चीज़ का हिस्सा हैं जिससे उन्हें फ़ायदा हो सकता है."
उन्होंने कहा, "गुयाना में बहुत सारे अमीर लोग हैं जो रियल एस्टेट में हैं या जो तेल उद्योग के सप्लाई चेन नेटवर्क में काम करते हैं."
शिव मिसिर का कहना है कि वह अमेरिका या कनाडा में रहने वाले गुयाना के अन्य नागरिकों को जानते हैं जो तेल के बढ़ते मुनाफे की उम्मीद में गुयाना में संपत्ति या ज़मीन में निवेश कर रहे हैं. जब वे गुयाना पहुंचते हैं, तो वे खुद ब खुद नए मध्यम वर्ग का हिस्सा बन जाते हैं.
मिसिर कहते हैं, "बहुत से गुयानावासी लौट रहे हैं. वे गेटेड कम्युनिटी में रहने की कोशिश कर रहे हैं, जहां आधुनिक घर हो और निजी सुरक्षा भी हो. उन्होंने अपनी ज़िंदगी अमेरिका और कनाडा में गुजारी है. वे वैसी ही ज़िंदगी यहां भी जीना चाहते हैं."
शिव मिसिर बड़े ग्राहकों को अपनी सेवाएं देते हैं.
वे कहते हैं कि इस देश का एलीट क्लास अभी भी महंगी खरीदारी विदेश जाकर करता है, इसलिए गुयाना नें एक भी लग्ज़री स्टोर नहीं है.
एक आकर्षक बाज़ार
हॉलैंड और ब्रिटेन का उपनिवेश रहने के बावजूद गुयाना कैरिबियन क्षेत्र के दूसरे पड़ोसियों की तरह अमेरिका से क़रीबी व्यावसायिक और सांस्कृतिक संबंध बनाए रखता है.
अमेरिका से गुयाना की दूरी चार घंटे की फ़्लाइट की है.
मिसिर बताते हैं कि गुयाना के कुलीन वर्ग के ज़्यादातर लोग अपने बच्चों को पढ़ने के लिए अमेरिका, कनाडा या यूरोप भेजते हैं. वे खुद भी वहां की जीवनशैली का आनंद लेने के लिए बच्चों के साथ जाते रहते हैं.
शिव मिसिर का कहना है कि हाल के सालों में जिस तेज़ी से गुयाना की तरक्की हुई है, उससे देश के संपन्न वर्ग को केंद्र में रखकर बिज़नेस शुरू करने को बढ़ावा मिला है.
वो बताते हैं, "उदाहरण के लिए हमारा कारोबार भी इसी में से एक है."
मिसिर बंधु की रियल इस्टेट एजेंसी मूवीटाउन शॉपिंग सेंटर से चलती है. जॉर्जटाउन में उन्होंने इसकी शुरुआत साल 2019 में की थी. उसी साल जब देश में तेल उत्खनन का काम शुरू हुआ था.
दुनिया की नज़र में
गुयाना में तेल से आई दौलत ने हालात कितने तेज़ी से बदले हैं, इसके संकेत और भी हैं.
दुनिया भर की कंपनियां इसकी ओर आकर्षित हो रही हैं. वे यहां बुनियादी ढांचा निर्माण परियोजनाओं में हिस्सा लेना चाहती हैं. इस देश को दशकों से इसकी ज़रूरत थी.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, सरकार ने साल 2019 में बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं पर 187 मिलियन डॉलर की रकम खर्च किए थे. साल 2023 तक ये रकम 247 फ़ीसदी बढ़कर 650 मिलियन डॉलर पर पहुंच गई.
वर्ल्ड बैंक की डिलेट्टा डोरेट्टी कहती हैं, "मैं गुयाना में लगभग दो साल रही हूं. मैं यहां जब भी वापस आई, मुझे लगा कि कुछ बदल गया है. बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बहुत काम हो रहा है, नई सड़कें और होटल बन रहे हैं. देश में बड़ी संख्या में शुरू हो रहे नए कारोबार भी गौर करने लायक हैं."
गुयाना में निवेश के लिए भी बाहरी दुनिया के देश आकर्षित हो रहे हैं.
गुयाना के लोक निर्माण विभाग के डिप्टी मिनिस्टर देवदत्त इंदर बीबीसी की ब्राज़ील सेवा से कहते हैं, "हमारे यहां यूरोप, चीन, भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्राज़ील की कंपनियां काम कर रही हैं. चीन इस लिस्ट में एक प्रमुख प्लेयर है."
चीनी कंपनियों के एक कंसोर्शियम ने हाल ही में हाल ही में एक नए पुल का टेंडर जीता है. इसे बैंक ऑफ़ चाइना ने फाइनैंस किया है. लेकिन यहां चीन के प्रतिस्पर्धी भी हैं. साल 2022 में एक भारतीय कंपनी ने 106 मिलियन डॉलर का एक हाइवे कंस्ट्रक्शन टेंडर हासिल किया था.
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