चीन के ‘जासूसी ग़ुब्बारे’ को अमेरिका ने कैसे गिराया, रक्षा मंत्रालय ने बताया

चीन के 'स्पाई बलून' या संदिग्ध जासूसी गुब्बारे को अमेरिकी F-22 फ़ाइटर जेट ने दक्षिण कैरोलिना के अटलांटिक तट के पास गिरा दिया है. इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने पायलटों को बधाई दी है.

अमेरिका के आसमान में दिखे 'चीनी बलून' को गिराने के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने बताया कि इसके गिराने के आदेश देश के राष्ट्रपति जो बाइडन ने दिए थे.

उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि शनिवार दोपहर को अमेरिका के उत्तरी कमांड के एक लड़ाकू विमान ने सफलतापूर्वक चीने के भेजे गए ऊंचाई से सर्विलांस करने वाले 'स्पाई बलून' को गिरा दिया है. ये चीन का बलून था और इसका मलबा दक्षिण कैरोलिना के पास समंदर में गिरा है.

लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि बुधवार को राष्ट्रपति जो बाइडन ने आदेश दिया था कि किसी अमेरिकी नागरिक को नुक़सान पहुंचाए बिना जल्द से जल्द इस सर्विलांस बलून को नष्ट करने का मिशन शुरू किया जाए.

इसके बाद सावाधानीपूर्वक स्थिति का विश्लेषण किया गया और ये फ़ैसला किया गया कि जब ये बलून ज़मीन के ऊपर होगा तब इसे गिराने से लोगों के लिए अनचाहा ख़तरा पैदा हो सकता है क्योंकि इसका आकार बड़ा है और इसमें सर्विलांस पेलोड भी होगा.

राष्ट्रपति के आदेशों का पालन करते हुए रक्षा मंत्रालय ने फ़ैसला किया कि इस बलून को उस वक्त गिराया जाएगा जब ये समंदर के हिस्से में होगा, और इसके लिए बलून की पूरी निगरानी की जाएगी और इससे संबंधित सभी जानकारी जुटाई जाएगी.

कनाडा से ली मदद

लॉयड ऑस्टिन के बयान के मुताबिक उन्हें इस काम में कनाडाई सरकार का पूरा समर्थन मिला.

उत्तरी अमेरिका के ऊपर से गुज़रते वक्त बलून की ट्रैकिंग और उससे संबंधित जानकारी के विश्लेषण के लिए कनाडा ने अमेरिकी सेना को नोराड सिस्टम (नॉर्थ अमेरिकन एरोस्पेस डिफेन्स कमांड) के ज़रिए मदद की थी. इसके लिए लॉयड ऑस्टिन ने उनका धन्यवाद किया.

उन्होंने कहा कि क़ानून के दायरे में रह कर की गई ये कार्रवाई दिखाती है कि देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले चीन के क़दम से मुक़बला करने में राष्ट्रपति बाइडन और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम देश के नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखेगी.

कैसे गिराया गया चीनी बलून

अमेरीकी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया 28 जनवरी को अमेरिका के हवाई क्षेत्र में एलुटिएल द्वीप के पास आसमान में चीन का ये बलून देखा गया था.

इस बलून से कोई सैन्य खतरा नहीं है. इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों के दौरान अमेरिकी एयरस्पेस में ये घुसपैठ अमेरिकी संप्रभुता का उल्लंघन है, जिसे मंज़ूर नहीं किया जा सकता है. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकारों के शासन के दौरान कम से कम तीन बार अमेरिकी द्वीप को तीन बार पार किया है.

ये बलून पहले अलास्का और कनाडा से होते हुए दोबारा इडाहो (अमेरिकी हवाई क्षेत्र) में घुसा. जिसके बाद बुधवार को राष्ट्रपति बाइडन ने सेना को इसे नष्ट करने का आदेश दिया.

एक बार बलून जब समंदर के ऊपर पहुंचा तो, इसे नष्ट करने के लिए वर्जीनिया के लेंग्ले एयरफोर्स अड्डे के फर्स्ट फ़ाइटर विंग के F-22 रैप्टर फ़ाइटर जेट ने उड़ान भरी. इस विमान ने AIM-9X साइडविन्डर मिसाइल से निशाना साधा.

एक संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में और जानकारी देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा सेना का एफ-22 विमान ने 58 हजार की फीट की ऊंचाई पर बलून पर निशाना साधा. यह बलून खुद 60 से 65 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था.

विमान से निशाना साधने पर यह बलून तट से छह मील दूर 47 फीट गहरे समुद्र में गिर गया. हालांकि इससे किसी को चोट नहीं पहुंची है.

मंत्रालय की ओर से कहा गया कि इस विमान को मेसाचुसेट्स के बार्न्स एयर नेशनल गार्ड बेस से उड़े एफ-15 का समर्थन हासिल था. कई जगहों से टैंकरों की मदद मिल रही थी.

ओरेगन, मोंटाना, मेसाचुसेट्स, साउथ केरोलिना, नॉर्थ केरोलिना जैसी जगहों से भी सैन्य टुकड़ियां तैनात थीं.

कई समुद्री बेड़े भी इस ऑपरेशन के लिए तैयार थे. इनमें ऑस्कर ऑस्टिन, फिलीपीन सी, यूएसएस कार्टर हॉल जैसे अमेरिकी समुद्री बेड़े शामिल हैं.

चीन की क्या रही प्रतिक्रिया

चीन ने स्पाई एयरक्राफ़्ट होने से इनकार करते हुए कहा कि यह मौसम का अनुमान लगाने वाला बलून था, जो अपना रास्ता भटक गया.

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि "असैन्य काम के लिए इस्तेमाल होने वाले मानवरहित बलून पर अमेरिका के ताक़त के इस्तेमाल करने का हम विरोध करते हैं."

विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "चीन ने साफ़तौर पर अमेरिका से कहा था कि वो संयम बरते और शांतिपूर्ण और प्रोफ़ेशनल तरीके से इस समस्या से निपटे.

लेकिन अमेरिका ने ताक़त का इस्तेमाल किया, स्पष्ट है कि वो इस पर ज़रूरत से अधिक प्रतिक्रिया दे रहा है."

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